Ad

Showing posts with label Amar Ujala. Show all posts
Showing posts with label Amar Ujala. Show all posts

चीनी मिलों का दुश्चक्र (अमर उजाला)

मधुरेंद्र सिन्हा 
इस समय देश भर में गन्ना किसान अपनी पैदावार की कीमत के लिए आंदोलन पर उतर रहे हैं। पंजाब में तो उन्होंने रेलें भी रोकीं और पुलिस ने डंडे भी बरसाए। पर सबसे खराब स्थिति है उत्तर प्रदेश में, जहां गन्ना किसानों के लगभग 19,000 करोड़ रुपये चीनी मिलें दबाकर बैठी हुई हैं। वहां किसानों की स्थिति शोचनीय है। कई मिलें तो उनके कई-कई वर्षों के बकाये का भुगतान तक नहीं कर रही हैं। हालत यह हो गई कि पहले तो इलाहाबाद उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मिलें गन्ना किसानों का भुगतान जल्द से जल्द करें। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी कड़े कदम उठाए हैं। देश की सबसे बड़ी चीनी कंपनी बजाज हिंदुस्तान, जिसके पास 14 चीनी मिलें हैं, का हाल यह है कि उसका सालाना कारोबार 45 प्रतिशत बढ़ा है। लेकिन किसानों का बकाया चुकाने में कंपनी आनाकानी कर रही है। कई और कंपनियों का यही हाल है और किसान अपना बकाया पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इसी वजह से इस साल सितंबर में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चीनी मिलों को किसानों का बकाया तुरंत चुकाने का आदेश दिया। लेकिन अभी तक इस पर पूरी तरह से कार्यान्वयन नहीं हुआ। यह पहली बार नहीं है कि अदालत के आदेशों का उल्लंघन हुआ हो। 2014 में भी अदालत ने ऐसा ही फैसला सुनाया था, लेकिन उसकी भी तामील नहीं हो पाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा ही फैसला सुनाया। लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है।

हैरानी की बात यह है कि चीनी मिलों में सरकारी बैंकों की भागीदारी काफी है। सबसे बड़ी कंपनी बजाज हिंदुस्तान में तो सरकारी बैंकों की भागीदारी 40 प्रतिशत की है, जो काफी बड़ी है। इसके बावजूद वहां से किसानों को भुगतान नहीं हो रहा है। सरकारी बैंक अपना उत्तरदायित्व या तो भूल गए हैं या कंपनियों के बहकावे में आ गए हैं। उन्हें किसानों के बकाया का भुगतान करने के लिए कंपनी पर दबाव डालना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं रहा है। वे मिलों को लगातार धन मुहैया कराते जा रहे हैं और उनमें निवेश भी करते जा रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क यह है कि ऐसा करना उन कंपनियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है नहीं तो ये रुग्ण हो जाएंगी, जबकि उनके कारोबार के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। इन सरकारी बैंकों का इन मिलों के प्रबंधन पर नियंत्रण भी है, लेकिन किसानों के मामले में ये चुप्पी साध लेते हैं। इन बैंकों ने कभी भी किसानों का साथ देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया, जो कि उनका दायित्व है। सरकारी अधिकारी भी चुप रहते हैं और अदालतों के आदेश के बावजूद कोई बड़ा कदम उठाते नहीं दिखते। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी मिलों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे गन्ना किसानों का बकाया चुकाएं, नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने आगाह किया कि सरकार ऐसी डिफॉल्टर मिलों की नीलामी भी कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि पिछली सरकारों में बकाया को अगले सत्र में डालने का रिवाज था, जिससे किसानों को भुगतान में असाधारण विलंब होता था, लेकिन यह सरकार इसकी इजाजत नहीं देगी। योगी सरकार के अधिकारियों का दावा है कि कम से कम 30 निजी मिलों ने किसानों का बकाया चुका दिया है। लेकिन बड़ी मछलियां इस फंदे से दूर हैं और वे किसानों का पैसा दबाए बैठी हैं, क्योंकि उनके तार दूर तक जुड़े हुए हैं।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक तथा चीनी उत्पादक राज्य है। यहां देश के कुल उत्पादन का 45 प्रतिशत यानी एक करोड़ बीस लाख टन चीनी का उत्पादन होता है। इतनी चीनी के उत्पादन के बावजूद किसान पैसों के लिए मोहताज है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो इसमें भी आगे है। यहां सबसे ज्यादा मिलें हैं और सबसे ज्यादा उत्पादन भी होता है। गन्ने की ज्यादा बढ़िया किस्मों की खोज के बाद यहां उत्पादन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी भी हुई है और यही कारण है कि देश में चीनी की कीमतें स्थिर हैं। बड़ी समस्या यह है कि किसानों को उनकी उपज की कीमत जल्दी से जल्दी दिलवाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? दरअसल चीनी मिलें गन्ना खरीदने के तुरंत बाद भुगतान नहीं करती हैं और वे उसे लटका कर रखती हैं। पांच-पांच साल तक बकाये का भुगतान मामूली बात है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा जाती है और वे अपनी मेहनत के पैसों के लिए दर-दर भटकते हैं।

देश में किसानों की आर्थिक संकट की चर्चा होती रहती है। किसानों के हितों की बात करना दरअसल राजनेताओं के दोमुंहे चरित्र का हिस्सा है, क्योंकि जब वे सत्ता में आते हैं, तो उनके लिए ठोस कदम उठाते नहीं हैं। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़े तेवर दिखाए हैं और उनके अधिकारी दबाव भी डाल रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी उनके पास है, तो उम्मीद की जा सकती है कि उनकी सरकार किसानों को उनकी बकाया राशि दिलवाएगी। किसानों के पास पैसा आना इसलिए भी जरूरी है कि देश में औद्योगिक वस्तुओं की खपत घट रही है। गांवों में लोगों की क्रय शक्ति घट रही है और अगर यह स्थिति सुधरी नहीं, तो हालात बिगड़ेंगे। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य सही समय पर दिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार देश के हित में बड़ा काम कर सकती है। इसलिए वहां चीनी मिलों के कर्ता-धर्ताओं पर एफआईआर होने शुरू हुए हैं, जिसकी गूंज संसद तक हुई है। बड़ी मिलों के पास बड़ा बकाया है और उनसे पैसे निकलवाना जरूरी है। इन मिलों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है, जिससे वे सरकार के खिलाफ हो गए हैं। लेकिन किसानों के हित में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े कदम उठाने ही पड़ेंगे।

सौजन्य - अमर उजाला
Share:
Copyright © संपादकीय : Editorials- For IAS, PCS, Banking, Railway, SSC and Other Exams | Powered by Blogger Design by ronangelo | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com