सामाजिकता का सिमटता दायरा: अपने और पराए के बीच विभाजन करती सीमा रेखाओं की खास भूमिका (दैनिक जागरण)


[ गिरीश्वर मिश्र ]: समकालीन सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में समावेश यानी इनक्लुजन के विचार को बड़ी तरजीह मिल रही है। राजनेता इस लोक-लुभावनी अभिव्यक्ति का ख़ूब उपयोग कर रहे हं। इसका आशय समाज के अधिकांश भाग को लोक कल्याणकारी योजनाओं की परिधि में शामिल करना होता है। सुविधाओं, लाभों और अवसरों की उपलब्धता सभी के लिए…


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Updated: February 11, 2019 — 4:00 pm