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‘समूचा विश्व’ अशांति, हिंसा और ‘असहिष्णुता की लपेट में




जैसे-जैसे अनेक देशों की सरकारों में निरंकुशता और स्वार्थलोलुपता बढ़ रही है, उसी अनुपात में लोगों में असंतोष और असहिष्णुता पैदा हो रही है। इससे विश्व में अशांति और हिंसा बढ़ रही ...
जैसे-जैसे अनेक देशों की सरकारों में निरंकुशता और स्वार्थलोलुपता बढ़ रही है, उसी अनुपात में लोगों में असंतोष और असहिष्णुता पैदा हो रही है। इससे विश्व में अशांति और हिंसा बढ़ रही है: 

* 24 अगस्त को पाक अधिकृत कश्मीर के ‘ददियाल’ में लगातार हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन और अत्याचारों के विरुद्ध लोगों ने बड़े स्तर पर रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। 
* 24 अगस्त को ही अमरीका में विस्कांसिन के केनोशा शहर में 2 महिलाओं का झगड़ा निपटा रहे जैकब ब्लैक नामक एक अश्वेत को पुलिस द्वारा गोली मारने के बाद हिंसा भड़क उठी और लोगों ने आगजनी व लूटमार शुरू कर दी। इस दौरान अमरीका के कई शहरों में फैले प्रदर्शनों पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा जिसमें 2 लोग मारे गए। 

* 25 अगस्त को पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में नीलम और जेहलम नदियों पर चीन द्वारा बांध बनाने के विरुद्ध लोगों ने ‘नदियों पर डैम न बनाओ, सानूं जिंदा रहन देओ’ नारे लगाते हुए विशाल मशाल जलूस निकाला। 
* 25 अगस्त को अफगानिस्तान के प्रांत गोर के शहरक जिले में तालिबान के हमले में 8 पुलिस कर्मचारी मारे गए। 
* 26 अगस्त को चीन सरकार की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों द्वारा किए जा रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया।
* 27 अगस्त को अफगानिस्तान के परवान प्रांत में तालिबान आतंकवादियों ने 4 नागरिकों की हत्या कर दी। 

* 29 अगस्त को स्वीडन के मालमो शहर में दक्षिणपंथी कार्यकत्र्ताओं द्वारा कथित रूप से पवित्र कुरान की प्रति जलाने के विरोध में दंगे भड़क उठे। 
मजहबी नारों के बीच पुलिस और बचाव दल के सदस्यों पर पथराव किया गया। सड़कों पर टायर जलाए गए और आग लगाने की कोशिश की गई। 
* 29 अगस्त को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में हजारों लोगों ने नस्लीय भेदभाव और पुलिस बर्बरता के विरुद्ध प्रदर्शन किया। 
इसी दिन विस्कांसिन में एक अदालत के बाहर लगभग 1000 प्रदर्शनकारियों ने जैकब ब्लैक को गोली मारे जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। 

* 29 अगस्त को ही लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर पर हजारों लोगों ने लॉकडाऊन  लगाने और फेस मास्क का इस्तेमाल अनिवार्य करने के विरुद्ध प्रदर्शन किया। इसी दिन जर्मनी के बर्लिन शहर में कोविड-19 के मद्देनजर लगाई गई पाबंदियों के विरोध में दक्षिणपंथी चरमपंथियों ने प्रदर्शन किया और जर्मन संसद के अंदर घुसने का प्रयास किया। 
* 31 अगस्त को इंगलैंड के लंदन, कनाडा के टोरंटो और अमरीका के न्यूयार्क शहरों में पाकिस्तान सरकार द्वारा बलूच नागरिकों पर अत्याचारों के विरुद्ध प्रदर्शन किए गए। 

* 31 अगस्त को अमरीका के वाशिंगटन और न्यूयार्क शहरों में उइगर मुसलमान समुदाय के सदस्यों ने चीन में उन पर अत्याचारों के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए बीजिंग सरकार के खिलाफ अमरीकी सरकार और संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई करने का अनुरोध किया। इसी दिन बीजिंग में एक उइगर मुसलमान महिला ने अदालत को बताया कि शिनजियांग प्रांत के आइसोलेशन सैंटर में मुस्लिम महिलाओं को सप्ताह में एक बार मुंह ढंक कर निर्वस्त्र होना पड़ता था और उसके बाद उनके शरीर पर रोगाणुनाशक रसायन का छिड़काव किया जाता था। 

* 31 अगस्त को मैक्सिको सिटी में दवाओं की कमी, बेरोजगारी और गैंगवार के चलते जारी हिंसा के विरुद्ध हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्टï्रपति एंड्रेस मैनुअल के विरुद्ध नारे लगाए और उनसे त्यागपत्र की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दवा नहीं मिलने के कारण लोगों की मौत हो रही है और सरकार चुप है। 

