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-Rajeev Kumar (Editor-in-chief)

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Tuesday, March 16, 2021

आई.टी. सैक्टर का लाभप्रद चमकीला परिदृश्य (पंजाब केसरी)

यकीनन इस समय देश के सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) सैक्टर के छलांगें लगाकर आगे बढऩे का लाभप्रद चमकीला परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नैसकॉम टैक्नोलॉजी एंड लीडरशिप फोरम (एन.टी.एल.एफ.) -2021’ को संबोधित करते

यकीनन इस समय देश के सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) सैक्टर के छलांगें लगाकर आगे बढऩे का लाभप्रद चमकीला परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नैसकॉम टैक्नोलॉजी एंड लीडरशिप फोरम (एन.टी.एल.एफ.) -2021’ को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 के वैश्विक संकट के बीच भारत के आई.टी. सैक्टर की प्रभावी भूमिका नए भारत का एक चमकदार उदाहरण है। 

गौरतलब है कि नैशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवयेर एंड सॢवसेस कंपनीज (नैसकॉम) ने ‘न्यू वल्र्ड: द फ्यूचर इज वर्चुअल’ रिपोर्ट 2021 में कहा है कि कोरोना वायरस की चुनौतियों के बीच डिजिटल माध्यम की तरफ झुकाव बढऩे से भारत का आई.टी. उद्योग तेजी से आगे बढ़ा है। नैसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष 2020 में आई.टी. उद्योग की आय 190 अरब डॉलर रही थी। इस वर्ष 2021 में आई.टी. उद्योग 194 अरब डॉलर की आय दर्ज कर सकता है। इतना ही नहीं वर्ष 2021 में सॉफ्टवेयर सेवाओं का निर्यात 150 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में घरेलू आई.टी. उद्योग का हिस्सा तेजी से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गया है। 

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि भारत दुनिया में आई.टी. सेवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। भारत की 200 से अधिक आई.टी. फर्में दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में काम कर रही हैं। इस समय भारतीय आई.टी. उद्योग तेजी से नई भॢतयां कर रहा है और डिजिटल कौशल पर विशेष जोर दे रहा है। वर्ष 2021 में आई.टी. सैक्टर में कुल कर्मचारियों की तादाद बढ़कर 44.7 लाख होनी अनुमानित की जा रही है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाऊंडेशन (आई.बी.ई.एफ.) की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय आई.टी. सैक्टर की आय वर्ष 2025 तक बढ़ते हुए 350 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकती है। 

उल्लेखनीय है कि देश का बढ़ता हुआ आई.टी. सैक्टर विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण बन गया है। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) का प्रवाह तेजी से बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 9 माह (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान एफ.डी.आई. का प्रवाह करीब चार गुणा होकर 24.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इस क्षेत्र में 6.4 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में इस क्षेत्र को 7.7 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला था।

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि वैश्विक स्तर पर इलैक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल क्षेत्र में जो बड़ा बदलाव आया है, उसका पूरा लाभ लेने के मद्देनजर सरकार रणनीतिक रूप से आगे बढ़ी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले माह 24 फरवरी को सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर उत्पादों के लिए करीब 7,350 करोड़ रुपए के उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पी.एल.आई.) की घोषणा की है। 

सरकार के अनुसार आई.टी. हार्डवेयर उत्पादों को इस योजना में लाने से 2025 तक इस क्षेत्र में मूल्यवर्धन 20 से 25 फीसदी बढ़ सकता है, जो वर्तमान में 5 से 10 फीसदी है। जहां 2025 तक आई.टी. हार्डवेयर क्षेत्र के लिए इस योजना से कुल उत्पादन 3.26 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है। वहीं कुल उत्पादन में से 75 फीसदी निर्यात होने की उम्मीद है, जो करीब 2.45 लाख करोड़ रुपए का होगा। पी.एल.आई. योजना को आर्ई.टी. हार्डवेयर तक विस्तार करने से भारत को दुनिया के लिए इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने में भी मदद मिलेगी।

जो बाइडेन ने नए राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद 3 फरवरी को एच-1बी नीति को जारी रखने की बात कही है। इससे भारतीय कुशल कर्मचारियों को वीजा नियमों के स्तर पर राहत मिली है। राष्ट्रपति जो बाइडेन अमरीका की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए भारत की आई.टी. सेवाओं का अधिक उपयोग लेना चाहेंगे। इसके साथ-साथ देश में आई.टी. के चमकीले भविष्य के लिए प्रतिभा निर्माण पर जोर देना होगा। नई पीढ़ी को आई.टी. के नए दौर की शिक्षा देने के लिए समुचित निवेश की व्यवस्था करनी होगी।-डा. जयंतीलाल भंडारी
 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Saturday, March 13, 2021

पर्यावरण से ‘अपराधपूर्ण छेड़छाड़’ दे रही ‘भारी विनाश की चेतावनी (पंजाब केसरी)

इन दिनों जिस तरह विश्व के हालात बने हुए हैं और लगातार हिमस्खलन, भूस्खलन हो रहे हैं, ज्वालामुखी फट रहे हैं और लगातार भूकम्प आदि आ रहे हैं, उन्हें देखते हुए लोगों का कहना ठीक प्रतीत होता है कि प्रकृति हमसे नाराज है और हम पृथ्वी, जल और वायु को दूषित करने...

इन दिनों जिस तरह विश्व के हालात बने हुए हैं और लगातार हिमस्खलन, भूस्खलन हो रहे हैं, ज्वालामुखी फट रहे हैं और लगातार भूकम्प आदि आ रहे हैं, उन्हें देखते हुए लोगों का कहना ठीक प्रतीत होता है कि प्रकृति हमसे नाराज है और हम पृथ्वी, जल और वायु को दूषित करने के परिणामस्वरूप विनाश की ओर बढ़ रहे हैं जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :  

* 7 फरवरी को उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा में आई जलप्रलय में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 206 लोगों की जान चली  गई। उल्लेखनीय है कि चमोली में ही 29 मार्च, 1999 को आए भूकम्प में करीब 105 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी।
* 11 फरवरी को न्यूजीलैंड में रिक्टर पैमाने पर 7.7 तीव्रता का भूकंप आया जिसका असर पड़ोसी देश आस्ट्रेलिया पर भी पड़ा। 
* 12 फरवरी को जापान के ‘फुकुशिमा’ में भूकंप के तेज झटके लगे।
* 13 फरवरी को दिल्ली तथा उत्तर भारत के अनेक इलाकों में रिक्टर पैमाने पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे। 

* 15 फरवरी को बिहार की राजधानी पटना सहित अनेक जिलों तथा सुदूरवर्ती निकोबार द्वीप में भी तीव्र भूकंप के झटके लगे।
* 17 फरवरी को हिमाचल के ‘नगानी’ में अचानक धमाके के बाद पहले जमीन से आग की लपटें उठीं और फिर लावे जैसा पदार्थ निकलने लगा।
* 23 फरवरी को इटली के सिसली में स्थित यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी ‘माऊंट एटना’ फिर से फूट पड़ा जिससे आसपास के इलाकों में भूकंप आ गया। यह 1500 ईसा पूर्व भी भारी विनाश लाया था और रोम के 2 ऐतिहासिक शहर इसके लावे के नीचे दब कर समाप्त हो गए थे। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार यह ज्वालामुखी समुद्र की ओर खिसक रहा है जिससे आशंका है कि यदि यह समुद्र में गिर गया तो भारी विनाश होगा। 

* 2 मार्च को इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत में ‘सिनबुंग’ नामक ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट से आकाश में 16,500 फुट तक राख के गुबार छा गए।
* 3 मार्च को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर ‘शाबाना बस’ इलाके में भूस्खलन के चलते वहां से गुजर रहा तेल का टैंकर उसके नीचे दब कर तबाह हो गया।
* 3 मार्च को ही मध्य यूनान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। इसके झटके  उत्तर मैसेडोनिया, कोसोवो और मोंटेनेग्रो तक महसूस किए गए। 
* 4 मार्च को न्यूजीलैंड के उत्तरी पूर्वी तट पर 7.2 तथा 6 मार्च को 6.4 तीव्रता के भूकंप आए जिनसे देश के अनेक भाग कांप उठे। 

* 5 मार्च को अफगानिस्तान के ‘बदख्शां’ प्रांत के रेगिस्तानी जिले में हिमस्खलन से कम से कम 14 लोगों की मौत और अनेक घायल हो गए। 
* 5 मार्च को ही इंडोनेशिया के ‘सुमात्रा द्वीप’ के पश्चिमी तट पर 5.6 तीव्रता और 7 मार्च को पूर्वी प्रांत ‘मलुकू’ में 5.8 तीव्रता के भूकंप आए।
* 7 मार्च को जम्मू-कश्मीर में भूकंप के झटके लगे। 

* 8 मार्च को गुजरात के अत्यधिक जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित कच्छ जिले में भूकंप आया। यहां जनवरी 2001 में आए विनाशकारी भूकंप में 20,000 से अधिक लोग मारे गए तथा डेढ़ लाख से अधिक लोग घायल हुए थे। 
* 8, 9 और 10 मार्च को हिमाचल प्रदेश के चम्बा और अन्य क्षेत्रों में लगातार 3 दिन भूकंप के झटके महसूस किए गए।
* 10 मार्च को नागालैंड में भूकंप के झटके लगे। इसी दिन मध्य प्रदेश में ङ्क्षछदवाड़ा जिले में भूकंप आया। 
* 12 मार्च को रूस के पूर्वी भाग में 5.0 तीव्रता तथा तुर्की के ‘इगदिर’ शहर में 3.8 तीव्रता के भूकंप आए। 

एक रिपोर्ट के अनुसार मात्र 11 मार्च के दिन ही दुनिया में 2 से 5 तक की तीव्रता के 755 छोटे-बड़े भूकंप आए। पिछले कुछ समय से विश्व में इतने अधिक भूकंप आ रहे हैं जितने इससे पहले कभी नहीं आए। इस बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ‘इसरो’ ने अमरीकी अंतरिक्ष एजैंसी ‘नासा’ के साथ मिल कर पृथ्वी के उच्च गुणवत्ता वाले चित्र प्रस्तुत करने में सक्षम ‘सिंथैटिक अपर्चर राडार’ (एस.ए.आर.) बनाया है जिसकी मदद से पर्यावरण में बदलाव, बर्फ के पिघलने, भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन जैसी आपदाओं की प्रक्रिया समझने में आसानी होगी। 

निश्चय ही यह समाचार कुछ राहत देने वाला है परंतु इतना ही काफी नहीं है। पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले उन कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर करने की भी आवश्यकता है जिनसे ये प्राकृतिक आपदाएं बार-बार आ रही हैं : 
* वायुमंडल में छोड़े जा रहे कारखानों के विषैले धुएं, वनों के कटान और उनमें आग लगने आदि से वायुमंडल रसायनयुक्त हो रहा है।
* फसल का अधिक झाड़ प्राप्त करने के लिए कीटनाशकों और रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग पृथ्वी को विषैला और कमजोर कर रहा है।
* जल स्रोतों में कारखानों का विषैला पानी, सीवरेज का गंदा पानी आदि प्रवाहित करने के कारण पानी विषैला हो रहा है। 

उपरोक्त घटनाओं द्वारा प्रकृति हमें बार-बार चेतावनी दे रही है कि, ‘‘यदि पर्यावरण से इसी प्रकार छेड़छाड़ होती रही तो विश्व को वर्तमान से भी अधिक विनाशलीला के हृदय विदारक दृश्य देखने पड़ेंगे।’’—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Friday, March 12, 2021

पाकिस्तान को ‘मुफ्त कोरोना वैक्सीन दी’‘भारत सरकार की सराहनीय पहल’ (पंजाब केसरी)

अस्तित्व में आने के समय से ही पाकिस्तान के अधिकांश शासकों ने भारत के विरुद्ध प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष युद्ध छेड़ रखा है और भारत के विरुद्ध ङ्क्षहसक गतिविधियों के लिए भारत में अपने पाले हुए आतंकियों की घुसपैठ करवा के, नकली करंसी, नशीले पदार्थ व हथियार भेज कर हमें

अस्तित्व में आने के समय से ही पाकिस्तान के अधिकांश शासकों ने भारत के विरुद्ध प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष युद्ध छेड़ रखा है और भारत के विरुद्ध ङ्क्षहसक गतिविधियों के लिए भारत में अपने पाले हुए आतंकियों की घुसपैठ करवा के, नकली करंसी, नशीले पदार्थ व हथियार भेज कर हमें हानि पहुंचा रहे हैं। पाकिस्तान के शासकों में से केवल 2 प्रधानमंत्रियों ने भारत से संबंध सुधारने की दिशा में कुछ पहल की। उनमें से एक नवाज शरीफ ने 21 फरवरी, 1999 को श्री अटल बिहारी वाजपेयी को लाहौर आमंत्रित करके ‘परस्पर मैत्री और शांति के लिए’ लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। 

तब आशा बंधी थी कि अब इस क्षेत्र में शांति का नया अध्याय शुरू होगा परंतु इसके कुछ ही समय बाद मुशर्रफ ने नवाज का तख्ता पलट कर उन्हें जेल में डाल दिया और सत्ता पर कब्जा करके उन्हें देश निकाला दे दिया। उसी वर्ष भारत के कारगिल पर हमले के पीछे भी मुशर्रफ ही था। उनके बाद 18 अगस्त, 2018 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने इमरान खान ने 9 नवम्बर, 2019 को भारतीय पंजाब में स्थित ‘डेरा बाबा नानक’ को पाकिस्तान में करतारपुर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोडऩे वाले करतारपुर कॉरीडोर की शुरूआत करवाई जिससे पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहब के दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा हो गई। 

यही नहीं इस वर्ष 24 और 25 फरवरी को सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों ने 2003 के युद्ध विराम समझौते का सख्ती से पालन करने पर सहमति भी व्यक्त की है। अभी तक पाकिस्तान इस समझौते का पालन न करके लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा था। अब अपना पड़ोसी धर्म निभाते हुए भारत सरकार ने भी पाकिस्तान को कोरोना महामारी का सामना करने में सहायता देने के लिए भारत में निर्मित कोरोना वैक्सीन की 4.5 करोड़ खुराकें मुफ्त देने की घोषणा कर दी है। पुणे स्थित ‘सीरम इंस्टीच्यूट’ द्वारा निर्मित ‘ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका’ की कोरोना वैक्सीन ‘कोवीशील्ड’ जल्द ही पाकिस्तान पहुंचेगी। इससे पूर्व भारत सरकार लगभग एक दर्जन देशों भूटान, मालदीव, मारीशस, बहरीन, ओमान, अफगानिस्तान, बारबाडोस, डोमीनिका, बंगलादेश, नेपाल, म्यांमार व सेशेल्स को 361 लाख से अधिक कोरोना वैक्सीन भेज चुकी है। 

