Day: February 3, 2018

विवाद का खेल (जनसत्ता)

जल्लीकट्टू से जुड़े सवालों पर फैसला प्रधान न्यायाधीश ने संविधान पीठ को सौंप दिया है। इस हिंसक खेल को लेकर विवाद जितना पेचीदा हो गया है उससे पार पाने का एकमात्र रास्ता यही है कि संविधान पीठ ही इस पर अपना निर्णय सुनाए। जल्लीकट्टू को लेकर समय-समय पर जो राजनीति होती रही और मामले को […]

सांप्रदायिकता का कार्ड फेल (राष्ट्रीय सहारा)

अनिल चमड़िया आम चुनाव से पहले के उप चुनावों के परिणाम आम चुनाव के लिए एक संकेत के रूप में माने जाते हैं। भारतीय राजनीति के इतिहास में उप चुनाव के नतीजों को आम चुनाव में दोहराते देखा गया है। 1977 में जनता पार्टी की सरकार एक बड़े जन आंदोलन के बाद बनी थी। ये […]

Padmaavat And Its Discontents (TOI)

Why does Bhansali’s lavish serving of feudal glamour trouble Karni Sena so? Swagato.Ganguly@timesgroup.com For those who have watched Padmaavat, why Karni Sena should want to ban it and why right-wing administrations should sympathise becomes inexplicable. Sanjay Leela Bhansali’s lavish serving of feudal glamour and pomp ticks all the right Hindutva boxes: a Muslim king is […]

Desert defeat: on Congress victory in Rajasthan (The Hindu)

Byelections are not clear pointers to the direction of the political wind, even when they are held close to a general election. A host of local factors are often at play, and selection of candidates and civic grievances exercise as much influence on the voter’s mind as do livelihood concerns and governance issues. Even so, […]

Get cracking: on implementing ‘Modicare’ (The Hindu)

Courtesy – The NDA government lost precious time in its first three years in initiating a health scheme that serves the twin purposes of achieving universal coverage and saving people from high health care costs. It announced two years ago in the Budget a health protection scheme offering a cover of ₹1 lakh per family, […]

मोदी सरकार का अंतिम ‘पूर्ण बजट’, गांव और गरीब के लिए समर्पित ((दैनिक जागरण)

नई दिल्ली, [डॉ. अश्विनी महाजन]। मोदी सरकार का अंतिम ‘पूर्ण बजट’, गांव और गरीब के लिए सर्मिर्पत बजट कहा जाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य रक्षक योजना (ओबामा केयर से भी बड़ी) की घोषणा, भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र के अनुरूप किसानों को उनकी सभी फसलों के लागत मूल्य से 50 प्रतिशत अधिक का न्यूनतम […]

बड़ी चुनौती, भारत में समाज की अवधारणा नहीं बल्कि जातियों का जमावड़ा है ((दैनिक जागरण)

नई दिल्ली, [जेपी चौधरी]। डॉ. भीमराव अंबेडकर के जाति उन्मूलन सपने को पूरा कर पाने में स्वयंभू अंबेडकरवादी न सिर्फ नाकाम रहे हैं, बल्कि अपनी-अपनी जातियों के पक्ष में मजबूती से खड़े भी दिखाई देते हैं। ये जातिवाद को कोसते जरूर हैं, पर अपनी जाति को छोड़ने से परहेज भी रखते हैं। दलितों ने डॉ. […]

समावेशी विकास को मिलेगी रफ्तार, सामाजिक मुद्दों पर दिया गया ध्यान ((दैनिक जागरण)

नई दिल्ली, [सतीश सिंह]। एक फरवरी 2018 को पेश बजट में समावेशी विकास को सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। इसमें सामाजिक मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है। देश में गरीबी एक बहुत बड़ी समस्या है। गरीबों को स्वस्थ रखना सरकार के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। इसलिए हेल्थ वेलनेस सेंटर […]

मोदी सरकार के बजट में नहीं दिखा सबका साथ सबका विकास ((दैनिक जागरण)

नई दिल्ली, [सुशील कुमार सिंह]। वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से निकले देश की आय-व्यय के विवरण में सबका विकास कितना निहित है? यह मुद्दा हो सकता है, लेकिन बजट में गांव, कृषि, किसान और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कोई हिचक दिखाई गई फिलहाल इस आरोप से यह बजट मुक्त होता दिखाई देता है। […]

Loading...
संपादकीय:Editorials (Hindi & English) © 2016