* 31 अगस्त को ही पाकिस्तान के खैबरपख्तूनख्वाह प्रांत के दक्षिण वजीरीस्तान में सैनिकों पर आतंकवादियों द्वारा की गई अंधाधुंध फायरिंग के परिणामस्वरूप 3 सैनिक मारे गए तथा 3 अन्य घायल हो गए। 
विश्वभर में व्याप्त ङ्क्षहसा और असंतोष के ये तो मात्र 7 दिनों के चंद उदाहरण हैं जबकि इनके अलावा भी विश्व में इस अवधि के दौरान ङ्क्षहसा की न जाने कितनी घटनाएं हुई होंगी और हो रही हैं। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार पिछले 25 वर्षों में विश्व में लोकतंत्र की स्थिति कमजोर हुई है और निरकुंश शासन या तानाशाही का समर्थन करने वाली ताकतों की संख्या में वृद्धि हुई है और इन घटनाओं के पीछे  सरकारों की निरंकुश प्रवृत्ति का योगदान भी है। लिहाजा समाज में बढ़ रही हिंसा को देखते हुए यह प्रश्र उठना स्वाभाविक ही है कि आखिर विश्व में वह समय कब आएगा जब लोगों को ऐसी घटनाओं से मुक्ति मिलेगी और वे सुख-शांति से रह पाएंगे।—विजय कुमार 

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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रक्त प्लाज्मा से दूसरों का जीवन बचाएं : Punjab Kesri Editorial


 भले ही भारत में कुछ ऐसी स्वैच्छिक संस्थाएं हैं, जो रक्त प्लाज्मा दान करने का कार्य कर रही हैं। यहां तक कि कुछ लोगों ने रक्त प्लाज्मा की सुविधा से अपने मरीजों को लाभ भी पहुंचाया है। कुछ अमरीका में रहने वाले भारतीयों द्वारा कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए रक्त प्लाज्मा की व्यवस्था करने हेतु कई संस्थान बनाए हैं,

भले ही भारत में कुछ ऐसी स्वैच्छिक संस्थाएं हैं, जो रक्त प्लाज्मा दान करने का  कार्य कर रही हैं। यहां तक कि कुछ लोगों ने रक्त प्लाज्मा की सुविधा से अपने मरीजों को लाभ भी पहुंचाया है। कुछ अमरीका में रहने वाले भारतीयों द्वारा कोरोना वायरस पीड़ितों के लिए रक्त प्लाज्मा की व्यवस्था करने हेतु कई संस्थान बनाए हैं, क्योंकि यह एक थैरेपी है जो कइयों की जिंदगियों को बचा सकती है। भारत में निश्चित रूप से भारतीय रैडक्रॉस संस्था है जो लोगों को रक्त प्लाज्मा के लिए प्रेरित कर रही है कि जो लोग इस बीमारी से सफलतापूर्वक लड़कर ठीक हो गए हैं, वे उन रोगियों के लिए अपना प्लाज्मा दान करें जो अब भी गंभीर रूप से पीड़ित हैं। इसके परिणामस्वरूप कुछ और लोग सामने आए हैं जिन्होंने रक्त दान भी किया है, परन्तु ऐसे लोग उंगलियों पर गिने जा सकते हैं जिन्होंने स्वेच्छा से स्वस्थ होने पर अपना प्लाज्मा दान किया है। उल्लेखनीय है कि एक व्यक्ति का प्लाज्मा दो रोगियों की जान बचा सकता है। 

तो कइयों का यह सोचना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान रक्तदान करना ठीक नहीं। इसी कारण राजधानी दिल्ली में ब्लड बैंक खाली पड़े हैं, क्योंकि संक्रमण के डर के चलते स्वैच्छिक रक्त प्लाज्मा दान करने की संख्या में गिरावट आई है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने भी कुछ दिन पूर्व रक्त प्लाज्मा बैंक शुरू करने का निर्णय लिया है। परन्तु ऐसा नहीं है क्योंकि प्लाज्मा केवल वे लोग दान कर सकते हैं जो कोरोना वायरस की चपेट से स्वस्थ होकर लौटे हैं और उन्हें ये बीमारी कुछ साल तो दोबारा नहीं हो पाएगी। उनके रक्त में वे एंटीबॉडीज हैं जो दूसरों को भी बचा सकती हैं और उन्हें भी सुरक्षित रख सकती हैं। ऐसे में रक्त दान देने से कतराना एक डर से अधिक कुछ नहीं। 

