Day: June 2, 2018

छीजती साख को बचाने की जवाबदेही (दैनिक ट्रिब्यून)

निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव लोकतंत्र की प्राणवायु हैं। यह ऑक्सीजन ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को जीवन प्रदान करती है, उसके प्रति विश्वास पैदा करती है। हाल के वर्षों में कई कारणों से चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जिसकी वजह से देश के मतदाताओं में अनेक संदेह घर कर गए हैं। कभी ये […]

उम्मीदों के बोझ से बिखरता बचपन (दैनिक ट्रिब्यून)

अमरीश सरकानगो आज का कड़ी प्रतिस्पर्धा का युग अब उस दौर में पहुंच चुका है जहां अभिभावक अनजाने में ही अपने बच्चों के दुश्मन बन बैठे हैं। प्रतिस्पर्धा पहले भी थी, पर उस समय अगर बच्चों को मनचाहा करियर नहीं मिलता था तो भी मानसिकता यही रहती थी कि अब बच्चे जो करें, उसी में […]

Mixed growth signals (The Hindu)

Official data showing the GDP expanding at the fastest pace in seven quarters in the three months ended March 31, a brisk 7.7% at that, is reason for cheer. Given that this has been propelled largely by increases in manufacturing and construction activity is a basis for optimism given that the former contributes almost a […]

Populists in Rome (The Hindu)

The political whirlwind that has swept Italy looks to be dissipating, at least for now. Giuseppe Conte, a little-known academic with an embellished resume, has been sworn in as Prime Minister, after weeks of wrangling between President Sergio Mattarella and a coalition with a slim parliamentary majority. The two-party combine, the anti-establishment Five Star Movement […]

बदल रही है ग्रामीण भारत की तस्वीर, देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान (दैनिक जागरण)

[नरेंद्र सिंह तोमर]। हालांकि गांव, गरीब और किसान सभी सरकारों की प्राथमिकता सूची में रहे हैं, लेकिन इसे एक मिशन का रूप देने का श्रेय मोदी सरकार को जाता है। यह सरकार गांव, गरीब और किसानों को ऊपर लाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ग्रामीण विकास विभाग […]

नाकामियों पर पर्दा डालती सरकार (दैनिक जागरण)

[राजीव सातव]। कहते हैं कि अपनी असफलता छिपाने के लिए अपने पूर्वजों की असफलता को जमकर उछालो तो आपकी असफलता पर पर्दा गिर जाएगा। यही हाल मोदी सरकार का है। जब भी कोई उसके चुनावी वादे और चार साल की उपलब्धियों पर बात करता है तो प्रधानमंत्री 60 साल का जुमला सामने रख देते हैं। […]

राज्यों पर टिकी हैं योजनाएं (अमर उजाला)

मधुरेन्द्र सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के चार वर्षों की समीक्षा हो चुकी है। पक्ष और विपक्ष, दोनों की बातें सामने आ चुकी हैं। एक बात तो जाहिर है और वह है कि सरकार का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा, लेकिन सौ टके का सवाल है कि चुनाव पूर्व जितनी घोषणाएं और वायदे किए गए थे, […]

केरल की सियासत से केंद्रीय भूमिका की ओर बढ़ रहे चांडी (बिजनेस स्टैंडर्ड)

आदिति फडणीस उम्मेन चांडी को गत सप्ताह कांग्रेस महासचिव नियुक्त किया गया। उन्हें आंध्र प्रदेश में पार्टी में नई जान फूंकने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। चांडी के बारे में हम कितना जानते हैं और उनकी नियुक्ति राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीतियों के बारे में हमें क्या बताती है? वर्तमान में आंध्र प्रदेश में […]

झूठी है मीडिया की मृत्यु की खबर (बिजनेस स्टैंडर्ड)

शेखर गुप्ता हम पत्रकार वाकई बहुत बुरे दिख रहे हैं। जनता को यह सोचने पर विवश किया जा रहा है कि हम रिश्वत लेते हैं। राजनेताओं को हंसने का मौका मिल गया है। सदाचारी लोगों की ओर से टिप्पणी आने लगी है कि हम केवल धोखेबाज ही नहीं बल्कि आपराधिक रूप से कट्टïर भी हैं। […]

घटता जनाधार भी वजह (बिजनेस स्टैंडर्ड)

बीते आठ महीनों में 10 लोकसभा उपचुनाव हुए। उनके नतीजों से एक बात स्पष्ट है कि सन 2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली भाजपा को इन 10 में से केवल एक सीट मिलने के पीछे केवल गैर भाजपा, विपक्षी दलों की एकता ही एकमात्र वजह नहीं है। विपक्ष की एकता एक […]

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