जहां भारत की यह पहल सराहनीय है, वहीं कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच भारत द्वारा पाकिस्तान से आयात पर 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगा देने और पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर बारे भारत सरकार के फैसले से बौखला कर द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने की धमकी देने के बाद बंद पड़ा करोड़ों रुपए का व्यापार भी दोबारा तुरन्त शुरू करने की जरूरत है। दोनों देशों में व्यापार बंद होने से अकेले अटारी और अमृतसर क्षेत्र के लगभग 20 हजार परिवारों का रोजगार छिन गया है जिनमें कुली, हैल्पर, ट्रांसपोर्टर, ट्रांसपोर्ट लेबर आदि शामिल हैं। दोनों देशों में आयात-निर्यात बंद होने के बाद सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी भी बढ़ गई है। जो लोग पहले सीमा पर मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवारों का पेट पाल रहे थे, उनमें से कई अब नशे की तस्करी करने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में बी.एस.एफ. ने सीमा पार से आई 497 किलो हैरोइन पकड़ी जो 7 वर्षों में बरामद की गई हैरोइन की सर्वाधिक मात्रा है। 

पाकिस्तान से आने वाली वस्तुओं में ड्राईफ्रूट, तरबूज, फल, सेंधा नमक, सीमैंट, पैट्रोलियम उत्पाद, सल्फर, चमड़े का सामान, मैडीकल उपकरण आदि शामिल थे। इसी प्रकार भारत से पाकिस्तान को जाने वाली वस्तुओं में कपास, धागा, कैमिकल, प्लास्टिक की वस्तुएं, खड्डी का धागा, रंग, रैडीमेड कपड़े, नारियल, काजू, पान के पत्ते, सब्जियां आदि शामिल थीं। इमरान खान खिलाड़ी रहे हैं। सिवाय तीन विवाह करने के उनके विरुद्ध कोई आरोप नहीं है और 6 मार्च को अपने विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में भी उन्होंने सफलता प्राप्त की है। अत: अब वह पूरे आत्मविश्वास से भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। 

यदि दोनों देश सकारात्मक दृष्टिकोण अपना लें तो न सिर्फ दोनों देशों में दूरियां मिटेंगी बल्कि लोगों का दोनों देशों में आना-जाना शुरू होने से सद्भाव बढ़ेगा। इसके साथ ही दोनों देशों में सम्बन्ध सामान्य होने से सीमाओं की सुरक्षा पर किए जाने वाले खर्च में कटौती होगी और उस बचे हुए धन को दूसरे कामों पर खर्च किया जा सकेगा। इससे पाकिस्तान में महंगाई कम होगी, लोगों को रोजगार मिलेगा और दोनों देशों में असंतोष समाप्त होगा। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी चलें, मंजिलें प्यार की, आएंगी चलते-चलते।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Wednesday, March 10, 2021

‘लगातार जारी है हिरासत से’ ‘आरोपियों की फरारी का सिलसिला’ (पंजाब केसरी)

देश भर की जेलें घोर अव्यवस्था की शिकार हैं। वहां से कैदियों के भागने और जेल के अंदर हर तरह के अपराध होने की घटनाएं आम हो गई हैं। यहां तक कि हाई सिक्योरिटी जेलें भी इस समस्या से मुक्त नहीं रहीं। एक ओर तिहाड़ जेल से चाल्र्स शोभराज द्वारा अधिकारियों को नशीली मिठाई खिलाकर फरार होने जैसी घटनाओं ने जेलों में सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाए तो दूसरी ओर जेलों से अदालतों में पेशी के लिए ले जाए जाने वाले विचाराधीन कैदियों की फरारी और उनके सहयोगियों द्वारा उन्हें पुलिस की हिरासत से निकाल ले जाने की घटनाएं भी आम हो गई हैं जो मात्र एक माह में हुई निम्न में दर्ज ग्यारह घटनाओं से स्पष्ट है : 

* 9 फरवरी को झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रांची स्थित ‘रिम्स’ में इलाज के लिए भर्ती हत्यारोपी सिद्धेश्वर निगरानी के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर आई.सी.यू. के बाथरूम की खिड़की से फरार हो गया।
* 10 फरवरी को भोपाल की पुरानी जेल से लक्ष्मण सिंह राजपूत नामक  कैदी ने न तो कहीं से ग्रिल काटी और न ही दीवार को फांदा बल्कि दिन-दिहाड़े जेल की सारी सुरक्षा व्यवस्था को धत्ता बताते हुए मेन गेट के रास्ते सबके सामने फरार हो गया।  
* 15 फरवरी को बिहार में जहानाबाद जिले के सदर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती एक कैदी उसकी निगरानी में तैनात पुलिस कर्मियों को चकमा देकर भाग निकला। 

* 20 फरवरी को लखनऊ की आदर्श जेल से एक कैदी राकेश उर्फ फौजी सुरक्षाकर्मियों को झांसा देकर निकल भागा। 
* 23 फरवरी को होशियारपुर के गांव चौहाल में चोरी के आरोप में पकड़े गए एक आरोपी ने ए.एस.आई. का कान दांतों से इतनी बुरी तरह काट डाला कि उसका एक हिस्सा ही अलग हो गया। यह कैदी ए.एस.आई. को घायल करके भाग निकला जिसे पकड़ कर लोगों ने पुलिस के हवाले किया। 
* 23 फरवरी को ही बलात्कार के एक आरोपी को पकड़ कर ले जा रही थाना गुरुहरसहाय की पुलिस पर 4 गाडिय़ों में आए 15 हमलावरों ने हमला कर दिया और उसे छुड़ा कर ले गए। 

* 26 फरवरी को बिहार की दलसिंह सराय उप-जेल से दोपहर साढ़े 3 बजे पूर्णिया उप-जेल में ले जाई जा रही महिला कैदी दुर्गा देवी शौच जाने के बहाने महिला पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गई। पुलिस ने उसे पकडऩे के लिए भागदौड़ की परन्तु वह हाथ न लगी।
* 26 फरवरी को ही फिरोजाबाद की अदालत में पेशी के लिए लाया गया अपनी पत्नी की हत्या का आरोपी ऋषि कुमार यादव पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। बताया जाता है कि जेल में तैनात महावीर सिंह नामक सिपाही फरार कैदी के साथ मिला हुआ था। 
* 3-4 मार्च की मध्य रात्रि को थाना ममदोट में कच्ची शराब बेचने के आरोप में पकड़ कर हवालात में बंद गुरनाम सिंह नामक आरोपी दीवार फांद कर फरार हो गया। 

* 5 मार्च को अदालत में पेशी के लिए ले जाया जा रहा 6.4 ग्राम स्मैक तस्करी का आरोपी देवेंद्र सिंह करनाल पुलिस की हिरासत से भाग निकला। 
* 6 मार्च को मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की एक विशेष अदालत द्वारा बलात्कार के आरोपी जितेंद्र को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद वह सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्कामुक्की करके फरार हो गया। 
बंदी अपराधियों का जेलों, अस्पतालों, अदालतों और पुलिस कर्मचारियों के कब्जे से फरार होना मुख्यत: उनकी सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही का ही प्रमाण है। 
यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि कई मामलों में पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी तरह फिट न होने के कारण भी कैदी भाग निकलने में सफल हो जाते हैं। 

इसी के दृष्टिगत पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान ने पुरुष और महिला पुलिस कर्मियों को चिकित्सकों की निगरानी में फिटनैस का प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जांच ब्यूरो के निदेशक से उन पुलिस कर्मियों को दिए गए वास्तविक शारीरिक फिटनैस प्रशिक्षण के बारे में रिपोर्ट लेने के लिए कहा है जो विभिन्न मामलों में संदिग्धों का पीछा करके उन्हें पकड़ नहीं सके। 

अत: ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जहां अपराधियों को पकडऩे के लिए सिर्फ शारीरिक दृष्टि से पूरी तरह फिट पुलिस कर्मियों को ही भेजना चाहिए और इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि अपराधियों के मामलों की सुनवाई या तो जेलों के अंदर वीडियो कांफ्रैंसिंग से की जाए या कचहरियों में शौच आदि के पक्के प्रबंध किए जाएं। यदि ऐसा नहीं किया जाएगा तो अपराधी इसी तरह पुलिस हिरासत से फरार होते रहेंगे, कानून व्यवस्था का मजाक उड़ता रहेगा और अन्य अपराधियों के हौसले बढ़ते रहेंगे।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Tuesday, March 9, 2021

‘महिला दिवस’ पर महिलाओं को कैसे ‘शुभकामनाएं’ दें (पंजाब केसरी)

हालांकि न्यूजीलैंड दुनिया का पहला स्वशासित देश था, जिसमें सभी महिलाओं को मतदान करने का अधिकार 1893 में दिया गया था लेकिन यह अधिकार संसदीय चुनाव में खड़े होने के लिए नहीं था। इसके बाद दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की कॉलोनी ने 1894 में महिलाओं को मतदान करने और चुनाव के लिए खड़े होने की अनुमति दी। 

अगर लैंगिक समानता के लिए लडऩे के लिए ‘महिला दिवस’ मनाने का विचार कोपेनहेगन में 1913 में महिला समाजवादी सम्मेलन से आया, जहां 17 देशों की 100 महिलाएं इस मुद्दे को उठाने के लिए एक साथ आईं तो 8 मार्च, 1917 को रूसी महिलाओं को और 8 मार्च, 1918 को जर्मन महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिलने के बाद मार्च की 8 तारीख को ही महिला दिवस मनाने के विचार ने जन्म लिया। 

अचरज की बात नहीं कि जहां महिलाओं को समान मतदान का अधिकार देने में अमरीका को 144 वर्ष लग गए और ब्रिटेन में 1920 में वोट का अधिकार जीतने के लिए लगभग एक सदी का समय लिया जबकि भारतीय महिलाओं को अपने देश की स्वतंत्रता केे पहले वर्ष में ही वोट डालनेे का अधिकार मिल गया। वहीं सऊदी अरब इस लम्बी सूची में आखिरी स्थान पर है जहां महिलाओं को 2015 में यह अधिकार मिला। 

परंतु जितनी भी तरक्की पिछले दशकों में हुई, वह कोरोना के चलते लॉकडाऊन के कारण बिखर गई। इसी के दृष्टिगत संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने 2021 के महिला दिवस के लिए अपने संदेश में कहा : ‘‘कोविड महामारी ने लिंग समानता की दिशा में दशकों की प्रगति को मिटा दिया है। नौकरियों के बड़े नुक्सान से, अवैतनिक देखभाल के बोझ के विस्फोट से, बाधित स्कूली शिक्षा से लेकर घरेलू ङ्क्षहसा और शोषण के बढ़ते संकट तक महिलाओं के जीवन में अत्यधिक गिरावट आई है और उनके अधिकारों का हनन हुआ है और इस नुक्सान की भरपाई कई सालों तक नहीं हो पाएगी।’’

आज के दिन जब भारत में सुंदर फूल और खूबसूरत संदेश महिलाओं को भेजे जाएंगे तो ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि भारत में महिलाओं के अधिकारों की अब क्या स्थिति है! जैसा कि कोविड के बाद के वर्ष की अर्थव्यवस्था से स्पष्ट है, जब भी बेरोजगारी बढ़ती है, महिलाओं के लिए रोजगार और कम हो जाते हैं। लॉकडाऊन के दौरान घरेलू ङ्क्षहसा में कई गुणा वृद्धि हुई, जो अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। न केवल समाज में, बल्कि राज्य तंत्र में भी महिलाओं के विरुद्ध एक ङ्क्षहसक, प्रतिगामी रवैया सामने आया है। 

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक ऐसे व्यक्ति की हत्या, जिसकी बेटी का आरोपियों द्वारा कथित रूप से यौन उत्पीडऩ किया गया था, ने राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर फिर से ध्यान केंद्रित किया है। इससे पहले भी हाथरस में 20 वर्षीय दलित महिला के साथ कथित तौर पर उच्च जाति के चार पुरुषों ने सामूहिक बलात्कार किया था। भले ही उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की उच्च दर रही है, अगर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर विश्वास किया जाए तो यह हाल के हमलों के घिनौनेपन ने सभी को चौंका दिया है। हाथरस मामले में, पीड़िता की जीभ काट दी गई और उसकी रीढ़ की हड्डी तथा गर्दन को गंभीर चोट पहुंचाई गई। 

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एन.सी.आर.बी.) की ‘भारत में अपराध’ 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध सबसे अधिक अपराध (59,853) दर्ज किए गए, जो देश भर में इस तरह के मामलों का 14.7 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश में प्रोटैक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सैक्सुअल अफैंस (पी.ओ.सी.एस.ओ.) अधिनियम के तहत बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की सबसे अधिक संख्या थी और बलात्कार के मामले में यह दूसरे स्थान पर था। 

ऐसे में यह सोचना भी गलत है कि उत्पीडऩ केवल बाहर वालों ने किया है। पिछले दिनों दो ऐसे केस आए, जहां पिता ने अपनी बच्ची की हत्या कर दी। जहां एक मामले में बेटी के किसी को मिलने पर पिता ने उसका सिर धड़ से अलग कर पुलिस थाने ले जाने की क्रूरता दिखाई, वहीं दूसरे मामले में बच्ची की हत्या पिता ने इसलिए की क्योंकि वह किसी अन्य जाति के लड़के से विवाह करना चाहती थी। 

जब कई राज्य सरकारें लव जेहाद जैसे कानून बना रही हैं तो इसमें हैरानी क्या! आश्चर्य तो इस पर भी नहीं कि पुलिस भी ऐसे जघन्य अपराधों में कुछ खास नहीं करती तो फिर महिलाएं न्याय की उम्मीद कहां से रखें! कुछ दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे ने  तीन जजों की बैंच का नेतृत्व करते हुए एक नाबालिग स्कूली लड़की से बलात्कार के आरोप में जमानत के केस में आरोपी व्यक्ति से पूछा कि क्या वह उससे शादी करेगा? उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप उससे शादी करना चाहते हैं (तो) हम आपकी मदद कर सकते हैं। यदि नहीं तो आप अपनी नौकरी खो देंगे और जेल जाएंगे।’’ यदि ऐसे फैसले शीर्ष अदालत देने लगे तो फिर हम महिला दिवस पर कैसे अपनी शुभकामनाएं महिलाओं को दें? 

