Day: April 3, 2019

धार और मार का नया खेल (दैनिक ट्रिब्यून)

रेशू वर्मा मेरे प्यारे देशवासियो, आज सवेरे लगभग 11.45-12.00 बजे मैं एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आप के बीच आऊंगा। मार्च 27 को प्रधानमंत्री के इस ट्वीट ने लगभग एक घंटे तक पूरे मीडिया और देश में हलचल मचा दी थी। प्रधानमंत्री ने जब मिशन शक्ति की सफलता की घोषणा की तो पूरे देश में सकारात्मक...

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संन्यास की उम्र में सत्ता की लालसा (दैनिक ट्रिब्यून)

राजकुमार सिंह सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में टिकट न मिलने पर भाजपा के पितामह भीष्म कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी तो मौन हैं, लेकिन एक अन्य पूर्व पार्टी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने अपनी नाराजगी नहीं छिपायी है। आलाकमान की इच्छा के विपरीत जोशी ने पार्टी दफ्तर जाकर खुद ही चुनाव न लड़ने का ऐलान...

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रोशनी छीनते डॉक्टर (दैनिक ट्रिब्यून)

कहां तो बुजुर्ग आंखों की रोशनी बढ़ने की उम्मीद से डाक्टरों के पास गये थे, मगर लापरवाही ने नेत्र-चिकित्सा शिविरों में उनकी दुनिया में अंधेरा कर दिया है। एकाध केस नहीं, बल्कि कई-कई केस खराब होने के समाचार हैं। कुरुक्षेत्र तथा भिवानी के सरकारी अस्पतालों में किए गए मोतियाबिन्द के ऑपरेशनों में 60 मामले ऐसे...

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चुनाव की अलग कहानी (नवभारत टाइम्स)

मंगलवार को जारी अपने घोषणापत्र में कांग्रेस का सारा ध्यान उन मुद्दों पर है जो जनता के जीवन, सुरक्षा और सम्मान से सीधे जुड़े हैं। यूं तो हर पार्टी अपने घोषणापत्र में बड़ी-बड़ी बातें कहती है, जिनका जमीनी हकीकत से कुछ खास लेना-देना नहीं होता। यही वजह है कि बीच के कई चुनावों में घोषणापत्रों...

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उपभोक्ता- संरक्षणकी नई चिंताएं (राष्ट्रीय सहारा)

डा. जयंतीलाल भंडारी जब हम ‘‘भारत के लोग’ अपना नया स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, बाबा नागार्जुन की एक प्रसिद्ध कविता का वह सवाल पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, जिसमें पहले वे पूछतेैहैं : किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? बाबा अपने सवाल को कौन त्रस्त, कौन पस्त और कौन मस्त तक भी...

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अमेरिका की डिप्लोमेसी (राष्ट्रीय सहारा)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अजहर मसूद पर चौथी बार आए प्रस्ताव पर चीन द्वारा ‘‘टेक्निकल होल्ड’ लगा दिए जाने के बाद अमेरिका एक बार फिर से प्रस्ताव लाने जा रहा है। सवाल है कि इस कदम को किस रूप में देखा जाए? इस रूप में कि अमेरिका अजहर और उसकी भारत के खिलाफ होने...

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De-fanging the deep state (The Indian Express)

Written by Arun Prakash “Carthago delenda est” (Carthage must be destroyed) — a phrase incessantly mouthed by Senator Cato the Elder — was the manifestation of Rome’s visceral desire to wreak vengeance on its rival Carthage (in modern Tunisia), which had terrorised its lands for decades. The Third Punic War, fought with bows and arrows,...

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Voters of consequence (The Indian Express)

Written by Reapan Tikoo Around three decades ago, my family fled Kashmir. I have lived in exile in Jammu, Mumbai and London. I have been applying for my ballot from Kashmir, during elections. Never have I been able to vote, despite the provision being there since 1996, under Section 36A of J&K Representation of People’s...

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‘How a city cleans up (The Indian Express)

Written by Isher Judge Ahluwalia, Almitra Patel We wrote in our last column, ‘Small town, cleaner future’ (IE, February 27) about how small towns in India are showing the way in keeping wet waste separate from dry waste. This is the most critical first step for sound solid waste management. We also looked to see...

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Bonds of secrecy (The Indian Express)

Written by P D T Achary Electoral bonds are attracting attention in the run-up to the general elections. These bonds were conceived in 2017 and the necessary legislative changes were made in the Finance Bill of 2017. For example, Section 31 of the Reserve Bank of India Act, 1924, was amended and a new Clause...

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