Day: July 11, 2019

लम्बित मुकद्दमों के पहाड़ तले दबी भारतीय न्यायपालिका (पंजाब केसरी)

देश की अदालतों में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ नीचे से ऊपर तक जजों और अन्य स्टाफ की कमी के कारण करोड़ों की संख्या में केस लम्बित पड़े हैं। कई मामलों में तो न्याय के लिए अदालतों में आवेदन करने वाले न्याय मिलने की प्रतीक्षा में ही इस संसार से चले जाते हैं। एक वर्ष पूर्व...

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सुरंग में किरण (जनसत्ता)

भ्रष्टचार पर फिर निशाना साधते हुए केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को देशभर में 110 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें दिल्ली के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई शहर शामिल हैं। इससे पहले सीबीआइ ने 2 जुलाई...

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राजनीतिः हांफती स्वास्थ्य सेवाएं (जनसत्ता)

हाल में आई नीति आयोग की रिपोर्ट ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति को सामने रखा है। रिपोर्ट में बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाओं की जो हालत सामने आई है, वह वाकई चिंतनीय है। नीति आयोग ने तेईस संकेतकों को आधार बना कर राज्यों की एक सूची तैयार की है। ये...

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घाटे के बजट पर क्षुब्ध पाकिस्तान : इमरान सरकार से हो रहा मोहभंग (अमर उजाला)

कुलदीप तलवार पाकिस्तान की जनता का प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार से मोहभंग होता जा रहा है। सरकार कह रही है कि एक दो साल की मुश्किल सूरते हाल के बाद जनता खुशहाली का दौर देखेगी, एक करोड़ नौकरियां मिलेंगी और बेघरों को 50 लाख घर बनाकर दिए जाएंगे। पर इसके लिए कोई ठोस...

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बढ़ती आबादी बढ़ाएगी प्रवासन: भारत अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में गिरावट के लिए तैयार है (अमर उजाला)

पत्रलेखा चटर्जी सबसे पहले एक अच्छी खबर! हम इस बात पर खुश हो सकते हैं कि भारत अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में तेजी से गिरावट के लिए तैयार है। और यह कि आबादी बहुल हिंदी प्रदेश में बहुत कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। यह एक आशाजनक संकेत है। वर्तमान रुझानों के अनुसार,...

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निवेश जुटाने की दृष्टि से पर्याप्त नहीं मांग (बिजनेस स्टैंडर्ड)

मिहिर शर्मा आर्थिक समीक्षा को वास्तविक बजट की तुलना में अधिक अग्रगामी और आर्थिक रूप से तर्कसंगत माना जाता है। दरअसल आर्थिक समीक्षा अर्थशास्त्रियों द्वारा तैयार की जाती है जबकि बजट अफसरशाहों द्वारा। हालांकि बजट को वास्तविक दुनिया से दो चार होना होता है जबकि समीक्षा तमाम अर्थशास्त्रियों की तरह आदर्श की दुनिया में भी...

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व्यापक सुधार जरूरी (बिजनेस स्टैंडर्ड)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सरकारी बैंकों में पुनर्पूंजीकरण के लिए 70,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करके बाजार को चौंका दिया। बाजार को इस मद में 40,000 करोड़ रुपये के आवंटन की आशा थी। किस बैंक को कितनी राशि मिलती है, इस आधार पर अतिरिक्त पूंजी का इस्तेमाल इन बैंकों द्वारा वृद्धि पूंजी...

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वित्तीय क्षेत्र सुधार के अनचाहे परिणाम (बिजनेस स्टैंडर्ड)

आकाश प्रकाश भारतीय वित्तीय व्यवस्था एक अप्रत्याशित सफाई के दौर से गुजर रही है। अंकेक्षकों और रेटिंग एजेंसियों से लेकर बैंकों और फंड तक हर जगह मानक कड़े किए जा रहे हैं। लंबी अवधि में इसके अनेक लाभ सामने आएंगे। व्यवस्था का प्रबंधन करके चीजों को ज्यादा टाला नहीं जा सकता है। रसूख के बल...

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As growth slows, time to step up spending (The Economic Times)

Through October 2018 to June 2019, 17% fewer cars have been sold compared to the same period a year ago, and bike sales have slumped 11%. These numbers show that the Indian consumer is tightening her belt. Cars and bikes (as well as entertainment and eating out) fall in the category called ‘discretionary spending’, different...

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महिला फुटबॉल (द नेशनल, यूएई)

5 दिसंबर 1921 को इंग्लिश फुटबॉल संगठन ने अपने मैदानों पर महिलाओं के खेलने पर पाबंदी लगा दी थी और कहा था कि फुटबॉल का खेल महिलाओं के अनुकूल नहीं है, अत: उसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। संगठन का यह फैसला 50 वर्षों तक महिला फुटबॉल के लिए एक झटका बना रहा। खैर, वक्त...

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