जबकि डाक्टरों ने स्पष्ट रूप से अनेकों निर्देश दिए हैं कि किन हालात में कौन-कौन प्लाज्मा दान दे सकता है। ‘‘यदि किसी का भी जीवन बचाने का मौका आए तो चूकना नहीं चाहिए।’’ यह कहना है उस अमरीकी महिला का जिसने सबसे पहले स्वस्थ होने पर अपना प्लाज्मा दान किया इसी सोच के अंतर्गत शायद न्यूयॉर्क के अस्पतालों में रक्तदान करने के लिए अनेकों ने अपने नाम रजिस्टर करवा रखे हैं तो अब क्या भारतीय दया,दान और उम्मीद की किरण जताने से पीछे हट जाएंगे। 


 सौजन्य - पंजाब केसरी।

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अब चीन से साइबर अटैक का खतरा : Punjab Kesri Editorial

दुनिया भर में इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी की तरक्की ने हमारा जीवन बहुत आसान बना दिया है परंतु इसका दुरुपयोग भी खूब होने लगा है। चूंकि आज सारा काम इंटरनैट और कम्प्यूटरों पर हो रहा है तो हैकर्स से अपने संवेदनशील तथा गोपनीय डाटा


दुनिया भर में इंफोर्मेशन टैक्नोलॉजी की तरक्की ने हमारा जीवन बहुत आसान बना दिया है परंतु इसका दुरुपयोग भी खूब होने लगा है। चूंकि आज सारा काम इंटरनैट और कम्प्यूटरों पर हो रहा है तो हैकर्स से अपने संवेदनशील तथा गोपनीय डाटा की सुरक्षा करना भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। 

एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में अमेरिका में सान फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के कम्प्यूटर सिस्टम्स को हैक करने के बाद डाटा लौटाने के लिए हैकर्स ने 1.14 मिलियन डॉलर की फिरौती वसूल की। दूसरी ओर ब्रिटेन की खुफिया एजैंसियां भी चीन सहित अन्य विरोधी देशों की ओर से यू.के. की रिसर्च लैब्स पर हो रहे साइबर अटैक्स को रोकने के लिए अलर्ट हैं। इन लैब्स में कोरोना की दवाई बनाने पर काम चल रहा है।  

साइबर अटैक का खतरा अब भारत पर भी मंडरा रहा है। हाल ही में 59 चाइनीज एप्स को भारत की ओर से बैन करने के बाद से ही चीन की ओर से साइबर अटैक की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सरकार उन सैक्टर्स और कम्पनियों की खास तौर से निगरानी कर रही है जिनमें चीन की ओर से निवेश किया गया है। 

ऐसे सैक्टर्स में कम्युनिकेशन और पावर के अलावा फाइनांशियल सैक्टर तक शामिल हैं। साइबर जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि एप्स को बैन करना केवल एक शुरूआत है और इससे भड़का चीन बदले में भारतीय साइबर स्पेस को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। कुछ अधिकारियों के अनुसार लगभग सभी सैक्टर्स में पहले से बेहतर निगरानी की जा रही है। इसके अलावा पावर, टैलीकॉम और फाइनांशियल सर्विसेज से जुड़े सैक्टर्स का चाइनीज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ाव होने के चलते उन्हें भी अलर्ट पर रखा गया है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कई वर्षों से हमने चीन को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की अनुमति दे रखी थी, ऐसे में उन नैटवक्र्स तक चीन की पहुंच है। इनमें कम्युनिकेशंस, पावर के अलावा फाइनांशियल सैक्टर भी शामिल हैं।’’

खतरा इस बात का है कि रिमोट लोकेशन्स से चीन भारत के इन नैटवक्र्स पर साइबर अटैक कर सकता है, इसे लेकर सभी संबंधितों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार सरकार उन कम्पनियों पर फोकस करेगी जिनमें चाइनीज निवेशकों की ओर से फंडिंग की गई है और इनकी निगरानी और सर्विलान्स अलग-अलग स्तर पर किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट सैक्टर में इस्तेमाल किए जा रहे चीन में बने सर्विलांस डिवाइसेस पर भी नजर रखी जा रही है। एक विशेषज्ञ के अनुसार मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कोई भी देश सीमा पर युद्ध के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में साइबर स्पेस, ट्रेड और सप्लाई चेन को प्रभावित कर नुक्सान पहुंचाने की कोशिश जरूर की जा सकती है। चीन की ओर से फंडिंग पाने वाली कम्पनियों और खासकर टैक फम्र्स की अब निगरानी की जा रही है क्योंकि इन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। 