ऐसा नहीं है कि केवल युवा और असहाय लड़कियों को हिंसा तथा भयावह अपराधों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि एक चौंकाने वाली घटना में राष्ट्रीय राजधानी में एक 25 वर्षीय महिला कांस्टेबल के साथ चलती बस में एक व्यक्ति ने उस समय छेड़छाड़ और उस पर हमला किया जब वह द्वारका में अपनी ड्यूटी पर जा रही थी। लेकिन महिलाओं के प्रति एकजुटता के प्रदर्शन के मामले में एकमात्र मामला जो कुछ आशा देता है, वह तमिलनाडु की महिला आई.पी.एस. अधिकारी का है जिसके समर्थन में कई आई.पी.एस. अधिकारी आए हैं जिन्होंने चेन्नई में पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक से भेंट करके डी.जी.पी. के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की। अत: शायद यह दिन केवल महिलाओं  को मजबूत रहने का उपदेश देने के लिए नहीं बल्कि समाज को झिझोडऩे का भी है।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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‘स्वतंत्रता के 73 वर्ष बाद भी’ ‘भारत में जादू-टोना, यौन शोषण और ठगी-ठोरी’ (पंजाब केसरी)

जादू-टोना भारतीय समाज के लिए एक असाध्य रोग बन गया है। समय-समय पर ऐसे ढोंगी बाबाओं के चक्कर में पड़े लोगों की समस्याएं सुलझाने और बीमारी आदि दूर करने के बहाने उन पर अत्याचारों से मौत, ठगी-ठोरी, महिलाओं के यौन उत्पीडऩ

जादू-टोना भारतीय समाज के लिए एक असाध्य रोग बन गया है। समय-समय पर ऐसे ढोंगी बाबाओं के चक्कर में पड़े लोगों की समस्याएं सुलझाने और बीमारी आदि दूर करने के बहाने उन पर अत्याचारों से मौत, ठगी-ठोरी, महिलाओं के यौन उत्पीडऩ आदि के मामले सामने आते रहते हैं जिससे स्पष्ट है कि आजादी के 73 वर्ष बाद भी लोग इनके मोहजाल से नहीं निकल पा रहे। 

आम लोगों के साथ-साथ बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ तक इनके जाल में फंसे हुए हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येद्दियुरप्पा तो अपनी मनोकामना सिद्धि के नाम पर फर्श पर निर्वस्त्र सोने के अलावा किसी धर्म स्थान पर जाकर गधे की बलि भी दे चुके हैं। हालांकि यह सिलसिला लगातार जारी है परंतु हम इसी वर्ष के कुछ उदाहरण निम्र में दर्ज कर रहे हैं जो यह बताने के लिए काफी हैं कि अंधविश्वासों में पड़ कर लोग किस प्रकार छल-कपट का शिकार हो रहे हैं : 

* 6 जनवरी को इंदौर में एक ढोंगी बाबा से अपने पति के लकवे का इलाज करवा रही महिला को कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसने महिला के साथ बलात्कार कर डाला। बाद में भी ढोंगी बाबा ने महिला के पति को और अधिक बीमार कर देने तथा उसके बच्चों की बलि चढ़ाने की धमकी देकर उसका शारीरिक शोषण जारी रखा तो तंग आकर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
* 14 जनवरी को जालौर के रहने वाले एक ढोंगी बाबा को राजस्थान की पुलिस ने बेंगलुरु से पकड़ा। अपनी झाड़-फूंक की शक्ति से एक महिला की सभी समस्याएं सुलझाने का झांसा देकर तथा नशीला पेय पिला कर बेहोश करने के बाद वह उसे बेंगलुरु ले गया और 10 दिनों तक उससे बलात्कार करता रहा।

* 6 फरवरी को यमुनानगर में प्रताप नगर क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस को दी शिकायत में एक ढोंगी बाबा द्वारा इलाज के नाम पर उसके साथ छेड़छाड़ और बलात्कार करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। 

* 13 फरवरी को गुजरात में सूरत के ‘रांदेर’ गांव में एक 21 वर्षीय युवती के पिता को तंत्र शक्ति के बल पर मारने की धमकी देकर युवती से कई बार बलात्कार करने के आरोप में ‘विपिन सोंदरवा’ नामक एक ढोंगी को गिरफ्तार किया गया।
* 19 फरवरी को गाजियाबाद में मुरादनगर थाना क्षेत्र के जलालपुर गांव में आस मोहम्मद नामक ढोंगी बाबा द्वारा एक महिला को प्रेत आत्माओं के साये का डर दिखा कर उसके साथ बलात्कार और छेड़छाड़ करने पर महिला के पति सलमान ने उसे तलवार से काट डाला। 

* 23 फरवरी को उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के ‘सैदनगली’ इलाके के लट्ठमार इलाके में एक बुजुर्ग तांत्रिक ने एक नाबालिग बच्ची को मिट्टी खोदने के बहाने जंगल में ले जाकर उसके साथ बलात्कार कर डाला। 
* 28 फरवरी को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के ‘कहमारा’ गांव में शारदा देवी नामक 33 वर्षीय एक नि:संतान महिला का इलाज करने के बहाने दुर्वेेश नामक एक ढोंगी तांत्रिक ने महिलाके परिवार की शह पर उसका इतना उत्पीडऩ किया कि उसकी मौत हो गई। 

दुर्वेेश ने शारदा देवी पर भूत-प्रेत का साया बताया और कहा कि यह भूत-प्रेत उसकी पिटाई करने से ही निकलेगा। इसी के अनुरूप दुर्वेेश ने पहले तो महिला के मुंह में कपड़ा ठूंस कर उसके नाजुक अंगों सहित शरीर के एक दर्जन से अधिक स्थानों को गर्म चिमटे से दागा और फिर लाठी से उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पूछताछ के दौरान दुर्वेेश ने कहा, ‘‘जिन्न ने मुझसे जो कहा, मैंने किया।’’ 

* 28 फरवरी को उत्तर प्रदेश में ऐटा के अलीगंज में अपनी डेढ़ वर्षीय बच्ची का तांत्रिक के पास इलाज करवाने गई महिला के पति को प्रसाद लाने के लिए भेज कर ढोंगी तांत्रिक बाबा ने महिला के साथ गंदी हरकत कर डाली।
* 1 मार्च को उत्तर प्रदेश में ओरैया के निकट कुदरकोट चौकी क्षेत्र निवासी द्वारा ज्योति जलाने के कार्यक्रम के सिलसिले में घर में पूजा करने के लिए बुलाए गए  तांत्रिक गृहस्वामियों के सोने के गहने चुरा कर भाग गए।
* 1 मार्च को ही पुलिस ने लोगों के ए.टी.एम. आदि का विवरण प्राप्त करके उनके खातों से रकम निकालने वाले राजस्थान के इंस्टाग्राम तांत्रिक गिरोह तथा ऑनलाइन नौकरी दिलाने वाले गिरोह के एक-एक सदस्य को गिरफ्तार किया ।
* 1 मार्च वाले दिन ही नागपुर में अधिकारियों ने एक नाबालिग को निर्वस्त्र होकर तंत्र साधना द्वारा नोटों की बारिश करवाने का झांसा देकर ठगने की कोशिश करने वाले एक कथित ढोंगी बाबा और उसके 5 साथियों को गिरफ्तार किया। 

* 3 मार्च को राजस्थान के पाली जिले के सोजत इलाके में एक कथित मौलवी और तांत्रिक रोशन बाबा को घर में 10 वर्षीय बेटे के साथ अकेली रहने वाली महिला को जादू-टोने और भूतप्रेत का भय दिखाकर अपने कथित चेले के साथ मिल कर कई बार गैंग रेप करने और 30 लाख रुपए हड़प लेने की शिकायत मिलने पर पुलिस ने गिरफ्तार किया। ये तो इसी वर्ष के चंद उदाहरण हैं जबकि इससे पहले अब तक ढोंगी बाबा क्या कुछ करते रहे होंगे, इसका अनुमान पाठक स्वयं ही लगा सकते हैं। समस्याओं से मुक्ति दिलाने के नाम पर न सिर्फ लोगों को ठगा जा रहा है बल्कि महिलाओं पर अत्याचार, बलात्कार व नरबलि तक दी जा रही है। 

हालांकि जादू-टोने को अपराध की श्रेणी में रखा गया है परंतु सिवाय महाराष्ट्र और कर्नाटक के कहीं भी जादू-टोने और ठगी-ठोरी के विरुद्ध कानून नहीं होने के कारण यह सिलसिला देश में जारी है। अत: दूसरे राज्यों में तथा केंद्र सरकार द्वारा भी इस बारे कठोर दंड प्रावधानों वाला कानून बनाकर उसे सख्ती से लागू करना चाहिए। यह दुष्चक्र रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Monday, March 8, 2021

एक ओर ‘भोजन बर्बाद हो रहा है’ दूसरी ओर ‘गरीब भूख से तड़प रहे हैं’ (पंजाब केसरी)

आज भोजन की बर्बादी एक विश्व व्यापी समस्या बन गई है। एक ओर करोड़ों लोग भूख से तड़प रहे हैं, तो दूसरी ओर कई देशों में लोग बड़ी मात्रा में खाद्यान्न नष्ट कर रहे हैं। इसी कारण विश्व में 70 करोड़ लोगों को दो समय का भोजन भी नसीब नहीं और वे भूखे पेट सोने को विवश हैं। 

भोजन की विश्व व्यापी समस्या के कारण प्रतिदिन 5 वर्ष की आयु से कम लगभग 24,000 बच्चे भूख से दम तोड़ रहे हैं और 87 करोड़ से अधिक लोग कुपोषण के शिकार हैं। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में विश्व भर में 93 करोड़ 10 लाख टन भोजन दुकानों, रेस्तराओं और खाने-पीने के अन्य स्थानों पर बर्बाद हुआ। नष्ट हुए खाद्यान्न की यह मात्रा विश्व भर में पैदा होने वाले खाद्यान्न का 17 प्रतिशत है। भोजन का 61 प्रतिशत हिस्सा घरोंं, 26 प्रतिशत हिस्सा होटलों तथा हास्पिटैलिटी उद्योग और 13 प्रतिशत अन्य क्षेत्रों में बर्बाद हुआ। 

भारतीय घरों में बर्बाद हुए भोजन की मात्रा 6 करोड़ 87 लाख टन थी अर्थात भारतीय घरों में प्रत्येक व्यक्ति ने वर्ष में औसतन कम से कम 50 किलो भोजन नष्ट्र किया। ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ के कार्यकारी निर्देशक इंगर एंडरसन ने चेतावनी दी है कि ‘‘दुनिया के हर देश और हर व्यक्ति को समझना होगा कि अन्न का एक दाना भी बर्बाद न होने पाए।’’ ‘‘यदि हमने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों को पहुंचने वाला नुक्सान रोकने के संबंध में अपनी जिम्मेदारी न समझी तो एक दिन हमें ही इसकी कीमत चुकानी होगी।’’ 

महंगी शादियां और अन्य भव्य समारोह भी इसका बड़ा कारण हैं जहां लोग खाते कम और जूठन ज्यादा छोड़ते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शादियों तथा अन्य समारोहों में अनुमानित आवश्यकता से 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक भोजन पकाया जाता है इसलिए उसका काफी हिस्सा बच जाता है जिसे कैटरिंग वाले जरूरतमंदों तक पहुंचाने की बजाय नालियों आदि में बहा कर या कूड़े के रूप में फैंक कर नष्ट कर देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार अन्न बर्बाद करने से  संबंधित देशों की आॢथक स्थिति और पर्यावरण पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। अन्न की यह बर्बादी प्राकृतिक संसाधनों को भी क्षति पहुंचाती है। 

फालतू समझ कर गड्ढों में फैंके गए भोजन से निकलने वाली हानिकारक मिथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाती है। विश्व भर में होने वाले कुल ग्रीन हाऊस गैस उत्सर्जन का 8-10 प्रतिशत हिस्सा गड्ढों में फैंक कर भोजन बर्बाद करने का ही परिणाम है। नैतिकता का तकाजा यह है कि हमें शादी-विवाहों तथा अन्य समारोहों में ही नहीं बल्कि अपने घरों में भी खाना खाते समय जूठन नहीं छोडऩी चाहिए और जितनी जरूरत हो उतना ही लेना चाहिए और भूख से कुछ कम ही खाना चाहिए जो स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। 

भोजन परोसने वालों के लिए भी उचित होगा कि वे एक बार में ही ज्यादा-ज्यादा न परोसें तथा जरूरत के अनुसार ही दें क्योंकि न सिर्फ जूठन लगे बर्तन साफ करने में परेशानी होती है बल्कि नालियों में जूठन फैंकने से गंदगी भी फैलती है। विश्व की लगातार बढ़ रही जनसंख्या भी भोजन की कमी का बड़ा कारण है। एक  अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते जनसंख्या वृद्धि पर रोक नहीं लगाई गई तो 2050 में पृथ्वी पर मौजूद लगभग 9 अरब जनसंख्या को भोजन और पोषण उपलब्ध करवाना कठिन हो जाएगा। 

भारत में अन्न को भी देवता का दर्जा प्राप्त है तथा भारतीय धर्म दर्शन में भोजन का अनादर करना या जूठन छोड़ना अनुचित माना गया है। अत: जूठन न छोडऩे से जहां अनाज का सदुपयोग और इसके व्यर्थ में नष्ट होने से बचाव होगा, वहीं धन की बचत होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी अच्छा होगा। यही नहीं, बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचा देने से न सिर्फ उनका पेट भरेगा बल्कि गंदगी और प्रदूषण से भी बचाव होगा और किसी भूखे का पेट भरने से जो पुण्य मिलेगा सो अलग!—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Friday, January 15, 2021

‘सीमा पर 150 मीटर लंबी सुरंग’‘इसके लिए असली कसूरवार कौन?’ (पंजाब केसरी)

समय-समय पर भारतीय शासकों द्वारा पाकिस्तान सरकार पर भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते रहते हैं परंतु अनुभव बताता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं हमारे अपने सुरक्षा प्रबंधों की

समय-समय पर भारतीय शासकों द्वारा पाकिस्तान सरकार पर भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते रहते हैं परंतु अनुभव बताता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं हमारे अपने सुरक्षा प्रबंधों की चूक का हाथ भी रहा है। भारत ने लगभग 10 वर्ष पूर्व भी पाकिस्तान के साथ यह मुद्दा उठाया था जब 28 मार्च, 2010 को वाघा में भारत-पाकिस्तान के बीच बी.एस.एफ. के एडीशनल डी.आई.जी. श्री पी.पी.एस. सिद्धू ने पाक रेंजर्स के महानिदेशक ब्रिगेडियर मोहम्मद याकूब से यह मामला उठाया तो याकूब ने साफ शब्दों में हमारे मुंह पर तमाचा जड़ते हुए कहा था कि : 

‘‘भारत की ओर से सीमा पर कांटेदार तार बाड़ है। तस्करों पर नजर रखने के लिए फ्लड लाइट्स लगी हैं। भारतीय सीमा पर चौकसी व गश्त की व्यवस्था है। इसके बावजूद यदि सीमा पर तस्करी की घटनाएं होती हैं तो इस बारे भारतीय अधिकारियों को ही सोचने की जरूरत है।’’ फिर 1 जुलाई, 2012 को भी पाकिस्तान रेंजर्स के महानिदेशक मियां मो. हिलाल हुसैन व मेजर जनरल मो. रिजवान अख्तर ने भी इस बारे भारतीय आरोपों को दो टूक शब्दों में नकारते हुए इसके लिए भारतीय सुरक्षाबलों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा : 

