Help Sampadkiya Team in maintaining this website

इस वेबसाइट को जारी रखने में यथायोग्य मदद करें -

-Rajeev Kumar (Editor-in-chief)

Showing posts with label Punjab Kesari. Show all posts
Showing posts with label Punjab Kesari. Show all posts

Friday, January 15, 2021

‘सीमा पर 150 मीटर लंबी सुरंग’‘इसके लिए असली कसूरवार कौन?’ (पंजाब केसरी)

समय-समय पर भारतीय शासकों द्वारा पाकिस्तान सरकार पर भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते रहते हैं परंतु अनुभव बताता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं हमारे अपने सुरक्षा प्रबंधों की

समय-समय पर भारतीय शासकों द्वारा पाकिस्तान सरकार पर भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते रहते हैं परंतु अनुभव बताता है कि इन घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं हमारे अपने सुरक्षा प्रबंधों की चूक का हाथ भी रहा है। भारत ने लगभग 10 वर्ष पूर्व भी पाकिस्तान के साथ यह मुद्दा उठाया था जब 28 मार्च, 2010 को वाघा में भारत-पाकिस्तान के बीच बी.एस.एफ. के एडीशनल डी.आई.जी. श्री पी.पी.एस. सिद्धू ने पाक रेंजर्स के महानिदेशक ब्रिगेडियर मोहम्मद याकूब से यह मामला उठाया तो याकूब ने साफ शब्दों में हमारे मुंह पर तमाचा जड़ते हुए कहा था कि : 

‘‘भारत की ओर से सीमा पर कांटेदार तार बाड़ है। तस्करों पर नजर रखने के लिए फ्लड लाइट्स लगी हैं। भारतीय सीमा पर चौकसी व गश्त की व्यवस्था है। इसके बावजूद यदि सीमा पर तस्करी की घटनाएं होती हैं तो इस बारे भारतीय अधिकारियों को ही सोचने की जरूरत है।’’ फिर 1 जुलाई, 2012 को भी पाकिस्तान रेंजर्स के महानिदेशक मियां मो. हिलाल हुसैन व मेजर जनरल मो. रिजवान अख्तर ने भी इस बारे भारतीय आरोपों को दो टूक शब्दों में नकारते हुए इसके लिए भारतीय सुरक्षाबलों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा : 

‘‘पाकिस्तान पर हमेशा भारतीय सीमा में घुसपैठियों को भेजने तथा तस्करी करवाने के आरोप लगाए जाते हैं परंतु भारतीय सीमा की तरफ से ही सुरक्षा के सर्वाधिक प्रबंध किए गए हैं।’’ ‘‘सीमा पर भारत की ओर से ही फैंसिंग लगाई गई है। इसके अलावा सर्च लाइट व फैंसिंग में करंट भी बी.एस.एफ. द्वारा छोड़ा गया है। ऐसे में भला हम भारत में घुसपैठ व तस्करी कैसे करवा सकते हैं? किसी की आज्ञा के बिना किसी के मकान में भला कोई कैसे घुस सकता है!’’ हमने अपने 5 जुलाई, 2012 के सम्पादकीय ‘पाकिस्तानियों की भारत के मुंह पर एक और चपत’ में भारत सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया था परंतु अभी तक इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है।

पाकिस्तान की ओर से भारत में हथियारों, नशीले पदार्थों और जाली करंसी की तस्करी लगातार जारी है और सुरक्षा व्यवस्था में हमारी कमजोरियां बार-बार सामने आ रही हैं। इसका ताजा उदाहरण सीमा सुरक्षा बल द्वारा जम्मू-कश्मीर के हीरा नगर सैक्टर के सीमांत गांव बेबिया में पाकिस्तान द्वारा बनाई गई एक पुरानी सुरंग का पर्दाफाश करने से मिला है जिसके बारे में भारतीय सुरक्षा बलों को अब पता चला है। 

इस सुरंग में बरामद बोरियों में शकरगढ़ और कराची की सीमैंट फैक्टरियों के टैग लगे थे तथा उनमें रेत भरी हुई थी। इन बोरियों पर 2016-2017 की तारीख छपी हुई है जिससे स्पष्ट है कि यह सुरंग 3-4 साल पहले की बनाई हुई है। पाटी मेरु के पास मिली यह सुरंग 150 मीटर लम्बी और 25-30 फुट गहरी है। भारतीय क्षेत्र में 20 मीटर अंदर तक बनी इस सुरंग का एक हिस्सा भारत में और बाकी 130 मीटर हिस्सा पाकिस्तान में आतंकवादियों के गढ़ और लांच पैड माने जाने वाले शकरगढ़ में निकलता है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गत वर्ष 29 अगस्त और 20 नवम्बर को साम्बा में 2 सुरंगों का पता चला था और वहां भी ऐसी ही बोरियां मिली थीं। यह सही है कि हमारे सुरक्षाबलों के सदस्यों ने इस सुरंग का पता लगाया है परंतु इतने लम्बे समय तक इसका पता न लग पाने से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं गड़बड़ जरूर है अत: इस ‘सफलता’ पर अपनी पीठ थपथपाने की बजाय हमें अपनी कमजोरियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। 

इस सुरंग का देर से पता लगने के कारण अब तक न जाने इस रास्ते से कितने गोला-बारूद, नशीले पदार्थों तथा नकली करंसी आदि की भारत में तस्करी करवाई जा चुकी होगी। सीमांत क्षेत्रों में लगातार गश्त करने वाले हमारे सुरक्षा बलों को शत्रु की ऐसी गतिविधियों व मशीनों आदि के चलने से होने वाली हलचल, उनकी आवाज और मिट्टी निकाले जाने की गतिविधियों का समय रहते पता क्यों नहीं चल पाया जबकि पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में मिलने वाली यह नौवीं सुरंग है। इन हालात में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपनी सतर्कता संबंधी त्रुटियों की ओर देखें। इसे अधिक चुस्त करें तथा गश्त भी बढ़ाएं। सीमा पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने की भी जरूरत है। 

यही नहीं, भारतीय सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों में छिपे उन गद्दारों का पता लगाना भी जरूरी है जो अपने ही देश की गुप्त सूचनाएं शत्रु को देकर देश के साथ छल कर रहे हैं जैसे कि गत वर्ष जम्मू-कश्मीर पुलिस के डी.एस.पी. देवेंद्र सिंह को आतंकवादियों के साथ मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ लगती पूरी सीमा पर एक योजनाबद्ध तरीके से सर्च आप्रेशन चलाना और पाकिस्तानी साजिश से बनी ऐसी सुरंगों का पर्दाफाश करके सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी हम पाकिस्तानी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Thursday, January 14, 2021

‘अब हमारे नेताओं पर लग रहे’ ‘बलात्कार और यौन शोषण के आरोप’ (पंजाब केसरी)

अपने 13 जनवरी के लेख में हमने लिखा था कि जहां पिछला साल 2020 नेताओं के उल्टे-पुल्टे बयानों का साल रहा व नए साल में भी उनका ऐसा ही व्यवहार जारी है, यही बात हमारे चंद नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीडऩ पर भी लागू होती है जिसके

अपने 13 जनवरी के लेख में हमने लिखा था कि जहां पिछला साल 2020 नेताओं के उल्टे-पुल्टे बयानों का साल रहा व नए साल में भी उनका ऐसा ही व्यवहार जारी है, यही बात हमारे चंद नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीडऩ पर भी लागू होती है जिसके हाल ही के चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 13 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ‘भाजपा विधायक महेश नेगी’ को बलात्कार के एक मामले में राहत देने से इन्कार कर दिया। चीफ जुडीशियल मैजिस्ट्रेट देहरादून की अदालत ने एक पीड़ित महिला की अर्जी पर ‘नेगी’ का डी.एन.ए. टैस्ट करवाने के आदेश दिए थे जिसके विरुद्ध नेगी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उल्लेखनीय है कि 17 अगस्त, 2020 को उक्त महिला ने ‘महेश नेगी’ पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह अपनी मां के इलाज के लिए विधायक से मदद मांगने गई थी। तब ‘नेगी’ ने मदद के बहाने उससे शारीरिक संबंध बना कर 2 साल तक उसका रेप किया और पीड़िता उसके बच्चे की मां भी बनी। ‘नेगी’ पर इस मामले में देहरादून के नेहरू कालोनी थाने में बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। 

* 11 जनवरी को महाराष्ट्र की ‘शिवसेना’ नीत गठबंधन सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री ‘धनंजय मुंडे’ (राकांपा) पर रेणुका शर्मा नामक एक गायिका ने उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया है। गायिका ने ‘धनंजय मुंडे’ के विरुद्ध पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करने पर ट्वीट करके आरोप लगाया है कि अब तक न तो पुलिस ने संज्ञान लिया और न ही कोई कार्रवाई की है। गायिका का आरोप है कि ‘मुंडे’ के साथ उसकी बड़ी बहन का प्रेम विवाह हुआ था और वर्ष 2006 में वह अपनी बहन की डिलीवरी के लिए इंदौर गई थी। तब उसकी इच्छा के विरुद्ध ‘मुंडे’ ने उससे संबंध बनाए। वह 2006 से ही बार-बार उसका बलात्कार कर रहे हैं तथा उसे ‘धनंजय मुंडे’ से जान का खतरा है। 

* 10 जनवरी, 2021 को वाराणसी से ‘भाजपा के पूर्व विधायक मायाशंकर त्रिपाठी’ पर उन्हीं के द्वारा संचालित शिक्षा संस्थान की एक छात्रा द्वारा छेडख़ानी का आरोप लगाने पर लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। 
* 14 दिसम्बर, 2020 को उत्तर प्रदेश में ‘समाजवादी पार्टी नेता इंतजार त्यागी’ पर एक अंतर्राष्ट्रीय महिला खिलाड़ी ने तमंचे के बल पर उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी ने अपने मोबाइल में उसके अश्लील फोटो कैद कर लिए और तभी से उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा है। 

इन दिनों दक्षिण भारत में तमिलनाडु के पोल्लाची में दो वर्ष पूर्व हुए यौन शोषण के मामले को लेकर वहां की राजनीति गर्माई हुई है। ‘द्रमुक के विधायक एन. काॢतक’ ने आरोप लगाया है कि सरकार 2019 के  इस मामले में आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है और सरकार की मिलीभगत के कारण ही 2 वर्ष तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यह पूरा मामला 12 फरवरी, 2019 का है जब 19 वर्षीय एक कालेज छात्रा के साथ चार लोगों ने बलात्कार करके उसकी वीडियो बना ली। इस मामले में सी.बी.आई. ने ‘अन्नाद्रमुक के छात्र विंग के सचिव अरुणाथल्लम’ सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यही नहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘चिन्मयानंद’ को सितम्बर 2019 में उन पर लगे बलात्कार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘निहालचंद मेघवाल’ पर भी बलात्कार करने का आरोप लगा। 

राजस्थान के पूर्व मंत्री ‘महिपाल मदेरणा’ (कांग्रेस) के नर्स ‘भंवरी देवी’ के साथ संबंधों के चलते वर्ष 2011 में राजस्थान की कांग्रेस सरकार की जम कर फजीहत हुई थी। इस मामले में मदेरणा तथा कांग्रेस के एक विधायक के भाई को गिरफ्तार किया गया था। उत्तराखंड के ‘हरक सिंह रावत’, गुजरात के ‘जयंती भानुशाली’, उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ से विधायक ‘कुलदीप सिंह सेंगर’ और बदायूं से विधायक ‘कुशाग्र सागर’ के विरुद्ध बलात्कार के केस दर्ज करवाए गए हैं और मध्य प्रदेश के ‘राजाराम’ को गिरफ्तार किया गया है। 

महाराष्ट्र का एक नेता ‘रविंद्र बावंठाडे’ चलती बस में महिला का चुम्बन लेते हुए कैमरे में कैद होने के बाद गिरफ्तार हुआ। ‘राजद’ नेता ‘अरुण यादव’ पर नाबालिग से बलात्कार का आरोप लगने के बाद वह फरार हो गया जबकि अयोध्या में ‘बसपा’ नेता ‘बज्मी सिद्दीकी’ और उसके साथियों के विरुद्ध एक युवती ने सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया। 

एक रिपोर्ट के अनुसार 2009 से 2019 के बीच 10 वर्षों में सांसदों द्वारा महिलाओं के विरुद्ध दर्ज अपराधों में 830 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अपने देश के चंद नेताओं की उक्त करतूतें हमने पाठकों के सामने रखी हैं जिससे स्पष्टï है कि ये नेता आचरण के मामले में संदेह के घेरे में आए हुए हैं। निश्चय ही यह देश के लिए कोई शुभ लक्षण नहीं है जिससे राजनीतिक दलों के स्तर में गिरावट आ रही है। अत: राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं को चाहिए कि वे ऐसे किरदार वालों को पार्टी में शामिल न करें और यदि कोई ऐसा नेता उनकी पार्टी में है तो उसे तुरंत निकाल बाहर करें ताकि दूसरों को नसीहत मिले।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Monday, January 11, 2021

पाकिस्तान सरकार आतंकियों संग ‘चूहे-बिल्ली का खेल’ खेलती रही (पंजाब केसरी)

एक महत्वपूर्ण बदलाव के चलते पाकिस्तान में एक आतंकवाद रोधी अदालत ने गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दूसरी ओर मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के आप्रेशन

एक महत्वपूर्ण बदलाव के चलते पाकिस्तान में एक आतंकवाद रोधी अदालत ने गुरुवार को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को आतंकी वित्तपोषण के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दूसरी ओर मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के आप्रेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को भी लाहौर में एक पाकिस्तानी आतंकवाद विरोधी अदालत (ए.टी.सी.) लाहौर के न्यायाधीश एजाज अहमद बुट्टर ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवादी लखवी को तीन मामलों में प्रत्येक में तीन साल की सजा के साथ पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 

ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ हो। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था परन्तु जब तक चीन ने पाकिस्तान-आधारित जे.एम. प्रमुख को ब्लैक लिस्ट करने के प्रस्ताव पर अपनी पकड़ हटा नहीं ली, यह मुमकिन न हुआ। दिल्ली ने इस मुद्दे पर पहली बार विश्व निकाय का दरवाजा लगभग 10 साल पहले खटखटाया था। 

पाकिस्तान सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादियों को पकडऩे का या फिर उन्हें छोडऩे का चूहे बिल्ली का यह खेल खेलती आई है। 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (एल.ई.टी.) के आतंकवादी समूह के आप्रेशन कमांडर लखवी को आतंकी वित्तपोषण मामले में पाकिस्तानी आतंकवाद विरोधी अदालत ने 15 साल की सजा सुनाई थी। संयुक्त राष्ट्र के कथित आतंकवादी 61 वर्षीय लखवी मुंबई आतंकवादी हमले के मामले में 2015 से जमानत पर था। उसे एक सप्ताह पहले पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के आतंकवाद रोधी विभाग (सी.टी.डी.) ने गिरफ्तार किया था। लखवी को दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा लश्कर और अलकायदा से जुड़े होने के कारण यू.एन. द्वारा एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। 

