हांगकांग का संकट (पत्रिका)


सरकारें चाहे लोकतंत्र की हो अथवा राजतंत्र की, जनता से बड़ी नहीं हो सकतीं। आज सरकारें अपनी-अपनी हुकुमतों को कानूनी जामा पहनाकर स्थायी रूप देने का प्रयास कर रही हैं। कुछ वर्षों बाद यह भ्रम भी दूर हो जाता है। जनता ही जनार्दन है। सत्ता का अंहकार ही भ्रम दूर करने का माध्यम बनता है।…


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Updated: September 10, 2019 — 11:06 PM