धार्मिक पहचान से त्रस्त सभ्य समाज: मानवीय मूल्यों का मजहब से कोई लेना-देना नहीं है (दैनिक जागरण)


[ तसलीमा नसरीन ]: कोई कह रहा था कि श्रीलंका में खून की नदियां बहीं। 253 लोगों की मौत और 500 लोगों के जख्मी होने से जो खून बहता है वह बहुत हद तक नदी की तरह ही दिखता है, लेकिन यह हत्याकांड क्यों? मनुष्यों को आखिर इतनी घृणा क्यों है? किसने किसका क्या बिगाड़ा…


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Updated: April 30, 2019 — 6:47 PM