Day: June 5, 2018

संपादकीयः योजना पर पलीता (जनसत्ता)

आम लोगों को सस्ती और गुणवत्ता वाली दवाइयां मुहैया कराने के मकसद से शुरू किए गए जन औषधि केंद्रों का नहीं चल पाना चिंताजनक है। ज्यादातर जन औषधि केंद्र ठप पड़े हैं। उत्साह और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ जिन लोगों ने जन औषधि केंद्र खोले थे, वे अब इन्हें बंद कर रोजगार का […]

संपादकीयः चुनाव से पहले (जनसत्ता)

एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की अनेक कसौटियों में सबसे पहली कसौटी यही होती है कि चुनाव निष्पक्ष हों, और निष्पक्ष दिखें भी। मतदाता सूची तैयार करने से लेकर चुनाव संपन्न कराने और वोटों की गिनती तक, हर स्तर पर उनकी विश्वसनीयता असंदिग्ध हो। लिहाजा मध्यप्रदेश की मतदाता सूची को लेकर जो सवाल उठा है वह बेहद […]

पत्थरबाजों का उन्माद (नईदुनिया)

श्रीनगर में हिंसक प्रदर्शन के दौरान सीआरपीएफ की कार के नीचे आने से घायल एक पत्थरबाज की मौत के बाद नए सिरे से हिंसक प्रदर्शन होना और उसमें दुनिया के सबसे बर्बर आतंकी संगठन आईएस के झंडे लहराना और सुरक्षा बलों पर पथराव करना इसलिए हैरान करता है कि यह सब रमजान के पवित्र महीने […]

प्रणब को संघ के न्योते पर बेजा प्रलाप – हृदयनारायण दीक्षित (नईदुनिया)

मनुष्य विचारशील प्राणी है। सो प्रत्येक मनुष्य के अपने विचार भी हैं। दुनिया का प्राचीनतम शब्द साक्ष्य ऋग्वेद लगभग 400 ऋषियों के कथनों से भरा-पूरा है। ऋग्वेद में वैचारिक विविधता है। समूचा वैदिक साहित्य विचार-भिन्नता का इंद्रधनुष है। जैसे विश्व में लाखों प्राणियों का सहअस्तित्व है, वैसे ही विचार-जगत में सभी विचारधाराओं का सहअस्तित्व होना […]

उपचुनाव नतीजों का असर (नईदुनिया)

उपचुनावों के परिणाम बहुत कुछ कहते हैं, लेकिन वे सब कुछ नहीं कहते और इसीलिए चार लोकसभा तथा दस विधानसभा सीटों के उपचुनाव नतीजों को आगामी आम चुनाव के सेमीफाइनल की संज्ञा नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके उपचुनाव नतीजे भाजपा विरोधी दलों को उत्साहित करने वाले हैं। उपचुनाव नतीजों और खासकर चार लोकसभा सीटों […]

फायदेमंद भी हैं तेल के ऊंचे दाम (दैनिक ट्रिब्यून)

भरत झुनझुनवाला विचार है कि तेल की बढ़ती कीमतें विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं। हमारे वित्त मंत्री उनके साथ एकमत हैं। वे भी मानते हैं कि तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए नुकसानदेह हैं। प्रथम दृष्टया यह सही भी लगता है, चूंकि हमें आयात के लिए अधिक रकम अदा करनी पड़ती है। मगर […]

विकसित देशों की जवाबदेही जरूरी (दैनिक ट्रिब्यून)

रोहित कौशिक आज पृथ्वी को बचाने के लिए भाषणबाजी तो बहुत होती है लेकिन धरातल पर काम नहीं हो पाता है। यही कारण है कि पर्यावरण की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। इस साल मई की गर्मी ने पिछले कई रिकार्ड तोड़ दिए। यह हम सबके साथ-साथ समाज के उस वर्ग के […]

गुस्से में किसान (दैनिक ट्रिब्यून)

एक बार फिर सड़क पर है किसान। जब वह सड़क पर सब्जी-दूध बिखेरता है तो खराब लगता है। दरअसल, किसान के प्रति भारत में पालक का भाव रहा है। उसे परिश्रमी, सहनशील और उदार माना जाता रहा है। मगर शायद खेती घाटे का सौदा बनने के बाद किसान का धैर्य जवाब देने लगा है। एक […]

घर में ही भूले पंजाबी (दैनिक ट्रिब्यून)

न वारिस शाह की हीर, न अमृता प्रीतम की पीर, न पाश, न पूरन सिंह, न करतार सिंह दुग्गल और न ही जगसीर या गुरदयाल सिंह का मढ़ी दा दीवा। ताज्जुब है कि पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में बैठे पंजाब विश्वविद्यालय के विद्वानों को इनमें से किसी का लिखा-पढ़ा स्तरीय नजर नहीं आया। पंजाब विश्वविद्यालय […]

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