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Thursday, April 1, 2021

‘पाकिस्तान के साथ भारत के’ ‘सुधर रहे रिश्ते’ (पंजाब केसरी)

14 फरवरी, 2019 को पुलवामा आतंकी हमले में सी.आर.पी.एफ. के 40 जवानों की शहादत के अगले ही दिन भारत सरकार ने पाकिस्तान को दिया गया ‘मोस्ट फेवरिट नेशन’ का दर्जा छीनते हुए पाकिस्तान से होने वाले आयात पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था और भारत द्वारा 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 हटाने के 4 दिन बाद 9 अगस्त, 2019 को पाकिस्तान ने भी भारत के साथ व्यापार बंद कर दिया था। 

दोनों देशों के बीच करोड़ों रुपयों का व्यापार बंद होने से अकेले अटारी और अमृतसर क्षेत्र के लगभग 20,000 और पाकिस्तान में भी भारी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। इससे पाकिस्तान की अर्थदशा पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और तभी से दोनों ही देशों के व्यापारी आपसी व्यापार दोबारा शुरू करने की मांग करते आ रहे थे। 

यहां उल्लेखनीय है कि जहां पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारत से संबंध सुधारने के लिए 21 फरवरी, 1999 को श्री अटल बिहारी वाजपेयी को लाहौर आमंत्रित करके ‘परस्पर मैत्री और शांति के लिए’ लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए वहीं पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी भारत से संबंध सुधारने की दिशा में कुछ पग उठाए। इस वर्ष 24 और 25 फरवरी को सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों ने 2003 के युद्ध विराम समझौते का सख्ती से पालन करने पर सहमति भी व्यक्त की है। 

बहरहाल, पाकिस्तान से संबंध सुधारने के प्रयासों की नवीनतम कड़ी में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस के मौके पर इमरान खान को बधाई संदेश भेज कर पाकिस्तान के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों की इच्छा जताई वहीं इमरान खान के पत्रोत्तर के रूप में भी पाकिस्तान से एक अच्छी खबर आई। इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए लिखा है कि ‘‘पाकिस्तान भी भारत सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ शांति एवं सहयोगपूर्वक रहने की इच्छा रखता है।’’

इसी दौरान भारत से कपास का आयात बंद होने के कारण गंभीर संकट के शिकार कपड़ा उद्योग ने भारत से कपास और सूती धागे के आयात पर अपनी सरकार द्वारा लगाई हुई रोक हटाने का अनुरोध पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग मंत्रालय की ‘आर्थिक तालमेल समिति’ से किया था। इसी प्रकार पाकिस्तान द्वारा भारत से चीनी आयात की अनुमति भी मांगी गई थी। 

इन दोनों ही मांगों को बुधवार को ‘आर्थिक तालमेल समिति’ ने स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार अब निजी क्षेत्र को पाकिस्तान सरकार ने भारत से 5 लाख टन चीनी  तथा कपास आयात करने की अनुमति दे दी है जिसकी शुरूआत जून से होगी। इससे वहां के टैक्सटाइल उद्योग को अमरीका, ब्राजील और ताजिकिस्तान की तुलना में सस्ती और कम समय में कपास मिलने से बड़ी राहत मिलेगी वहीं बेरोजगार हुए लोगों को भी रोजगार मिल सकेगा। आयात खुलने से भारत के कपास निर्यातक व्यापारियों को भी एक और बाजार उपलब्ध होगा और उनकी आय में वृद्धि होगी जबकि मई, 2020 में पाकिस्तान कोरोना महामारी के चलते भारत से दवाओं तथा कच्चे माल के आयात पर लगी रोक तो पहले ही समाप्त कर चुका है। 

इसी प्रकार यदि दोनों देशों में अन्य वस्तुओं के आयात-निर्यात बारे भी समझौता हो जाए तो इससे जितना लाभ भारतीय व्यापारियों को होगा उससे कहीं अधिक लाभ पाकिस्तान के व्यापारियों को होगा। भारत में तो इतने राज्य हैं कि हम अपना सामान कहीं भी बेच सकते हैं परंतु पाकिस्तान के पास तो अपना सामान बेचने के लिए विकल्प बहुत ही कम हैं। हमने 12 मार्च को प्रकाशित अपने संपादकीय सशीर्षक ‘भारत की सराहनीय पहल’ में लिखा भी था कि ‘‘इससे पाकिस्तान में महंगाई कम होगी, लोगों को रोजगार मिलेगा और दोनों देशों में असंतोष समाप्त होगा।’’ 

पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कपास व चीनी जैसी वस्तुओं के आयात की अनुमति मिलने से इंटरनैशनल चैक पोस्ट (आई.सी.पी.) अटारी पर काम करने वाले हजारों कुलियों, व्यापारियों व ट्रांसपोर्टरों में खुशी की लहर दौड़ गई है और यह आशा बंधी है कि एक बार फिर अटारी सीमा पर दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात शुरू हो जाएगा। जिस प्रकार भारत ने विश्व के बड़े देशों के साथ संबंध सुधारे हैं और अपने पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बंगलादेश आदि के साथ संबंध सुधार रहा है उसी प्रकार यदि पाकिस्तान के साथ भी हमारे संबंध सामान्य हो जाएं तो इससे न सिर्फ इस क्षेत्र में शांति को बढ़ावा मिलेगा बल्कि चीन के कर्ज तले पिस रहे पाकिस्तान को चीन के शोषण से मुक्त होने में भी कुछ सहायता मिलेगी।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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