Month: June 2018

वक्त से तालमेल में पिछड़ीं वायु सेवाएं (हिन्दुस्तान)

हर्षवर्द्धन, पूर्व प्रबंध निदेशक वायुदूत गुरुवार का दिन भारतीय विमानन सेवा के लिए भारी रहा। उस दिन मुंबई का एक चार्टर जहाज हादसे का शिकार तो हुआ ही, दिल्ली आने वाले दो यात्री विमानों को भी आपात स्थितियों में उतारना पड़ा। नतीजतन, एक बार फिर विमान यात्रियों की सुरक्षित यात्रा को लेकर सवाल उठने लगे […]

संपादकीय: खस्ताहाल रुपया (जनसत्ता)

  मुद्रा की विनिमय दर का आकलन हमेशा एक ही तरह नहीं होता। किसी देश की मुद्रा की कम कीमत को जहां उसका आयात-खर्च बढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं निर्यात-वृद्धि के लिए सहायक। लेकिन भारतीय मुद्रा की मौजूदा हालत सामान्य उतार-चढ़ाव से अलग, और बेहद चिंताजनक है। डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत गुरुवार […]

संपादकीय: किसका दरबार (जनसत्ता)

अपनी समस्याएं और फरियाद लेकर जनता दरबार में जाने वालों को अगर मुख्यमंत्री का कोपभाजन होना पड़ जाए तो क्या इसे सही मायने में जनता का दरबार कहा जा सकता है? गुरुवार को देहरादून में मुख्यमंत्री के ‘जनता मिलन कार्यक्रम’ में मौजूद लोग ऐसी ही घटना के चश्मदीद बने। अपने तबादले की फरियाद लेकर पहुंची […]

इमरजेंसी-दांव और विपक्ष (राष्ट्रीय सहारा)

राजेन्द्र शर्मा तेतालीसवीं सालगिरह के मौके पर भाजपा को इमज्रेसी कुछ ज्यादा ही याद आई है। वैसे यह स्वाभाविक भी है। 1975 की 26 जून को इमज्रेसी लगाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर जो तानाशाही थोपी थी, उसकी यह सालगिरह नरेन्द्र मोदी के राज का पांचवां साल शुरू होने के बाद पड़ रही […]

The Battle Of Nightmares (TOI)

Both BJP and opposition are locked in a contest to scare voters into supporting them Sadanand Dhume If India’s 2014 general election was a vote for hope, then 2019 appears to be more about fear. So far, neither Prime Minister Narendra Modi’s Bharatiya Janata Party nor Rahul Gandhi’s Congress Party has come up with a […]

शांति की संभावनाओं पर अमल जरूरी (दैनिक ट्रिब्यून)

वजाहत हबीबुल्लाह यह तथ्य है कि कश्मीर में रमजान के महीने के दौरान लागू किया गया संघर्ष विराम पहले 15 दिनों में सफल रहा था। राज्य के अंदर और सीमा नियंत्रण रेखा पर हिंसा में कमी आई थी, आतंकियों की भर्ती में गिरावट दर्ज हुई। भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ ने दीर्घकालीन शांति को फिर […]

बेबसी की सांझ (दैनिक ट्रिब्यून)

संशोधनों के बावजूद सरकार के भरण-पोषण अधिनियम से कितने बुजुर्ग मां-बाप लाभान्वित हो पा रहे हैं, जिनकी संतानें उन्हें जीवन की सांझ में निराश्रय छोड़ गयी हैं, यह प्रश्न अभी तक निरुत्तर है। इसे सिस्टम की खामी कहें या मानवीय रिश्तों में आ रही गिरावट, कि लाचारी की दशा में भी औलाद के भय से […]

घुसपैठ और मानवाधिकार के द्वंद्व (दैनिक ट्रिब्यून)

उमेश चतुर्वेदी आजादी के दौरान रक्त रंजित बंटवारे के बाद जिस नागरिकता रजिस्टर की जरूरत समझी गई, वही रजिस्टर एक बार फिर असम में विवाद की वजह बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित इस राज्य के लिए सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का फाइनल ड्राफ्ट 30 जून को प्रकाशित होना था। लेकिन […]

Reform 101: On higher education (The Hindu)

The provisions of the new Higher Education Commission of India (HECI) Bill drafted by the Centre have far-reaching implications for the expansion and quality of human resource development, at a time when access to skill-building and educational opportunity are vitally important. There were 864 recognised universities and 40,026 colleges in the country in 2016-17, while […]

Then there were 16: On FIFA 2018 (The Hindu)

When the 2018 FIFA World Cup kicked off on June 14 in Moscow, there was no single favourite. A clutch of high-quality and well-matched sides such as France, Germany, Spain and Brazil added to the allure. So much so that even educated guesses on who would get past the league stage were off the mark. […]



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