Day: June 4, 2018

संपादकीयः अमन के खिलाफ (जनसत्ता)

पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सुरक्षा चौकियों पर मोर्टार दाग कर एक बार फिर यही जाहिर किया है कि वह किसी भी तरह अमन के पक्ष में नहीं है। रविवार को देर रात कश्मीर के अखनूर सेक्टर के प्रगवाल, कंचक और खौर में भारतीय चौकियों पर मोर्टार दागे। इसमें भारतीय सीमा सुरक्षा बल के दो जवान […]

Fuel fractions: on petrol, diesel prices (The Hindu)

Last Wednesday, the public sector oil marketing companies cut the prices of petrol and diesel by one paisa a litre — the first reduction for a while in motor fuel prices that had been frozen for 19 days in the run-up to the Karnataka elections, only to creep up thereafter. Not surprisingly, the Centre, already […]

सवाल दुनिया को बदलने का है (प्रभात खबर)

II रविभूषण II वरिष्ठ साहित्यकार ravibhushan1408@gmail.com मई 2018 में दुनिया की पूरी आबादी सात अरब 62 करोड़ और संयुक्त राष्ट्र के एक आकलन के अनुसार 31 मई, 2018 को भारत की आबादी 1 अरब, 35 करोड़, 27 लाख, 13 हजार, 973 थी. यानी भारत की मौजूदा आबादी दुनिया की कुल आबादी का 17.74 प्रतिशत है. […]

विरोध से मिलेगा क्या? (राष्ट्रीय सहारा)

इस समय देश के आठ राज्यों में किसानों के नाम पर हो रहा आंदोलन मीडिया में भी सुर्खियां पा रहा है। मीडिया में सड़क पर फेंके जा रहे दूध-सब्जियां, अनाज आदि के वीडियो लगातार दिखाकर यह बताया जा रहा है कि यह किसानों के आक्रोश का प्रकटीकरण है। जो मीडिया इस समय किसानों को लेकर […]

अंधेरे से जूझता अकेला दीया (दैनिक ट्रिब्यून)

मधुरेन्द्र सिन्हा देश कुछ ऐसे दौर से गुजर रहा है, जिसमें डॉक्टरों के प्रति जनता में अब वह पुराना भाव नहीं दिखता। अंधाधुंध पैसे कमाने की होड़ में उन्होंने अपनी मर्यादाएं तो लांघी ही हैं, मरीजों का स्नेह-भाव भी खोया है। ऐसा नहीं कि देश के तमाम डॉक्टर पैसे के पीछे भाग रहे हैं लेकिन […]

दुख की मरुभूमि में सुख की फसल (दैनिक ट्रिब्यून)

सीताराम गुप्ता एक कहावत है जितने दिन जेठ अधिक तपता है, उतने ही दिन सावन ज़्यादा बरसता है। जेठ में जितने दिन पुरवाई चलती है, हवा ठंडी हो जाती है, उतने ही दिन सावन में धूल उड़ती है। जेठ ठीक से नहीं तपेगा तो सावन भी ठीक से नहीं बरसेगा। यह एक वैज्ञानिक सत्य भी […]

बदलती दुनिया में महिलाओं की हालत, समझना कठिन है कि दुनिया बदल गई है (दैनिक जागरण)

[तसलीमा नसरीन]। आजकल सुबह हाथ में चाय की प्याली लेकर ऑनलाइन पत्र-पत्रिका, फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप इत्यादि से ही जान लेती हूं कि दुनिया में क्या हो रहा है। हाल में वायरल हुआ एक वीडियो देखा कि बांग्लादेश के किसी गांव में करीब 80 साल के एक बूढ़े की शादी 19-20 साल की एक लड़की से […]

उपचुनाव को आम चुनाव की बानगी नहीं समझा जाना चाहिए क्योंकि… (दैनिक जागरण)

डॉ.एके वर्मा (नई दिल्ली)। हाल में 11 राज्यों में चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने एक बार फिर भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। विपक्षी दल उपचुनाव नतीजों को लेकर बेहद उत्साहित हैं। ऐसा लग रहा है जैसे उपचुनाव परिणामों को वे लोकसभा में अपनी […]

सियासी मोहरा बनते किसान संगठन, स्वयंभू नेता अपनी राजनीति चमकाने में लगे है (दैनिक जागरण)

[डॉ. राजाराम त्रिपाठी]। उत्तर भारत में एक कहावत मशहूर है- ‘बहुतै जोगी, मठ उजाड़।’ यह कहावत भारतीय किसान संगठनों पर सटीक बैठती है। तमाम परिवर्तनों के दौर से गुजरने के बावजूद भारत एक कृषि प्रधान देश ही बना रहा। उदारीकरण के दौर में सेवा क्षेत्र के विस्तार, औद्योगिक विकास के बावजूद देश की बहुसंख्यक आबादी […]

विपरीत ध्रुवों के बीच संवाद, वैचारिक अछूतवादी बिलावजह ही मचा रहे हैं हल्ला-गुल्ला (दैनिक जागरण)

[हृदयनारायण दीक्षित]। अस्तित्व एक प्राणवान सत्ता है। यहां निष्कलुष निर्दोष पशु पक्षी है तो विषधर कीट और सांप भी। मनुष्य विचारशील प्राणी है। सो प्रत्येक मनुष्य के अपने विचार भी हैं। दुनिया का प्राचीनतम शब्द साक्ष्य ऋग्वेद लगभग 400 ऋषियों के कथनों से भरापूरा है। ऋग्वेद में वैचारिक विविधता है। समूचा वैदिक साहित्य विचार भिन्नता […]



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