पुलवामा हमले के बाद भी भारी अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद (जे.ए.एम.) प्रमुख के बेटे और भाई सहित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के 100 से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें सी.आर.पी.एफ के 40 जवान मारे गए थे। 

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने जैश मुख्यालय के प्रशासनिक नियंत्रण को अपने कब्जे में लेने का दावा किया जिसमें बहावलपुर में मद्रेसतुल साबिर और जामा मस्जिद सुभानल्लाह शामिल थे। परन्तु धीरे-धीरे इन सबको या तो छोड़ दिया गया या किसी न किसी बहाने लापता बताया गया। ऐसे में यह मानना गलत न होगा कि पाकिस्तानी सरकार ही इन्हें अपने साए तले संरक्षण देती है और जब चाहे औपचारिक तौर पर जेल में डाल देती है। 

ग़ौरतलब है कि पैरिस स्थित एफ.ए.टी.एफ . ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक मनी लॉड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए कार्ययोजना लागू करने को कहा था। कोविड-19 प्रकोप के बाद समय सीमा बढ़ा दी गई थी। जबकि नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि इन कार्रवाइयों का समय स्पष्ट रूप से ‘एशिया पैसिफिक ज्वाइंट ग्रुप’ (ए.पी.जे.जी.) से मिलने और अगले ‘फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (एफ.ए.टी.एफ.) जोकि फरवरी 2021 में होना है, के आगे अनुपालन की भावना व्यक्त करने का इरादा बताता है। 

भारतीय प्रवक्ता ने आगे कहा कि लखवी को जेल की सजा सुनाए जाने और जैश-ए-मोहम्मद (जे.ई.एम.)  प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ  गिरफ्तारी वारंट जारी करना मात्र यह बतलाता है कि पाकिस्तान के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह महत्वपूर्ण बैठकों से पहले ठोस कार्रवाई करे। संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं और नामित आतंकवादियों ने अपने भारत-विरोधी एजैंडे को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी संगठनों के साथ मिलकर ये कार्य किए हैं।

पाकिस्तान जोकि आर्थिक संकट की डगर पर है तो उसके लिए ब्लैक लिस्ट में चले जाने से उस पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। एक वैश्वीकरण माहौल में अन्य देशों की तरह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ नहीं है तथा यह पूर्णत: अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों पर निर्भर है। यदि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया तो इससे उसके आयात, निर्यात तथा राजस्व पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय ऋण लेने की पहुंच भी सीमित हो जाएगी। ब्लैक लिस्ट होने से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) तथा ए.डी.बी. जैसे संस्थान इमरान खान सरकार से निपटने में और सचेत हो जाएंगे और इसके अलावा जोखिम दर तय करने वाली एजैंसियां जैसे मूडीज एस.एन.पी. तथा फीच रेटिंग को डाऊन ग्रेड करने के लिए बाध्य होगी। 

इस्लामाबाद इस समय वित्त संकट की मझधार में है और यह वर्तमान संकट 1988 के परमाणु परीक्षणों के बाद से भी बुरा है। ब्लैक लिस्ट होने से पाकिस्तान की चीन की बैल्ट एंड रोड इनीशिएटिव की बिलियन डालर परियोजना भी तहस-नहस हो जाएगी। इसलिए पाकिस्तान चाहेगा कि सभी आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया जाए ताकि ब्लैक लिस्ट से वह बाहर रह सके। 

फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफ.ए.टी.एफ.) अध्यक्ष मार्कस प्लेयर का कहना है कि पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई योजना में से 27 आइटमों से 21 को पा लिया है और सरकार ने संकेत दिया है कि वह बाकी आइटमों को भी पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले एफ.ए.टी.एफ. का अध्यक्ष एक चीनी शियांगमिन ली था जो पाकिस्तान को किसी भी नकारात्मक कार्रवाई से बचाता रहा है जबकि वर्तमान अध्यक्ष मार्कस प्लेयर एक जर्मन नागरिक है जोकि आतंकवाद के कड़े विरोधी हैं।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Saturday, January 9, 2021

‘देश की सेना का तनाव दूर करने के लिए’ ‘तुरंत कदम उठाने की जरूरत’ (पंजाब केसरी)

1 अप्रैल, 1895 को अस्तित्व में आई भारतीय सेना आज विश्व की सबसे बड़ी सेना बन चुकी है जिसने कई युद्धों में अपनी वीरता के झंडे गाड़े तथा विश्व के अनेक भागों में राहत और बचाव अभियानों में सफलतापूर्वक भाग लिया ....

1 अप्रैल, 1895 को अस्तित्व में आई भारतीय सेना आज विश्व की सबसे बड़ी सेना बन चुकी है जिसने कई युद्धों में अपनी वीरता के झंडे गाड़े तथा विश्व के अनेक भागों में राहत और बचाव अभियानों में सफलतापूर्वक भाग लिया है।

1971 में बंगलादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद करवाने और 1988 में मालदीव सरकार का राजनीतिक संकट सुलझाने में भारतीय सेना ने सहायता की थी जो ‘आप्रेशन कैक्टस’ के नाम से इतिहास में दर्ज है। परंतु अपनी वीरता से भारत को विश्वव्यापी प्रतिष्ठा दिलाने वाली हमारी सेना के जवानों के तनाव में पिछले दो दशकों के दौरान भारी वृद्धि हुई है। इस कारण प्रतिवर्ष भारतीय सेना आत्महत्याओं तथा अन्य असुखद कारणों से अपने जांबाज सैनिकों से हाथ धो रही है। 

पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई खबरों के अनुसार भारतीय सेना में ‘क्वालिटी आफ लाइफ’ अच्छी नहीं रही जिस कारण सेना के जवान तनाव और नकारात्मकता के शिकार हो रहे हैं। हाल ही में रक्षा मंत्रालय के सबसे बड़े ‘थिंक टैंक’ (‘द युनाईटेड सर्विस इंस्टीच्यूशन आफ इंडिया’) ने भारतीय सेना में तनाव पर एक वर्ष के अनुसंधान के बाद जारी अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन किए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय भारतीय सेना के आधे से अधिक जवान मुख्यत: आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में लम्बी तैनाती तथा कार्य संबंधी अन्य समस्याओं के कारण गंभीर तनाव के शिकार हैं। सर्वाधिक चिंताजनक बात यह है कि यह तनाव अधिकांशत: वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार के कारण पैदा हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार : ‘‘तनाव का सबसे बड़ा कारण जवानों को जरूरत के समय पर छुट्टी न मिलना या देर से मिलना, काम ज्यादा और आराम कम, घरेलू परेशानियां, वरिष्ठ सेनाधिकारियों से कम संवाद और उनकी समस्याओं के प्रति उनका उपेक्षापूर्ण रवैया, उन्हें परेशान करना, अपेक्षित सम्मान न मिलना, मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अनुचित प्रतिबंध तथा मनोरंजन की सुविधाओं का अभाव आदि है।’’‘‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, अपर्याप्त रेल रिजर्वेशन, प्रशासन से पर्याप्त सहायता न मिलना, वित्तीय समस्याएं, परिवार से लम्बी दूरी, फील्ड एरिया में रहने की पर्याप्त जगह का न होना, वरिष्ठ अधिकारियों का दुव्र्यवहार, पदोन्नतियों में पारदर्शिता का अभाव, वित्तीय दावों के भुगतान में देरी, घटिया राशन आदि भी तनाव का कारण बन रहे हैं।’’ 

‘‘यही नहीं सैनिकों की पत्नियों के कल्याण के लिए गठित ‘आर्मी वाइव्स वैल्फेयर एसोसिएशन’ (ए.डब्ल्यू.डब्ल्यू.ए.) के कार्यक्रमों में लम्बी ड्यूटी देते समय या दूसरे मौकों पर हाजिरी देने के दौरान अकारण लम्बे समय तक खड़े रहना आदि भी जवानों और जे.सी.ओ. को तनाव दे रहा है।’’ इसी अनुसंधान के अनुसार युवा अधिकारियों में तनाव का सबसे बड़ा कारण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन पर अनावश्यक काम का बोझ डालना और उन्हें फिजूल के कामों में लगाना, उन्हें दिए गए किसी काम को असंभव रूप से कम समय में पूरा करने का दबाव और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ढुलमुल फैसले लेने की प्रवृत्ति है। 

कर्नल (रिटा.) गुरुराज गोपीनाथ ने गत वर्ष अक्तूबर में कहा था कि : ‘‘30 से 40 वर्ष के सेनाधिकारियों की प्रतिक्रियाओं संबंधी एक रिपोर्ट के अनुसार 87 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि वे काम के दबाव के चलते छुट्टी नहीं ले पाते, 85 प्रतिशत ने कहा कि खाना खाते समय भी उन्हें सरकारी फोन का जवाब देना पड़ता है, 73 प्रतिशत ने कहा कि यदि वे छुट्टी ले भी लें तो उन्हें काम के कारण बुला लिया जाता है और 63 प्रतिशत का कहना था कि काम के चलते उनका वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ है।’’अत: हमारी सेना के जवानों में नकारात्मकता की भावना पैदा करने वाले कारणों को दूर करने की जरूरत है ताकि देश की शौर्य पताका फहराने वाले हमारे वीरों पर आंच न आए। वे खुश और उनके परिवार खुशहाल रहें और वे देश की सरहदों तथा देशवासियों की पूरी ताकत के साथ रक्षा करने में समर्थ हों।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Thursday, January 7, 2021

‘भारत में नारी जाति पर’‘निर्भया जैसे अत्याचार कब थमेंगे’ (पंजाब केसरी)

16 दिसम्बर, 2012 की रात को दिल्ली में पैरा मैडीकल की 23 वर्षीय छात्रा ‘निर्भया’ के साथ चलती बस में 6 लोगों द्वारा वीभत्स बलात्कार कांड ने विश्व भर में सनसनी फैला दी थी। इस घटना में बलात्कारियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में ‘लोहे की छड़

16 दिसम्बर, 2012 की रात को दिल्ली में पैरा मैडीकल की 23 वर्षीय छात्रा ‘निर्भया’ के साथ चलती बस में 6 लोगों द्वारा वीभत्स बलात्कार कांड ने विश्व भर में सनसनी फैला दी थी। इस घटना में बलात्कारियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में ‘लोहे की छड़’ डालने के अलावा उसके शरीर को कई जगह दांतों से काट दिया था। 

‘निर्भया’ को न्याय दिलवाने के लिए देश भर में उठी आवाजों के दृष्टिगत भारत सरकार ने जब महिलाओं की सुरक्षा संबंधी अनेक पग उठाने के अलावा 3 महीनों के भीतर कानून भी बना दिया तो आशा बंधी थी कि इससे महिलाओं के विरुद्ध अपराध घटेंगे परंतु ऐसा हुआ नहीं और बच्चियों से लेकर वृद्धाओंं तक वासना के भूखे भेडिय़ों के अत्याचारों की शिकार हो रही हैं। 

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के 2019 के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। वर्ष 2013 में देश में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की 309546 घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं  जो 2019 में बढ़ कर 405861 हो गईं। महिलाओं से बलात्कार जैसा घिनौना अपराध करने के साथ-साथ उनके शरीर पर अन्य तरीकों से भी अत्याचार करने के चंद शर्मनाक उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

* 21 जनवरी, 2020 को महाराष्ट्र के नागपुर में ‘योगी लाल रहंगदाले’ नामक 52 वर्षीय व्यक्ति ने एक युवती के मुंह में कपड़ा ठूंस कर उससे बलात्कार किया और उसके गुप्तांग में ‘लोहे की छड़’ डाल दी।  
* 8 अगस्त, 2020 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ में हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए एक युवक ने एक 6 वर्षीय बच्ची का अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया और उसका प्राइवेट पार्ट कुचल डाला।
* 14 सितम्बर को हाथरस जिले के ‘चंदपा’ थाना के एक गांव में 19 वर्षीय दलित युवती की 4 युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार, बेरहमी से पिटाई करने से समूचे शरीर में जगह-जगह फ्रैक्चर होने, जीभ काटने तथा रीढ़ की हड्डïी टूटने से 29 सितम्बर को दिल्ली के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई। 

* 20 नवम्बर, 2020 को मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ज्ञारसपुर थाना इलाके के ‘ओङ्क्षलजा’ गांव में ‘सुरेंद्र चिढ़ार’ नामक एक 26 वर्षीय युवक ने न केवल एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ बलात्कार किया बल्कि विरोध करने तथा चिल्लाने पर उसके मुंह में मिट्टी भर दी जिससे सांस रुकने से उसकी मृत्यु हो गई। यही नहीं बलात्कार करने के बाद वृद्धा की मौत की पुष्टि करने के लिए उसने उसके गुप्तांग में डंडा भी डाल दिया।
* 23 दिसम्बर, 2020 को ओडिशा के नयागढ़ में एक युवक ने एक 5 वर्षीय बच्ची की हत्या करने के बाद उसके शव के साथ बलात्कार कर डाला। 

* 3 जनवरी, 2021 को झारखंड में रांची के ‘ओरमांझी’ में एक युवती के साथ बलात्कार करने के बाद अपराधियों ने न सिर्फ गला रेत कर उसकी हत्या कर दी बल्कि उसका गुप्तांग भी काट दिया और युवती की पहचान छिपाने के लिए उसका सिर धड़ से अलग करके निर्वस्त्र लाश को फैंक दिया।
* 3 जनवरी, 2021 को ही जालंधर के थाना पतारा के अंतर्गत पड़ते गांव में 25 वर्षीय प्रवासी मजदूर ने एक 6 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी।
 * नारी जाति के प्रति अपराधों का एक और उदाहरण 4 जनवरी को सामने आया जब उत्तर प्रदेश में बदायूं के थाना ‘उगैती’ क्षेत्र में 50 वर्षीय एक महिला के साथ एक मंदिर के महंत, उसके चेले व ड्राइवर ने निर्भया जैसी बर्बरता की। 

आरोपियों ने उसके शरीर को बुरी तरह नोच डाला और गैंगरेप करने के बाद उसके गुप्तांग में ‘लोहे की छड़’ जैसी कोई चीज जोरदार प्रहार के साथ डाल दी जिसके परिणामस्वरूप महिला की बाईं पसली, बायां पैर और बायां फेफड़ा क्षतिग्रस्त हो जाने से उसकी मृत्यु हो गई और आरोपी देर रात उसका शव उसके घर के बाहर फैंक कर चले गए। 

ऐसे अनेक मामले सामने आए हैं जब बलात्कार के आरोप में कुछ महीनों या साल की सजा काट कर आए अभियुक्त दोबारा यह अपराध करने से संकोच नहीं करते। जैसे कि बलात्कार के आरोप में कैद काट कर जेल से निकले उत्तर प्रदेश के सीतापुर के ‘इमलिया सुल्तानपुर’ थाना क्षेत्र के समर बहादुर नामक आरोपी ने 18 दिसम्बर, 2020 को फिर 9 वर्षीय एक बच्ची से बलात्कार किया। 

बेशक निर्भया पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को 7 साल लम्बी कानूनी कार्रवाई के बाद गत वर्ष 20 मार्च को फांसी दी गई परंतु इसके अलावा किसी भी न्यायालय द्वारा किसी बलात्कारी को फांसी पर लटकाए जाने का कोई मामला सामने नहीं आया। अत: जब तक महिलाओं के विरुद्ध इस तरह के अपराधों के मामले में फास्ट ट्रैक अदालतों द्वारा जल्द से जल्द सुनवाई पूरी करके दोषियों को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा, तब तक इस मनोविकृत्ति पर रोक लग पाना असंभव ही प्रतीत होता है।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Wednesday, January 6, 2021

‘रक्षकों’ की वर्दी में छुपे चंद ‘भक्षक’ ‘धूमिल कर रहे हैं पुलिस की छवि’ (पंजाब केसरी)

समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है पर इसमें घुस आई चंद काली भेड़ें अपनी कत्र्तव्यविमुखता एवं अमानवीय कृत्यों से पुलिस विभाग की बदनामी का कारण बन रही..

समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस की है पर इसमें घुस आई चंद काली भेड़ें अपनी कत्र्तव्यविमुखता एवं अमानवीय कृत्यों से पुलिस विभाग की बदनामी का कारण बन रही हैं। महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, ‘‘यदि पुलिस में दुर्भावना आ जाएगी तो देश का भविष्य सचमुच अंधकारमय हो जाएगा।’’ आज कुछ-कुछ वैसा ही होता दिखाई दे रहा है जिसके 11 दिनों के उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 24 दिसम्बर को शाहजहांपुर के जलालाबाद थाने के एक सब इंस्पैक्टर पर एक महिला ने बलात्कार करने का आरोप लगाया। महिला के अनुसार जब वह अपने साथ कुछ लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार किए जाने की रिपोर्ट लिखवाने उक्त थाने में गई तो वहां मौजूद सब-इंस्पैक्टर विनोद कुमार ने उसके साथ बलात्कार कर डाला। 
* 24 दिसम्बर को ही हरियाणा राज्य नशा नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एक नशा तस्कर से जब्त किए गए 812 किलो डोडा-चूरा की बजाय मात्र 400 किलो डोडा-चूरा की बरामदगी दिखाने के आरोप में 8 पुलिस कर्मियों के विरुद्ध केस दर्ज करके उन्हें निलम्बित किया। 

* 26 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक महिला के साथ बलात्कार करने और उसकी बेटी से छेड़छाड़ करने के मामले में फरार चल रहे सिपाही मनोज रस्तोगी को गिरफ्तार किया गया। 
* 30 दिसम्बर को मोहाली में तैनात एक सिपाही गगनदीप सिंह के विरुद्ध एक युवती को अपने प्रेम जाल में फंसा कर गर्भवती करने, गर्भपात करवाने और वायदा करके शादी से मुकर जाने के आरोप में केस दर्ज किया गया। 
* 30 दिसम्बर को ही जालन्धर के थाना 8 की पुलिस ने हैरोइन सप्लाई करते हुए पंजाब पुलिस के डिसमिस हैड कांस्टेबल राकेश कुमार और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार किया। यह हैड कांस्टेबल 2018 में शराब की सप्लाई करता पकड़े जाने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था। 

* 1 जनवरी को नशा तस्करों को पकडऩे के लिए बनाई गई स्पैशल टास्क फोर्स मोगा से संबंधित एक ए.एस.आई. बलजीत सिंह को पुलिस ने चिट्टे की तस्करी करने के आरोप में उसकी महिला मित्र कर्मबीर कौर और ड्राइवर जग्गी के साथ गिरफ्तार किया। कर्मबीर कौर को उसके पति बलतेज सिंह ने कुछ समय पूर्व बलजीत सिंह के साथ रंगरलियां मनाते हुए पकड़ा था।

* 1 जनवरी को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में नए साल की खुशी में एक ढाबे पर कुछ सिपाहियों ने दावत उड़ाने के बाद ढाबे वाले द्वारा पैसे मांगने पर न सिर्फ उसकी स्कूटी और मोबाइल तोड़ दिए बल्कि गोलक में रखे 4,000 रुपए और जेब में पड़े 2000 रुपए भी निकाल लिए और धमकाया कि होटल चलाना है तो उन्हें मुफ्त खाना खिलाना होगा। पीड़ित दुकानदार ने अधिकारियों से शिकायत की तो 3 जनवरी की रात को लगभग 12.30 बजे 4 नकाबपोशों ने आकर पहले तो उसके साथ गाली-गलौच किया और फिर उसका ढाबा तहस-नहस कर दिया। 

* 1 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश में बिठूर (कानपुर) पुलिस थाने के एस.ओ. कौशलेन्द्र प्रताप को 2018 में चोरी हुई कार का इस्तेमाल करते हुए पाया गया। 
* 2 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब के खमानों में एक चिकन कार्नर के मालिक की मौत के बाद उसके कमरे से मिली 8 लाख रुपए नकदी और कुछ मूल्यवान सामान खुर्द-बुर्द करने के आरोप में एस.एच.ओ. हरविंद्र सिंह और ए.एस.आई. जसपाल सिंह को निलम्बित करके उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की गई। 

* 4 जनवरी को कैथल पुलिस ने राजस्थान के नसीराबाद कैंट से एक नायब सूबेदार और दो सैनिकों को अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा। 
* 4 जनवरी को ही लुधियाना की चौकी मुंडियां के हैड कांस्टेबल राकेश कुमार के विरुद्ध एक महिला से हुए बलात्कार के मामले में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है जबकि ए.एस.आई. सुखविंद्र सिंह और होमगार्ड जवान हरिन्द्र सिंह को निलम्बित किया गया है। 

उक्त घटनाओं से स्पष्ट है कि पुलिस की ज्यादतियां किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रह कर देशव्यापी बन चुकी हैं और कानून के रक्षक कहलाने वाले चंद पुलिस कर्मियों का इस प्रकार से भक्षक बनना समूचे पुलिस विभाग की छवि धूमिल कर रहा है। अत: दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए ताकि दूसरों को भी नसीहत मिले और वे ऐसी कोई करतूत करने से पहले सौ बार सोचें।-विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Tuesday, January 5, 2021

‘वित्तीय संकट से लटका’‘नौसेना का आधुनिकीकरण’ (पंजाब केसरी)

7800 किलोमीटर से अधिक की लम्बी तटरेखा के साथ भारतीय नौसेना को हर समय देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन के साथ चल रहे भारत के विवाद के बीच भारतीय नौसेना को अपने आधुनिकीकरण की योजना में धन की कमी के कारण परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे

7800 किलोमीटर से अधिक की लम्बी तटरेखा के साथ भारतीय नौसेना को हर समय देश के समुद्री हितों की रक्षा करने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन के साथ चल रहे भारत के विवाद के बीच भारतीय नौसेना को अपने आधुनिकीकरण की योजना में धन की कमी के कारण परिवर्तन करना पड़ रहा है। ऐसे में 200 शिप्स लेने की बजाय इनकी संख्या कम कर के 175 की जा सकती है और तीसरे एयरक्राफ्ट करियर की योजना को भी फिलहाल टाला जा सकता है। इससे निश्चित ही चीन के विरुद्ध बने आस्ट्रेलिया, जापान, अमरीका और भारत के समूह ‘क्वाड’ में भारत की स्थिति कमजोर होती है क्योंकि ये देश समुद्र में चीन का प्रभाव घटाने के लिए भारत का सहयोग चाहते हैं। 

भारत ने अपनी सेना का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के साथ लगती पश्चिमी सीमा पर तैनात कर रखा है और यदि  भारत को  चीन के साथ भी उत्तरी सीमा पर इसी तरह की तैनाती करनी है तो देश के रक्षा बजट में थल सेना पर होने वाला खर्च और बढ़ाना पड़ेगा। पहले ही भारत के रक्षा बजट का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा देश की लगभग साढ़े 13 लाख की मजबूत थल सेना पर खर्च होता है और नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए बहुत कम बजट मिल पाता है। 

रक्षा बजट में नौसेना की हिस्सेदारी 2012 से 18 प्रतिशत से कम हो कर 2019-20 में 13 प्रतिशत रह गई है और यह नौसेना के आधुनिकीकरण की योजनाओं में सबसे बड़ी समस्या है। वित्त वर्ष 2019-20 में जारी हुए रक्षा बजट में से सर्वाधिक 39,302.64 करोड़ रुपए वायु सेना को जारी हुए हैं जबकि थल सेना को 29,461.25 करोड़ रुपए और नौसेना को सबसे कम 23,156.43 करोड़ रुपए का आबंटन हुआ। नौसेनाध्यक्ष एडमिरल कर्मबीर सिंह धन की कमी के कारण  आधुनिकीकरण में आ रही रुकावट के संबंध में सरकार को जानकारी दे चुके हैं और मौजूदा हालत में नौसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण की जरूरत के बारे में उन्होंने सरकार को बताया है। 

नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को यह भी बताया है कि उसको कम बजट दिए जाने की स्थिति में नौसेना अपने आधुनिकीकरण की योजनाओं में बदलाव कर सकती है। फिलहाल नौसेना के बेड़े में वृद्धि के लिए 50 शिप और पनडुब्बियां  निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा नौसेना किसी भी सूरत में 2022 तक अपने महत्वाकांक्षी प्रॉजैक्ट ‘विक्रांत’ के निर्माण को पूरा करना चाहती है। फिलहाल नौसेना के पास एक मात्र एयरक्राफ्ट करियर ‘विक्रमादित्य’ ही है। नौसेना की योजना कम से कम 3 एयरक्राफ्ट करियर रखने की है ताकि 2 हमेशा ही ऑपरेशंस में रहें। इसके अलावा ‘डिफैंस एंड रिसर्च डिवैल्पमैंट आर्गेनाइजेशन’ ने 2026 तक नौसेना को दो इंजन वाले हल्के लड़ाकू विमान बना कर देने की पेशकश की है। 

दुनिया भर में चीन के बढ़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए भारत को अपनी नौसेना को मजबूत करना बहुत जरूरी है लेकिन लद्दाख सीमा पर चीन के साथ बढ़े विवाद के चलते नौसेना की तरफ से बजट की मांग बढऩे लगी है क्योंकि लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेना की तैनाती और रख रखाव का खर्च बहुत अधिक है और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था के बीच भारत के लिए इतना खर्च करना बहुत मुश्किल काम है। दूसरी ओर यदि हम चीन की अर्थव्यवस्था की बात करें तो यह भारत के मुकाबले 6 गुणा बड़ी है और चीन की सेना भी भारतीय सेना के मुकाबले संख्या में डेढ़ गुना ज्यादा है। 

अमरीका के रक्षा विभाग के अनुसार पिछले दो दशक में चीन ने अपनी सेना की ताकत बढ़ाने के लिए तमाम संसाधन झोंके हैं और सेना को तकनीकी तौर पर मजबूत बनाने के लिए भी खूब खर्च किया है। इतना ही नहीं चीन के सियासतदानों ने इस दिशा में जबरदस्त राजनीतिक इच्छा शक्ति भी दिखाई है और यदि उसे लद्दाख में भारत के विरुद्ध सेनाओं की लंबे समय के लिए तैनाती करनी है तो उसे आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर कोई समस्या नहीं आएगी। चीन के साथ लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर में चल रही खींचतान के बीच  देश की तीनों सेनाओं का और अधिक मजबूत होना बहुत जरूरी है। 

हालांकि वायुसेना में राफेल आने के बाद इसकी ताकत बढ़ी है लेकिन देश की तीनों सेनाओं को अभी भी आधुनिकीकरण के लिए सरकार की तरफ से मदद की बड़ी जरूरत है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22  के लिए देश का आम बजट पेश करेंगी तो निश्चित रूप से उनके मन में देश की नौसेना द्वारा रक्षा बजट में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग का सवाल भी होगा और उम्मीद करनी चाहिए कि अगले बजट के दौरान वह संतुलित रक्षा बजट पेश करेंगी और  सेना के तीनों अंगों को उनकी मांग के अनुसार बजट में हिस्सेदारी मिलेगी और इस से देश की ताकत भी बढ़ सकेगी। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘चीन में फंसे भारतीय नाविकों की’ ‘सुध ले भारत सरकार’ (पंजाब केसरी)

कोरोना महामारी के प्रसार के लिए विश्व व्यापी आलोचना झेल रही चीन सरकार और आस्ट्रेलिया के बीच चल रही ट्रेड वार का असर भारत सहित दूसरे देशों पर भी पडऩे लगा है। अमरीका ने कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया

कोरोना महामारी के प्रसार के लिए विश्व व्यापी आलोचना झेल रही चीन सरकार और आस्ट्रेलिया के बीच चल रही ट्रेड वार का असर भारत सहित दूसरे देशों पर भी पडऩे लगा है। अमरीका ने कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया था तथा इसकी जांच की मांग की थी और आस्ट्रेलिया ने अमरीका के इस कदम का समर्थन किया था जिस पर भड़क कर चीन ने आस्ट्रेलिया पर अनेक व्यापारिक पाबंदियां लगा दी हैं। इन्हीं पाबंदियों के तहत आस्ट्रेलिया और चीन के झगड़े के परिणामस्वरूप चीन ने आस्ट्रेलिया से कोयला लेकर आए ‘एमवी अनास्तासिया’ नामक जहाज को अपनी ‘कैफेडिएन’ बंदरगाह के निकट बीच समुद्र में गत 20 सितम्बर से रोक रखा है। 

एक अन्य जहाज ‘एमवी जगआनंद’ को चीन की ‘जींगतांग’ बंदरगाह पर गत वर्ष 13 जून से रोक कर रखा हुआ है। इन दोनों जहाजों के कर्मचारियों में 39 भारतीय नाविक भी शामिल हैं जो उक्त जहाजों के अन्य कर्मचारियों के साथ समुद्र में ही फंसे हुए हैं। न तो चीनी अधिकारी उक्त दोनों जहाजों को बंदरगाहों पर जाने की अनुमति दे रहे हैं, न ही माल उतारने दे रहे हैं और न ही भारतीय नाविकों को अपने घरों को जाने की अनुमति दे रहे हैं। कहा जाता है कि न केवल ये भारतीय नाविक चीन और आस्ट्रेलिया के इस झगड़े में पिस रहे हैं बल्कि चीन इन्हें भारतीय होने के कारण तंग भी कर रहा है क्योंकि इन जहाजों के समुद्र में रोके जाने के बाद भी यहां दूसरे देशों से आने वाले कई जहाज सामान उतार कर चले गए केवल भारतीय नाविकों को ही तट पर आने से रोक रहा है। 