‘‘पाकिस्तान पर हमेशा भारतीय सीमा में घुसपैठियों को भेजने तथा तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते हैं परंतु भारतीय सीमा की तरफ से ही सुरक्षा के सर्वाधिक प्रबंध किए गए हैं।’’ ‘‘सीमा पर भारत की ओर से ही फैंसिंग लगाई गई है। इसके अलावा सर्च लाइट व फैंसिंग में करंट भी बी.एस.एफ. द्वारा छोड़ा गया है। ऐसे में भला हम भारत में घुसपैठ व तस्करी कैसे करवा सकते हैं? किसी की आज्ञा के बिना किसी के मकान में भला कोई कैसे घुस सकता है!’’ हमने अपने 5 जुलाई, 2012 के सम्पादकीय ‘पाकिस्तानियों की भारत के मुंह पर एक और चपत’ में भारत सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया था परंतु अभी तक इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है।

पाकिस्तान की ओर से भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी लगातार जारी है और सुरक्षा व्यवस्था में हमारी कमजोरियां बार-बार सामने आ रही हैं। इसका ताजा उदाहरण सीमा सुरक्षा बल द्वारा जम्मू-कश्मीर के हीरा नगर सैक्टर के सीमांत गांव बेबिया में पाकिस्तान द्वारा बनाई गई एक पुरानी सुरंग का पर्दाफाश करने से मिला है जिसके बारे में भारतीय सुरक्षा बलों को अब पता चला है। 

इस सुरंग में बरामद बोरियों में शकरगढ़ और कराची की सीमैंट फैक्टरियों के टैग लगे थे तथा उनमें रेत भरी हुई थी। इन बोरियों पर 2016-2017 की तारीख छपी हुई है जिससे स्पष्ट है कि यह सुरंग 3-4 साल पहले की बनाई हुई है। पाटी मेरु के पास मिली यह सुरंग 150 मीटर लम्बी और 25-30 फुट गहरी है। भारतीय क्षेत्र में 20 मीटर अंदर तक बनी इस सुरंग का एक हिस्सा भारत में और बाकी 130 मीटर हिस्सा पाकिस्तान में आतंकवादियों के गढ़ और लांच पैड माने जाने वाले शकरगढ़ में निकलता है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गत वर्ष 29 अगस्त और 20 नवम्बर को साम्बा में 2 सुरंगों का पता चला था और वहां भी ऐसी ही बोरियां मिली थीं। यह सही है कि हमारे सुरक्षाबलों के सदस्यों ने इस सुरंग का पता लगाया है परंतु इतने लम्बे समय तक इसका पता न लग पाने से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं गड़बड़ जरूर है अत: इस ‘सफलता’ पर अपनी पीठ थपथपाने की बजाय हमें अपनी कमजोरियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। 

इस सुरंग का देर से पता लगने के कारण अब तक न जाने इस रास्ते से कितने गोला-बारूद, नशीले पदार्थों तथा नकली करंसी आदि की भारत में तस्करी करवाई जा चुकी होगी। सीमांत क्षेत्रों में लगातार गश्त करने वाले हमारे सुरक्षा बलों को शत्रु की ऐसी गतिविधियों व मशीनों आदि के चलने से होने वाली हलचल, उनकी आवाज और मिट्टी निकाले जाने की गतिविधियों का समय रहते पता क्यों नहीं चल पाया जबकि पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में मिलने वाली यह नौवीं सुरंग है। इन हालात में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी सतर्कता संबंधी त्रुटियों की ओर देखें। इसे अधिक चुस्त करें तथा गश्त भी बढ़ाएं। सीमा पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने की भी जरूरत है। 

यही नहीं, भारतीय सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों में छिपे उन गद्दारों का पता लगाना भी जरूरी है जो अपने ही देश की गुप्त सूचनाएं शत्रु को देकर देश के साथ छल कर रहे हैं जैसे कि गत वर्ष जम्मू-कश्मीर पुलिस के डी.एस.पी. देवेंद्र सिंह को आतंकवादियों के साथ मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ लगती पूरी सीमा पर एक योजनाबद्ध तरीके से सर्च आप्रेशन चलाना और पाकिस्तानी साजिश से बनी ऐसी सुरंगों का पर्दाफाश करके सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी हम पाकिस्तानी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Thursday, January 14, 2021

‘अब हमारे नेताओं पर लग रहे’ ‘बलात्कार और यौन शोषण के आरोप’ (पंजाब केसरी)

अपने 13 जनवरी के लेख में हमने लिखा था कि जहां पिछला साल 2020 नेताओं के उल्टे-पुल्टे बयानों का साल रहा व नए साल में भी उनका ऐसा ही व्यवहार जारी है, यही बात हमारे चंद नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीडऩ पर भी लागू होती है जिसके

अपने 13 जनवरी के लेख में हमने लिखा था कि जहां पिछला साल 2020 नेताओं के उल्टे-पुल्टे बयानों का साल रहा व नए साल में भी उनका ऐसा ही व्यवहार जारी है, यही बात हमारे चंद नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीडऩ पर भी लागू होती है जिसके हाल ही के चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 13 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ‘भाजपा विधायक महेश नेगी’ को बलात्कार के एक मामले में राहत देने से इन्कार कर दिया। चीफ जुडीशियल मैजिस्ट्रेट देहरादून की अदालत ने एक पीड़ित महिला की अर्जी पर ‘नेगी’ का डी.एन.ए. टैस्ट करवाने के आदेश दिए थे जिसके विरुद्ध नेगी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उल्लेखनीय है कि 17 अगस्त, 2020 को उक्त महिला ने ‘महेश नेगी’ पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह अपनी मां के इलाज के लिए विधायक से मदद मांगने गई थी। तब ‘नेगी’ ने मदद के बहाने उससे शारीरिक संबंध बना कर 2 साल तक उसका रेप किया और पीड़िता उसके बच्चे की मां भी बनी। ‘नेगी’ पर इस मामले में देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। 

* 11 जनवरी को महाराष्ट्र की ‘शिवसेना’ नीत गठबंधन सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री ‘धनंजय मुंडे’ (राकांपा) पर रेणुका शर्मा नामक एक गायिका ने उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया है। गायिका ने ‘धनंजय मुंडे’ के विरुद्ध पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करने पर ट्वीट करके आरोप लगाया है कि अब तक न तो पुलिस ने संज्ञान लिया और न ही कोई कार्रवाई की है। गायिका का आरोप है कि ‘मुंडे’ के साथ उसकी बड़ी बहन का प्रेम विवाह हुआ था और वर्ष 2006 में वह अपनी बहन की डिलीवरी के लिए इंदौर गई थी। तब उसकी इच्छा के विरुद्ध ‘मुंडे’ ने उससे संबंध बनाए। वह 2006 से ही बार-बार उसका बलात्कार कर रहे हैं तथा उसे ‘धनंजय मुंडे’ से जान का खतरा है। 

* 10 जनवरी, 2021 को वाराणसी से ‘भाजपा के पूर्व विधायक मायाशंकर त्रिपाठी’ पर उन्हीं के द्वारा संचालित शिक्षा संस्थान की एक छात्रा द्वारा छेडख़ानी का आरोप लगाने पर लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। 
* 14 दिसम्बर, 2020 को उत्तर प्रदेश में ‘समाजवादी पार्टी नेता इंतजार त्यागी’ पर एक अंतर्राष्ट्रीय महिला खिलाड़ी ने तमंचे के बल पर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी ने अपने मोबाइल में उसके अश्लील फोटो कैद कर लिए और तभी से उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा है। 

इन दिनों दक्षिण भारत में तमिलनाडु के पोल्लाची में दो वर्ष पूर्व हुए यौन शोषण के मामले को लेकर वहां की राजनीति गर्माई हुई है। ‘द्रमुक के विधायक एन. काॢतक’ ने आरोप लगाया है कि सरकार 2019 के  इस मामले में आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है और सरकार की मिलीभगत के कारण ही 2 वर्ष तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यह पूरा मामला 12 फरवरी, 2019 का है जब 19 वर्षीय एक कालेज छात्रा के साथ चार लोगों ने बलात्कार करके उसकी वीडियो बना ली। इस मामले में सी.बी.आई. ने ‘अन्नाद्रमुक के छात्र विंग के सचिव अरुणाथल्लम’ सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यही नहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘चिन्मयानंद’ को सितम्बर 2019 में उन पर लगे बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘निहालचंद मेघवाल’ पर भी बलात्कार करने का आरोप लगा। 

राजस्थान के पूर्व मंत्री ‘महिपाल मदेरणा’ (कांग्रेस) के नर्स ‘भंवरी देवी’ के साथ संबंधों के चलते वर्ष 2011 में राजस्थान की कांग्रेस सरकार की जम कर फजीहत हुई थी। इस मामले में मदेरणा तथा कांग्रेस के एक विधायक के भाई को गिरफ्तार किया गया था। उत्तराखंड के ‘हरक सिंह रावत’, गुजरात के ‘जयंती भानुशाली’, उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से विधायक ‘कुलदीप सिंह सेंगर’ और बदायूं से विधायक ‘कुशाग्र सागर’ के विरुद्ध बलात्कार के केस दर्ज करवाए गए हैं और मध्य प्रदेश के ‘राजाराम’ को गिरफ्तार किया गया है। 

महाराष्ट्र का एक नेता ‘रविंद्र बावंठाडे’ चलती बस में महिला का चुम्बन लेते हुए कैमरे में कैद होने के बाद गिरफ्तार हुआ। ‘राजद’ नेता ‘अरुण यादव’ पर नाबालिग से बलात्कार का आरोप लगने के बाद वह फरार हो गया जबकि अयोध्या में ‘बसपा’ नेता ‘बज्मी सिद्दीकी’ और उसके साथियों के विरुद्ध एक युवती ने सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया। 

एक रिपोर्ट के अनुसार 2009 से 2019 के बीच 10 वर्षों में सांसदों द्वारा महिलाओं के विरुद्ध दर्ज अपराधों में 830 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अपने देश के चंद नेताओं की उक्त करतूतें हमने पाठकों के सामने रखी हैं जिससे स्पष्टï है कि ये नेता आचरण के मामले में संदेह के घेरे में आए हुए हैं। निश्चय ही यह देश के लिए कोई शुभ लक्षण नहीं है जिससे राजनीतिक दलों के स्तर में गिरावट आ रही है। अत: राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को चाहिए कि वे ऐसे किरदार वालों को पार्टी में शामिल न करें और यदि कोई ऐसा नेता उनकी पार्टी में है तो उसे तुरंत निकाल बाहर करें ताकि दूसरों को नसीहत मिले।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Monday, January 11, 2021

पाकिस्तान सरकार आतंकियों संग ‘चूहे-बिल्ली का खेल’ खेलती रही (पंजाब केसरी)

एक महत्वपूर्ण बदलाव के चलते पाकिस्तान में एक आतंकवाद रोधी अदालत ने गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दूसरी ओर मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के आप्रेशन

एक महत्वपूर्ण बदलाव के चलते पाकिस्तान में एक आतंकवाद रोधी अदालत ने गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दूसरी ओर मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के आप्रेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को भी लाहौर में एक पाकिस्तानी आतंकवाद विरोधी अदालत (ए.टी.सी.) लाहौर के न्यायाधीश एजाज अहमद बुट्टर ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादी लखवी को तीन मामलों में प्रत्येक में तीन साल की सजा के साथ पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 

ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ हो। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था परन्तु जब तक चीन ने पाकिस्तान-आधारित जे.एम. प्रमुख को ब्लैक लिस्ट करने के प्रस्ताव पर अपनी पकड़ हटा नहीं ली, यह मुमकिन न हुआ। दिल्ली ने इस मुद्दे पर पहली बार विश्व निकाय का दरवाजा लगभग 10 साल पहले खटखटाया था। 

पाकिस्तान सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों को पकडऩे का या फिर उन्हें छोडऩे का चूहे बिल्ली का यह खेल खेलती आई है। 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (एल.ई.टी.) के आतंकवादी समूह के आप्रेशन कमांडर लखवी को आतंकी वित्तपोषण मामले में पाकिस्तानी आतंकवाद विरोधी अदालत ने 15 साल की सजा सुनाई थी। संयुक्त राष्ट्र के कथित आतंकवादी 61 वर्षीय लखवी मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में 2015 से जमानत पर था। उसे एक सप्ताह पहले पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के आतंकवाद रोधी विभाग (सी.टी.डी.) ने गिरफ्तार किया था। लखवी को दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा लश्कर और अलकायदा से जुड़े होने के कारण यू.एन. द्वारा एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। 

पुलवामा हमले के बाद भी भारी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद (जे.ए.एम.) प्रमुख के बेटे और भाई सहित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के 100 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें सी.आर.पी.एफ के 40 जवान मारे गए थे। 

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने जैश मुख्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण को अपने कब्जे में लेने का दावा किया जिसमें बहावलपुर में मद्रेसतुल साबिर और जामा मस्जिद सुभानल्लाह शामिल थे। परन्तु धीरे-धीरे इन सबको या तो छोड़ दिया गया या किसी न किसी बहाने लापता बताया गया। ऐसे में यह मानना गलत न होगा कि पाकिस्तानी सरकार ही इन्हें अपने साए तले संरक्षण देती है और जब चाहे औपचारिक तौर पर जेल में डाल देती है। 

ग़ौरतलब है कि पैरिस स्थित एफ.ए.टी.एफ . ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक मनी लॉड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए कार्ययोजना लागू करने को कहा था। कोविड-19 प्रकोप के बाद समय सीमा बढ़ा दी गई थी। जबकि नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि इन कार्रवाइयों का समय स्पष्ट रूप से ‘एशिया पैसिफिक ज्वाइंट ग्रुप’ (ए.पी.जे.जी.) से मिलने और अगले ‘फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (एफ.ए.टी.एफ.) जोकि फरवरी 2021 में होना है, के आगे अनुपालन की भावना व्यक्त करने का इरादा बताता है। 

भारतीय प्रवक्ता ने आगे कहा कि लखवी को जेल की सजा सुनाए जाने और जैश-ए-मोहम्मद (जे.ई.एम.)  प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ  गिरफ्तारी वारंट जारी करना मात्र यह बतलाता है कि पाकिस्तान के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह महत्वपूर्ण बैठकों से पहले ठोस कार्रवाई करे। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं और नामित आतंकवादियों ने अपने भारत-विरोधी एजैंडे को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी संगठनों के साथ मिलकर ये कार्य किए हैं।

