Day: October 3, 2019

भारी वर्षा से हुआ फिर देश का आपदा प्रबंधन फेल (पंजाब केसरी)

इस वर्ष देश में पहली बार 125 वर्षों का रिकार्ड तोड़ते हुए मानसून 107 प्रतिशत बरसा है और अभी भी 10 अक्तूबर से पहले इसकी वापसी के संकेत नहीं हैं जिस कारण यह आंकड़ा बढ़ कर 110 प्रतिशत हो सकता है। वर्षा से देश में इस वर्ष 1700 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी...

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The slowdown puzzle and RBI’s bias for policy action (Livemint)

Tulsi Jayakumar What should be the role of monetary policy in spurring growth when faced with a slowdown of the type that India is witnessing? The Reserve Bank of India (RBI) seems to be following spiritual author Eckhart Tolle’s maxim: “Any action is better than no action, especially if you have been stuck in an...

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In smartphones, what’s a luxury today will be mid-range tomorrow (Livemint)

Madhav Sheth Remember the phones with green-backlit keypads that we used to have long ago? The only game that we could play in them was “Snakes”. After some point, another game “Cricket” was introduced and it instantly made your phone more functional. This was still nothing as compared to what we were about to see...

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कैसे भरोसेमंद बने बैंकिंग प्रणाली (प्रभात खबर)

अजित रानाडे, सीनियर फेलो तक्षशिला इंस्टीट्यूशन पंजाब एवं महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) के खातों को ‘फीज’ करना तथा उसके द्वारा ऋण देना और जमा राशियां स्वीकार करना रोकने से एक बार फिर बैंकों तथा खासकर कोऑपरेटिव बैंकों की जोखिमशीलता उजागर हुई है. आरबीआइ ने जिस तरह एकाएक इसके खातों को फ्रीज कर दिया, उससे जमाधारकों...

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चीन के सत्तर साल और चुनौतियां (प्रभात खबर)

अविनाश गोडबोले असिस्टेंट प्रोफेसर, ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी. एक अक्तूबर, 1949 को आपनी मुक्ति (लिबरेशन) पानेवाला चीन अब 70 साल का हो चुका है. इस सत्तर साल में चीन ने बहुत सारी मंजिलें हासिल की हैं और अपने विकास के रास्ते में अनेक चुनौतियां पायी हैं. इनमें से कुछ चुनौतियां प्राकृतिक, कुछ विदेशों से निर्माण...

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संपादकीय: संकट का संकेत (जनसत्ता)

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संग्रह में जिस तेजी से गिरावट आ रही है, वह अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट का संकेत है। पिछले कई महीनों से अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रही है। संकेतक बता रहे हैं कि किसी भी क्षेत्र में हालत अच्छी नहीं है। सरकार ने हर महीने जीएसटी संग्रह का...

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संपादकीय: पाबंदी के बजाय (जनसत्ता)

इस बात से शायद ही किसी को असहमति होगी कि प्लास्टिक के बढ़ते बेलगाम इस्तेमाल ने आज समूचे पर्यावरण के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इससे न केवल जल, वायु और जमीन को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे उपजी मुश्किल को आम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में भी महसूस कर...

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संपादकीय: क्षेत्रीय विवाद और पश्चिमी रणनीति (जनसत्ता)

संयुक्त राष्ट्र महासभा के चौहत्तरवें अधिवेशन में दुनिया के तमाम नेता पहुंचे और एशियाई क्षेत्र की समस्याओं सहित कई मसलों पर चर्चा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं, बल्कि तमाम एशियाई नेताओं ने एशियाई क्षेत्र से संबंधित समस्याओं और विवादों पर चिंता जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता में भविष्य में ईरान से...

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Raining misery: On ongoing monsoon fury (The Hindu)

If Bihar is struggling to stay afloat in the ongoing monsoon, its distress can be traced to poor infrastructure and a lack of administrative preparedness. Even large parts of the capital, Patna, have been paralysed without power and communications, as the State government tries to drain its streets of water, and critical rations are distributed...

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A sound review: On Supreme Court recalling its verdict diluting SC/ST anti-atrocities law (The Hindu)

After last year’s amendments aimed at nullifying the effect of a Supreme Court judgment that was seen as diluting the law against atrocities on Scheduled Castes and Scheduled Tribes, the apex court’s decision recalling the earlier verdict may not appear very significant. However, the latest order by a three-judge Bench on the Centre’s petition seeking...

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