हालांकि भारत सरकार ने चीन से अनुरोध किया था कि महीनों से जहाज पर फंसे इन नाविकों को भारत आने की इजाजत दे दी जाए परंतु चीनी अधिकारी कोरोना का बहाना करके इसकी अनुमति नहीं दे रहे परंतु दूसरे देशों के जहाजों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। हालांकि चीनी अधिकारी भारतीय नाविकों को हर तरह की मदद देने का दावा कर रहे हैं परंतु उनका यह दावा सच्चाई से कोसों दूर है। इन नाविकों को अन्य सुविधाएं देने की बात तो दूर उन्हें तो पीने के लिए स्वच्छ पानी भी नहीं मिल रहा। नाविकों को इतने लम्बे समय तक जहाज पर ही रोके रखना और आवागमन की अनुमति न देने के कारण उनमें मानसिक तनाव बढ़ रहा है और वे अवसाद का शिकार हो रहे हैं। 

जहाज पर फंसे भारतीय नाविकों के अनुसार वे बहुत परेशान हैं। उन्हें कहीं से भी कोई सहायता नहीं मिल पा रही है इसलिए अब वह घर वापसी के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। एक नाविक ने अपने भेजे संदेश में कहा है कि ‘‘हमें अपने घर जाना है। आप से निवेदन है कि हमारी आवाज सरकार तक पहुंचाइए।’’ भारत ने चीनी अधिकारियों के इस आचरण पर आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास लगातार चीन के संबंधित अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है और उनसे जहाजों को माल उतारने तथा नाविकों को बदलने की अनुमति देने का अनुरोध करता आ रहा है जिसका अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला। 

चीन द्वारा भारत का अनुरोध किसी न किसी बहाने टालते जाने के कारण पीड़ित परिवारों में रोष बढ़ रहा है और चीन की नीयत के बारे में संदेह पैदा हो रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस स्थिति को लेकर सरकार से नाविकों को वापस बुलाने की व्यवस्था करने का अनुरोध कर रहे हैं। शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर शिकायत की है कि ‘‘केंद्र सरकार ने 39 नाविकों को उनके भाग्य पर छोड़ दिया है। नाविकों के परिवार दर-दर भटक रहे हैं और कोई भी उनकी मदद नहीं कर रहा है।’’अत: भारत सरकार को इस संबंध में चीनी अधिकारियों के साथ मजबूती से यह मामला उठाना चाहिए ताकि नाविक सकुशल घर लौट सकें और उनके परिजनों की चिंता समाप्त हो।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘विश्व में लोकतंत्र के लिए बेहतर’ ‘व दूसरे कई बदलावों वाला होगा यह नया वर्ष’ (पंजाब केसरी)

‘कोरोना महामारी’ के इलाज के लिए चल रही वैक्सीन उपलब्ध करवाने की कवायद के बीच वर्ष 2021 में प्रवेश करते हुए हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि आने वाला यह वर्ष विश्व के लिए कैसा रहने वाला है और इस नए वर्ष में विश्व में कौन से सुखद बदलाव

‘कोरोना महामारी’ के इलाज के लिए चल रही वैक्सीन उपलब्ध करवाने की कवायद के बीच वर्ष 2021 में प्रवेश करते हुए हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि आने वाला यह वर्ष विश्व के लिए कैसा रहने वाला है और इस नए वर्ष में विश्व में कौन से सुखद बदलाव हो सकतेे हैं। इस वर्ष विश्व के अनेक देशों में चुनाव होंगे जिससे शायद लोकतंत्र फिर मजबूत होगा। अनेक देशों में कोरोना के चलते तानाशाही पूर्ण रवैये से काम करने वाली सरकारों की विदाई हो सकती है। यहां तक कि गत वर्ष अमरीका में हुए चुनाव भी एक ‘कमजोर’ लोकतंत्र के चुनावों जैसे ही थे। 

वर्ष 2020 में विभिन्न देशों के शासकों ने कई तरह से लोकतंत्र को ध्वस्त किया है। कोरोना के बहाने सत्ता पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करके लोकतंत्र को आघात पहुंचाया, जैसा कि हंगरी में हुआ। फिर रूस जैसे देशों में ‘व्लादीमीर पुतिन’ ने चेहरे पहचानने वाले कैमरों की मदद से विरोध प्रदर्शन करने वालों की पहचान करके उनका दमन करने की नीति अपनाई। 

रवांडा में सन 2000 से ही शासन कर रहे तानाशह ‘पाल कगामे’ ने अब देश भर में सुरक्षा बलों की तैनाती की है और कफ्र्यू तोडऩे वालों को वहां गोली तक मार दी गई। यहां तक कि अनेक देशों की सरकारों ने मीडिया की आवाज कुचलने की कोशिश की तथा विश्व में 50 से अधिक पत्रकार मारे गए। परंतु वर्ष 2021 में विश्व के अनेक भागों में होने वाले चुनावों का कार्यक्रम देखते हुए लगता है कि इस वर्ष विश्व में लोकतंत्र मजबूत होगा। वर्ष की शुरुआत में पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में 14 जनवरी को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होगा जिसके लिए वहां लगातार प्रचार जारी है। 

वहां विपक्ष के नेता ‘बॉबी वाइन’ काफी लोकप्रिय हो रहे हैं लेकिन उन्हें दबाने के लिए सरकार ने विपक्ष की रैलियों पर पाबंदी लगा दी है। हाल ही में ‘बॉबी वाइन’ को एक रैली के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। इथोपिया में 2021 में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने के साथ-साथ 7 फरवरी को इक्वाडोर में राष्ट्रपति पद के लिए, नीदरलैंड में 17 मार्च को नई सरकार के लिए व पेरू में 11 अप्रैल को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे। 

6 जून को ईराक के संसदीय चुनाव होंगे तथा 18 जून को ईरान और 12 अगस्त को जांबिया के राष्ट्रपति का चुनाव आएगा। इन सबके बीच दुनिया की नजरें 5 सितम्बर को हांगकांग के स्थानीय निकाय के चुनावों पर रहेंगी। चीन द्वारा हांगकांग पर विवादित सुरक्षा कानून थोपे जाने के बाद होने वाला यह पहला चुनाव काफी महत्वपूर्ण समझा जाता है। फिर 26 सितम्बर को जर्मनीवासी 16 वर्ष बाद ऐसी सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे जिसका नेतृत्व एंजेला मर्केल नहीं कर रही होंगी। यही नहीं, निकारागुआ में 76 वर्षीय राष्ट्रपति डैनियल ओर्टेगा के कार्यकाल की समाप्ति के बाद 7 नवम्बर को राष्ट्रपति के लिए चुनाव होगा।

इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी अनेक बेहतर बदलाव आने वाले हैं। यह वर्ष विश्व में इलैक्ट्रिक कारों के निर्माण और बिक्री के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है क्योंकि इस वर्ष दुनिया के कई देशों में कार निर्माता कंपनियां अपनी बैटरी चालित कारों की नई रेंज लांच करेंगी जो प्रदूषण कम करने में सर्वाधिक प्रभावशाली सिद्ध होंगी। इस वर्ष जनरल मोटर्स की इलैक्ट्रिक कार ‘हमर’ लांच होगी इसके साथ ही ‘टेस्ला’ भी अपना साइबर ट्रक लांच करेगी। फिलहाल 260 कंपनियां इनका निर्माण कर रही हैं और इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी ‘टेस्ला’ के शेयर 2020 में ही 6 गुना बढ़ कर 665 डालर प्रति शेयर पर पहुंच गए हैं।

विश्व में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 2021 में 1 से 12 नवंबर तक ग्लासगो में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के ‘जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन’ पर भी विश्व की नजरें रहेंगी। अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 2015 के पैरिस शिखर सम्मेलन से हट जाने के कारण इस बारे कोई सकारात्मक काम नहीं किया है, अब अमरीका की सत्ता संभाल रहे जो बाइडेन को इस दिशा में काम करना होगा। 2021 में चीन और हॉलीवुड की बॉक्स आफिस कलैक्शन के मामले में भी कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। चीन का फिल्म उद्योग लगातार बढ़ रहा है जबकि कोरोना के कारण हॉलीवुड में ठहराव का दौर है। शो बिजनैस से जुड़े लोगों के अनुसार संभवत: इस वर्ष चीन का फिल्म उद्योग बॉक्स आफिस कलैक्शन के मामले में हॉलीवुड को पछाड़ देगा। 

इस वर्ष अमरीका की अंतरिक्ष अनुसंधान एजैंसी ‘नासा’ अंतरिक्ष से गिरने वाले उल्कापिंडों से धरती के बचाव का मिशन भी शुरू करेगी। ‘डबल एस्ट्रॉयड री डायरैक्शन’ यानी ‘डार्ट’ की शुरुआत वास्तव में दिसंबर-2020 में होनी थी पर अब यह जुलाई में शुरू होगा। यह मिशन धरती के निकट आ कर उसे क्षति पहुंचाने में समर्थ उल्कापिंड खोज कर उनकी दिशा बदलने पर काम करेगा ताकि धरती को विनाश से बचाया जा सके। 

ऐसे परिदृश्य में विश्व की सरकारों के लिए नए वर्ष में सबसे बड़ी सीख यही है कि वे भविष्य में आने वाले नए-नए वायरसों के खतरे का सामना करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जनस्वास्थ्य पर केंद्रित नीतियां तय करके उन पर नियमित रूप से धन का निवेश सुनिश्चित बनाएं ताकि लगातार बढ़ते जा रहे स्वास्थ्य खतरे का सामना करना यकीनी बनाया जा सके। अब तो ‘मिंक’ जानवर में भी अगला हानिकारक वायरस पाया जा चुका है। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘विश्व में फैल रही है’‘हिंसा, रक्तपात और असंतोष की आग’ (पंजाब केसरी)

हिंसा की घटनाएं विश्व में लगातार बढ़ रही हैं। विकसित और विकासशील देश समान रूप से इसकी चपेट में आए हुए हैं जिससे जानमाल की भारी हानि हो रही है। आज अशांति, रक्तपात तथा ङ्क्षहसा का शिकार होकर अधिकांश विश्व किस कदर विनाश के निकट पहुंचता जा रहा है इसके

हिंसा की घटनाएं विश्व में लगातार बढ़ रही हैं। विकसित और विकासशील देश समान रूप से इसकी चपेट में आए हुए हैं जिससे जानमाल की भारी हानि हो रही है। आज अशांति, रक्तपात तथा ङ्क्षहसा का शिकार होकर अधिकांश विश्व किस कदर विनाश के निकट पहुंचता जा रहा है इसके ताजा उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 19 दिसम्बर को नाईजीरिया के ‘जमफारा’ प्रांत के ‘कौरा नामोदा’ क्षेत्र में एक क्षेत्रीय अधिकारी के काफिले पर हमले में 3 पुलिस अधिकारियों सहित 8 लोग मारे गए।
* 20 दिसम्बर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कार बम विस्फोट में 9 लोग मारे गए।
* 21 दिसम्बर को ब्लूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाली ‘करीमा बलोच’ का शव कनाडा के टोरंटो में रहस्यमय हालात में पड़ा मिला। उसकी हत्या पाकिस्तान की खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. ने करवाई।
* 23 दिसम्बर को फ्रांस की राजधानी पैरिस के उपनगर ‘सेंट जस्ट’ में घरेलू हिंसा की शिकायत की जांच करने गए 3 पुलिस अधिकारियों पर हिंसा के आरोपी ने ही अंधाधुंध गोलियां चलाकर उन्हें मार डाला। 

* 24 दिसम्बर को पश्चिम बंगाल के ‘जलपाईगुड़ी’ जिले में अज्ञात लोगों ने टी.एम.सी. नेता ‘मनोरंजन डे’ को गोली मार कर घायल कर दिया।
* 24 दिसम्बर को ही पूर्वी अफ्रीकी देश ‘इथोपिया’ के ‘पश्चिमी बेनी शांगल गुमुज’ प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने रात के समय घरों में सो रहे 100 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार कर उनके घरों को लूट लिया।
* 26 दिसम्बर को ‘तेलंगाना’ में ‘खम्मम’ जिले के ‘वायरा’ में बदमाशों ने भाजपा नेता एन. रामाराव की उसके घर में घुस कर हत्या कर दी। 
* 26 दिसम्बर को ही अफगानिस्तान के काबुल में बम धमाकों में 2 पुलिस कर्मचारियों सहित 4 लोगों की मौत तथा अनेक घायल हो गए। 

* 26 दिसम्बर को पाकिस्तान के अशांत ब्लूचिस्तान प्रांत के ‘हरनाल’ जिले में सुरक्षा बलों की चौकी पर आतंकी हमले में 7 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तथा अनेक घायल हो गए। इसी दिन ‘पंजगुर’ जिले के एक स्टेडियम के निकट बम धमाके में 2 लोग मारे गए तथा 7 अन्य घायल हो गए।
* 26 दिसम्बर को ही ‘मध्य अफ्रीकी’ गणराज्य में अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में संयुक्त राष्ट्र के 3 शांति सैनिक मारे गए व 2 घायल हो गए। 
* 26 दिसम्बर को ही अफगानिस्तान के ‘कापिसा’ प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने मानवाधिकार कार्यकत्र्ता ‘फ्रेश्टा कोहिस्तानी’ को मार डाला। 

* 26 दिसम्बर को जर्मनी की राजधानी बॢलन में जर्मनी की ‘सोशल डैमोक्रेटिक पार्टी’ के मुख्यालय के निकट गोलीबारी में 4 लोग घायल हो गए।
* 26 दिसम्बर वाले दिन ही अमरीका के मैसाचुसेट्स प्रांत के ‘लिन’ शहर में एक म्यूजिक वीडियो की शूटिंग के दौरान गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 5 घायल हो गए। 
* 27 दिसम्बर को चीन के उत्तरी पूर्वी ‘लियोलिंग’ प्रांत में एक व्यक्ति ने चाकू से वार करके 7 लोगों की हत्या कर दी। 
* 27 दिसम्बर को ही अमरीका के इलीनाय में एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी करके 3 लोगों की हत्या कर दी व 3 अन्य को घायल कर दिया। 
* 28 दिसम्बर को आस्ट्रेलिया में एक युवक ने अपनी गर्लफ्रैंड के पिता को चाकू से ताबड़तोड़ वार करके मार डाला। 

* 28 दिसम्बर को ही रूस के ‘चेचेन’ में हथियार छीनने की वारदात में 2 हमलावरों तथा एक पुलिस कर्मचारी की मौत हो गई।
* 28 दिसम्बर को ही कनाडा के ‘सरी’ शहर में अज्ञात हमलावरों ने ‘हरमन सिंह ढेसी’ नामक पंजाबी युवक की गोली मार कर हत्या कर दी।
* 29 दिसम्बर को पश्चिम अफ्रीकी देश ‘माली’ में ‘मोप्तो’ प्रांत के ‘होम्बोरी’ क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा किए गए ‘आई.ई.डी.’ विस्फोट में वहां आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल फ्रांस के 3 सैनिक मारे गए। 

* 29 दिसम्बर को ही पश्चिम बंगाल के हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस के वर्कर ‘धर्मेंद्र सिंह’ की गोली मार कर हत्या कर दी गई।
 * 29 दिसम्बर को ही आंध्र प्रदेश के ‘कडप्पा’ जिले के गोडातुरू शहर के ‘सोमुलावरी पिल्ले’ गांव में ‘तेलगू देशम पार्टी’ के वरिष्ठ नेता ‘नंदम सुब्बैया’ को कुछ लोगों ने निर्ममतापूर्वक मार डाला।
 * 29 दिसम्बर को ही पाकिस्तान के पेशावर में भूमि विवाद को लेकर हुई गोलीबारी में 4 लोग मारे गए। 

विश्व के अधिकांश देशों में ङ्क्षहसा की लगातार लहर, बढ़ रही ‘बंदूक संस्कृति’ और लोगों में घट रही सहनशीलता का ही दुष्परिणाम है जिसका नतीजा दुखद घटनाओं के रूप में निकल रहा है और दुनिया में तबाही हो रही है। यदि यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो लोगों में भय एवं असुरक्षा की भावना बढ़ेगी और उनका जीवन दूभर हो जाएगा। अत: मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि यह सिलसिला आखिर कहां जा कर रुकेगा।—विजय कुमार  

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Tuesday, December 22, 2020

‘भारत और नेपाल के बीच रिश्ते’ ‘पुन: मजबूती की ओर’ (पंजाब केसरी)

हिमालय की गोद में बसे भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने तथा पहली बार 2017 में हुए चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सरकार तीन वर्ष में ही राजनीतिक अंतॢवरोधों के कारण धराशायी हो गई है। एकाएक 20 दिसम्बर की सुबह ‘के.

