Day: June 8, 2018

शांगरी-ला में मोदी का ‘नेहरू’ क्षण (पत्रिका)

– प्रताप भानु मेहता, राजनीतिशास्त्री शांगरी-ला डायलॉग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रशंसित संबोधन दो कारणों से उल्लेखनीय है। पहला, यह भाषण भारत की विदेश नीति की निरंतरता को रेखांकित करता है। इसका केंद्रीय भाव 2004 और 2005 में मनमोहन सिंह के भाषणों की याद दिलाता है। वैश्विक तंत्र में भारत की अवस्थिति उसे एक […]

प्लास्टिक का खतरा हर तरफ (पत्रिका)

– अजय कुमार झा, पर्यावरण कार्यकर्ता वर्ष 1972 से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस बार पर्यावरण दिवस पर भारत वैश्विक मेजबान है और संकल्प है दुनिया को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने का। पिछले वर्ष दिसंबर में राष्ट्रसंघ की तीसरी पर्यावरण एसेम्बली में 193 देशों ने विश्व को […]

फिर बढ़ीं चीन से नजदीकियां (हिन्दुस्तान)

शशांक पूर्व विदेश सचिव भारत और चीन एशिया की दो बड़ी ताकतें हैं। ये दोनों ऐसी शक्तियां हैं, जिनके रिश्तों में मिठास भी रही है और कड़वाहट भी। सीमा पर तनातनी की कुछ हालिया घटनाओं के बाद एक बार फिर दोनों मुल्क नजदीक आते दिख रहे हैं। अप्रैल में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के […]

समझौता और अंदेशे (जनसत्ता)

रोहिंग्या मुसलमानों की वतन-वापसी के लिए संयुक्त राष्ट्र और म्यांमा के बीच समझौता हो गया है। इसे संयुक्त राष्ट्र की बड़ी उपलब्धि कहा जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हाल तक म्यांमा के हालात को लेकर यह वैश्विक निकाय खुद संतुष्ट नजर नहीं आ रहा था। दूसरी तरफ, म्यांमा इस बात पर अड़ा हुआ था […]

महंगाई की फिक्र (जनसत्ता)

लगभग हर बार मौद्रिक समीक्षा से पहले रिजर्व बैंक को एक दुविधा से गुजरना पड़ता है, कि वह बाजार में तेजी और अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को प्रोत्साहित करने वाले उपायों को तरजीह दे या महंगाई नियंत्रण को। इस बार की मौद्रिक समीक्षा से जाहिर है कि रिजर्व बैंक ने महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता दी […]

मुसीबत की थैली (जनसत्ता)

अब यह छिपी बात नहीं है कि रोजमर्रा के कामों में प्लास्टिक से बनी चीजों के इस्तेमाल का पर्यावरण पर कितना घातक असर पड़ता है और इससे उपजी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके मद्देनजर समय-समय पर सरकारें प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करने से लेकर इस पर पाबंदी लगाने तक की घोषणाएं करती रही […]

मदद और मुश्किलें (जनसत्ता)

चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने साढ़े आठ हजार करोड़ रुपए की सहायता राशि घोषित की है। उम्मीद की जाती है कि इससे चीनी मिलों की हालत सुधरेगी। पर इसमें गन्ना किसानों के उद्धार लिए कोई बहुत ज्यादा रकम नजर नहीं आती। इसी पैसे से चीनी मिलों को एथनॉल उत्पादन […]

शहरी नक्सलियों का खतरा (नईदुनिया)

इस साल के पहले ही दिन पुणे के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा ने सारे देश को चौंकाने के साथ ही चिंतित भी किया था। किसी के लिए भी यह समझना कठिन था कि दो सौ साल पहले अंग्रेजों और पेशवाओं के बीच हुए युद्ध की स्मृति में होने वाले आयोजन के दौरान हिंसा क्यों भड़की? […]

आसियान से गहराते रिश्तों का दौर – डॉ. जयंतीलाल भंडारी (नईदुनिया)

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का दौरा किया। ये तीनों देश दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के प्रमुख देश हैं। लिहाजा इस दौरे को मोदी सरकार की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत आसियान देशों से संबंध बढ़ाने का हिस्सा भी माना गया। इस दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने […]

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