Day: March 1, 2018

Higher education: No piecemeal reform (The Economic Times)

The limited public spending on higher education must flow more to the infrastructure essential for research and towards equitable access, while universities and colleges raise resources to meet running expenses. This is the context to understand the government’s decision asking central universities and institutions to generate revenues to pay 30% of the increase in faculty […]

जानिए, आधी आबादी के लोकतंत्र में महिला सशक्तीकरण एक नारा बनकर क्यों रह गया (दैनिक जागरण)

नई दिल्ली [ मृणाल पाण्डे ]। भारत सरकार द्वारा 2018-19 के बजट में मदवार आवंटित धनराशि और ठोस तथ्यों के आधार पर महिला सशक्तीकरण की ताजा किस्म कुल मिलाकर शिगूफा ही अधिक नजर आती है। चौंके नहीं। बजट से पहले इस बरस के सालाना आर्थिक सर्वेक्षण के मसौदे पर महिलाओं के हक में गुलाबी जिल्द […]

जानिए, भौतिकता की अंधी दौड़ में बच्चों का भविष्य संवारना एक चुनौती है (दैनिक जागरण)

नई दिल्ली [ डॉ. निरंजन कुमार ]। पिछले कुछ वर्षों में बाल और किशोर अपराधों के साथ-साथ बच्चों में विकृत-असामान्य व्यवहार के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। बच्चों की ओर से आक्रामक मनोवृत्ति का प्रदर्शन करने और यहां तक कि हिंसा, हत्या, दुष्कर्म की घटनाओं में शामिल होने की खबरें अब आए दिन दिखाई […]

कॉरपोरेट और किसान में फर्क क्यों (अमर उजाला)

देविंदर शर्मा पंजाब के बठिंडा में एक किसान को एक साल की जेल की सजा सुनाई गई और उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी किया गया। उसकी गलती बस यह थी कि वह बैंक से लिया दो लाख रुपये का कर्ज नहीं लौटा सका था। कुछ हफ्ते पहले हरियाणा के एक किसान को […]

सरकारी बैैंकों के कुप्रबंधन के लिए मोदी सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती (दैनिक जागरण)

पंजाब नेशनल बैैंक में घोटाले के बाद जिस तरह जानबूझकर कर्ज न लौटाने वाले सामने आए उसे देखते हुए वित्त मंत्रालय की सक्रियता स्वाभाविक है, लेकिन अच्छा होता कि उसने सरकारी बैैंकों को जैसे निर्देश अब दिए वैसे पहले ही दे दिए होते। वित्तीय सेवा सचिव ने सभी सरकारी बैैंकों के प्रबंध निदेशकों को कहा […]

न्यायिक अनुशासन की जरूरत (अमर उजाला)

सुधांशु रंजन न्यायिक अनुशासनहीनता संशय एवं अनिश्चितता को जन्म देती है। कानून बनाने के पीछे एक महत्तर उद्देश्य किसी विषय पर संशय खत्म कर निश्चितता लाना है। फिर भी संशय बना रहता है, जिसे अदालत दूर करती है और अंत में निश्चयात्मकता उच्चतम न्यायालय के निर्णयों से आती है, जो व्याख्या के जरिये व्यवस्था देता […]

A general overstepping (The Indian Express)

Written by Suhas Palshikar An army chief making headlines for the wrong reasons is a painful sight. Some months ago, it was about the incident of the human shield and the general’s views on fighting the dirty war. This time, General Bipin Rawat has connected his theory of dirty war to domestic politics. With his […]

Immersive journalism (The Indian Express)

The invasion of Iraq brought us the horror of embedded journalism, in which pliant hacks were scooped up by the American war machine and made to report exclusively from within the belly of the beast. It produced journalism that was like a deodorised, low-sodium, alcohol-free version of Nicholas Tomalin’s 1966 New Journalism classic from Vietnam, […]

A cautious hope (The Indian Express)

Amid the negative sentiment because of frauds reported by the country’s state-owned banks, comes the release of the latest economic data by the government’s statistics office or the CSO. It may help dispel some of the gloom for now. The CSO’s second advance estimates show that GDP grew 7.2 per cent in the October to […]

Uneasy rider (The Indian Express)

Motorcycle mania threatens international trade relations at the highest levels. Harley-Davidson (NYSE symbol HOG, poetically enough), Milwaukee’s finest contribution to Americana, is not upset about India’s duties on imported motorcycles, but a fantastic man in Washington is. For the second time in a fortnight, POTUS has raged about no benefits going to American industry from […]



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