हिमालय की गोद में बसे भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 2015 में नया संविधान लागू होने तथा पहली बार 2017 में हुए चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बने ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सरकार तीन वर्ष में ही राजनीतिक अंतर्विरोधों के कारण धराशायी हो गई है। एकाएक 20 दिसम्बर की सुबह ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने अपने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाकर संसद भंग करने की सिफारिश कर दी। इसके कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रपति ‘विद्या देवी भंडारी’ ने उनकी सिफारिश स्वीकार कर संसद भंग करके अगले साल 30 अप्रैल और 10 मई को 2 चरणों में देश में चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। 

‘ओली’ के इस कदम को असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और जनादेश के खिलाफ बताते हुए इसके विरुद्ध रोष स्वरूप सत्ताधारी ‘नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी’ (एन.सी.पी.) के नेताओं ‘पुष्प कमल दहल प्रचंड’ व ‘माधव नेपाल’ के धड़े सहित तमाम विपक्षी दलों ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा कर दी। ‘के.पी. शर्मा ओली’ की सिफारिश के विरोध में कुछ संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के गठन की संभावना मौजूद रहने तक संसद भंग करने का नेपाल के संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में ‘शेर बहादुर देउबा’ के नेतृत्व वाली ‘नेपाल कांग्रेस’ (एन.सी.) वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अधिक प्रासंगिक हो सकती है। 

‘पुष्प कमल दहल प्रचंड’ ने ‘ओली’ पर भ्रष्टाचार के अनेक आरोप भी लगाए हैं। उन पर 50 करोड़ रुपए की सड़क निर्माण की अमरीकी योजना में भी पैसे खाने का आरोप लग चुका है। यह भी चर्चा है कि चीनी शासकों ने जेनेवा में ‘ओली’ के बैंक अकाऊंट में भारी-भरकम रकम जमा करवाई है। ‘ओली’ व ‘प्रचंड’ के धड़ों की लड़ाई में भी काठमांडू स्थित चीन की राजदूत ‘हाऊ यानकी’ ने ‘प्रचंड’ और ‘ओली’ के बीच कई बार सुलह-सफाई करवाने की कोशिश की है और उन्हीं के दबाव में आकर ‘ओली’ ने विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों व अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार देने वाला अध्यादेश वापस ले लिया क्योंकि ‘प्रचंड’ का धड़ा इसके विरोध में था। जहां तक भारत का सम्बन्ध है तो प्रधानमंत्री ‘ओली’ को हमारा देश उनके द्वारा बिगाड़े गए रिश्तों के लिए कोसेगा क्योंकि अपने शासनकाल में चीन के इशारे पर ‘ओली’ ने जम कर भारत विरोधी बयानबाजी और कार्य किए। 

* 08 मई, 2020 को प्रधानमंत्री ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने भारत द्वारा लिपुलेख दर्रे तक सड़क बिछाने के विरुद्ध रोष व्यक्त किया। 
* 19 मई को चीन के इशारे और ‘के.पी. शर्मा ओली’ के आदेश पर नेपाल सरकार ने देश के अपने नए नक्शे में भारत के 3 इलाकों ‘लिपुलेख’, ‘कालापानी’ व ‘लिपियाधुरा’ को नेपाली क्षेत्र में दिखा दिया। 
* 19 मई को ही नेपाल के प्रधानमंत्री ‘के.पी. शर्मा ओली’ ने नेपाल में कोरोना के प्रसार के लिए भारत को दोषी ठहराया। 
* 19 मई को ‘ओली’ ने नेपाल की संसद में भारत के राजचिन्ह में अंकित  नीति वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ पर भी तंज कसते हुए ‘सिंहमेव जयते’ कहा। ‘ओली’ का कहना था कि सत्य की जीत होती है और जोर-जबरदस्ती के साथ सिंह की तरह जीत हासिल नहीं की जानी चाहिए। 

* 20 मई को ‘ओली’ ने भारत पर टिप्पणी करते हुए दोबारा कहा कि भारतीय वायरस चीन और इटली के मुकाबले अधिक खतरनाक है।
* 08 जून को ‘ओली’ ने चीन की ‘वन चाइना पालिसी’ का समर्थन करके फिर अपने भारत विरोधी रवैये का संकेत दिया जबकि समूचा विश्व हांगकांग की स्वायत्तता के मुद्दे पर चीन की नीतियों का विरोध कर रहा था। 
* 13 जून को भारत के साथ एक नया विवाद खड़ा करते हुए ‘ओली’ ने उत्तराखंड स्थित लिपुलेख और कालापानी के इलाकों को नेपाल के नक्शे में दिखाने को संसद से मंजूरी दिलाई। 
* 29 जून को ‘ओली’ ने भारत के विरुद्ध बयानबाजी करते हुए कहा कि भारत उनकी सरकार को अस्थिर करना चाहता है और नेपाल में स्थित दूतावास इस साजिश में शामिल है। 
* 14 जुलाई को ‘ओली’ ने कहा कि असली अयोध्या नेपाल में है। इससे भारत में लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और ‘ओली’ के इस बयान पर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने नाराजगी भी जताई। 

भारत और नेपाल का रोटी-बेटी का रिश्ता है परंतु प्रधानमंत्री ‘ओली’ ने सदियों पुराने इस रिश्ते में दरार डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसके विरुद्ध नेपाल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी तथा ‘ओली’ के विरुद्ध आम जनता तथा विरोधी दल सड़कों पर उतर आए हैं तथा उनके प्रदर्शन दिन-ब-दिन उग्र होते जा रहे हैं और स्थिति पर नियंत्रण के लिए काठमांडू में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़ गए हैं। आज नेपाल में जिस तरह का माहौल है उसे देख कर लगता है कि आने वाले चुनाव में ऐसी सरकार आएगी जो ‘ओली’ द्वारा भारत के साथ खराब किए गए रिश्तों को सुधारने की दिशा में काम करेगी और नेपाल के साथ भारत के पहले जैसे सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बहाल होंगे।—विजय कुमार 

सौजन्य- पंजाब केसरी।

Share:

Monday, December 21, 2020

‘कैंसर ट्रेन’ निलंबित होने से ‘कैंसर पीड़ितों को हो रही परेशानी’ (पंजाब केसरी)

रासायनिक कीटनाशक दवाओं व खादों के इस्तेमाल में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और हरियाणा देश में सबसे अग्रणी हैं। इनके अधिक इस्तेमाल के कारण ही कैंसर पंजाब में महामारी का रूप धारण कर गया है। विशेष रूप से पंजाब का मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभा

रासायनिक कीटनाशक दवाओं व खादों के इस्तेमाल में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और हरियाणा देश में सबसे अग्रणी हैं। इनके अधिक इस्तेमाल के कारण ही कैंसर पंजाब में महामारी का रूप धारण कर गया है। विशेष रूप से पंजाब का मालवा क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित है। 

हर रात अबोहर से बीकानेर (राजस्थान) के लिए एक गाड़ी ‘अबोहर-जोधपुर एक्सप्रैस’ चलती थी। इसमें सवार होकर वहां जाने वाले अन्य यात्रियों के साथ-साथ पंजाब की कपास पट्टी-मानसा, बठिंडा, फरीदकोट, संगरूर, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का के किसान तथा अन्य कैंसर पीड़ित बीकानेर स्थित ‘आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सैंटर’ में इलाज के लिए जाया करते थे। इस रेलगाड़ी में यात्रा करने वाले 60 प्रतिशत यात्री पूरे पंजाब से आने वाले हर उम्र के कैंसर पीड़ित होते थे जो प्रतिदिन बीकानेर जाने वाले लगभग 100 कैंसर रोगियों की जीवन रेखा थी। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनसे यह पता चलता है कि उक्त गाड़ी के स्थगित होने से कैंसर पीड़ितों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

इस रेलगाड़ी में कैंसर पीड़ितों के लिए बीकानेर तक की यात्रा मुफ्त होने के अलावा रोगी के साथ जाने वाले परिचारक को भी किराए में 75 प्रतिशत की रियायत दी जाती थी और इसका नाम लोगों ने ‘कैंसर ट्रेन’ रख दिया था। पिछले 9 महीनों से इसके बंद होने के कारण बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ित इलाज के लिए बीकानेर नहीं जा पा रहे। इससे उन्हें तथा उनके परिजनों को भारी परेशानी हो रही है। ‘एडवांस्ड कैंसर इंस्टीच्यूट’ बठिंडा के निदेशक डा. दीपक अरोड़ा का भी कहना है कि कोरोना के कारण अस्पताल नहीं आ सकने वाले 10 प्रतिशत रोगियों का रोग बढ़ गया है अत: जितनी जल्दी यह ट्रेन बहाल की जा सके क्षेत्र के कैंसर पीड़ितों के लिए उतना ही अच्छा होगा। 

बठिंडा इंस्टीच्यूट में भी रोगियों की भीड़ बढ़ जाने से बड़े आप्रेशन करने के लिए छोटे आप्रेशन रोके जा रहे हैं। इसकी क्षमता 100 बैड की है और इसके साथ ही संगरूर में भी 50 बैड की क्षमता वाला ‘होमी भाभा कैंसर अस्पताल’ (टाटा) काम कर रहा है पर दोनों ही जगह ‘बैड्स’ तथा कैंसर विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की तुरंत जरूरत है। इस समय जबकि देश में सब तरह के कैंसर का प्रकोप दिनोंं दिन बढ़ता जा रहा है और प्रति दिन देश में 3500 व्यक्ति कैंसर से मर रहे हैं, सरकार को चाहिए कि वह चल रहे सरकारी व निजी कैंसरअस्पतालों में  बैड्स तथा विशेषज्ञ डाक्टरों  की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नए कैंसर अस्पताल खोलने और पहले से काम कर रहे अस्पतालों को प्रोत्साहित करने की दिशा में तत्काल पग उठाए।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Saturday, December 19, 2020

‘कठोर दंड के पात्र हैं प्लाज्मा में मिलावट करके लोगों की जान से खेलने वाले’ (पंजाब केसरी)

देश भर में आए दिन खाद्य पदार्थों से लेकर अनेक वस्तुओं में मिलावट के समाचार आते रहते हैं। शायद ही कोई ऐसी वस्तु होगी जो मिलावट से बची हुई हो। अब तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कोरोना से बचाव के लिए रोगियों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले प्लाज्मा में भी

देश भर में आए दिन खाद्य पदार्थों से लेकर अनेक वस्तुओं में मिलावट के समाचार आते रहते हैं। शायद ही कोई ऐसी वस्तु होगी जो मिलावट से बची हुई हो। अब तो यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कोरोना से बचाव के लिए रोगियों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले प्लाज्मा में भी मिलावट करके समाज के दुश्मनों द्वारा अनमोल प्राणों से खिलवाड़ किया जाने लगा है। मात्र 2 दिनों में ही मिलावट के 3 ऐसे मामले सामने आए हैं जो इस बात के ज्वलंत उदाहरण हैं कि देश में मिलावट की समस्या कितना गंभीर रूप धारण करती जा रही है। 

16 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश की हाथरस पुलिस ने नबीपुर इलाके में स्थित गर्म मसाला बनाने की एक फैक्टरी में छापा मार कर गधे की लीद, भूसा, एसिड और खाने के अयोग्य हानिकारक रंग मिला कर स्थानीय ब्रांडों के नकली मसाले बनाने के स्कैंडल का भंडाफोड़ कर 300 किलोग्राम से अधिक नकली लाल मिर्च, धनिया और गर्म मसाले के पैकेट जब्त किए। पुलिस ने फैक्टरी के मालिक ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ के मंडल सह-प्रभारी अनूप वाष्र्णेय को गिरफ्तार कर लिया है। ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ की स्थापना 2002 में योगी आदित्यनाथ (वर्तमान मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) ने की थी। 17 दिसम्बर को आगरा जिले के खंदौली कस्बे में पुलिस ने नकली घी बनाने की फैक्टरी में छापा मार कर जानवरों की चर्बी को चूल्हे पर पिघला कर बनाए हुए लगभग 125 किलो ‘नकली देसी घी’ के साथ 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। 

‘मोहल्ला व्यापारियान’ में इस नकली घी फैक्टरी के बगल में ही एक अवैध बूचडख़ाना भी चलाया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए फैक्टरी के मालिक चांद बाबू के अनुसार उसकी फैक्टरी में जानवरों की चर्बी को चूल्हे पर उबाल कर उसमें तय मात्रा में वनस्पति और रिफाइंड तेल के अलावा ‘एसैंस’ मिलाकर असली देसी घी जैसा नकली घी तैयार किया जाता है। उसने बताया कि वह लम्बे समय से नकली घी बनाकर आस-पास के इलाकों में सप्लाई कर रहा था। इस पर कुल 23 रुपए प्रति किलो का खर्च आता है जिसे वह व्यापारियों को 60 रुपए प्रति किलो बेचता है और व्यापारी इसी नकली घी को 200 रुपए प्रति किलो तक में बेचते हैं। 17 दिसम्बर को ही मिलावटी मसालों और नकली घी के कारखानों के बाद कोरोना रोगियों के उपचार में सहायक ‘असली प्लाज्मा’ की ओट में ‘मिलावटी प्लाज्मा’ और खून बेच कर मानव जीवन से खिलवाड़ किए जाने का स्कैंडल सामने आया है। 

