जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा बैंकों पर हमलों का सिलसिला लगातार जारी (पंजाब केसरी)


जहां पाकिस्तान ने अपने अस्तित्व में आने के समय से ही भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध छेड़ रखा है वहीं इसके पाले हुए आतंकी भी जम्मू-कश्मीर व भारत में अन्य स्थानों पर हिंसक गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। अब तो इन्होंने नोटबंदी के बाद अपनी आॢथक जरूरतें पूरी करने के लिए जम्मू-कश्मीर में बैंकों को लूटने का सिलसिला भी शुरू कर दिया है:


21 नवम्बर, 2016 को लश्कर-ए-तोएबा के सदस्य आतंकवादियों ने बडग़ाम जिले के मालपुरा में जम्मू-कश्मीर बैंक से 13 लाख रुपए लूटे। 08 दिसम्बर, 2016 को पुलवामा में जम्मू-कश्मीर बैंक की शाखा पर धावा बोल कर 13 लाख रुपए लूटे। 15 दिसम्बर, 2016 को 4 बंदूकधारियों ने, जिनमें से 2 की पाकिस्तानी आतंकवादियों के रूप में शिनाख्त हुई, पुलवामा जिले के जम्मू-कश्मीर बैंक की रंतीपुरा स्थित शाखा पर धावा बोल कर 9.84 लाख रुपए लूट लिए। 19 जनवरी, 2017 को अज्ञात लोगों ने अनंतनाग जिले के मोमिनाबाद में जम्मू-कश्मीर बैंक के एक ए.टी.एम. से 14.56 लाख रुपए लूटे। 16 फरवरी, 2017 को 4 सशस्त्र संदिग्ध आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के तुर्कवंगम कस्बे में जम्मू-कश्मीर बैंक की शाखा से 2 लाख रुपए लूट लिए और हवा में फायर करते हुए भाग गए।

17 जून को जीरापारा से एक ए.टी.एम. मशीन चुरा ली गई। 31 जुलाई को बुर्कापोश बंदूकधारी अनंतनाग जिले के बीजबहेड़ा इलाके के गांव अरवीनी में जम्मू-कश्मीर बैंक की शाखा से बंदूक की नोक पर 5.20 लाख रुपए लूट कर ले गए। 12 अक्तूबर को अनंतनाग जिले में मरहामा स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक की शाखा से हिजबुल मुजाहिदीन के बंदूकधारियों ने 5 लाख रुपए लूट लिए। 13 अक्तूबर, 2017 को बंदूकधारियों ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में जम्मू-कश्मीर बैंक की रत्नीपुरा शाखा से 1,98,000 रुपए लूट लिए। 22 नवम्बर को शोपियां इलाके में एक जिला अस्पताल परिसर से ए.टी.एम. मशीन चुरा ली गई।

28 नवम्बर को मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर दुरसमा मनीगम नामक स्थान पर एक बैंक लूटने की कोशिश की गई। और अब 4 दिसम्बर को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल इलाके में उग्रवादियों ने जम्मू-कश्मीर बैंक से एक लाख रुपए लूट लिए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्राल इलाके के नूरपोरा में नकाब पहने 3 बंदूकधारी बैंक की शाखा में घुसे और कैश काऊंटर से रुपए लेकर फरार हो गए। उग्रवादियों ने एक निगरानी कैमरे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

ये तो चंद मुख्य घटनाएं हैं इनके अलावा भी न जाने और कितनी घटनाएं हुई होंगी। केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी लागू करने का एक मुख्य उद्देश्य आतंकवादियों को धन का स्रोत बंद करना भी था परंतु जिस प्रकार बैंकों को लूटने की घटनाएं हो रही हैं उनसे यह प्रतीत होता है कि नोटबंदी अपना यह उद्देश्य प्राप्त करने में असफल ही रही है तथा आतंकवादियों ने धन की कमी पूरी करने के लिए यह रास्ता निकाल लिया है। यही नहीं जहां एक ओर बैंकों को लूटने की घटनाएं लगातार जारी हैं वहीं दूसरी ओर सुरक्षाबलों पर आतंकवादियों द्वारा हमले भी लगातार जारी हैं और अभी 3 दिसम्बर को ही आतंकवादियों ने दक्षिण कश्मीर में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेना के काफिले पर हमला कर दिया जिस दौरान एक जवान शहीद हो गया।

इस पृष्ठभूमि में जहां बैंकों को अधिकतम सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है वहीं सुरक्षा बलों पर आतंकी हमले रोकने के लिए प्रबंधों को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं से होने वाली जान-माल की हानि को रोका जा सके। बेशक सुरक्षा प्रबंध पहले की तुलना में मजबूत तो हुए हैं परंतु जब बैंक और सुरक्षा बल ही सुरक्षित नहीं तो लक्ष्य पूरा करने में अधिक देर लगेगी।—विजय कुमार

सौजन्य – पंजाब केसरी।

Updated: December 6, 2017 — 10:13 am

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