पाकिस्तान जोकि आर्थिक संकट की डगर पर है तो उसके लिए ब्लैक लिस्ट में चले जाने से उस पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। एक वैश्वीकरण माहौल में अन्य देशों की तरह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ नहीं है तथा यह पूर्णत: अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों पर निर्भर है। यदि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया तो इससे उसके आयात, निर्यात तथा राजस्व पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय ऋण लेने की पहुंच भी सीमित हो जाएगी। ब्लैक लिस्ट होने से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) तथा ए.डी.बी. जैसे संस्थान इमरान खान सरकार से निपटने में और सचेत हो जाएंगे और इसके अलावा जोखिम दर तय करने वाली एजैंसियां जैसे मूडीज एस.एन.पी. तथा फीच रेटिंग को डाऊन ग्रेड करने के लिए बाध्य होगी। 

इस्लामाबाद इस समय वित्त संकट की मझधार में है और यह वर्तमान संकट 1988 के परमाणु परीक्षणों के बाद से भी बुरा है। ब्लैक लिस्ट होने से पाकिस्तान की चीन की बैल्ट एंड रोड इनीशिएटिव की बिलियन डालर परियोजना भी तहस-नहस हो जाएगी। इसलिए पाकिस्तान चाहेगा कि सभी आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया जाए ताकि ब्लैक लिस्ट से वह बाहर रह सके। 

फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफ.ए.टी.एफ.) अध्यक्ष मार्कस प्लेयर का कहना है कि पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई योजना में से 27 आइटमों से 21 को पा लिया है और सरकार ने संकेत दिया है कि वह बाकी आइटमों को भी पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले एफ.ए.टी.एफ. का अध्यक्ष एक चीनी शियांगमिन ली था जो पाकिस्तान को किसी भी नकारात्मक कार्रवाई से बचाता रहा है जबकि वर्तमान अध्यक्ष मार्कस प्लेयर एक जर्मन नागरिक है जोकि आतंकवाद के कड़े विरोधी हैं।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Saturday, January 9, 2021

‘देश की सेना का तनाव दूर करने के लिए’ ‘तुरंत कदम उठाने की जरूरत’ (पंजाब केसरी)

1 अप्रैल, 1895 को अस्तित्व में आई भारतीय सेना आज विश्व की सबसे बड़ी सेना बन चुकी है जिसने कई युद्धों में अपनी वीरता के झंडे गाड़े तथा विश्व के अनेक भागों में राहत और बचाव अभियानों में सफलतापूर्वक भाग लिया ....

1 अप्रैल, 1895 को अस्तित्व में आई भारतीय सेना आज विश्व की सबसे बड़ी सेना बन चुकी है जिसने कई युद्धों में अपनी वीरता के झंडे गाड़े तथा विश्व के अनेक भागों में राहत और बचाव अभियानों में सफलतापूर्वक भाग लिया है।

1971 में बंगलादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद करवाने और 1988 में मालदीव सरकार का राजनीतिक संकट सुलझाने में भारतीय सेना ने सहायता की थी जो ‘आप्रेशन कैक्टस’ के नाम से इतिहास में दर्ज है। परंतु अपनी वीरता से भारत को विश्वव्यापी प्रतिष्ठा दिलाने वाली हमारी सेना के जवानों के तनाव में पिछले दो दशकों के दौरान भारी वृद्धि हुई है। इस कारण प्रतिवर्ष भारतीय सेना आत्महत्याओं तथा अन्य असुखद कारणों से अपने जांबाज सैनिकों से हाथ धो रही है। 

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई खबरों के अनुसार भारतीय सेना में ‘क्वालिटी आफ लाइफ’ अच्छी नहीं रही जिस कारण सेना के जवान तनाव और नकारात्मकता के शिकार हो रहे हैं। हाल ही में रक्षा मंत्रालय के सबसे बड़े ‘थिंक टैंक’ (‘द युनाईटेड सर्विस इंस्टीच्यूशन आफ इंडिया’) ने भारतीय सेना में तनाव पर एक वर्ष के अनुसंधान के बाद जारी अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन किए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय भारतीय सेना के आधे से अधिक जवान मुख्यत: आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में लम्बी तैनाती तथा कार्य संबंधी अन्य समस्याओं के कारण गंभीर तनाव के शिकार हैं। सर्वाधिक चिंताजनक बात यह है कि यह तनाव अधिकांशत: वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार के कारण पैदा हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार : ‘‘तनाव का सबसे बड़ा कारण जवानों को जरूरत के समय पर छुट्टी न मिलना या देर से मिलना, काम ज्यादा और आराम कम, घरेलू परेशानियां, वरिष्ठ सेनाधिकारियों से कम संवाद और उनकी समस्याओं के प्रति उनका उपेक्षापूर्ण रवैया, उन्हें परेशान करना, अपेक्षित सम्मान न मिलना, मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अनुचित प्रतिबंध तथा मनोरंजन की सुविधाओं का अभाव आदि है।’’‘‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, अपर्याप्त रेल रिजर्वेशन, प्रशासन से पर्याप्त सहायता न मिलना, वित्तीय समस्याएं, परिवार से लम्बी दूरी, फील्ड एरिया में रहने की पर्याप्त जगह का न होना, वरिष्ठ अधिकारियों का दुव्र्यवहार, पदोन्नतियों में पारदर्शिता का अभाव, वित्तीय दावों के भुगतान में देरी, घटिया राशन आदि भी तनाव का कारण बन रहे हैं।’’ 

‘‘यही नहीं सैनिकों की पत्नियों के कल्याण के लिए गठित ‘आर्मी वाइव्स वैल्फेयर एसोसिएशन’ (ए.डब्ल्यू.डब्ल्यू.ए.) के कार्यक्रमों में लम्बी ड्यूटी देते समय या दूसरे मौकों पर हाजिरी देने के दौरान अकारण लम्बे समय तक खड़े रहना आदि भी जवानों और जे.सी.ओ. को तनाव दे रहा है।’’ इसी अनुसंधान के अनुसार युवा अधिकारियों में तनाव का सबसे बड़ा कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन पर अनावश्यक काम का बोझ डालना और उन्हें फिजूल के कामों में लगाना, उन्हें दिए गए किसी काम को असंभव रूप से कम समय में पूरा करने का दबाव और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ढुलमुल फैसले लेने की प्रवृत्ति है। 

कर्नल (रिटा.) गुरुराज गोपीनाथ ने गत वर्ष अक्तूबर में कहा था कि : ‘‘30 से 40 वर्ष के सेनाधिकारियों की प्रतिक्रियाओं संबंधी एक रिपोर्ट के अनुसार 87 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि वे काम के दबाव के चलते छुट्टी नहीं ले पाते, 85 प्रतिशत ने कहा कि खाना खाते समय भी उन्हें सरकारी फोन का जवाब देना पड़ता है, 73 प्रतिशत ने कहा कि यदि वे छुट्टी ले भी लें तो उन्हें काम के कारण बुला लिया जाता है और 63 प्रतिशत का कहना था कि काम के चलते उनका वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है।’’अत: हमारी सेना के जवानों में नकारात्मकता की भावना पैदा करने वाले कारणों को दूर करने की जरूरत है ताकि देश की शौर्य पताका फहराने वाले हमारे वीरों पर आंच न आए। वे खुश और उनके परिवार खुशहाल रहें और वे देश की सरहदों तथा देशवासियों की पूरी ताकत के साथ रक्षा करने में समर्थ हों।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Thursday, January 7, 2021

‘भारत में नारी जाति पर’‘निर्भया जैसे अत्याचार कब थमेंगे’ (पंजाब केसरी)

16 दिसम्बर, 2012 की रात को दिल्ली में पैरा मैडीकल की 23 वर्षीय छात्रा ‘निर्भया’ के साथ चलती बस में 6 लोगों द्वारा वीभत्स बलात्कार कांड ने विश्व भर में सनसनी फैला दी थी। इस घटना में बलात्कारियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में ‘लोहे की छड़

16 दिसम्बर, 2012 की रात को दिल्ली में पैरा मैडीकल की 23 वर्षीय छात्रा ‘निर्भया’ के साथ चलती बस में 6 लोगों द्वारा वीभत्स बलात्कार कांड ने विश्व भर में सनसनी फैला दी थी। इस घटना में बलात्कारियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में ‘लोहे की छड़’ डालने के अलावा उसके शरीर को कई जगह दांतों से काट दिया था। 

‘निर्भया’ को न्याय दिलवाने के लिए देश भर में उठी आवाजों के दृष्टिगत भारत सरकार ने जब महिलाओं की सुरक्षा संबंधी अनेक पग उठाने के अलावा 3 महीनों के भीतर कानून भी बना दिया तो आशा बंधी थी कि इससे महिलाओं के विरुद्ध अपराध घटेंगे परंतु ऐसा हुआ नहीं और बच्चियों से लेकर वृद्धाओंं तक वासना के भूखे भेडिय़ों के अत्याचारों की शिकार हो रही हैं। 

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के 2019 के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। वर्ष 2013 में देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की 309546 घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं  जो 2019 में बढ़ कर 405861 हो गईं। महिलाओं से बलात्कार जैसा घिनौना अपराध करने के साथ-साथ उनके शरीर पर अन्य तरीकों से भी अत्याचार करने के चंद शर्मनाक उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

* 21 जनवरी, 2020 को महाराष्ट्र के नागपुर में ‘योगी लाल रहंगदाले’ नामक 52 वर्षीय व्यक्ति ने एक युवती के मुंह में कपड़ा ठूंस कर उससे बलात्कार किया और उसके गुप्तांग में ‘लोहे की छड़’ डाल दी।  
* 8 अगस्त, 2020 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ में हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए एक युवक ने एक 6 वर्षीय बच्ची का अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया और उसका प्राइवेट पार्ट कुचल डाला।
* 14 सितम्बर को हाथरस जिले के ‘चंदपा’ थाना के एक गांव में 19 वर्षीय दलित युवती की 4 युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार, बेरहमी से पिटाई करने से समूचे शरीर में जगह-जगह फ्रैक्चर होने, जीभ काटने तथा रीढ़ की हड्डïी टूटने से 29 सितम्बर को दिल्ली के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई। 

* 20 नवम्बर, 2020 को मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ज्ञारसपुर थाना इलाके के ‘ओङ्क्षलजा’ गांव में ‘सुरेंद्र चिढ़ार’ नामक एक 26 वर्षीय युवक ने न केवल एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ बलात्कार किया बल्कि विरोध करने तथा चिल्लाने पर उसके मुंह में मिट्टी भर दी जिससे सांस रुकने से उसकी मृत्यु हो गई। यही नहीं बलात्कार करने के बाद वृद्धा की मौत की पुष्टि करने के लिए उसने उसके गुप्तांग में डंडा भी डाल दिया।
* 23 दिसम्बर, 2020 को ओडिशा के नयागढ़ में एक युवक ने एक 5 वर्षीय बच्ची की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ बलात्कार कर डाला। 

* 3 जनवरी, 2021 को झारखंड में रांची के ‘ओरमांझी’ में एक युवती के साथ बलात्कार करने के बाद अपराधियों ने न सिर्फ गला रेत कर उसकी हत्या कर दी बल्कि उसका गुप्तांग भी काट दिया और युवती की पहचान छिपाने के लिए उसका सिर धड़ से अलग करके निर्वस्त्र लाश को फैंक दिया।
* 3 जनवरी, 2021 को ही जालंधर के थाना पतारा के अंतर्गत पड़ते गांव में 25 वर्षीय प्रवासी मजदूर ने एक 6 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी।
 * नारी जाति के प्रति अपराधों का एक और उदाहरण 4 जनवरी को सामने आया जब उत्तर प्रदेश में बदायूं के थाना ‘उगैती’ क्षेत्र में 50 वर्षीय एक महिला के साथ एक मंदिर के महंत, उसके चेले व ड्राइवर ने निर्भया जैसी बर्बरता की। 

आरोपियों ने उसके शरीर को बुरी तरह नोच डाला और गैंगरेप करने के बाद उसके गुप्तांग में ‘लोहे की छड़’ जैसी कोई चीज जोरदार प्रहार के साथ डाल दी जिसके परिणामस्वरूप महिला की बाईं पसली, बायां पैर और बायां फेफड़ा क्षतिग्रस्त हो जाने से उसकी मृत्यु हो गई और आरोपी देर रात उसका शव उसके घर के बाहर फैंक कर चले गए। 

ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जब बलात्कार के आरोप में कुछ महीनों या साल की सजा काट कर आए अभियुक्त दोबारा यह अपराध करने से संकोच नहीं करते। जैसे कि बलात्कार के आरोप में कैद काट कर जेल से निकले उत्तर प्रदेश के सीतापुर के ‘इमलिया सुल्तानपुर’ थाना क्षेत्र के समर बहादुर नामक आरोपी ने 18 दिसम्बर, 2020 को फिर 9 वर्षीय एक बच्ची से बलात्कार किया। 

बेशक निर्भया पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को 7 साल लम्बी कानूनी कार्रवाई के बाद गत वर्ष 20 मार्च को फांसी दी गई परंतु इसके अलावा किसी भी न्यायालय द्वारा किसी बलात्कारी को फांसी पर लटकाए जाने का कोई मामला सामने नहीं आया। अत: जब तक महिलाओं के विरुद्ध इस तरह के अपराधों के मामले में फास्ट ट्रैक अदालतों द्वारा जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करके दोषियों को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा, तब तक इस मनोविकृत्ति पर रोक लग पाना असंभव ही प्रतीत होता है।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Wednesday, January 6, 2021

‘रक्षकों’ की वर्दी में छुपे चंद ‘भक्षक’ ‘धूमिल कर रहे हैं पुलिस की छवि’ (पंजाब केसरी)

समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है पर इसमें घुस आई चंद काली भेड़ें अपनी कत्र्तव्यविमुखता एवं अमानवीय कृत्यों से पुलिस विभाग की बदनामी का कारण बन रही..

समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है पर इसमें घुस आई चंद काली भेड़ें अपनी कत्र्तव्यविमुखता एवं अमानवीय कृत्यों से पुलिस विभाग की बदनामी का कारण बन रही हैं। महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, ‘‘यदि पुलिस में दुर्भावना आ जाएगी तो देश का भविष्य सचमुच अंधकारमय हो जाएगा।’’ आज कुछ-कुछ वैसा ही होता दिखाई दे रहा है जिसके 11 दिनों के उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 24 दिसम्बर को शाहजहांपुर के जलालाबाद थाने के एक सब इंस्पैक्टर पर एक महिला ने बलात्कार करने का आरोप लगाया। महिला के अनुसार जब वह अपने साथ कुछ लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार किए जाने की रिपोर्ट लिखवाने उक्त थाने में गई तो वहां मौजूद सब-इंस्पैक्टर विनोद कुमार ने उसके साथ बलात्कार कर डाला। 
* 24 दिसम्बर को ही हरियाणा राज्य नशा नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एक नशा तस्कर से जब्त किए गए 812 किलो डोडा-चूरा की बजाय मात्र 400 किलो डोडा-चूरा की बरामदगी दिखाने के आरोप में 8 पुलिस कर्मियों के विरुद्ध केस दर्ज करके उन्हें निलम्बित किया। 

* 26 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक महिला के साथ बलात्कार करने और उसकी बेटी से छेड़छाड़ करने के मामले में फरार चल रहे सिपाही मनोज रस्तोगी को गिरफ्तार किया गया। 
* 30 दिसम्बर को मोहाली में तैनात एक सिपाही गगनदीप सिंह के विरुद्ध एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसा कर गर्भवती करने, गर्भपात करवाने और वायदा करके शादी से मुकर जाने के आरोप में केस दर्ज किया गया। 
* 30 दिसम्बर को ही जालन्धर के थाना 8 की पुलिस ने हैरोइन सप्लाई करते हुए पंजाब पुलिस के डिसमिस हैड कांस्टेबल राकेश कुमार और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया। यह हैड कांस्टेबल 2018 में शराब की सप्लाई करता पकड़े जाने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था। 

* 1 जनवरी को नशा तस्करों को पकडऩे के लिए बनाई गई स्पैशल टास्क फोर्स मोगा से संबंधित एक ए.एस.आई. बलजीत सिंह को पुलिस ने चिट्टे की तस्करी करने के आरोप में उसकी महिला मित्र कर्मबीर कौर और ड्राइवर जग्गी के साथ गिरफ्तार किया। कर्मबीर कौर को उसके पति बलतेज सिंह ने कुछ समय पूर्व बलजीत सिंह के साथ रंगरलियां मनाते हुए पकड़ा था।

* 1 जनवरी को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में नए साल की खुशी में एक ढाबे पर कुछ सिपाहियों ने दावत उड़ाने के बाद ढाबे वाले द्वारा पैसे मांगने पर न सिर्फ उसकी स्कूटी और मोबाइल तोड़ दिए बल्कि गोलक में रखे 4,000 रुपए और जेब में पड़े 2000 रुपए भी निकाल लिए और धमकाया कि होटल चलाना है तो उन्हें मुफ्त खाना खिलाना होगा। पीड़ित दुकानदार ने अधिकारियों से शिकायत की तो 3 जनवरी की रात को लगभग 12.30 बजे 4 नकाबपोशों ने आकर पहले तो उसके साथ गाली-गलौच किया और फिर उसका ढाबा तहस-नहस कर दिया। 

* 1 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश में बिठूर (कानपुर) पुलिस थाने के एस.ओ. कौशलेन्द्र प्रताप को 2018 में चोरी हुई कार का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। 
* 2 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब के खमानों में एक चिकन कार्नर के मालिक की मौत के बाद उसके कमरे से मिली 8 लाख रुपए नकदी और कुछ मूल्यवान सामान खुर्द-बुर्द करने के आरोप में एस.एच.ओ. हरविंद्र सिंह और ए.एस.आई. जसपाल सिंह को निलम्बित करके उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की गई। 

* 4 जनवरी को कैथल पुलिस ने राजस्थान के नसीराबाद कैंट से एक नायब सूबेदार और दो सैनिकों को अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा। 
* 4 जनवरी को ही लुधियाना की चौकी मुंडियां के हैड कांस्टेबल राकेश कुमार के विरुद्ध एक महिला से हुए बलात्कार के मामले में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है जबकि ए.एस.आई. सुखविंद्र सिंह और होमगार्ड जवान हरिन्द्र सिंह को निलम्बित किया गया है। 

उक्त घटनाओं से स्पष्ट है कि पुलिस की ज्यादतियां किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रह कर देशव्यापी बन चुकी हैं और कानून के रक्षक कहलाने वाले चंद पुलिस कर्मियों का इस प्रकार से भक्षक बनना समूचे पुलिस विभाग की छवि धूमिल कर रहा है। अत: दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए ताकि दूसरों को भी नसीहत मिले और वे ऐसी कोई करतूत करने से पहले सौ बार सोचें।-विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Tuesday, January 5, 2021

‘वित्तीय संकट से लटका’‘नौसेना का आधुनिकीकरण’ (पंजाब केसरी)

7800 किलोमीटर से अधिक की लम्बी तटरेखा के साथ भारतीय नौसेना को हर समय देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन के साथ चल रहे भारत के विवाद के बीच भारतीय नौसेना को अपने आधुनिकीकरण की योजना में धन की कमी के कारण परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे

7800 किलोमीटर से अधिक की लम्बी तटरेखा के साथ भारतीय नौसेना को हर समय देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन के साथ चल रहे भारत के विवाद के बीच भारतीय नौसेना को अपने आधुनिकीकरण की योजना में धन की कमी के कारण परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे में 200 शिप्स लेने की बजाय इनकी संख्या कम कर के 175 की जा सकती है और तीसरे एयरक्राफ्ट करियर की योजना को भी फिलहाल टाला जा सकता है। इससे निश्चित ही चीन के विरुद्ध बने आस्ट्रेलिया, जापान, अमरीका और भारत के समूह ‘क्वाड’ में भारत की स्थिति कमजोर होती है क्योंकि ये देश समुद्र में चीन का प्रभाव घटाने के लिए भारत का सहयोग चाहते हैं। 

भारत ने अपनी सेना का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के साथ लगती पश्चिमी सीमा पर तैनात कर रखा है और यदि  भारत को  चीन के साथ भी उत्तरी सीमा पर इसी तरह की तैनाती करनी है तो देश के रक्षा बजट में थल सेना पर होने वाला खर्च और बढ़ाना पड़ेगा। पहले ही भारत के रक्षा बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा देश की लगभग साढ़े 13 लाख की मजबूत थल सेना पर खर्च होता है और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम बजट मिल पाता है। 

रक्षा बजट में नौसेना की हिस्सेदारी 2012 से 18 प्रतिशत से कम हो कर 2019-20 में 13 प्रतिशत रह गई है और यह नौसेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं में सबसे बड़ी समस्या है। वित्त वर्ष 2019-20 में जारी हुए रक्षा बजट में से सर्वाधिक 39,302.64 करोड़ रुपए वायु सेना को जारी हुए हैं जबकि थल सेना को 29,461.25 करोड़ रुपए और नौसेना को सबसे कम 23,156.43 करोड़ रुपए का आबंटन हुआ। नौसेनाध्यक्ष एडमिरल कर्मबीर सिंह धन की कमी के कारण  आधुनिकीकरण में आ रही रुकावट के संबंध में सरकार को जानकारी दे चुके हैं और मौजूदा हालत में नौसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की जरूरत के बारे में उन्होंने सरकार को बताया है। 

नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को यह भी बताया है कि उसको कम बजट दिए जाने की स्थिति में नौसेना अपने आधुनिकीकरण की योजनाओं में बदलाव कर सकती है। फिलहाल नौसेना के बेड़े में वृद्धि के लिए 50 शिप और पनडुब्बियां  निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा नौसेना किसी भी सूरत में 2022 तक अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजैक्ट ‘विक्रांत’ के निर्माण को पूरा करना चाहती है। फिलहाल नौसेना के पास एक मात्र एयरक्राफ्ट करियर ‘विक्रमादित्य’ ही है। नौसेना की योजना कम से कम 3 एयरक्राफ्ट करियर रखने की है ताकि 2 हमेशा ही ऑपरेशंस में रहें। इसके अलावा ‘डिफैंस एंड रिसर्च डिवैल्पमैंट आर्गेनाइजेशन’ ने 2026 तक नौसेना को दो इंजन वाले हल्के लड़ाकू विमान बना कर देने की पेशकश की है। 

दुनिया भर में चीन के बढ़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए भारत को अपनी नौसेना को मजबूत करना बहुत जरूरी है लेकिन लद्दाख सीमा पर चीन के साथ बढ़े विवाद के चलते नौसेना की तरफ से बजट की मांग बढऩे लगी है क्योंकि लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की तैनाती और रख रखाव का खर्च बहुत अधिक है और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था के बीच भारत के लिए इतना खर्च करना बहुत मुश्किल काम है। दूसरी ओर यदि हम चीन की अर्थव्यवस्था की बात करें तो यह भारत के मुकाबले 6 गुणा बड़ी है और चीन की सेना भी भारतीय सेना के मुकाबले संख्या में डेढ़ गुना ज्यादा है। 

अमरीका के रक्षा विभाग के अनुसार पिछले दो दशक में चीन ने अपनी सेना की ताकत बढ़ाने के लिए तमाम संसाधन झोंके हैं और सेना को तकनीकी तौर पर मजबूत बनाने के लिए भी खूब खर्च किया है। इतना ही नहीं चीन के सियासतदानों ने इस दिशा में जबरदस्त राजनीतिक इच्छा शक्ति भी दिखाई है और यदि उसे लद्दाख में भारत के विरुद्ध सेनाओं की लंबे समय के लिए तैनाती करनी है तो उसे आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर कोई समस्या नहीं आएगी। चीन के साथ लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर में चल रही खींचतान के बीच  देश की तीनों सेनाओं का और अधिक मजबूत होना बहुत जरूरी है। 

हालांकि वायुसेना में राफेल आने के बाद इसकी ताकत बढ़ी है लेकिन देश की तीनों सेनाओं को अभी भी आधुनिकीकरण के लिए सरकार की तरफ से मदद की बड़ी जरूरत है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22  के लिए देश का आम बजट पेश करेंगी तो निश्चित रूप से उनके मन में देश की नौसेना द्वारा रक्षा बजट में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग का सवाल भी होगा और उम्मीद करनी चाहिए कि अगले बजट के दौरान वह संतुलित रक्षा बजट पेश करेंगी और  सेना के तीनों अंगों को उनकी मांग के अनुसार बजट में हिस्सेदारी मिलेगी और इस से देश की ताकत भी बढ़ सकेगी। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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‘चीन में फंसे भारतीय नाविकों की’ ‘सुध ले भारत सरकार’ (पंजाब केसरी)

कोरोना महामारी के प्रसार के लिए विश्व व्यापी आलोचना झेल रही चीन सरकार और आस्ट्रेलिया के बीच चल रही ट्रेड वार का असर भारत सहित दूसरे देशों पर भी पडऩे लगा है। अमरीका ने कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया

कोरोना महामारी के प्रसार के लिए विश्व व्यापी आलोचना झेल रही चीन सरकार और आस्ट्रेलिया के बीच चल रही ट्रेड वार का असर भारत सहित दूसरे देशों पर भी पडऩे लगा है। अमरीका ने कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया था तथा इसकी जांच की मांग की थी और आस्ट्रेलिया ने अमरीका के इस कदम का समर्थन किया था जिस पर भड़क कर चीन ने आस्ट्रेलिया पर अनेक व्यापारिक पाबंदियां लगा दी हैं। इन्हीं पाबंदियों के तहत आस्ट्रेलिया और चीन के झगड़े के परिणामस्वरूप चीन ने आस्ट्रेलिया से कोयला लेकर आए ‘एमवी अनास्तासिया’ नामक जहाज को अपनी ‘कैफेडिएन’ बंदरगाह के निकट बीच समुद्र में गत 20 सितम्बर से रोक रखा है। 

एक अन्य जहाज ‘एमवी जगआनंद’ को चीन की ‘जींगतांग’ बंदरगाह पर गत वर्ष 13 जून से रोक कर रखा हुआ है। इन दोनों जहाजों के कर्मचारियों में 39 भारतीय नाविक भी शामिल हैं जो उक्त जहाजों के अन्य कर्मचारियों के साथ समुद्र में ही फंसे हुए हैं। न तो चीनी अधिकारी उक्त दोनों जहाजों को बंदरगाहों पर जाने की अनुमति दे रहे हैं, न ही माल उतारने दे रहे हैं और न ही भारतीय नाविकों को अपने घरों को जाने की अनुमति दे रहे हैं। कहा जाता है कि न केवल ये भारतीय नाविक चीन और आस्ट्रेलिया के इस झगड़े में पिस रहे हैं बल्कि चीन इन्हें भारतीय होने के कारण तंग भी कर रहा है क्योंकि इन जहाजों के समुद्र में रोके जाने के बाद भी यहां दूसरे देशों से आने वाले कई जहाज सामान उतार कर चले गए केवल भारतीय नाविकों को ही तट पर आने से रोक रहा है। 

हालांकि भारत सरकार ने चीन से अनुरोध किया था कि महीनों से जहाज पर फंसे इन नाविकों को भारत आने की इजाजत दे दी जाए परंतु चीनी अधिकारी कोरोना का बहाना करके इसकी अनुमति नहीं दे रहे परंतु दूसरे देशों के जहाजों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। हालांकि चीनी अधिकारी भारतीय नाविकों को हर तरह की मदद देने का दावा कर रहे हैं परंतु उनका यह दावा सच्चाई से कोसों दूर है। इन नाविकों को अन्य सुविधाएं देने की बात तो दूर उन्हें तो पीने के लिए स्वच्छ पानी भी नहीं मिल रहा। नाविकों को इतने लम्बे समय तक जहाज पर ही रोके रखना और आवागमन की अनुमति न देने के कारण उनमें मानसिक तनाव बढ़ रहा है और वे अवसाद का शिकार हो रहे हैं। 

जहाज पर फंसे भारतीय नाविकों के अनुसार वे बहुत परेशान हैं। उन्हें कहीं से भी कोई सहायता नहीं मिल पा रही है इसलिए अब वह घर वापसी के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। एक नाविक ने अपने भेजे संदेश में कहा है कि ‘‘हमें अपने घर जाना है। आप से निवेदन है कि हमारी आवाज सरकार तक पहुंचाइए।’’ भारत ने चीनी अधिकारियों के इस आचरण पर आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास लगातार चीन के संबंधित अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है और उनसे जहाजों को माल उतारने तथा नाविकों को बदलने की अनुमति देने का अनुरोध करता आ रहा है जिसका अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला। 

चीन द्वारा भारत का अनुरोध किसी न किसी बहाने टालते जाने के कारण पीड़ित परिवारों में रोष बढ़ रहा है और चीन की नीयत के बारे में संदेह पैदा हो रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस स्थिति को लेकर सरकार से नाविकों को वापस बुलाने की व्यवस्था करने का अनुरोध कर रहे हैं। शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर शिकायत की है कि ‘‘केंद्र सरकार ने 39 नाविकों को उनके भाग्य पर छोड़ दिया है। नाविकों के परिवार दर-दर भटक रहे हैं और कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है।’’अत: भारत सरकार को इस संबंध में चीनी अधिकारियों के साथ मजबूती से यह मामला उठाना चाहिए ताकि नाविक सकुशल घर लौट सकें और उनके परिजनों की चिंता समाप्त हो।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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‘विश्व में लोकतंत्र के लिए बेहतर’ ‘व दूसरे कई बदलावों वाला होगा यह नया वर्ष’ (पंजाब केसरी)