पहले भी चाइनीज हैकर्स से जुड़ी चेतावनी सरकार की ओर से दी जा चुकी है और चीन की ओर से पहले भी डाटा पाने के लिए अटैक किए जाते रहे हैं और पिछले साल लाखों भारतीयों का मैडीकल डाटा चोरी होने का मामला सामने आया था। पिछले कुछ दिनों की ही बात करें तो चीन की ओर से साइबर अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। गत माह ही महाराष्ट्र के साइबर विभाग ने एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी थी कि चीन के साइबर अपराधी बड़े स्तर पर फिशिंग हमले की योजना बना रहे हैं। राज्य साइबर विभाग के स्पैशल आई.जी. ने कहा था कि 4-5 दिनों में ही भारत के साइबर स्पेस पर संसाधन, जो खासकर सूचना, इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग से जुड़े हैं, उन पर चीन से हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया था कि कम से कम ऐसे 40,300 साइबर हमलों की कोशिश हुई जिसमें से अधिकतर की ट्रेसिंग चीन के चेंगदू क्षेत्र में हुई है। 

ऐसे में बेहद जरूरी है कि इंटरनैट के सुरक्षित उपयोग के बारे में सभी संबंधित लोगों को जागरूक किया जाए। जैसे कि सोशल मीडिया पर किसी अनचाहे ईमेल, एस.एम.एस. या मैसेज में दिए अटैचमैंट को खोलने या क्लिक करने से बचें। ईमेल, वैबसाइट में वर्तनी की गलती और अज्ञात ईमेल भेजने वालों से भी सावधान रहें। इन दिनों ऐसे ई-मेल या लिंक से विशेष रूप से सावधान रहें जो खास ऑफर के साथ हों जैसे कोविड-19 टेस्टिंग, कोविड-19 मदद, ईनामी राशि, कैशबैक ऑफर्स आदि। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या लॉगइन करने से पहले उसके यू.आर.एल. को अवश्य चैक कर लें।

सौजन्य - पंजाब केसरी।

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डाक्टरों की लापरवाही से सरकारी अस्पतालों में रोगियों को असुविधा और मौतें

लोगों को सस्ती और स्तरीय शिक्षा एवं चिकित्सा,स्वच्छ पेयजल और लगातार बिजली उपलब्ध करवाना हमारी केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है परंतु ये दोनों ही इसमें विफल रही हैं और इसीलिए सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने तथा सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान होने वाली लापरवाही के कारण लोग वहां इलाज के लिए जाने से संकोच करते हैं।
09 जनवरी को मोगा के सरकारी अस्पताल के मैटर्निटी वार्ड में एक महिला ने फर्श पर बच्चे को जन्म दिया। उसने आरोप लगाया कि अस्पताल का स्टाफ उसके कराहने की आवाजें सुन कर भी सहायता के लिए नहीं आया।
10 जनवरी को उत्तर प्रदेश में जौनपुर के शाहगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए आई महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि डाक्टरों ने बहुत देर तक उसे देखा ही नहीं जिस कारण उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई जो उसकी मृत्यु का कारण बनी।
12 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मानीमऊ स्थित सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए आई महिला के शरीर से डाक्टरों की लापरवाही से बहुत देर तक रक्त बहने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों के अनुसार जब उन्होंने डाक्टरों से इसकी शिकायत की तो उन्होंने यह कह कर उन्हें आश्वस्त कर दिया कि जल्दी ही आराम आ जाएगा परंतु हुआ इसके विपरीत।
13 जनवरी को उत्तर प्रदेश में रायबरेली के काजीखेड़ा गांव की एक महिला की नसबंदी आप्रेशन के दौरान बरती गई लापरवाही के परिणामस्वरूप तबीयत बिगड़ जाने से मृत्यु हो गई।
14 जनवरी को फर्रुखाबाद के एक अस्पताल में आप्रेशन थिएटर में घुस कर आवारा कुत्ते ने वहां सिजेरियन आप्रेशन से जन्मे बच्चे को नोच-नोच कर मार डाला।
14 जनवरी को ही मध्य प्रदेश में शहडोल के बच्चा वार्ड में 12 घंटों के भीतर 6 नवजात बच्चों की मृत्यु का खुलासा हुआ।

उपरोक्त उदाहरणों से सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि स्टाफ, बुनियादी ढांचे की कमी और कुप्रबंधन के शिकार हमारे सरकारी अस्पताल किस कदर बदहाली के शिकार हो चुके हैं। डाक्टरों को कम से कम 60 हजार से 2 लाख रुपए या उससे भी अधिक मासिक वेतन मिलने के बावजूद करोड़ों रुपयों की लागत से निर्मित सरकारी अस्पतालों की यह दुर्दशा निश्चय ही एक ज्वलंत समस्या है जो दूर होनी चाहिए।  —विजय कुमार
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