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नए दौर के सिर पर मंडराती ड्रोन की चुनौतियां

जसप्रीत बिंद्रा तकनीक विशेषज्ञ

उस एमक्यू-9 रीपर ड्रोन ने नए दशक  की शुरुआत का डंका पीट दिया है, जिससे हेलफायर मिसाइल दागकर ईरानी सेना के प्रमुख कासिम सुलेमानी को मार गिराया गया। इससे कुछ ही दिन पहले एक वह ड्रोन चर्चा में था, जो भारत में आंदोलन कर रहे छात्रों की निगरानी कर रहा था, लेकिन उसे उतना खतरनाक नहीं कहा जा सकता। खतरनाक ड्रोन की शृंखला में रीपर अकेला नहीं है, आज दुनिया में प्रीडेटर, रेप्टर जैसे कई ड्रोन इस्तेमाल हो रहे हैं, जो लेजर गाइडेड मिसाइल छोड़ने की क्षमता रखते हैं। हालांकि खुद ड्रोन शब्द अपने आप में मासूम-सा है। यह उन मधुमक्ख्यिों से लिया गया है, जो मधु एकत्र करके शहद के छत्ते का निर्माण करती हैं। महान लेखक पीजी वुडहाउस ने एक ड्रोन क्लब बनाया था, जहां कुंवारे अंग्रेज शाम की चाय पर जमा होते थे। लेकिन आज जब इन्हीं मानवरहित हवाई वाहनों का इस्तेमाल सैनिक उद्देश्यों से किया जाता है, तो हैरत नहीं होती। ऐसा पहला मामला 1960 में हुआ था, जब अमेरिका ने ड्रोन के जरिए एक सोवियत विमान को मार गिराया था।
ड्रोन बेशक सैनिक और पुलिस कार्रवाइयों के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन उनके दूसरे इस्तेमाल भी हैं। चीन की कंपनी डीजेआई इसका उपयोग लॉजिस्टिक्स में करने की अगुवा है। अमेजन ऐसे ड्रोन बनाने में जुटी है, जो सामान की डिलेवरी कर सकें। न्यूजीलैंड में डोमिनोज ने इसके जरिए पिज्जा डिलेवर करने का एक प्रयोग किया था। हालांकि इनका सबसे बेहतर इस्तेमाल कृषि, हवाई फोटोग्राफी, राहत व बचाव अभियानों और बीमा वगैरह में किया जा सकता है। एक स्टार्टअप टेराव्यू ने इसका इस्तेमाल अंगूर के खेतों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया है। ड्रोन से यह आकलन किया जा सकता है कि उपज के बाद खेत में कितना अनाज पड़ा है या खदान के बाहर कोयले का कितना ढेर पड़ा है। टाटा स्टील कंपनी इसका इस्तेमाल खनन की थाह पाने के लिए करती है। ड्रोन वहां पहुंच सकते हैं, जहां इंसान आसानी से नहीं जा सकते। इससे सुदूर द्वीपों पर लगी पवन-चक्कियों, पाइपलाइनों, संयंत्रों और वर्षा वनों की निगरानी बहुत कम लागत पर सटीक ढंग से की जा सकती है। बाढ़ या तूफान के बाद नुकसान का आकलन करने के लिए बीमा कंपनियां भी इसका इस्तेमाल करती हैं। इनके जरिए किसी भी निर्माण-परियोजना को हर तरफ से जांचा-परखा जा सकता है। कई जगहों पर ड्रोन भेजना ज्यादा सुरक्षित होता है, खासकर जहां नतीजे विस्फोट करके हासिल करने हों, जैसे खदानों में। फ्लाई एबिलिटी इल्योज नाम की कंपनी बार्सीलोना में सीवर लाइन की जांच के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। वहीं दूसरी तरफ, अफ्रीका के जंगलों में वन्य-जीवों की तस्करी के सर्वेक्षण के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है। बोत्सवाना में इसका इस्तेमाल दूरस्थ गांवों में दवाएं पहुंचाने के लिए किया गया है।
ड्रोन जल्द ही उसी तरह की उपयोगी वस्तु बनने वाले हैं, जैसे कि आज कंप्यूटर हैं। इसमें डाले गए सॉफ्टवेयर इसकी ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे। ड्रोन सेवाओं का इस्तेमाल कारोबार की रूपरेखा को बदल देगा और चौथी औद्योगिक क्रांति का एक बहुत बड़ा औजार बनेगा। लेकिन इसका सबसे ज्यादा विकास वहीं होगा, जहां ड्रोन का जन्म हुआ था- युद्ध के मैदान में। इस मोर्चे पर नन्हे-नन्हे ड्रोन को टिड्डी दल की शक्ल दी जा रही है, जो एक बड़े नेटवर्क का काम करेंगे। आधुनिक फौजों के पास ऐसे टिड्डी दल हैं, जो भविष्य की लड़ाइयों को पूरी तरह बदल देंगे। दुश्मन की सेना को मात देने में इन्हीं ड्रोन द्वारा भेजे गए डाटा काम आएंगे। इन्हें मार गिराना आसान नहीं होगा, क्योंकि ये एक-दो नहीं, बल्कि हजारों की संख्या में होंगे। हालांकि अभी इनके विकास का दौर चल रहा है, लेकिन ये नन्हे ड्रोन इतने स्मार्ट बनाए जा रहे हैं कि वे खुद ही किसी जगह के बहुत नजदीक जाकर उसका हाल भेज सकें।
हर तकनीक की तरह ड्रोन भी ऐसी चीज है, जिसके बारे में अंत में इंसान को ही तय करना होगा कि वह उसका उपयोग करेगा या दुरुपयोग। ड्रोन अच्छी परियोजनाओं के लिए बेहतरीन औजार हो सकते हैं। वे धरती को बचा सकते हैं। वे अपराधियों को पकड़ सकते हैं। वे जन-धन की हानि रोक सकते हैं। बस, हमें उन्हें एक हथियार में  बदलने से रोकना होगा, वरना वे सिर्फ संहारक हथियारों के रूप में गिने जाएंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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