‘कोरोना महामारी’ के इलाज के लिए चल रही वैक्सीन उपलब्ध करवाने की कवायद के बीच वर्ष 2021 में प्रवेश करते हुए हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि आने वाला यह वर्ष विश्व के लिए कैसा रहने वाला है और इस नए वर्ष में विश्व में कौन से सुखद बदलाव

‘कोरोना महामारी’ के इलाज के लिए चल रही वैक्सीन उपलब्ध करवाने की कवायद के बीच वर्ष 2021 में प्रवेश करते हुए हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि आने वाला यह वर्ष विश्व के लिए कैसा रहने वाला है और इस नए वर्ष में विश्व में कौन से सुखद बदलाव हो सकतेे हैं। इस वर्ष विश्व के अनेक देशों में चुनाव होंगे जिससे शायद लोकतंत्र फिर मजबूत होगा। अनेक देशों में कोरोना के चलते तानाशाही पूर्ण रवैये से काम करने वाली सरकारों की विदाई हो सकती है। यहां तक कि गत वर्ष अमरीका में हुए चुनाव भी एक ‘कमजोर’ लोकतंत्र के चुनावों जैसे ही थे। 

वर्ष 2020 में विभिन्न देशों के शासकों ने कई तरह से लोकतंत्र को ध्वस्त किया है। कोरोना के बहाने सत्ता पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करके लोकतंत्र को आघात पहुंचाया, जैसा कि हंगरी में हुआ। फिर रूस जैसे देशों में ‘व्लादीमीर पुतिन’ ने चेहरे पहचानने वाले कैमरों की मदद से विरोध प्रदर्शन करने वालों की पहचान करके उनका दमन करने की नीति अपनाई। 

रवांडा में सन 2000 से ही शासन कर रहे तानाशह ‘पाल कगामे’ ने अब देश भर में सुरक्षा बलों की तैनाती की है और कफ्र्यू तोडऩे वालों को वहां गोली तक मार दी गई। यहां तक कि अनेक देशों की सरकारों ने मीडिया की आवाज कुचलने की कोशिश की तथा विश्व में 50 से अधिक पत्रकार मारे गए। परंतु वर्ष 2021 में विश्व के अनेक भागों में होने वाले चुनावों का कार्यक्रम देखते हुए लगता है कि इस वर्ष विश्व में लोकतंत्र मजबूत होगा। वर्ष की शुरुआत में पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में 14 जनवरी को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होगा जिसके लिए वहां लगातार प्रचार जारी है। 

वहां विपक्ष के नेता ‘बॉबी वाइन’ काफी लोकप्रिय हो रहे हैं लेकिन उन्हें दबाने के लिए सरकार ने विपक्ष की रैलियों पर पाबंदी लगा दी है। हाल ही में ‘बॉबी वाइन’ को एक रैली के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। इथोपिया में 2021 में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने के साथ-साथ 7 फरवरी को इक्वाडोर में राष्ट्रपति पद के लिए, नीदरलैंड में 17 मार्च को नई सरकार के लिए व पेरू में 11 अप्रैल को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे। 

6 जून को ईराक के संसदीय चुनाव होंगे तथा 18 जून को ईरान और 12 अगस्त को जांबिया के राष्ट्रपति का चुनाव आएगा। इन सबके बीच दुनिया की नजरें 5 सितम्बर को हांगकांग के स्थानीय निकाय के चुनावों पर रहेंगी। चीन द्वारा हांगकांग पर विवादित सुरक्षा कानून थोपे जाने के बाद होने वाला यह पहला चुनाव काफी महत्वपूर्ण समझा जाता है। फिर 26 सितम्बर को जर्मनीवासी 16 वर्ष बाद ऐसी सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे जिसका नेतृत्व एंजेला मर्केल नहीं कर रही होंगी। यही नहीं, निकारागुआ में 76 वर्षीय राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा के कार्यकाल की समाप्ति के बाद 7 नवम्बर को राष्ट्रपति के लिए चुनाव होगा।

इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी अनेक बेहतर बदलाव आने वाले हैं। यह वर्ष विश्व में इलैक्ट्रिक कारों के निर्माण और बिक्री के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में कार निर्माता कंपनियां अपनी बैटरी चालित कारों की नई रेंज लांच करेंगी जो प्रदूषण कम करने में सर्वाधिक प्रभावशाली सिद्ध होंगी। इस वर्ष जनरल मोटर्स की इलैक्ट्रिक कार ‘हमर’ लांच होगी इसके साथ ही ‘टेस्ला’ भी अपना साइबर ट्रक लांच करेगी। फिलहाल 260 कंपनियां इनका निर्माण कर रही हैं और इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी ‘टेस्ला’ के शेयर 2020 में ही 6 गुना बढ़ कर 665 डालर प्रति शेयर पर पहुंच गए हैं।

विश्व में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 2021 में 1 से 12 नवंबर तक ग्लासगो में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के ‘जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन’ पर भी विश्व की नजरें रहेंगी। अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 2015 के पैरिस शिखर सम्मेलन से हट जाने के कारण इस बारे कोई सकारात्मक काम नहीं किया है, अब अमरीका की सत्ता संभाल रहे जो बाइडेन को इस दिशा में काम करना होगा। 2021 में चीन और हॉलीवुड की बॉक्स आफिस कलैक्शन के मामले में भी कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। चीन का फिल्म उद्योग लगातार बढ़ रहा है जबकि कोरोना के कारण हॉलीवुड में ठहराव का दौर है। शो बिजनैस से जुड़े लोगों के अनुसार संभवत: इस वर्ष चीन का फिल्म उद्योग बॉक्स आफिस कलैक्शन के मामले में हॉलीवुड को पछाड़ देगा। 

इस वर्ष अमरीका की अंतरिक्ष अनुसंधान एजैंसी ‘नासा’ अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों से धरती के बचाव का मिशन भी शुरू करेगी। ‘डबल एस्ट्रॉयड री डायरैक्शन’ यानी ‘डार्ट’ की शुरुआत वास्तव में दिसंबर-2020 में होनी थी पर अब यह जुलाई में शुरू होगा। यह मिशन धरती के निकट आ कर उसे क्षति पहुंचाने में समर्थ उल्कापिंड खोज कर उनकी दिशा बदलने पर काम करेगा ताकि धरती को विनाश से बचाया जा सके। 

ऐसे परिदृश्य में विश्व की सरकारों के लिए नए वर्ष में सबसे बड़ी सीख यही है कि वे भविष्य में आने वाले नए-नए वायरसों के खतरे का सामना करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जनस्वास्थ्य पर केंद्रित नीतियां तय करके उन पर नियमित रूप से धन का निवेश सुनिश्चित बनाएं ताकि लगातार बढ़ते जा रहे स्वास्थ्य खतरे का सामना करना यकीनी बनाया जा सके। अब तो ‘मिंक’ जानवर में भी अगला हानिकारक वायरस पाया जा चुका है। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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‘विश्व में फैल रही है’‘हिंसा, रक्तपात और असंतोष की आग’ (पंजाब केसरी)

हिंसा की घटनाएं विश्व में लगातार बढ़ रही हैं। विकसित और विकासशील देश समान रूप से इसकी चपेट में आए हुए हैं जिससे जानमाल की भारी हानि हो रही है। आज अशांति, रक्तपात तथा ङ्क्षहसा का शिकार होकर अधिकांश विश्व किस कदर विनाश के निकट पहुंचता जा रहा है इसके

हिंसा की घटनाएं विश्व में लगातार बढ़ रही हैं। विकसित और विकासशील देश समान रूप से इसकी चपेट में आए हुए हैं जिससे जानमाल की भारी हानि हो रही है। आज अशांति, रक्तपात तथा ङ्क्षहसा का शिकार होकर अधिकांश विश्व किस कदर विनाश के निकट पहुंचता जा रहा है इसके ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 19 दिसम्बर को नाईजीरिया के ‘जमफारा’ प्रांत के ‘कौरा नामोदा’ क्षेत्र में एक क्षेत्रीय अधिकारी के काफिले पर हमले में 3 पुलिस अधिकारियों सहित 8 लोग मारे गए।
* 20 दिसम्बर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कार बम विस्फोट में 9 लोग मारे गए।
* 21 दिसम्बर को ब्लूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाली ‘करीमा बलोच’ का शव कनाडा के टोरंटो में रहस्यमय हालात में पड़ा मिला। उसकी हत्या पाकिस्तान की खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. ने करवाई।
* 23 दिसम्बर को फ्रांस की राजधानी पैरिस के उपनगर ‘सेंट जस्ट’ में घरेलू हिंसा की शिकायत की जांच करने गए 3 पुलिस अधिकारियों पर हिंसा के आरोपी ने ही अंधाधुंध गोलियां चलाकर उन्हें मार डाला। 

* 24 दिसम्बर को पश्चिम बंगाल के ‘जलपाईगुड़ी’ जिले में अज्ञात लोगों ने टी.एम.सी. नेता ‘मनोरंजन डे’ को गोली मार कर घायल कर दिया।
* 24 दिसम्बर को ही पूर्वी अफ्रीकी देश ‘इथोपिया’ के ‘पश्चिमी बेनी शांगल गुमुज’ प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने रात के समय घरों में सो रहे 100 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार कर उनके घरों को लूट लिया।
* 26 दिसम्बर को ‘तेलंगाना’ में ‘खम्मम’ जिले के ‘वायरा’ में बदमाशों ने भाजपा नेता एन. रामाराव की उसके घर में घुस कर हत्या कर दी। 
* 26 दिसम्बर को ही अफगानिस्तान के काबुल में बम धमाकों में 2 पुलिस कर्मचारियों सहित 4 लोगों की मौत तथा अनेक घायल हो गए। 

* 26 दिसम्बर को पाकिस्तान के अशांत ब्लूचिस्तान प्रांत के ‘हरनाल’ जिले में सुरक्षा बलों की चौकी पर आतंकी हमले में 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तथा अनेक घायल हो गए। इसी दिन ‘पंजगुर’ जिले के एक स्टेडियम के निकट बम धमाके में 2 लोग मारे गए तथा 7 अन्य घायल हो गए।
* 26 दिसम्बर को ही ‘मध्य अफ्रीकी’ गणराज्य में अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में संयुक्त राष्ट्र के 3 शांति सैनिक मारे गए व 2 घायल हो गए। 
* 26 दिसम्बर को ही अफगानिस्तान के ‘कापिसा’ प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने मानवाधिकार कार्यकत्र्ता ‘फ्रेश्टा कोहिस्तानी’ को मार डाला। 

* 26 दिसम्बर को जर्मनी की राजधानी बॢलन में जर्मनी की ‘सोशल डैमोक्रेटिक पार्टी’ के मुख्यालय के निकट गोलीबारी में 4 लोग घायल हो गए।
* 26 दिसम्बर वाले दिन ही अमरीका के मैसाचुसेट्स प्रांत के ‘लिन’ शहर में एक म्यूजिक वीडियो की शूटिंग के दौरान गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 5 घायल हो गए। 
* 27 दिसम्बर को चीन के उत्तरी पूर्वी ‘लियोलिंग’ प्रांत में एक व्यक्ति ने चाकू से वार करके 7 लोगों की हत्या कर दी। 
* 27 दिसम्बर को ही अमरीका के इलीनाय में एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी करके 3 लोगों की हत्या कर दी व 3 अन्य को घायल कर दिया। 
* 28 दिसम्बर को आस्ट्रेलिया में एक युवक ने अपनी गर्लफ्रैंड के पिता को चाकू से ताबड़तोड़ वार करके मार डाला। 

* 28 दिसम्बर को ही रूस के ‘चेचेन’ में हथियार छीनने की वारदात में 2 हमलावरों तथा एक पुलिस कर्मचारी की मौत हो गई।
* 28 दिसम्बर को ही कनाडा के ‘सरी’ शहर में अज्ञात हमलावरों ने ‘हरमन सिंह ढेसी’ नामक पंजाबी युवक की गोली मार कर हत्या कर दी।
* 29 दिसम्बर को पश्चिम अफ्रीकी देश ‘माली’ में ‘मोप्तो’ प्रांत के ‘होम्बोरी’ क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा किए गए ‘आई.ई.डी.’ विस्फोट में वहां आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल फ्रांस के 3 सैनिक मारे गए। 

* 29 दिसम्बर को ही पश्चिम बंगाल के हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस के वर्कर ‘धर्मेंद्र सिंह’ की गोली मार कर हत्या कर दी गई।
 * 29 दिसम्बर को ही आंध्र प्रदेश के ‘कडप्पा’ जिले के गोडातुरू शहर के ‘सोमुलावरी पिल्ले’ गांव में ‘तेलगू देशम पार्टी’ के वरिष्ठ नेता ‘नंदम सुब्बैया’ को कुछ लोगों ने निर्ममतापूर्वक मार डाला।
 * 29 दिसम्बर को ही पाकिस्तान के पेशावर में भूमि विवाद को लेकर हुई गोलीबारी में 4 लोग मारे गए। 

विश्व के अधिकांश देशों में ङ्क्षहसा की लगातार लहर, बढ़ रही ‘बंदूक संस्कृति’ और लोगों में घट रही सहनशीलता का ही दुष्परिणाम है जिसका नतीजा दुखद घटनाओं के रूप में निकल रहा है और दुनिया में तबाही हो रही है। यदि यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो लोगों में भय एवं असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और उनका जीवन दूभर हो जाएगा। अत: मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि यह सिलसिला आखिर कहां जा कर रुकेगा।—विजय कुमार  

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Tuesday, December 22, 2020

‘भारत और नेपाल के बीच रिश्ते’ ‘पुन: मजबूती की ओर’ (पंजाब केसरी)

हिमालय की गोद में बसे भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने तथा पहली बार 2017 में हुए चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सरकार तीन वर्ष में ही राजनीतिक अंतॢवरोधों के कारण धराशायी हो गई है। एकाएक 20 दिसम्बर की सुबह ‘के.