‘प्लाज्मा’ रक्त में मौजूद एक तत्व है जिसमें 99 प्रतिशत पानी के अलावा प्रोटीन, मिनरल, कार्बनडाइआक्साइड व हार्मोन्स होते हैं। शरीर में कार्बनडाइआक्साइड का प्रवाह रक्त के ‘प्लाज्मा’ के माध्यम से ही होता है। ‘कोरोना’ के अटैक के बाद शरीर वायरस से लडऩा शुरू करता है और यह लड़ाई ‘प्लाज्मा’ में मौजूद ‘एंटीबॉडी’ लड़ती है। शरीर द्वारा पर्याप्त ‘एंटीबॉडी’ बना लेने पर ‘कोरोना’ को हराने में सहायता मिलती है।

ग्वालियर पुलिस ने लगभग 40 लाख रुपए का मिलावटी ‘प्लाज्मा’ और खून बेचकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने के आरोपी और इस कांड के मास्टरमाइंड ‘अजय त्यागी’ को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान ‘अजय त्यागी’ ने बताया कि वह एक यूनिट ‘प्लाज्मा’ खरीद कर इसमें ‘डिस्टिल्ड वाटर’ और ‘नार्मल स्लाइन’ मिलाता तथा इसकी मात्रा बढ़ा कर उस पर फर्जी मोहर लगा कर मरीजों के परिजनों को बेच देता था। ‘अजय त्यागी’ के अनुसार कुछ प्राइवेट अस्पतालों में काम करने वाले उसके साथी भी उसके इस काले धंधे में शामिल थे। 

पुलिस पूछताछ के दौरान ‘अजय त्यागी’ ने ‘ब्लड बैग’ खरीदने से लेकर ‘प्लाज्मा’ बनाने और उस पर सील लगाने तक का तरीका भी बताया। ‘अजय त्यागी’ ने बताया कि वह ग्वालियर स्थित एक लैब से खाली ‘ब्लड बैग’ खरीदता। इसमें पानी मिला ‘प्लाज्मा’ भरा जाता और यही ‘ब्लड बैग’ कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों को बेच दिया जाता था। मिलावटी खाद्य पदार्थों और ‘प्लाज्मा’ या रक्त से किसी का जीवन खतरे में डालना किसी की हत्या करने से कम गंभीर अपराध नहीं है और इस समाचार से गंभीर रोगों से पीड़ितों का ङ्क्षचताग्रस्त होना स्वाभाविक ही है। अत: ऐसा जघन्य अपराध करने वालों पर उसी लिहाज से कानून के अनुसार कार्रवाई करके हत्या के आरोप जैसी धाराओं में केस चला कर प्राण दंड जैसा कठोर दंड दिया जाना चाहिए ताकि इससे दूसरों को नसीहत मिले तथा रोगग्रस्त एवं ‘प्लाज्मा’ के जरूरतमंद रोगी बच सकें।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘भारत में विदेशी कम्पनियों को प्रोत्साहन के लिए उन्हें संरक्षण देना जरूरी’ (पंजाब केसरी)

उद्योग जगत में बढ़ती चीन की बादशाहत को चुनौती देने, अमरीका के साथ चीन के ट्रेड वार बढऩे और उसके बाद कोरोना वायरस महामारी के चलते अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा चीन में अपने कारखाने और कारोबार बंद करके अन्य एशियाई देशों का रुख करने की बातें कुछ

उद्योग जगत में बढ़ती चीन की बादशाहत को चुनौती देने, अमरीका के साथ चीन के ट्रेड वार बढऩे और उसके बाद कोरोना वायरस महामारी के चलते अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा चीन में अपने कारखाने और कारोबार  बंद करके अन्य एशियाई देशों का रुख करने की बातें कुछ समय से सुनाई देती आ रही हैं। विशेष रूप से वे कम्पनियां जो दुनिया भर में बिकने वाले टी.वी. से लेकर स्मार्टफोन जैसे अपने उत्पादों को चीन में कम लागत की वजह से बनवाती रही हैं, उनके अब भारत का रुख करने की सम्भावनाएं भी अधिक देखी जाने लगी हैं। आंकड़े भी यही दर्शाते हैं कि गत कुछ वर्षों के दौरान इन उत्पादों के निर्माण में भारत का हिस्सा लगातार बढ़ा है। 

स्मार्टफोन तथा कम्प्यूटर बनाने वाली अग्रणी कम्पनी ‘एप्पल’ भारत में कुछ ‘आईफोन’ मॉडल्स पहले से बना रही है और ऐसा कहा जा रहा है कि कम्पनी अपना ज्यादातर बिजनैस चीन से भारत में शिफ्ट करना चाहती है। वहीं ‘सैमसंग’ भी भारत में फोन बनाती है। कम्पनी ने नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल बनाने वाली फैक्टरी भी लगाई है। जून महीने में ही कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने घोषणा की थी कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन गया है। उन्होंने बताया था कि भारत में अब तक 300 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लग चुके हैं। उनके अनुसार भारत में 330 मिलियन मोबाइल हैंडसैट्स बनाए जा चुके हैं। 

केन्द्र सरकार ने देश में इलैक्ट्रॉनिक सामानों के निर्माण में तेजी लाने के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा भी की हुई है। परंतु गत 12 दिसम्बर को कर्नाटक के कोलार में ‘एप्पल’ के ‘आईफोन’ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में मैनेजमैंट द्वारा कई महीनों से वेतन न दिए जाने के कारण कर्मचारियों द्वारा की गई तोडफ़ोड़ इस बात का प्रमाण है कि हमारी सरकारें इस अहम मुद्दे को कितने हल्के में लेती हैं। 

उल्लेखनीय है कि यह प्लांट मोदी सरकार की विदेशी कम्पनियों को भारत में आकॢषत करने की पहली बड़ी सफलता के रूप में भी पेश किया जाता रहा है। इसे ताइवान की ‘विस्ट्रॉन कार्पोरेशन’ चलाती है। कम्पनी के अनुसार तोडफ़ोड़ तथा लूटपाट के चलते कम्पनी को 437.40 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। यहां 10,000 कर्मचारी काम करते हैं जिनमें से 80 प्रतिशत अस्थायी हैं। कम्पनी ने अपने बयान में कहा है कि तोडफ़ोड़ में ऑफिस के उपकरणों, मोबाइल फोन तथा मशीनों को हुए नुक्सान से 412.5 करोड़ रुपए का घाटा हुआ जबकि ऑफिस के इंफ्रास्ट्रक्चर को 10 करोड़, कार और गोल्फ कार्ट्स को 60 लाख रुपए का नुक्सान पहुंचा है। तोडफ़ोड़ से स्मार्टफोन और दूसरे गैजेट्स को 1.5 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। बताया जा रहा है कि 5000 कॉन्ट्रैक्ट पर आए मजदूरों और 2000 अज्ञात आरोपियों ने इस घटना को अंजाम दिया। 

पुलिस के अनुसार हजारों वर्कर नाइट शिफ्ट पूरी करने के बाद प्लांट से बाहर निकल रहे थे कि अचानक से वे तोडफ़ोड़ करने लगे। उन्होंने रिसैप्शन और असैम्बली यूनिट को नुक्सान पहुंचाया और कुछ गाडिय़ों में आग भी लगा दी। हजारों आईफोन भी चुरा लिए गए। यहां तक कि सबसे पहले मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला किया गया।

कहा जा रहा है कि कोरोना के चलते वेतन कटने और समय पर न मिलने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी थी परंतु सवाल उठता है कि कोरोना के कारण वेतन न दे पाने की समस्या तो अन्य कम्पनियों में भी है। अत: कर्मचारियों ने तोडफ़ोड़ व लूटपाट की बजाय मैनेजमैंट से बातचीत का रास्ता क्यों नहीं अपनाया और अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया!  इस समस्या को इतना बड़ा रूप लेने क्यों दिया गया? समय रहते इस तरह के मुद्दों को हल करने के लिए कोई पुख्ता कदम क्यों नहीं उठाए गए? अब दोषियों के विरुद्ध किस तरह की कार्रवाई की जाएगी और कम्पनी को हुए नुक्सान की भरपाई कौन करेगा?

कर्नाटक में हाल के दिनों में कर्मचारियों के असंतोष से जुड़ी यह एकमात्र घटना नहीं है। ‘टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स’ में 10 नवम्बर से 3500 कर्मचारी हड़ताल पर हैं तथा कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन के 1 लाख कर्मचारियों ने भी 11 दिसम्बर को राज्यव्यापी हड़ताल की थी जिससे राज्य में 20,000 बसों के पहिए थम गए थे। पुलिस ने ‘विस्ट्रॉन कार्पोरेशन’ के प्लांट में हुई तोडफ़ोड़ पर छानबीन शुरू की है पर यदि ऐसी गम्भीर घटनाएं होंगी तो भला कितनी बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भारत में अपना निर्माण शुरू करने की हिम्मत जुटा पाएंगी? 

ऐसे में जहां यह पता लगाना अत्यंत आवश्यक है कि इस घटना के पीछे किन तत्वों का हाथ है, वहीं भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा तुरंत कठोर दंड प्रावधानों वाले कानून की व्यवस्था करना भी जरूरी है। ऐसा न करने पर विश्व की बड़ी कम्पनियां भारत में आने से कतराने लगेंगी जिससे भारत की साख को भारी धक्का लग सकता है। यदि भारत को निर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनना है तो कई ऐसी बातें हैं जिनकी ओर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले तो कम्पनियों को इस बात का भरोसा दिलाना भी बाकी है कि काम करने के लिए उन्हें यहां एक सुरक्षित माहौल मिलेगा और कानून-व्यवस्था का सख्ती से पालन होगा और इसके साथ ही कर्मियों के अधिकारों को भी सुरक्षित करने की व्यवस्था करनी होगी।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘इमरान सरकार की हालत डावांडोल’ ‘पाकिस्तान में कभी भी धमाका संभावित’ (पंजाब केसरी)

इन दिनों पाकिस्तान से जो खबरें आ रही हैं उनसे वहां की अत्यंत निराशाजनक तस्वीर सामने आ रही है। ऐसा लगता है कि वहां पर किसी भी समय कोई बड़ा धमाका हो सकता है तथा आंतरिक असंतोष, भ्रष्टाचार, कमरतोड़ महंगाई, लाकानूनी आदि...

इन दिनों पाकिस्तान से जो खबरें आ रही हैं उनसे वहां की अत्यंत निराशाजनक तस्वीर सामने आ रही है। ऐसा लगता है कि वहां पर किसी भी समय कोई बड़ा धमाका हो सकता है तथा आंतरिक असंतोष, भ्रष्टाचार, कमरतोड़ महंगाई, लाकानूनी आदि समस्याओं से जूझ रही इमरान खान की सरकार कभी भी धराशायी हो सकती है। यद्यपि अमीर वर्ग से संबंधित लोगों को तो हर चीज आसानी से उपलब्ध है परन्तु देश में व्याप्त कमरतोड़ महंगाई के कारण देश की बड़ी आबादी, जो बहुत ज्यादा गरीब है, अनिवार्य जीवनोपयोगी वस्तुओं के लिए तरस रही है और उसका जीना दूभर हो गया है। 

वहां अदरक 1000 रुपए किलो, शिमला मिर्च 200 रुपए किलो, दूध 135 रुपए लीटर, डबल रोटी 150 रुपए, गेहूं 60 रुपए, चीनी 81 रुपए, चावल 200 रुपए, सेब 250 रुपए, टमाटर 200 रुपए, प्याज 90 रुपए किलो तथा पानी की बोतल 80 रुपए तक में बिक रही है। ढाबों पर एक रोटी 30 रुपए में मिलती है। देश में अराजकता जैसी स्थिति के कारण लूटपाट तथा दमन जारी है। इसी कारण इन दिनों वहां इमरान सरकार को सत्ताच्युत करने के लिए 11 विपक्षी दलों ने  मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व में ‘पाकिस्तान डैमोक्रेटिक मूवमैंट’ (पी.डी.एम.) का गठन कर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज)’ (पी.एम.एल.-एन) की अध्यक्ष और उनकी बेटी मरियम नवाज तथा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टों भी शामिल हैं। 

इमरान खान की हालत का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अपने विरुद्ध बढ़ रहे जनअसंतोष के कारण 2018 में सत्ता ग्रहण करने के बाद से अब तक वह चार बार अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर चुके हैं। हाल ही में किए फेरबदल में इमरान ने उस बड़बोले शेख रशीद अहमद को गृहमंत्री नियुक्त किया है जिसका उनके साथ ‘36’ का आंकड़ा रहा है और जो अतीत में रेल मंत्री के रूप में उल्टे-पुल्टे बयान देकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान की किरकिरी करवा चुका है। सेना और गुप्तचर एजैंसी आई.एस.आई. की शह पर हो रहे भारी अत्याचारों के चलते अवैध रूप से कब्जाए गए गिलगित-बाल्तिस्तान, बलूचिस्तान, सिंध और ‘फाटा’ आदि में आजादी की मांग उठ खड़ी हुई है और प्रदर्शन जारी हैं। इसी के लिए सिंध में लम्बे समय से ‘जीए सिंध’ आंदोलन जारी है। 

वास्तव में पंजाब को छोड़ कर सभी राज्य पाकिस्तान से अलग होकर अपना स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं। सीमा (एल.ओ.सी.) के पार पाक अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के विरुद्ध लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां से पलायन करके भारत में आए लोगों का कहना है कि उस नरक से निकलने के बाद भारत आकर उनकी जिंदगी संवर गई है और वे सुखी हो गए हैं। हालत यहां तक पहुंच गई है कि अपने पाले हुए जिन आतंकवादियों की सहायता से पाकिस्तानी सेना भारत में हिंसा करवा रही है वही आतंकवादी अब बेकाबू होकर अपने ही देश में धमाके करके लोगों को मार रहे हैं और पाकिस्तान के सबसे बड़े दोस्त चीन के नागरिकों पर भी हमले करने लगे हैं। ऐसे ही एक आतंकी हमले में 15 दिसम्बर को चीनी नागरिक बाल-बाल बचे। अब तो पाकिस्तान में सेना पर भी हमले होने लगे हैं और 16 दिसम्बर को ही कराची में सेना के वाहनों पर हमले में 2 सैनिक घायल हो गए। 

आर्थिक तौर पर भी पाकिस्तान सरकार बुरी तरह कंगाल हो चुकी है और इसके शासकों को अपने सिर पर चढ़ा कर्ज उतारने के लिए भी दूसरे देशों से कर्ज लेना पड़ रहा है। इसी वर्ष अगस्त में चीन ने पाकिस्तान को 1.5 बिलियन डालर का कर्ज दिया है ताकि वह सऊदी अरब का कुछ कर्ज उतार सके। हालांकि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ भारत के साथ सम्बन्ध मधुर बनाना चाहते थे परन्तु पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने उनके प्रयासों को तारपीडो कर दिया और तब से अब तक भारत तथा पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध सामान्य नहीं हो सके हैं। 

जहां तक भारत का संबंध है सी.डी.एस. जनरल बिपिन रावत के अनुसार भारत किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है और सीमा पर 15 दिनों तक चल सकने वाले युद्ध के लिए गोला-बारूद जमा करने को हरी झंडी दे दी है। ऐसे में यदि भारत में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रहा तो भारत मुंह तोड़ जवाब दे सकता है। इसी प्रकार के हालात को देखते हुए 5 में से 4 पाकिस्तानियों का विश्वास है कि देश गलत दिशा में जा रहा है तथा राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि इमरान सरकार अब चंद दिनों की ही मेहमान रह गई है।—विजय कुमार  

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

Monday, December 14, 2020

भारत विरोधी गतिविधियों से ‘बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान’ (पंजाब केसरी)

बार-बार मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान के शासक अपने अतीत के अनुभवों से कोई सबक नहीं ले रहे तथा आतंकवादियों को शरण, समर्थन और प्रशिक्षण देने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा समाचारों के अनुसार पाकिस्तान के शासकों ने बालाकोट...

