Day: June 11, 2018

नियुक्तियों से घटेगा मुकदमों का बोझ (दैनिक ट्रिब्यून)

अनूप भटनागर क्या राज्य सरकारों के ढुलमुल रवैये की वजह से राज्यों की निचली अदालतों में न्यायाधीशों, न्यायिक कार्मिकों और सहायक कर्मचारियों के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं अथवा इसकी कोई और वजह है? हालांकि निचली अदालतों में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार का विषय है लेकिन मौजूदा स्थिति के मद्देनजर […]

विभाजक पहचान में फंसने की नियति (दैनिक ट्रिब्यून)

लोकतंत्र में अल्पसंख्यक एक अवसादसूचक शब्द है। इसका शाब्दिक अभिप्राय है : ‘पराजित’। भारत में इस शब्द को कई अर्थों में लिया जाता है, जिसमें प्रमुख धार्मिक पहचान के अनुसार है, तथापि इस शब्द का सैद्धांतिक, सांस्कृतिक, भाषाई, लिंगानुसार कम गिनती वालों के लिए अनेकार्थ रूप में प्रयोग होता है। संविधान की धारा 29 ‘अल्पसंख्यकों […]

Ceasing fire: on truce in Afghanistan (The Hindu)

The Taliban’s announcement of a three-day ceasefire with Afghan government troops for Eid, two days after President Ashraf Ghani declared an unconditional week-long ceasefire, is a glimmer of hope for a breakthrough in the long-struggling peace process. This is the first time the Taliban has announced a ceasefire in the 17 years since it was […]

महिलाओं की जिंदगी बदलती शराबबंदी, शराब के कारण सताई जाती हैं औरतें (दैनिक जागरण)

[क्षमा शर्मा]। घरों में काम करने वाली गरीब औरतों से पूछिए तो उनमें से कुछ अवश्य ही अपने प्रति की गई हिंसा, गाली-गलौज, मार-पीट के लिए जिस चीज को सर्वाधिक जिम्मेदार मानती हैं वह है शराब। आम तौर पर उनका यही कहना होता है कि जब उनके पति शराब नहीं पीते तो वे बड़े भले […]

No easy solutions: on tackling NPAs (The Hindu)

Union Minister Piyush Goyal, currently in charge of the Finance Ministry, has announced the formation of a committee to assess the idea of special asset reconstruction companies or asset management companies to take over bad loans from banks. The bankers’ panel has been given two weeks to revert. The idea of a ‘bad bank’ is […]

जनादेश का मनमाना इस्तेमाल, कर्नाटक में जिन दलों को जनता ने नकार दिया उन्होंने ही मिलकर सरकार बना ली (दैनिक जागरण)

[ए. सूर्यप्रकाश]। कर्नाटक के हालिया जनादेश को देखते हुए सरकार गठन और दलबदल से जुड़े मौजूदा नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जरूरत महसूस हो रही है। कर्नाटक में जिन दलों को जनता ने नकार दिया उन्होंने ही मिलकर सरकार बना ली। ऐसी सरकार के बारे में तो जनता ने शायद ही सोचा हो। […]

बहुजन राजनीति का काला (अमर उजाला)

यशवंत व्यास कलाओं की भी अपनी राजनीति होती है और विभिन्न कलारूपों में उसे लक्ष्यपूर्ति के लिए उतारा जा सकता है। इसीलिए पार्टी का साहित्य, विचारधारा के नायक तथा कथाओं के आरंभ और अंत तक लक्ष्य के हिसाब से निर्मित किए जाते रहे हैं। यह भी एक किस्म का फॉर्मूला है, जिसे व्याख्याकार अपने विमर्श […]

बंगले को खंडहर बनाना (अमर उजाला)

अवधेश कुमार उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक शानदार बंगले को जिस तरह खाली करने के साथ नष्ट कर दिया, वह कोई सामान्य खबर नहीं है। उसके बाद उन्होंने यह बयान दिया है कि सरकार सूची भिजवा दे, हम वे सारे सामान वापस भिजवा देंगे। ऐसी ढिढाई के लिए […]

माकपा के पदचिह्नों पर (अमर उजाला)

सुब्रत मुखर्जी, दिल्ली विवि के पूर्व प्राध्यापक पश्चिम बंगाल की सामाजिक व्यवस्था तुलनात्मक रूप से शांतिपूर्ण है, जिसमें ऊंची जातियों का वर्चस्व होने के बावजूद सहिष्णुता का माहौल है। जाति हिंसा एवं सांप्रदायिक दंगों के मामलों में पश्चिम बंगाल की स्थिति देश के उत्तरी और पश्चिमी राज्यों की तुलना में बहुत ही अच्छी है। पर […]

संघ के कार्यक्रम में प्रणब दा की मौजूदगी पर मचा हड़कंप, दोहरे मापदंड की एक और मिसाल है (दैनिक जागरण)

सुरेंद्र किशोर (नई दिल्ली)। संघ परिवार को लेकर कांग्रेसियों और कम्युनिस्टों का एक बार फिर दोहरा रवैया सामने आया। तथाकथित सेक्युलर जमात का कोई बड़ा नेता जब आरएसएस से संपर्क साधता है तो उसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठती, लेकिन जब उनके बीच का कोई नेता संघ मुख्यालय चला जाता है तो हाय-तौबा मच जाती […]

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