Day: April 29, 2019

आपाधापी में कुछ छूटने-टूटने की टीस (दैनिक ट्रिब्यून)

सुरेश सेठ पंजाब के शहरों से लेकर दूर गांवों और कस्बों तक घूम आता हूं। शहरों में चुनाव प्रचार की धमक शुरू हो गई है, लेकिन गांवों से लेकर शहरों तक कहीं ढोल की धमक नहीं सुनी। चाहे विदाई हमने विदा कर दी। शहरों के विरासती अखाड़े अब मस फूटते नौजवान मल्लों की हुंकार से...

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ईमानदारी से आत्मविश्वास की गरिमा (दैनिक ट्रिब्यून)

सीता राम गुप्ता पंजाबी भाषा के रचनाकार डॉ. श्यामसुंदर दीप्ति की एक लघुकथा बीज पढ़ रहा था। कश्मीर सिंह अपने दोस्त सुरजन सिंह के साथ अपने बेटे दिलदार का, जिसकी एक अच्छे सरकारी पद पर नियुक्ति हुई है और जो अपने कॉलेज का बैस्ट एथलीट रहा है, मेडिकल करवाने सिविल सर्जन के दफ्तर पहुंचता है।...

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दबाव में बच्चे (नवभारत टाइम्स)

बचपन में अपने साथ हुई बुलीइंग को भले ही हम भुला दें पर इसका नकारात्मक प्रभाव वयस्क होने के बाद भी देखा जा सकता है। बुलीइंग का मतलब है दबाव डालना या धौंस दिखाना, चिढ़ाना-मजाक उड़ाना या पीटना। लंदन में हुए एक शोध में कहा गया है कि किशोरावस्था में बुलीइंग का शिकार होने वालों...

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संकट में शीर्ष न्यायपालिका (राष्ट्रीय सहारा)

आम चुनाव के शोर के बीच हमारी शीर्ष न्यायपालिका सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आए गंभीर संकट पर देश का ध्यान उतना नहीं है जितना होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर जबसे सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सभी न्यायाधीशों को पत्र लिखा तभी से हलचल मचा...

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An outrageous campaign (The Indian Express)

Written by P Chidambaram In June 2015, a candidate in the election for President of the United States said, “When Mexico sends its people, they’re not sending their best. They’re sending people that have lots of problems. They’re bringing drugs. They’re bringing crime. They’re rapists.” People were outraged, yet 62,984,825 persons voted for him in...

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जाति आखिर जाती क्यों नहीं? भारतीय राजनीति आज मुद्दों से अधिक छोटे प्रपंचों में फंसती जा रही है (दैनिक जागरण)

[ गिरीश्वर मिश्र ]: भारतीय समाज कई खांचों में विभाजित है। इसी में एक अहम विभाजक रेखा जाति भी है। जाति का सीधा अर्थ समूह, विशेषता या गुण होता है। इसी अर्थ में फूल, पशु, पक्षी, अनाज, फल तथा सब्जी आदि की जाति जानी और पहचानी जाती है। जाति एक तरह की भेदक विशेषता का...

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संभावनाओं के द्वार खोलता पर्यटन: पर्यटन उद्योग देश की आर्थिक दशा और दिशा दोनों ही बदल सकता है (दैनिक जागरण)

जीएन वाजपेयी इस साल जनवरी से मार्च के बीच प्रयागराज में कुंभ का सफल आयोजन हुआ। इसमें 15 करोड़ से अधिक लोगों ने शिरकत की। औसतन 25 लाख लोग इसमें रोजाना आए और यहां तक कि कुछ अवसरों पर एक दिन में दो करोड़ लोग भी पहुंचे। महज पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में इतने...

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भारत के लिए अच्छा संदेश नहीं कि बांग्लादेश के बाद एक और पड़ोसी देश में आइएस के आतंक ने दी दस्तक (दैनिक जागरण)

[ संजय गुप्त ]: पिछले रविवार को श्रीलंका में दिल दहलाने वाले बम धमाकों के बाद दक्षिण एशिया एक बार फिर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। इन धमाकों में करीब ढाई सौ लोग मारे गए और पांच सौ लोग घायल हुए। इस भीषण आतंकी हमले के लिए स्थानीय संगठन नेशनल तौहीद जमात यानी...

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जानिए, चुनाव में ड्यूटी से हटने के लिए सरकारी कर्मचारी किस हद तक सरकार को धोखा देते हैं (दैनिक जागरण)

[ शैलेश त्रिपाठी ]: भगवान भी हैरान थे। मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने वालों को उलाहना देने वाला रामप्रीत आज उनकी देहरी पर खड़ा था। उसने भगवान को लुभाने के लिए भी तमाम तरह के प्रलोभन देने शुरू कर दिए कि मन्नत पूरी होने पर वह कितने का प्रसाद, कितने की दक्षिणा और कहां पर केश...

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महागठबंधन के राजनीतिक दलों के विचारों में भिन्नता के नाम पर विरोध को लेकर आम जनता भ्रमित हो रही है (दैनिक जागरण)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी कन्हैया कुमार की तारीफ में यह कहकर महागठबंधन के विरोधाभास को नए सिरे से उजागर करने का ही काम किया है कि राष्ट्रीय जनता दल ने इस युवा नेता के खिलाफ उम्मीदवार उतारकर बहुत बड़ी गलती की। उनके मुताबिक कन्हैया कुमार...

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