बार-बार मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान के शासक अपने अतीत के अनुभवों से कोई सबक नहीं ले रहे तथा आतंकवादियों को शरण, समर्थन और प्रशिक्षण देने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा समाचारों के अनुसार पाकिस्तान के शासकों ने बालाकोट में बड़ी संख्या में ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के आतंकियों को भारत में हमला करने के लिए ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है। यह ट्रेनिंग उसी स्थान पर दी जा रही है जहां फरवरी, 2019 में भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राइक कर वहां मौजूद आतंकवादियों के सभी कैंपों को ध्वस्त कर दिया था। इसी ट्रेनिंग कैम्प का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वहां ट्रेनिंग ले रहे आतंकवादी मिल कर हिंदुओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। 

इस ट्रेनिंग सैंटर में कुख्यात आतंकवादी मसूद अजहर का भाई मौलाना अब्दुल रऊफ अजहर भी मौजूद था और उसे ही भारत के विरुद्ध चलाए जाने वाले तमाम ऑप्रेशन्स का इंचार्ज बनाया गया है। वहां मौजूद आतंकवादी भारत के विरुद्ध कार्रवाई के लिए तैयार बताए जाते हैं। पाकिस्तान की बदनीयती का एक और सबूत उस समय मिला जब पाकिस्तान की इमरान सरकार के प्रस्ताव पर ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ द्वारा घोषित आतंकवादी और 2008 के मुम्बई हमलों, जिसमें लगभग 166 लोग मारे गए थे, के मुख्य साजिशकत्र्ता जकी-उर-रहमान लखवी को महीने में डेढ़ लाख पाकिस्तानी रुपए का खर्च देने की अनुमति संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रदान कर दी है। 

मुम्बई हमले के आरोप में रावलपिंडी की अडियाला जेल में कैद 60 वर्षीय लखवी को पाकिस्तान सरकार ने अप्रैल 2015 में इस आधार पर जेल से रिहा कर दिया था कि ‘‘उसके विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।’’  रिहाई के बाद काफी समय तक वह अंडरग्राऊंड भी रहा था। ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ की ‘1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति’ द्वारा प्रदत्त अनुमति के अनुसार यह धनराशि लखवी के उसी बैंक खाते में डाली जाएगी जिससे उसके प्रतिबंधित आतंकवादी घोषित होने पर लेन-देन बंद किया गया था। 

रिपोर्ट के अनुसार लश्कर-ए-तैयबा और अल-कायदा से संबद्ध लखवी को हर महीने भोजन के लिए 50,000, दवा के लिए 45,000, वकीलों की फीस और दूसरे खर्चों के लिए 20-20 हजार और यात्रा के लिए 15,000 रुपए मासिक दिए जाएंगे। बालाकोट में पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी कैम्प दोबारा शुरू करना और पाकिस्तान की इमरान खां सरकार द्वारा कुख्यात आतंकवादी लखवी के लिए मासिक खर्च बहाल करवाना उसकी बदनीयती का ही प्रमाण है। 

आमतौर पर यह देखा जाता है कि जब पाकिस्तानी सरकार अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाना चाहती है तो यह न केवल भारत के खिलाफ कुप्रचार चालू कर देती है बल्कि आतंकवादी गतिविधियों को भी बढ़ावा देती है। कहीं इस बार जो बाइडेन के निर्वाचित होने पर ही पाकिस्तान को ऐसा लग रहा हो कि अब उस कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। अत: भारत सरकार और सेना को पाकिस्तान की ओर से लगातार अधिकतम सतर्क और सजग रहने की जरूरत है। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

न्यायमूर्ति बिंदल की ‘टिप्पणी’ ‘सरकारी अधिकारी सो रहे कुंभकर्ण की नींद’ (पंजाब केसरी)

रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर एक बार ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा तो ‘इंद्रासन’ प्राप्त करने के इच्छुक कुंभकर्ण ने भूलवश ‘इंद्रासन’ की बजाय ‘निद्रासन’ का

रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर एक बार ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा तो ‘इंद्रासन’ प्राप्त करने के इच्छुक कुंभकर्ण ने भूलवश ‘इंद्रासन’ की बजाय ‘निद्रासन’ का वर मांग लिया।

ब्रह्मा जी के ‘तथास्तु’ कहते ही जब कुंभकर्ण को अपनी भूल का एहसास हुआ तो वह ब्रह्मा जी से यह वरदान वापस लेने के लिए गिड़गिड़ाने लगा तो उन्होंने कहा कि वरदान वापस तो नहीं हो सकता अलबत्ता तुम 6 महीने के बाद एक दिन के लिए निद्रा से जाग सकोगे। जब सीताहरण के बाद रावण का राज्य खतरे में पड़ गया और युद्ध में उसके अनेक परिजन एवं योद्धा मारे गए तब रावण के मन में कुंभकर्ण की सहायता लेने का विचार आया परंतु उस समय वह घोर निद्रा में था। 

रावण के अनुचर ढोल-नगाड़े बजाकर और कई अन्य उपाय कर ही कुंभकर्ण को जगा पाए और उसके बाद श्री राम से युद्ध करने के लिए वह रणभूमि में चला गया। तभी से महाआलसी लोगों की तुलना कुंभकर्ण से की जाने लगी। ‘रामायण’ के इसी प्रसंग का उदाहरण 9 दिसम्बर को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह कह कर दिया कि ‘‘लंबित केसों में आपत्तियां और उत्तर दायर करने के मामले में हमारे अधिकारी कुंभकर्ण से कम नहीं हैं।’’

जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2018 में एक सड़क निर्माण के टैंडर पर एक कम्पनी द्वारा लिए गए अंतरिम स्टे आर्डर को समाप्त करवाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर न्यायमूर्ति बिंदल ने सुप्रीमकोर्ट की एक पुरानी टिप्पणी का हवाला देते हुए यह बात कही। इस सड़क निर्माण के लिए उत्तरदायी अधिकारियों द्वारा स्टे आर्डर न तुड़वाने से न सिर्फ उक्त सड़क निर्माण की लागत बढ़ गई बल्कि सड़क न बन पाने के कारण क्षेत्रवासी अभी तक इस सुविधा से वंचित हैं। 

न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा, ‘‘अधिकारियों की इस तरह की निष्क्रियता का यह कोई अकेला मामला नहीं है न जाने देश में ऐसे कितने मामले होंगे जिस कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।’’ ‘‘जिस प्रकार कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण के अनुचरों को उसके निकट भारी शोर-शराबा करने के अलावा तरह-तरह के उपाय अपनाने पड़े थे, वैसे ही सरकारी अधिकारियों को भी गहरी नींद से जगाने के लिए तरह-तरह के उपाय करने पड़ते हैं। अत: इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उनकी जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।’’ 

उल्लेखनीय है कि अधिकारियों की लापरवाही के अनेक मामले सामने आते रहते हैं। देश में आवासीय इलाकों, सड़कों और खेतों आदि के ऊपर से गुजरने वाली बेतरतीब हाई टैंशन बिजली की नंगी तारों से मूल्यवान प्राण जा रहे हैं परंतु अधिकारियों से बार-बार गुहार करने के बावजूद यह समस्या ज्यों की त्यों है और लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं जिसके मात्र 6 दिसम्बर से 11 दिसम्बर तक 6 दिनों के 6 उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

* 6 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश में ‘महाराजगंज’ के ‘बेनीगंज’ गांव में शादी समारोह के लिए टैंट लगा रहा युवक ऊपर से गुजर रही 11000 वोल्ट की तार की चपेट में आने से मारा गया।
* 9 दिसम्बर को लुधियाना में ‘बहादुर के’ रोड चुंगी के निकट एक फैक्टरी में छत पर लोहे की सीढ़ी लगाते हुए ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज तार से सीढ़ी छू जाने के चलते एक कामगार की मृत्यु हो गई।
* 9 दिसम्बर को झारखंड के ‘पलामू’ जिले में सड़क पर गुजर रही बारातियों की एक बस बहुत नजदीक से गुजर रही 11,000 वोल्ट की बिजली की तार की चपेट में आ गई जिससे एक बाराती की जान चली गई। 

* 10 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश में ‘कौशाम्बी’ के ‘गौहानी’ गांव में बांस लेकर जा रहे युवक ने ऊपर से गुजर रही हाईटैंशन तार की चपेट में आकर दम तोड़ दिया।
* 11 दिसम्बर को राजस्थान के ‘बांसवाड़ा’ में सड़क के ऊपर लटक रही हाईटैंशन तार टूट कर वहां से स्कूटी पर जा रही एक महिला पर जा गिरी जिससे वह करंट लगने से तड़प-तड़प कर मर गई। 
* 11 दिसम्बर को ‘ग्रेटर नोएडा’ के ‘मकनपुर खादर’ गांव में एक बारात की ‘घुड़चढ़ी’ के दौरान ऊपर लटक रही हाई वोल्टेज तार की चपेट में आने से 3 बाराती बुरी तरह झुलस गए और 13 वर्षीय बच्चे की मृत्यु हो गई। 

उक्त घटनाएं बिजली विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और नागरिक आबादी के स्थानों के ऊपर से गुजर रहे ढीले-ढाले तार न हटाने का ही परिणाम हैं। अत: श्री ङ्क्षबदल द्वारा सरकारी अधिकारियों की कुंभकर्ण से तुलना करना सौ फीसदी सही है क्योंकि यह किसी एक प्रदेश की नहीं बल्कि देश के अधिकांश प्रदेशों की यही स्थिति है। 

अत: न्यायमूर्ति श्री बिंदल की टिप्पणी का देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के मंत्रियों व विभागाध्यक्षों, पावर कार्पोरेशनों के चेयरमैनों आदि से यह मामला उठाना चाहिए और औचक छापेमारी करके उनके काम की पड़ताल करना तथा आदेशों का पालन न होने की स्थिति में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि उन्हें नसीहत मिले और वे लापरवाही बरतने से बाज आएं।—विजय कुमार

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही’‘बंगाल के राजनीतिक तापमान में उबाल’ (पंजाब केसरी)

पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनावों से पूर्व भाजपा तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ ‘तृणमूल कांग्रेस’ के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार

पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनावों से पूर्व भाजपा तथा राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ ‘तृणमूल कांग्रेस’ के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाती आ रही भाजपा  2011 के विधानसभा चुनावों में राज्य में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। गत वर्ष लोकसभा चुनावों में राज्य की 42 में से 18 सीटें जीत कर उत्साहित भाजपा ने अब 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को सत्ताच्युत करके राज्य की 294 में से 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है जबकि ममता बनर्जी तीसरी बार विजय प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं। 

अभी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया आरम्भ भी नहीं हुई है और दोनों दलों में टकराव शुरू हो गया है। वहां दोनों ही दलों से जुड़े लोगों पर हमले हो रहे हैं। इस वर्ष जून से सितम्बर के बीच ही राज्य में 12 राजनीतिक कार्यकत्र्ताओं की हत्या हो चुकी है जिनमें से 6 भाजपा और 5 तृणमूल कांग्रेस के थे। दोनों दलों के बीच तनाव तब शिखर पर जा पहुंचा जब 10 दिसम्बर को भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की पश्चिम बंगाल की यात्रा के दौरान ममता के भतीजे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले सांसद अभिषेक बनर्जी के क्षेत्र डायमंड हार्बर जाते समय नड्डा तथा उनके साथ यात्रा कर रहे भाजपा के राज्य प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, पार्टी उपाध्यक्ष मुकुल राय तथा राष्ट्रीय सचिव अनुपम हाजरा के काफिले पर हमला कर दिया गया। 

श्री नड्डा को तो कोई चोट नहीं आई परंतु कैलाश विजयवर्गीय, मुकुल राय तथा अनुपम हाजरा को पत्थर लगे और उनकी कारों के शीशे टूट गए। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ से इस घटना की रिपोर्ट तलब की और कहा है कि ममता को इस प्रायोजित हिंसा के लिए प्रदेश की शांतिप्रिय जनता को जवाब देना होगा। भाजपा नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि यह हमला नड्डा के कार्यक्रम को नाकाम बनाने के लिए किया गया और कोलकाता से डायमंड हार्बर को जोडऩे वाले 52 किलोमीटर लम्बे रास्ते पर कोई पुलिस नहीं थी वहीं ममता बनर्जी ने इस पर पलटवार करते हुए इस हमले को नौटंकी बताया है। 

भाजपा नेतृत्व की तुलना तानाशाहों, हिटलर और मुसोलिनी से करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘वे (भाजपा कार्यकत्र्ता) हर दिन हथियारों के साथ रैलियों के लिए आते हैं। वे खुद को थप्पड़ मार रहे हैं और इसका आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगा रहे हैं।’’‘‘उन्होंने ऐसा लोगों का ध्यान खींचने के लिए किया है। उनके काफिले में 50 कारें क्यों थीं? मैं सिर्फ तीन कारों में चलती हूं। इतनी जल्दी वीडियो बनाकर कैसे जारी कर दिए गए? उस समय भाजपा नेताओं के साथ तैनात केंद्रीय पुलिस बल के सदस्य क्या कर रहे थे? मैं इसे चुनौती दे सकती हूं और मैंने प्रशासन से इसकी जांच करने के लिए कहा है।’’ 

