Day: April 4, 2018

जहर और अंदेशे (जनसत्ता)

रूस के खिलाफ अमेरिका और पश्चिमी देशों ने जिस तरह से अभियान छेड़ा हुआ है, वह किसी युद्ध से कम नहीं है। पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी को ब्रिटेन में जहर देने की घटना के बाद रूस और पश्चिम के रिश्ते नाजुक दौर में पहुंच गए हैं। अमेरिका और आस्ट्रेलिया सहित अट्ठाईस […]

जातिप्रथा की जड़ें (जनसत्ता)

गुजरात के भावनगर जिले में पिछले हफ्ते एक दलित युवक की हत्या सामान्य कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। यह हत्या बताती है कि भारतीय समाज में वर्ण या जातिप्रथा की जड़ें कितनी गहरी हैं। कई लोगों पर उच्च जाति का अहंकार उन्माद की हद तक चढ़ा होता है और उन्हें अत्याचार या अपराध करने में […]

मोसुल का सबक (जनसत्ता)

इराक के मोसुल शहर के पास चार साल पहले मारे गए भारतीय कामगारों के शव भारत आ गए हैं और परिजनों को सौंप दिए गए हैं। इन कामगारों की इस्लामिक स्टेट (आइएस) के आतंकियों ने हत्या कर दी थी। भारतीय कामगारों की हत्या का यह प्रकरण चिंताजनक तो है ही, कई गंभीर सवाल भी खड़े […]

विरोध का अर्थ (जनसत्ता)

अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम की बाबत बीस मार्च को आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लेकर दलितों का आक्रोश समझा जा सकता है। लेकिन विरोध का अर्थ हिंसा और उपद्रव नहीं होता। इसलिए सोमवार को जो हिंसा और तोड़-फोड़ हुई उसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता। भारत बंद कराने के लिए देश के अधिकतर राज्यों […]

शीतयुद्ध के नए दौर की आहट! – डॉ. रहीस सिंह (नईदुनिया)

लुई हाल ने अपनी पुस्तक ‘द कोल्डवॉर एज ऑफ हिस्ट्री में लिखा है कि दो गुटों के मध्य तीव्र तनाव शीतयुद्ध की स्थिति है। उन्होंने यह भी माना है कि यह स्थिति सशस्त्र युद्ध से भी अधिक भयंकर होती है, जिसमें विभिन्न् पक्ष समस्याओं को सुलझाने के बजाय उलझाने का प्रयास करते हैं। उत्तरी गोलार्द्ध […]

मंजूर नहीं अराजक विरोध (नईदुनिया)

अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को अत्याचार और भेदभाव से बचाने वाले एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में विभिन्न् संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से बुलाए गए भारत बंद के दौरान कैसी खुली अराजकता का परिचय दिया गया, इसका पता कई लोगों के हताहत होने, बड़े पैमाने पर सरकारी एवं निजी […]

‘वयं आधुनिका:’ (प्रभात खबर)

II मृणाल पांडे II वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार नेशनल हेराल्ड समूह mrinal.pande@gmail.com आपको यह जानकर अचरज होगा कि जिस तरह आज हम अंग्रेजी में ‘द न्यू रियल’ यानी नयी सच्चाई को जगह देकर पुरानी सचाइयों को खारिज कर रहे हैं, वह सिलसिला आज का नहीं, बहुत पुराना है. सदियों से हर नयी पीढ़ी यह दावा करती […]

जल संकट के लिए तैयार रहें (प्रभात खबर)

II आशुतोष चतुर्वेदी II प्रधान संपादक, प्रभात खबर ashutosh.chaturvedi@prabhatkhabar.in गर्मी शुरू हो गयी है. हम सब जानते हैं कि हर साल की तरह हमारे गांव, कस्बे और शहर पानी की कमी से जूझेंगे. लेकिन, इस विषय में हम तभी सोचते हैं, जब समस्या हमारे सिर पर आ खड़ी होती है. न तो सरकारों की ओर […]

ये हिंसा डराती है (राष्ट्रीय सहारा)

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 में संशोधन के विरु द्ध भारत बंद में जिस तरह की भीषण हिंसा हुई वह आतंकित करने वाली है। बंद के दौरान ज्यादातर जगहों पर देखा गया कि लोग हिंसक उन्माद से भरे हुए हैं। कहीं आगजनी हो रही थी, तो कहीं तोड़फोड़। कुछ […]

जलवायु परिवर्तन के दौर में चिपको की याद (दैनिक ट्रिब्यून)

गोविन्द सिंह चिपको आन्दोलन की 45वीं जयन्ती पर गूगल ने डूडल के जरिये न सिर्फ एक पवित्र आन्दोलन की याद दिलाई, बल्कि देश के वनों की हालत पर पुनर्विचार करने का मौक़ा भी दे दिया। इस अवसर पर उत्तराखंड के वनों की दशा का भी जायजा लिया जाना चाहिए। यही नहीं, चिपको की सफलता-विफलता का […]



संपादकीय:Editorials (Hindi & English) © 2016