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Saturday, March 13, 2021

दागी पुलिसकर्मी पर मेहरबानी क्योंॽ (राष्ट्रीय सहारा)

आचार्य पवन त्रिपाठी


बई पुलिस का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता है। एक समय ऐसा भी था कि मुंबई पुलिस को अपराध अन्वेषण के मामले में इंग्लैैंड की स्कॉटलैंड यार्ड के बाद दूसरे नम्बर पर माना जाता था पर आज या कहें कि पिछले कुछ सालों से मुंबई पुलिस को अनेक आरोप और कलंक भी झेलने पड़े हैं। एक बात ध्यान में रखें कि जहां धुआं रहता है वहीं आग भी होती है। इसलिए अंबानी के आवास के पास जिलेटिन मिली गाड़ी के मामले में सचिन वझे के ऊपर जो आरोप लगे हैं‚ उनमें जरूर कुछ सच्चाई है।


 एक बात यह भी है कि महाराष्ट्र कैडर पाकर पुलिस अधिकारी स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं‚ लेकिन आज मुंबई सहित महाराष्ट्र में जो हो रहा है‚ वे न सिर्फ पुलिस को कलंकित कर रहे हैं‚ बल्कि आम लोगों का भी प्रशासन से भरोसा उठता जा रहा है। यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। नवम्बर‚ २०१९ में जब से महाराष्ट्र में तीन पहियों वाली सरकार बनी है‚ तब से सारे हालात तेजी से बदल गए हैं। इस बेमेल सरकार पर किसी व्यक्ति का नियंत्रण नहीं है। यह विसंगतियों वाला गठबंधन है‚ जो केवल स्वार्थवश बना है तो स्वाभाविक है कि हालात भी काबू के बाहर जाएंगे। कोरोना जहां देश भर में कम हो रहा वहीं मुंबई समेत महाराष्ट्र में इसका कहर जारी है‚ महाराष्ट्र में इसकी स्थिति काफी चिंताजनक है। कोरोना के समय जब मुंबइकर को सत्ता के सहयोग की आवश्यकता थी तो मुख्यमंत्री समेत पूरा मंत्रिमंडल क्वारंटीन हो गया था। उस समय विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस संपूर्ण महाराष्ट्र का दौरा कर सहायता पहुंचवाने का कार्य लगातार कर रहे थे‚ मुख्यमंत्री को पता है कि महाराष्ट्र की जनता ने जनादेश देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री बनाने के लिए दिया था‚ तो जनता के प्रति जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।


 केंद्र सरकार द्वारा कोरोना से निपटने के लिए जो भी सहायता आई उसका भी वितरण महाराष्ट्र सरकार ने उचित तरीके से न करके जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया। पालघर में जिस तरह पुलिस की उपस्थिति में साधु/संतों की बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी गई‚ उसको देखकर संपूर्ण देश का हिंदू समाज बहुत ही आहत और आक्रोशित हुआ‚ लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। पालघर की घटना ने महाराष्ट्र सरकार और पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया‚ लेकिन सरकार के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा। वर्तमान महाराष्ट्र सरकार जिनके कंट्रोल में है‚ वे शरद पवार हिंदू आतंकवाद भगवा आतंकवाद की थ्योरी बनाने वालों में से प्रमुख सदस्य थे‚ इसी महाराष्ट्र सरकार के मंत्री विजय वडेटीवार कहते हैं कि साधु–संत नालायक होते हैं। इस तरह की मानसिकता वाले लोग सरकार चलाएंगे तो स्वाभाविक है कि साधु/संतों पर इस तरह की अमानवीय घटनाए होंगी। महाराष्ट्र सरकार ने रेस्टोरेंट‚ दारू की दुकानें तो खोल दी थीं‚ लेकिन मंदिर खोलने से परहेज था। यह आस्था का सबसे बड़ा मजाक है। भाजपा के लंबे आंदोलन के बाद सरकार को मंदिर खोलने पर मजबूर होना पड़ा। सुशांत सिंह राजपूत की घटना हो या कंगना के साथ किए गए दुर्व्यवहार की घटना‚ इन सभी मामलों में सरकार की भूमिका पर संदेह हुआ।


 वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार और पुलिस जिस कारण चर्चा में है‚ वह भी दुर्भाग्यपूर्ण है। मामला है मुकेश अम्बानी के मुंबई स्थित आवास अंटीलिया के बाहर स्काÌपयो में विस्फोटक सामग्री का मिलना। यह सब घटनाक्रम जिस तरीके से हुआ उस पर प्रश्न चिह्न लगना स्वाभाविक है। विस्फोटक मिलने के बाद जिस तरह से घटनाएंं हो रही हैं; चाहे रहस्यमय तरीके से मनसुख हिरेन का शव मिलना हो या पुलिस अधिकारी सचिन वझे का घटना स्थल पर इतना जल्दी पहुंचना हो। मनसुख हिरेन की पत्नी के अनुसार हिरेन की स्काÌपयो सचिन वझे लगातार अपने प्रयोग में लाते थे। उसी स्काÌपयो से विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई। मनसुख हिरेन की रहस्यमय मृत्यु से पूर्व उनको पूछताछ के लिए पुलिस ने बुलाया भी था तथा सचिन वझे लगातार हिरेन के संपर्क में थे। हिरेन की पत्नी के अनुसार हिरेन अपनी पत्नी को बता रहे थे कि ये लोग मुझे फंसा देंगे। आखिर कौन सा रहस्य मनसुख हिरेन जानते थे‚ जिसको खोलने पर बड़ा विस्फोट होता जिसके कारण उनको जान तक गंवानी पड़ी। महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र भी हो गया। इस घटना को लेकर महाराष्ट्र भर में आक्रोश है। सबकी इच्छा है कि इस मामले में दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए‚ विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने इस मुद्दे को बहुत ही जोरदार और आक्रामक तरीके से विधानसभा में उठाया और इस प्रकरण में दोषी दिख रहे सचिन वझे को निलम्बित करके गिरपतारी की मांग की। पर सरकार ने क्या किया। सचिन वझे का सिर्फ तबादला करके ही अपने कर्त्तव्य की इतिश्री समझ ली। महाराष्ट्र सरकार जिस तरह से सचिन वझे को बचा रही है‚ उससे जनता में संदेश जा रहा है कि वझे सरकार का क्या रहस्य जानता है‚ जिसको छुपाने के लिए उसे बचाया जा रहा है। देवेंद्र फड़नवीस ने विधानसभा में धनंजय गावडे का जिक्र किया जिस पर बहुत सारे आपराधिक मामले भी दर्ज हैं तथा सचिन वझे और धनंजय गावडे एक साथ चालीस लाख रुûपये की जबरन वसूली के मामले में अभियुक्त हैं तथा अभी जमानत पर बाहर हैं।


 देवेंद्र फड़नवीस ने हिरेन की पत्नी के बयान का जिक्र करते हुए विधानसभा में कहा कि हिरेन की अंतिम लोकेशन धनंजय गावड़े के पास बताई गई है‚ यह पूरा मामला बहुत ही संदिग्ध है। महाराष्ट्र एटीएस ने मनसुख हिरेन के केस को हत्या का मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं केंद्रीय एजेंसी एनआईए ने विस्फोटक सामग्री मिलने तथा उसके अन्य पहलुओं पर अपनी जांच प्रारंभ कर दी है। विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस जिस तरीके से आक्रामक होकर यह सब विषय उठा रहे हैं‚ उससे महाराष्ट्र की जनता को संपूर्ण विश्वास है कि किसी भी अपराधी को महाराष्ट्र सरकार बचा नहीं पाएगी। आज नहीं तो कल फैसला हो कर रहेगा। 


 (ये लेखक के निजी विचार हैं)

सौजन्य - राष्ट्रीय सहारा।

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