अभिषेक बनर्जी ने इस पर कहा है कि ‘‘यदि आम आदमी अपने गुस्से की अभिव्यक्ति कर रहा है तो मैं क्या कर सकता हूं। भाजपा देश में भय और हिंसा फैलाती है परंतु बंगाल में तो उसने संतुलन ही खो दिया है।’’ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में जारी तनातनी के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ की रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने राज्य के डी.जी.पी. और मुख्य सचिव को 14 दिसम्बर को दिल्ली तलब कर लिया है वहीं 11 दिसम्बर को धनखड़ ने संवाददाता सम्मेलन में ममता बनर्जी पर हमला बोला और चेतावनी दी कि ‘‘ उन्हें कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आग से नहीं खेलना चाहिए और यदि राज्य में संविधान का पालन नहीं हुआ तो मेरा रोल शुरू हो जाएगा।’’ 

वैसे तो बंगाल का इतिहास रहा है कि जब भी चुनाव आते हैं, चाहे यह मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के बीच हो या किसी अन्य के बीच, वहां हमेशा ङ्क्षहसा होती रही है परंतु इस बार यह रुझान कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है जिसे किसी भी रूप में उचित नहीं कहा जा सकता। लगता है कि यह सब कुछ कहीं न कहीं निजी स्वार्थों से प्रेरित है। यह भी उल्लेखनीय है कि मई, 2019 में गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे के समय भी इसी तरह का बवाल मचा था। 

नड्डा के काफिले पर हमले के सिलसिले में 7 लोगों की गिरफ्तारी तथा 3 पर एफ.आई.आर. दर्ज की गई लेकिन राज्य के ‘24 परगना’ जिले में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस से सम्बन्धित छात्रों में मारपीट का समाचार भी आ गया है और इसी बीच एक बार फिर भाजपा ने 19 और 20 दिसम्बर को श्री अमित शाह के बंगाल दौरे की घोषणा कर दी है। ऐसे में राज्य का राजनीतिक तापमान शांत होने की तो कोई संभावना दिखाई नहीं देती, अलबत्ता इसके गर्माने से राज्य का माहौल बिगडऩे का खतरा अवश्य पैदा होता दिखाई दे रहा है। 

हालांकि एक वर्ग राज्य में राष्ट्रपति शासन का इच्छुक है परंतु दूसरों का मानना है कि इससे ममता जनता की हमदर्दी पाकर चुनाव जीत सकती हैं, ऐसे में राज्यपाल श्री धनखड़ ने अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। ऐसे में क्या मान लिया जाए कि राज्य के राज्यपाल शांति का वातावरण तैयार करेंगे या फिर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के रास्ते का मार्ग प्रशस्त करेंगे। 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम’ ‘रहस्यमय रोगों के रूप में निकलने लगा’ (पंजाब केसरी)

हिन्दू धर्म ग्रंथों में प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रकृति पूजन का नियम बताया गया है तथा पेड़-पौधों, नदी-पर्वत, ग्रह-नक्षत्र, अग्नि और वायु सहित प्रकृति के विभिन्न रूपों के साथ मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं। यहां पेड़ की तुलना संतान से की

हिन्दू धर्म ग्रंथों में प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रकृति पूजन का नियम बताया गया है तथा पेड़-पौधों, नदी-पर्वत, ग्रह-नक्षत्र, अग्नि और वायु सहित प्रकृति के विभिन्न रूपों के साथ मानवीय रिश्ते जोड़े गए हैं। यहां पेड़ की तुलना संतान से की गई है तो नदी और पृथ्वी को मां तथा ग्रह-नक्षत्र, पहाड़ एवं वायु को देव रूप माना गया है। इनकी हमें रक्षा करनी चाहिए परंतु हम अपने ही गलत कार्यों से प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप न सिर्फ पर्यावरण बिगडऩे से तरह-तरह के प्राकृतिक प्रकोपों भूकम्पों, बेमौसमी वर्षा, बाढ़ों, आकाशीय बिजली गिरने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के चलते भारी विनाश हो रहा है बल्कि लोग गम्भीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। 

प्रकृति के इसी प्रकोप की ताजा मिसाल हाल ही में ‘आंध्र प्रदेश के एलुरु’ इलाके में 5 दिसम्बर रात से फैली रहस्यमय बीमारी के रूप में सामने आई जिसके परिणामस्वरूप अब तक इस रोग से 575 से अधिक लोग पीड़ित हो चुके हैं। इन लोगों को घबराहट, उल्टियां, अस्थायी स्मृति लोप, सिर तथा पीठ में दर्द शुरू हो गया। 

अचानक उन्हें 3 से 5 मिनट तक जारी रहने वाले मिर्गी जैसे दौरे पडऩे लगे और वे चक्कर आने से बेहोश होकर गिरने लगे।इस रहस्यमय रोग से मचे हड़कम्प के बीच इसके कारणों का पता लगाने के लिए राज्य में पहुंची ‘ऑल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ  मैडीकल साइंसेज’ (एम्स) की टीम ने शुरुआती जांच में शहर में पीने के पानी और दूध में ‘निक्कल’(गिलट) और ‘सीसा’ (जस्ता) जैसे भारी तत्वों की मौजूदगी को इसका कारण बताया है। ‘एलुरु’ में ‘गोदावरी’ तथा ‘कृष्णा’ नदियों की नहरों से कारखानों, अस्पतालों, घरों आदि में पानी की सप्लाई की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में सप्लाई किए गए पानी में भारी मात्रा में कीटनाशकों के ‘अवशेषों’ की मौजूदगी का भी पता चला जो कहीं-कहीं  ‘जायज’ (परमिसिबल) मात्रा से हजारों गुणा अधिक है। इस रोग से पीड़ित लोगों के खून में भी भारी मात्रा में कीटनाशक पाए गए हैं। 

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की ओर से तैनात विशेषज्ञों के अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम ने 8 दिसम्बर को ‘एलुरु’ पहुंच कर नमूने लेने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद बीमारी के कारणों के बारे मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रैड्डी को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसके आधार पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रोगियों के शरीर में भारी धातु तत्वों की मौजूदगी की गहन जांच का निर्देश दे दिया है।

डाक्टर यह भी मान रहे हैं कि कोविड की रोकथाम के लिए इस्तेमाल किया गया ब्लीच पाऊडर और सैनिटाइजर भी इसका एक कारण हो सकता है क्योंकि इसके तत्व पानी में घुले हुए हो सकते हैं जिससे यह समस्या पैदा हुई है। ‘एलुरु नगरपालिका’ के अधिकारियों के अनुसार किसानों द्वारा भारी मात्रा में अपनी फसलों में कीटनाशकों का इस्तेमाल करने के कारण संभवत: इस वर्ष राज्य में अक्तूबर-नवम्बर में भारी वर्षा के कारण आई बाढ़ के चलते खेतों से बहकर आया पानी अपने साथ कीटनाशक भी ले आया हो। जो भी हो, यह चाहे प्राकृतिक कारणों से हुआ हो अथवा मानवीय भूल से, दोनों ही स्थितियों में इसके कारणों का निवारण करना जरूरी है और यदि इसका कारण मानव का प्रकृति से छेड़छाड़ या शरारत करना पाया जाता है तो हमें और अधिक सतर्क होने और स्वयं में सुधार करने की जरूरत है। 

यह केवल किसी एक राज्य की बात नहीं, देश में बड़े पैमाने पर विभिन्न रूपों में प्रकृति व पर्यावरण से छेड़छाड़ जारी है। इसमें अधिक बच्चे पैदा करके जनसंख्या का संतुलन बिगाडऩा, अधिक उपज के लिए अंधाधुंध रासायनिक खादों व विषैले कीटनाशकों का प्रयोग, नदियों तथा अन्य जलस्रोतों में कल-कारखानों और चमड़ा रंगने वाली इकाइयों का जहरीला पानी छोडऩा, वनों का अंधाधुंध कटान तथा उन्हें आग लगाना आदि शामिल है। अत: विभिन्न आपदाओं के रूप में प्रकृति रह-रह कर मानव जाति को चेतावनी दे रही है कि ‘अभी भी मुझसे छेड़छाड़ करना बंद कर दो’ और संभल जाओ वर्ना मेरा इंतकाम पहले से भी अधिक भयानक और विनाशकारी होगा।-विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:

‘...जब प्रैजीडैंट सिकंदर मिर्जा ने कश्मीर पर कार्रवाई करने का आदेश दिया’ (पंजाब केसरी)

‘‘पहले तीन महीने तक मुझे और अन्य लोगों को क्रियात्मक रूप से अलग-अलग स्थानों पर अलग रूप से कैद में रखा गया। हमें कोई समाचार पत्र, चिट्ठी, रिश्तेदारों के साथ मुलाकात और वकीलों के साथ सलाह-मशविरे की इजाजत नहीं दी गई और न ही...

‘‘पहले तीन महीने तक मुझे और अन्य लोगों को क्रियात्मक रूप से अलग-अलग स्थानों पर अलग रूप से कैद में रखा गया। हमें कोई समाचार पत्र, चिट्ठी, रिश्तेदारों के साथ मुलाकात और वकीलों के साथ सलाह-मशविरे की इजाजत नहीं दी गई और न ही चार्जशीट दी गई। इसके पश्चात् हैदराबाद की जेल में मुकद्दमे की खुफिया सुनवाई शुरू हुई। मुकद्दमे की सुनवाई के दौरान 285 गवाहों के बयान इस्तगासा के पक्ष में लिए गए। बचाव और सफाई के लिए मेरे पास कोई गवाह नहीं था।’’

‘‘ट्रिब्यूनल के एक जज ने अदालत में यह कहा कि यह सबसे अधिक गैर-इंसानी कानूनों में से एक यह कानून है जो हमें अपील के अधिकार से वंचित करता है। यह फिर इंडियन आर्मी एक्ट की शर्तों को मुझ पर लागू करता है, जिसका संबंध बीते समय से है। हालांकि गुजरे जमाने के कानूनों को लागू करना यू.एन. के मानवाधिकार चार्टर से टकराता है जिसे हमने स्वीकार किया है।’’ 

‘‘इस मुकद्दमे को खत्म होने में डेढ़ साल लग गया और दी गई सजाएं 14 साल तक कैद अथवा 4 साल कैद आगे बा-मुशक्कत थी। मुकद्दमे 3000 पृष्ठों पर आधारित थे जबकि फैसला 1000 से ज्यादा पृष्ठों मेें था। हमें उनकी प्रतियां लेने की आज्ञा नहीं दी गई। यह सारा रिकार्ड अभी तक जारी नहीं किया गया है। मई 1954 में गवर्नर जनरल गुलाम मोहम्मद ने मंत्रिमंडल को बरतरफ (निष्कासित) कर दिया और विधानसभा को भंग कर दिया। भंग की गई विधानसभा के संबंध में सिंध के चीफ जस्टिस ने यह घोषणा की कि विधानसभा को भंग करना गलत था। प्रादेशिक अदालत ने गवर्नर जनरल को इस मुश्किल से आंशिक रूप से बचाया परन्तु इस सारी कार्रवाई में उससे पहले स्वीकार किए गए कुछ कानूनों के संबंध में प्रश्न उठाए गए। अत: अप्रैल 1955 में लाहौर हाईकोर्ट ने हमें हैबियस काप्र्स अर्जी पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया।’’ 

‘‘परन्तु सरकार ने इसके कुछ घंटों के बाद हमें दोबारा गिरफ्तार कर लिया। परन्तु तीन हफ्तों के पश्चात् जस्टिस एम.आर. कियानी के अधीन बैंच ने कामानत पर हमारी रिहाई का आदेश जारी किया। फिर भी मुकद्दमा तो अभी $खत्म नहीं हुआ था। अत: हमने स्वयं ही नई हुकूमत की पुष्टि पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को आरंभ किया। जिनमें जनरल अयूब खान प्रतिरक्षा मंत्री की हैसियत से भी एक मैंबर थे, इसके पश्चात् मैंने प्रैजीडैंट सिकंदर मिर्जा से मुलाकात की। उन्होंने मुझे बताया कि सारा का सारा मंत्रिमंडल इस मामले के खात्मे के लिए राजी है। लेकिन अकेले जनरल अयूब खान ने ही हमारे वापस जेल जाने पर जिद की। स्पष्ट रूप से अयूब खान की जिद का बुनियादी कारण यह था कि उन्हें डर था कि अगर मैं बाहर निकला तो मैं उन्हें गोली मार डालूंगा।’’ 

मैंने रिहाई के कुछ महीनों के बाद 1956 में फिर एक पर्चा लिखा जिसका शीर्षक था ‘कश्मीर समस्या को हल करने का तरीका’। प्रैजीडैंट पाकिस्तान सिकंदर मिर्जा ने इस पर दिलचस्पी लेते हुए पूछा कि कश्मीर में कार्रवाई की हमें क्या जरूरत होगी। प्रैजीडैंट ने मुझसे एक सवाल किया कि लाहौर की रक्षा कैसे की जाएगी यदि भारतीय सेना ने इधर हमला कर दिया। तब शहर के बचाव के लिए शहर के आसपास गहरी खंदकों (खाइयों) और टैंक रोधी प्रणाली बनाने पर विचार हुआ। लाहौर की सुरक्षा के संबंध में संतुष्ट होने के बाद प्रैजीडैंट सिकंदर मिर्जा ने जनरल अयूब खान को मशविरा दिया कि वह इस योजना (तोड़-फोड़ की) के तहत मकबूजा कश्मीर में आगे बढ़ें। अयूब खान ने इस उद्देश्य के लिए हथियारों की खरीददारी के वास्ते इटली जाने का समय मांगा। 

‘‘केवल एक बार किसी एक विशेष समारोह में वजीर-ए-आजम मलिक फिरोज खान नून ने एक तरफ मेरे कान में बताया कि अकबर आपको यह जानकर खुशी होगी कि हमने इसकी शुरूआत कर दी है’’ मुझे लगा कि शायद वह कश्मीर में कार्रवाई के विषय पर इशारा करना चाह रहे थे। 1970 की बात है हमने अभी तक कश्मीर की आजादी के लिए एक भी सही कदम नहीं उठाया।‘‘

सच्चाई यह है कि युद्धों/लड़ाइयों में जीत और हार की निर्भरता बहुत से कारणों, हालात एवं आपसी मामलों पर है और विचारधारा की दृष्टि से इनका हिसाब नहीं लिया जा सकता। केवल भूगोल का प्रभाव ही इतना बड़ा है कि वह किसी भी युद्ध का पासा पलट सकता है। क्षेत्रीय विस्तार को अगर होशियारी से इस्तेमाल किया जाए जैसा कि रूस ने नेपोलियन  और फिर हिटलर के खिलाफ भी किया था तो वह दुश्मन को हराने का कारण बन सकता है।’-पेशकश: ओम प्रकाश खेमकरणी

सौजन्य - पंजाब केसरी।

Share:
Copyright © संपादकीय : Editorials- For IAS, PCS, Banking, Railway, SSC and Other Exams | Powered by Blogger Design by ronangelo | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com