गत को नमस्कार, आगत के स्वागत को लेकर नई दिशा की प्रतीक्षा में राजनीति (दैनिक जागरण)


[ हृदयनारायण दीक्षित ]: काल अखंड सत्ता है। दिन, रात, घटी, निमिष और मास वर्ष काल के भीतर हैं। अथर्ववेद के ऋषि भृगु ने बताया है कि ‘काल में जीवन है और काल में मृत्यु। काल से वायु है और काल से आयु।’ काल सबको बाहर से घेरे हुए है और भीतर भी सक्रिय है।…


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Updated: December 31, 2018 — 12:25 PM