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Wednesday, April 7, 2021

नयी प्रौद्योगिकी से रोजगार सृजन (प्रभात खबर)

By डॉ अश्विनी महाजन 


पिछले 30 वर्षों में भूमंडलीकरण की अंधी दौड़ ने रोजगार सृजन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. चीन को छोड़ दुनिया के लगभग हर देश में बेरोजगारी बढ़ी है. अमेरिका में बेरोजगारी की दर 6.2 प्रतिशत है, इंग्लैंड में 5.1 प्रतिशत, जर्मनी और फ्रांस में यह क्रमशः 5.9 और आठ से नौ प्रतिशत है. कुछ समय पूर्व ओइसीडी की एक रपट के अनुसार भारत में 15-29 वर्ष की आयुवर्ग में 2017 में 30 प्रतिशत ऐसे युवा थे, जो न तो शिक्षण संस्थानों में थे, न रोजगार में और न ही प्रशिक्षण में, यानी बेरोजगार थे.



यूरोप के कई देशों में युवा बेरोजगारी 50 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है. विकसित देश हों अथवा विकासशील पिछले 30 वर्षों में सभी रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं.भारत की जनसंख्या में लगभग दो करोड़ लोग हर साल जुड़ जाते हैं. आज जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा युवा है. देश की दो तिहाई जनसंख्या 35 वर्ष से नीचे की है. इसमें 36 प्रतिशत से ज्यादा 15 से 35 वर्ष की आयुवर्ग में हैं. इस दृष्टि से दुनियाभर में सबसे ज्यादा युवा भारत में हैं.



इसे जनसांख्यिकी लाभ भी कहा जाता है, क्योंकि युवा आबादी की ऊर्जा का इस्तेमाल कर देश तेजी से तरक्की कर सकता है. नीति-निर्माताओं को चिंता रहती है कि कैसे इस जनसांख्यिकी लाभ का इस्तेमाल किया जाये. पिछले 20 वर्षों से चीनी साजो-सामान के भारी आयात के चलते देश विनिर्माण के क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है. इसका असर रोजगार सृजन पर भी पड़ा है.


बेरोजगारी में आज नयी प्रौद्योगिकी आग में घी डालने जैसा काम कर रही है. मशीनीकरण से रोजगार पर प्रभाव पड़ा था. इस समस्या का निवारण धीरे-धीरे रोजगार के वैकल्पिक अवसर जुटा कर किया गया. जहां मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार घटा, वहां कुछ भरपाई सेवा क्षेत्र से होने लगी. आज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स, ब्लॉक चेन आदि नयी प्रौद्योगिकी रोजगार के अवसरों के लिए खतरा बनी हुई हैं.


पहले कॉल सेंटरों के जरिये रोजगार का सृजन हो रहा था, अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के चलते कॉल सेंटर में युवाओं के बदले इंटरनेट बॉट्स मशीनें (रोबोट) सवाल-जवाब कर लेती हैं. इससे रोजगार घटने लगा है और आनेवाले समय में और घट सकता है. आजकल फैक्ट्रियों, दफ्तर, घरों में कई मानव कार्यों को रोबोट करने लगे हैं.


जहां पहली औद्योगिक क्रांति ने मशीनीकरण के कारण रोजगार घटाया था और यह क्रम दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति में भी चलता रहा. लेकिन मशीनीकरण ने परंपरागत उद्योगों में रोजगार कम किया, लेकिन साथ ही साथ दुनिया में इसके कारण वैकल्पिक रोजगार भी पैदा हुए.


हालांकि, तीसरी औद्योगिक क्रांति में ही सूचना प्रौद्योगिकी का आगाज हो गया था, लेकिन भारत इस औद्योगिक क्रांति से लगभग अछूता ही रह गया, क्योंकि कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत शेष दुनिया से पिछड़ गया था. इसलिए, इन क्षेत्रों में भारत सीमित मात्रा में ही रोजगार सृजन कर पाया.


आज भारत के सामने यह चुनौती है कि वह न केवल दूसरी और तीसरी औद्योगिक क्रांति में अपने असंतोषजनक प्रदर्शन की भरपाई करे, बल्कि चौथी औद्योगिक क्रांति में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले. यह सही है कि रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ड्रोन इत्यादि के कारण रोजगार के सृजन में कमी आयेगी, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नयी प्रौद्योगिकी के कारण लागत में भी कमी आती है.


उदाहरण के लिए जो कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोट, ड्रोन इत्यादि का उपयोग करती हैं, उनकी लागत घटती है. लागत घटने पर वह उद्योग बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाती हैं. लेकिन नयी प्रौद्योगिकी के नाम पर रोजगार के अंधाधुंध ह्रास को भी औचित्यपूर्ण नहीं ठहराया जा सकता. ऐसे में नीति-निर्माताओं को प्रौद्योगिकी के चयन के संदर्भ में अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार करना होगा.


उचित प्रौद्योगिकी के चयन का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है. आज के युग में यह चयन बाजार द्वारा प्रभावित हो रहा है. जहां-जहां रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कारण लागत घटती है, वहां इसके उपयोग को औचित्यपूर्ण ठहराया जाता है. लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि रोजगार घटने की भी अपनी एक सामाजिक लागत (सोशल कॉस्ट) होती है.


जब रोजगार से लोग बाहर होते हैं, तो उनकी ऊर्जा और कौशल का उपयोग नहीं हो पाता. उनकी आय की भरपाई हेतु सरकार को किसी न किसी रूप में खर्च करना पड़ता है, यानी एक ओर कंपनियों की लागत घटती है, लेकिन उसकी चोट शेष समाज और सरकार पर पड़ती है. इसलिए उचित प्रौद्योगिकी को अपनाना जरूरी है, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कष्ट न हो और संसाधनों का सही इस्तेमाल भी हो.


आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस हो, रोबोट हो, ब्लॉक चेन हो अथवा ड्रोन, ये आज के युग में विकास के प्रतीक भी बन रहे हैं. नयी खोजें इसी क्षेत्र में हो रही हैं. दुनिया भर में इनकी मांग भी बढ़ रही हैं. पिछले 30 वर्षों में देश में सॉफ्टवेयर विकास और विज्ञान प्रौद्योगिकी में हमारे युवाओं के बढ़ते कौशल के कारण आज बड़ी संख्या में हमारे युवा इस क्षेत्र में नयी खोजें भी कर रहे हैं और इस क्रांति में उनकी बड़ी हिस्सेदारी भी है. ड्रोन उत्पादन के क्षेत्र में भारत के स्टार्टअप आगे बढ़ रहे हैं. कई क्षेत्रों में रोबोट का भी विकास तेजी से हुआ है.


किसी भी हालत में इस विकास को रोका जाना देश के लिए हितकारी नहीं होगा. आज देश में इस बहस को शुरू करने की जरूरत है कि इन नयी प्रौद्योगिकियों को किस प्रकार से बढ़ावा देना है, ताकि एक ओर देश दुनिया में इस क्षेत्र में अग्रणी बन सके, तो दूसरी ओर उपयुक्त प्रौद्योगिकी के चयन के द्वारा देश के सभी प्रकार के युवाओं, चाहे वे कुशल हैं अथवा अकुशल, सभी को रोजगार भी मिले.


देश रोबोट उत्पादन, ड्रोन उत्पादन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में नयी ऊंचाइयां छू रहा है. इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हुए दुनिया में अपना परचम लहराने की जरूरत है. लेकिन, अपने देश की जरूरत के मुताबिक ही इन तकनीकों को भारत में अपनाने की जरूरत है.

सौजन्य - प्रभात खबर।

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