हिमालय की गोद में बसे भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने तथा पहली बार 2017 में हुए चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सरकार तीन वर्ष में ही राजनीतिक अंतर्विरोधों के कारण धराशायी हो गई है। एकाएक 20 दिसम्बर की सुबह ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर संसद भंग करने की सिफारिश कर दी। इसके कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रपति ‘विद्या देवी भंडारी’ ने उनकी सिफारिश स्वीकार कर संसद भंग करके अगले साल 30 अप्रैल और 10 मई को 2 चरणों में देश में चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। 

‘ओली’ के इस कदम को असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और जनादेश के खिलाफ बताते हुए इसके विरुद्ध रोष स्वरूप सत्ताधारी ‘नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी’ (एन.सी.पी.) के नेताओं ‘पुष्प कमल दहल प्रचंड’ व ‘माधव नेपाल’ के धड़े सहित तमाम विपक्षी दलों ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा कर दी। ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सिफारिश के विरोध में कुछ संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के गठन की संभावना मौजूद रहने तक संसद भंग करने का नेपाल के संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में ‘शेर बहादुर देउबा’ के नेतृत्व वाली ‘नेपाल कांग्रेस’ (एन.सी.) वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अधिक प्रासंगिक हो सकती है। 

‘पुष्प कमल दहल प्रचंड’ ने ‘ओली’ पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप भी लगाए हैं। उन पर 50 करोड़ रुपए की सड़क निर्माण की अमरीकी योजना में भी पैसे खाने का आरोप लग चुका है। यह भी चर्चा है कि चीनी शासकों ने जेनेवा में ‘ओली’ के बैंक अकाऊंट में भारी-भरकम रकम जमा करवाई है। ‘ओली’ व ‘प्रचंड’ के धड़ों की लड़ाई में भी काठमांडू स्थित चीन की राजदूत ‘हाऊ यानकी’ ने ‘प्रचंड’ और ‘ओली’ के बीच कई बार सुलह-सफाई करवाने की कोशिश की है और उन्हीं के दबाव में आकर ‘ओली’ ने विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों व अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार देने वाला अध्यादेश वापस ले लिया क्योंकि ‘प्रचंड’ का धड़ा इसके विरोध में था। जहां तक भारत का सम्बन्ध है तो प्रधानमंत्री ‘ओली’ को हमारा देश उनके द्वारा बिगाड़े गए रिश्तों के लिए कोसेगा क्योंकि अपने शासनकाल में चीन के इशारे पर ‘ओली’ ने जम कर भारत विरोधी बयानबाजी और कार्य किए। 

* 08 मई, 2020 को प्रधानमंत्री ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने भारत द्वारा लिपुलेख दर्रे तक सड़क बिछाने के विरुद्ध रोष व्यक्त किया। 
* 19 मई को चीन के इशारे और ‘के.पी. शर्मा ओली’ के आदेश पर नेपाल सरकार ने देश के अपने नए नक्शे में भारत के 3 इलाकों ‘लिपुलेख’, ‘कालापानी’ व ‘लिपियाधुरा’ को नेपाली क्षेत्र में दिखा दिया। 
* 19 मई को ही नेपाल के प्रधानमंत्री ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने नेपाल में कोरोना के प्रसार के लिए भारत को दोषी ठहराया। 
* 19 मई को ‘ओली’ ने नेपाल की संसद में भारत के राजचिन्ह में अंकित  नीति वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ पर भी तंज कसते हुए ‘सिंहमेव जयते’ कहा। ‘ओली’ का कहना था कि सत्य की जीत होती है और जोर-जबरदस्ती के साथ सिंह की तरह जीत हासिल नहीं की जानी चाहिए। 

* 20 मई को ‘ओली’ ने भारत पर टिप्पणी करते हुए दोबारा कहा कि भारतीय वायरस चीन और इटली के मुकाबले अधिक खतरनाक है।
* 08 जून को ‘ओली’ ने चीन की ‘वन चाइना पालिसी’ का समर्थन करके फिर अपने भारत विरोधी रवैये का संकेत दिया जबकि समूचा विश्व हांगकांग की स्वायत्तता के मुद्दे पर चीन की नीतियों का विरोध कर रहा था। 
* 13 जून को भारत के साथ एक नया विवाद खड़ा करते हुए ‘ओली’ ने उत्तराखंड स्थित लिपुलेख और कालापानी के इलाकों को नेपाल के नक्शे में दिखाने को संसद से मंजूरी दिलाई। 
* 29 जून को ‘ओली’ ने भारत के विरुद्ध बयानबाजी करते हुए कहा कि भारत उनकी सरकार को अस्थिर करना चाहता है और नेपाल में स्थित दूतावास इस साजिश में शामिल है। 
* 14 जुलाई को ‘ओली’ ने कहा कि असली अयोध्या नेपाल में है। इससे भारत में लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और ‘ओली’ के इस बयान पर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने नाराजगी भी जताई। 

भारत और नेपाल का रोटी-बेटी का रिश्ता है परंतु प्रधानमंत्री ‘ओली’ ने सदियों पुराने इस रिश्ते में दरार डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसके विरुद्ध नेपाल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी तथा ‘ओली’ के विरुद्ध आम जनता तथा विरोधी दल सड़कों पर उतर आए हैं तथा उनके प्रदर्शन दिन-ब-दिन उग्र होते जा रहे हैं और स्थिति पर नियंत्रण के लिए काठमांडू में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़ गए हैं। आज नेपाल में जिस तरह का माहौल है उसे देख कर लगता है कि आने वाले चुनाव में ऐसी सरकार आएगी जो ‘ओली’ द्वारा भारत के साथ खराब किए गए रिश्तों को सुधारने की दिशा में काम करेगी और नेपाल के साथ भारत के पहले जैसे सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बहाल होंगे।—विजय कुमार 

सौजन्य- पंजाब केसरी।

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Monday, December 21, 2020

‘कैंसर ट्रेन’ निलंबित होने से ‘कैंसर पीड़ितों को हो रही परेशानी’ (पंजाब केसरी)

रासायनिक कीटनाशक दवाओं व खादों के इस्तेमाल में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और हरियाणा देश में सबसे अग्रणी हैं। इनके अधिक इस्तेमाल के कारण ही कैंसर पंजाब में महामारी का रूप धारण कर गया है। विशेष रूप से पंजाब का मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभा

रासायनिक कीटनाशक दवाओं व खादों के इस्तेमाल में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और हरियाणा देश में सबसे अग्रणी हैं। इनके अधिक इस्तेमाल के कारण ही कैंसर पंजाब में महामारी का रूप धारण कर गया है। विशेष रूप से पंजाब का मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित है। 

हर रात अबोहर से बीकानेर (राजस्थान) के लिए एक गाड़ी ‘अबोहर-जोधपुर एक्सप्रैस’ चलती थी। इसमें सवार होकर वहां जाने वाले अन्य यात्रियों के साथ-साथ पंजाब की कपास पट्टी-मानसा, बठिंडा, फरीदकोट, संगरूर, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का के किसान तथा अन्य कैंसर पीड़ित बीकानेर स्थित ‘आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सैंटर’ में इलाज के लिए जाया करते थे। इस रेलगाड़ी में यात्रा करने वाले 60 प्रतिशत यात्री पूरे पंजाब से आने वाले हर उम्र के कैंसर पीड़ित होते थे जो प्रतिदिन बीकानेर जाने वाले लगभग 100 कैंसर रोगियों की जीवन रेखा थी। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनसे यह पता चलता है कि उक्त गाड़ी के स्थगित होने से कैंसर पीड़ितों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

इस रेलगाड़ी में कैंसर पीड़ितों के लिए बीकानेर तक की यात्रा मुफ्त होने के अलावा रोगी के साथ जाने वाले परिचारक को भी किराए में 75 प्रतिशत की रियायत दी जाती थी और इसका नाम लोगों ने ‘कैंसर ट्रेन’ रख दिया था। पिछले 9 महीनों से इसके बंद होने के कारण बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ित इलाज के लिए बीकानेर नहीं जा पा रहे। इससे उन्हें तथा उनके परिजनों को भारी परेशानी हो रही है। ‘एडवांस्ड कैंसर इंस्टीच्यूट’ बठिंडा के निदेशक डा. दीपक अरोड़ा का भी कहना है कि कोरोना के कारण अस्पताल नहीं आ सकने वाले 10 प्रतिशत रोगियों का रोग बढ़ गया है अत: जितनी जल्दी यह ट्रेन बहाल की जा सके क्षेत्र के कैंसर पीड़ितों के लिए उतना ही अच्छा होगा। 

बठिंडा इंस्टीच्यूट में भी रोगियों की भीड़ बढ़ जाने से बड़े आप्रेशन करने के लिए छोटे आप्रेशन रोके जा रहे हैं। इसकी क्षमता 100 बैड की है और इसके साथ ही संगरूर में भी 50 बैड की क्षमता वाला ‘होमी भाभा कैंसर अस्पताल’ (टाटा) काम कर रहा है पर दोनों ही जगह ‘बैड्स’ तथा कैंसर विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की तुरंत जरूरत है। इस समय जबकि देश में सब तरह के कैंसर का प्रकोप दिनोंं दिन बढ़ता जा रहा है और प्रति दिन देश में 3500 व्यक्ति कैंसर से मर रहे हैं, सरकार को चाहिए कि वह चल रहे सरकारी व निजी कैंसरअस्पतालों में  बैड्स तथा विशेषज्ञ डाक्टरों  की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नए कैंसर अस्पताल खोलने और पहले से काम कर रहे अस्पतालों को प्रोत्साहित करने की दिशा में तत्काल पग उठाए।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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Saturday, December 19, 2020

‘कठोर दंड के पात्र हैं प्लाज्मा में मिलावट करके लोगों की जान से खेलने वाले’ (पंजाब केसरी)

देश भर में आए दिन खाद्य पदार्थों से लेकर अनेक वस्तुओं में मिलावट के समाचार आते रहते हैं। शायद ही कोई ऐसी वस्तु होगी जो मिलावट से बची हुई हो। अब तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कोरोना से बचाव के लिए रोगियों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले प्लाज्मा में भी

देश भर में आए दिन खाद्य पदार्थों से लेकर अनेक वस्तुओं में मिलावट के समाचार आते रहते हैं। शायद ही कोई ऐसी वस्तु होगी जो मिलावट से बची हुई हो। अब तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कोरोना से बचाव के लिए रोगियों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले प्लाज्मा में भी मिलावट करके समाज के दुश्मनों द्वारा अनमोल प्राणों से खिलवाड़ किया जाने लगा है। मात्र 2 दिनों में ही मिलावट के 3 ऐसे मामले सामने आए हैं जो इस बात के ज्वलंत उदाहरण हैं कि देश में मिलावट की समस्या कितना गंभीर रूप धारण करती जा रही है। 

16 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश की हाथरस पुलिस ने नबीपुर इलाके में स्थित गर्म मसाला बनाने की एक फैक्टरी में छापा मार कर गधे की लीद, भूसा, एसिड और खाने के अयोग्य हानिकारक रंग मिला कर स्थानीय ब्रांडों के नकली मसाले बनाने के स्कैंडल का भंडाफोड़ कर 300 किलोग्राम से अधिक नकली लाल मिर्च, धनिया और गर्म मसाले के पैकेट जब्त किए। पुलिस ने फैक्टरी के मालिक ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ के मंडल सह-प्रभारी अनूप वाष्र्णेय को गिरफ्तार कर लिया है। ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ की स्थापना 2002 में योगी आदित्यनाथ (वर्तमान मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) ने की थी। 17 दिसम्बर को आगरा जिले के खंदौली कस्बे में पुलिस ने नकली घी बनाने की फैक्टरी में छापा मार कर जानवरों की चर्बी को चूल्हे पर पिघला कर बनाए हुए लगभग 125 किलो ‘नकली देसी घी’ के साथ 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। 

‘मोहल्ला व्यापारियान’ में इस नकली घी फैक्टरी के बगल में ही एक अवैध बूचडख़ाना भी चलाया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए फैक्टरी के मालिक चांद बाबू के अनुसार उसकी फैक्टरी में जानवरों की चर्बी को चूल्हे पर उबाल कर उसमें तय मात्रा में वनस्पति और रिफाइंड तेल के अलावा ‘एसैंस’ मिलाकर असली देसी घी जैसा नकली घी तैयार किया जाता है। उसने बताया कि वह लम्बे समय से नकली घी बनाकर आस-पास के इलाकों में सप्लाई कर रहा था। इस पर कुल 23 रुपए प्रति किलो का खर्च आता है जिसे वह व्यापारियों को 60 रुपए प्रति किलो बेचता है और व्यापारी इसी नकली घी को 200 रुपए प्रति किलो तक में बेचते हैं। 17 दिसम्बर को ही मिलावटी मसालों और नकली घी के कारखानों के बाद कोरोना रोगियों के उपचार में सहायक ‘असली प्लाज्मा’ की ओट में ‘मिलावटी प्लाज्मा’ और खून बेच कर मानव जीवन से खिलवाड़ किए जाने का स्कैंडल सामने आया है। 

‘प्लाज्मा’ रक्त में मौजूद एक तत्व है जिसमें 99 प्रतिशत पानी के अलावा प्रोटीन, मिनरल, कार्बनडाइआक्साइड व हार्मोन्स होते हैं। शरीर में कार्बनडाइआक्साइड का प्रवाह रक्त के ‘प्लाज्मा’ के माध्यम से ही होता है। ‘कोरोना’ के अटैक के बाद शरीर वायरस से लडऩा शुरू करता है और यह लड़ाई ‘प्लाज्मा’ में मौजूद ‘एंटीबॉडी’ लड़ती है। शरीर द्वारा पर्याप्त ‘एंटीबॉडी’ बना लेने पर ‘कोरोना’ को हराने में सहायता मिलती है।

ग्वालियर पुलिस ने लगभग 40 लाख रुपए का मिलावटी ‘प्लाज्मा’ और खून बेचकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने के आरोपी और इस कांड के मास्टरमाइंड ‘अजय त्यागी’ को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान ‘अजय त्यागी’ ने बताया कि वह एक यूनिट ‘प्लाज्मा’ खरीद कर इसमें ‘डिस्टिल्ड वाटर’ और ‘नार्मल स्लाइन’ मिलाता तथा इसकी मात्रा बढ़ा कर उस पर फर्जी मोहर लगा कर मरीजों के परिजनों को बेच देता था। ‘अजय त्यागी’ के अनुसार कुछ प्राइवेट अस्पतालों में काम करने वाले उसके साथी भी उसके इस काले धंधे में शामिल थे। 

पुलिस पूछताछ के दौरान ‘अजय त्यागी’ ने ‘ब्लड बैग’ खरीदने से लेकर ‘प्लाज्मा’ बनाने और उस पर सील लगाने तक का तरीका भी बताया। ‘अजय त्यागी’ ने बताया कि वह ग्वालियर स्थित एक लैब से खाली ‘ब्लड बैग’ खरीदता। इसमें पानी मिला ‘प्लाज्मा’ भरा जाता और यही ‘ब्लड बैग’ कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों को बेच दिया जाता था। मिलावटी खाद्य पदार्थों और ‘प्लाज्मा’ या रक्त से किसी का जीवन खतरे में डालना किसी की हत्या करने से कम गंभीर अपराध नहीं है और इस समाचार से गंभीर रोगों से पीड़ितों का ङ्क्षचताग्रस्त होना स्वाभाविक ही है। अत: ऐसा जघन्य अपराध करने वालों पर उसी लिहाज से कानून के अनुसार कार्रवाई करके हत्या के आरोप जैसी धाराओं में केस चला कर प्राण दंड जैसा कठोर दंड दिया जाना चाहिए ताकि इससे दूसरों को नसीहत मिले तथा रोगग्रस्त एवं ‘प्लाज्मा’ के जरूरतमंद रोगी बच सकें।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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