Day: March 5, 2018

रोजगार सब्सिडी से आर्थिकी को गति (दैनिक ट्रिब्यून)

भरत झुनझुनवाला सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए रोजगार गारंटी जैसी तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस संकल्प को दो तरह से हासिल किया जा सकता है। पहला रास्ता है कि व्यापारियों पर टैक्स लगाकर रकम हासिल की जाये और उस रकम का उपयोग सामाजिक सुरक्षा, रोजगार आदि उपलब्ध कराने के लिए किया जाये, जैसा […]

गोबर ग्रामीण जीवन की तकदीर बदलने के साथ खेती को बना सकता है लाभ का व्यवसाय (दैनिक जागरण)

नई दिल्ली [ पंकज चतुर्वेदी ]। हाल में प्रधानमंत्री ने मन की बात रेडियो कार्यक्रम में गोबर के सदुपयोग की अपील की। उन्होंने गोबरधन (गल्वानाइजिंग आर्गेनिक बायो एग्रो रिर्सोस फंड स्कीम)योजना की भी चर्चा करते हुए कहा कि मवेशियों के गोबर से बायो गैस और जैविक खाद बनाई जाए। उन्होंने लोगों से कचरे और गोबर […]

एक साथ चुनाव कराने का मतलब (अमर उजाला)

देवेन्द्र सिंह असवाल वर्तमान बजट सत्र के उद्घाटन भाषण में संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चिंता व्यक्त की कि बार-बार चुनाव होने से मानव संसाधन पर बोझ पड़ता ही है। साथ ही, आचार संहिता लागू होने से ‘देश की विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है।’ अत: उन्होंने सुझाव […]

The Medals Of Their Defeats (The Indian Express)

Written by Khaled Ahmed The second Oxford University Press edition of Crossed Swords: Pakistan, its Army and the Wars Within has brought a new focus on its gifted Pakistani author, Shuja Nawaz. He is a distinguished fellow at the Atlantic Council’s South Asia Center in Washington DC and was its founding director, and has been […]

Borrowing terms (The Indian Express)

The State Bank of India (SBI) has raised its one-year MCLR or marginal cost of funds-based lending rate from 7.95 per cent to 8.15 per cent, while hiking similarly for two- and three-year loans. So have the ICICI Bank and Punjab National Bank, even if not by as much. The increase in MCLRs, below which […]

अपनी जिम्मेदारी समझे मीडिया (अमर उजाला)

तवलीन सिंह श्रीदेवी के दुखद देहांत की खबर को टीवी पत्रकारों ने ऐसे पेश किया कि मुझे खुद के पत्रकार होने पर शर्म आती है। मेरे दोस्त वीर संघवी ने ट्वीट करके याद दिलाया कि हम सबको शर्मिंदा होना चाहिए। वीर ने अपने ट्वीट में कहा, ‘गिद्धों और टीवी समाचार चैनलों में अंतर क्या है? […]

सुर्खियों के प्रबंधन की राजनीति (बिजनेस स्टैंडर्ड)

शेखर गुप्ता राष्ट्रीय राजनीति अगर सुर्खियों के प्रबंधन तक सीमित रह गई है तो कहा जा सकता है कि भाजपा को इसमें ऐसा कौशल हासिल है जिसका कोई तोड़ नहीं है। बीते सप्ताहों की अखबारी सुर्खियों और टेलीविजन चैनलों पर प्राइम टाइम में चलने वाली बहसों पर नजर डालिए। वे सारी की सारी नीरव मोदी […]

आर्थिक दृष्टि से सही नहीं होते संरक्षणवादी कदम (बिजनेस स्टैंडर्ड)

मिहिर शर्मा सन 2014 में जब नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री बने थे तब कई लोगों ने कहा था कि वह आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को आगे ले जाएंगे। वे लोग खासतौर पर उत्साहित थे जो वर्षों से राजनीतिक माहौल में ढांचागत बदलाव की बात कह रहे थे क्योंकि किसी भी तरह की […]

समस्या का हल (बिजनेस स्टैंडर्ड)

टी. एन. नाइनन आर्थिक वृद्धि दोबारा 7 फीसदी का स्तर पार कर चुकी है। इस बीच यह अटकल लगाई जा सकती है कि क्या सुधार की प्रक्रिया अब थम गई है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने हालांकि दो अंकों की वृद्धि के वादे के साथ शुरुआत की थी लेकिन लगातार चार तिमाहियों […]

Law fugitive tycoons will definitely hate (The Economic Times)

The Cabinet’s nod for a new law that allows the government to take over all assets of loan defaulters and economic offenders who flee the country to evade criminal prosecution is pragmatic. Called the Fugitive Economic Offenders Bill (FEOB), the proposed law is meant to coerce such offenders to return to India, face prosecution and […]



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