संपादकीय: सकारात्मक समझौता (जनसत्ता)


पूर्वोत्तर लंबे समय से अशांत है। वहां कुछ अलगाववादी संगठन और कई जातीय संगठन सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगातार चुनौतियां पेश करते रहे हैं। इन संगठनों पर कई बार लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठाए गए, तो कई बार बातचीत के जरिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी हुए, मगर कोई उल्लेखनीय सकारात्मक…


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Updated: August 13, 2019 — 6:30 PM