Day: February 4, 2019

नाकामी से सबक ले चलने का नाम जीवन (दैनिक ट्रिब्यून)

रोहित कौशिक हमारी ज़िंदगी उस नाव की तरह है जो समय की धारा में अपने आप बहने लगती है। हम एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी समय की धारा अपने हिसाब से हमारी नाव का रुख मोड़ देती है। कुछ समय बाद हमें पता चलता है कि हमें कहां पहुंचना था...

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रोजगार सृजन हो सरकार की प्राथमिकता (दैनिक ट्रिब्यून)

यूं तो यह अंतरिम बजट है लेकिन कुल मिलाकर मात्रा में न सही, लेकिन विषय-वस्तु के मुताबिक बहुत भारी-भरकम है। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने यह सुनिश्चित किया है कि मतदाता किसी भी वर्ग से हो, उसका हित छूटने न पाए। पिछले कुछ हफ्तों से यह अपेक्षा वैसे भी थी कि एनडीए सरकार अपने कार्यकाल...

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बुरे फंसे भारतीय छात्र (नवभारत टाइम्स)

अमेरिका में ‘पे ऐंड स्टे’ गिरोह का भंडाफोड़ होने से वहां अनेक भारतीय छात्र मुसीबत में फंस गए हैं। दरअसल बीते बुधवार को एक फर्जी विश्वविद्यालय के सहारे चल रहे एक इमिग्रेशन रैकेट का पता चला। इसे चलाने के आरोप में आठ भारतीय व भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों को गिरफ्तार किया गया। उसके बाद...

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मजा और कुछ सजा (नवभारत टाइम्स)

नरेंद्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने चुनावी सरोकारों और समाज के विभिन्न तबकों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर कोशिश की है। कहने को यह अंतरिम बजट था, लेकिन पिछले कई आम चुनावों के साथ यह विडंबना जुड़ी रही है कि सरकारों...

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रेल हादसा, कब लगेगा विराम? (राष्ट्रीय सहारा)

रमेश ठाकुर बजट का आम बजट में विलय करने का मकसद था भारतीय रेल नेटवर्क को मजबूत करना। लेकिन रिजल्ट कुछ खास नहीं निकला। रेलवे की स्थिति पहले ही जैसी है। हादसे रुके नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक और बड़ा रेल हादसा हो गया। शनिवार को रात के समय सीमांचल एक्सप्रेस ट्रेन...

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समझदार विपक्ष की दरकार (राष्ट्रीय सहारा)

भारत की राजनीति सहज सामान्य प्रतिस्पर्धा से बढ़कर अत्यंत डरावनी स्थिति में पहुंच रही है। संसदीय लोकतंत्र में नेताओं से उम्मीद की जाती है कि आपस में प्रतिस्पर्धा करते हुए भी संवेदनशील और परंपराओं के मामले में संयम बरतेंगे। यह अनिवार्य मर्यादा रेखा टूट चुकी है। अनेक उदाहरण सामने हैं, जिनसे भय पैदा होता है...

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How a Naga tribe is challenging clichéd notions of advancement, backwardness (The Indian Express)

Written by Vrinda Shukla Mon. The name will not ring a bell for most of us. The land of the last legendary head-hunters, this picturesque district of Nagaland, running along the Myanmar border, is one of the remotest in the country. Mon is also typically considered one of the most “backward” districts. In my one...

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The boundaries of welfare (The Indian Express)

Written by Prabhat Patnaik The Narendra Modi government has now carried its penchant for undermining institutions to the national budget itself. Not only has it treated what should have been an interim budget, as its tenure lasts barely two months into the new financial year, as a full-fledged budget, but it has also palpably refrained...

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The techno dystopia (The Indian Express)

Written by Vikram S Mehta Two former chief election commissioners (CECs) and the current CEC have verbally, and in writing, rebutted the suggestion that the electronic voting machine (EVM) is hackable and that the Commission should safeguard public franchise by reverting to a form of paper balloting. This controversy is about the electoral process in...

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Across the Aisle: The importance of being Mr Gadkari (The Indian Express)

Written by P Chidambaram Mr Nitin Gadkari is an uncommon politician. By his own admission he is a foodie, he wears chic clothes and seems to enjoy life. He enjoys speaking at public functions and he speaks as if he does not have a care in the world. At the same time, he is a...

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