Day: January 3, 2018

साख पर न आने पाये आंच (दैनिक ट्रिब्यून)

अनूप भटनागर समाज के विभिन्न क्षेत्रों से कार्यस्थल पर यौन शोषण के बारे में अक्सर शिकायतें मिलती रहती हैं और ऐसी घटनाओं की रोकथाम तथा इनसे सख्ती से निपटने के लिये कानून भी है। लेकिन जब म.प्र. उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश के खिलाफ अधीनस्थ न्यायपालिका की महिला सदस्य ने ऐसे आरोप लगाते हुए 2014 […]

अप्रिय विवाद (दैनिक ट्रिब्यून)

महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा में एक  आयोजन को लेकर शुरू हुए हिंसक टकराव ने आखिरकार राज्यव्यापी रूप ले लिया। स्वतंत्र भारत में जातीय अस्मिताओं के सहारे राजनीति करने वालों ने सामाजिक समरसता और चैनो-अमन को किस कदर क्षति पहुंचाई है, उसकी मिसाल कोरेगांव के टकराव और उसके निहितार्थों में मिलती है। ऐसे में सवाल उठता […]

ब्याज में कटौती सुखद (दैनिक ट्रिब्यून)

नये साल पर उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्टेट बैंक आफ इंडिया ने कर्ज के आधारभूत पैमाने में 30 बेस प्वाइंट्स की कटौती की है, जिससे न केवल बैंक के ग्राहकों को फायदा पहुंचेगा, बल्कि अन्य बैंक भी ऐसे कदम उठाने को बाध्य होंगे। फैसला जहां आवास ऋण की मांग को प्रोत्साहित करेगा वहीं दूसरी […]

On the ledger: on fiscal consolidation (The Hindu)

Eight months into the financial year, or until end November, the Union government’s fiscal deficit — the amount by which its expenditure exceeds revenue — had already overshot the year’s budget target by a significant ₹65,573 crore. And as in everything with numbers, there are several interesting insights to be had, some fairly straightforward and […]

बिना भेदभाव के ‘आधी आबादी’ को पूरा अधिकार और सम्मान दिलाना सरकार का फर्ज (दैनिक जागरण)

प्रशांत मिश्र एक साथ तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) के खिलाफ सरकार के प्रयास का समर्थन देश और राजनीतिक दलों का बड़ा हिस्सा कर रहा है। यह सवाल जरूर है कि कितने खुले दिल से कर रहे हैं और कितने ऐसे हैं जो मजबूर होकर साथ खड़े दिख रहे हैं। मुस्लिम समाज में भी एक […]

चुनावी बांड का चलन (दैनिक जागरण)

यह अच्छा हुआ कि चुनावी चंदे को साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से जिस चुनावी बांड की चर्चा पिछले आम बजट में की गई थी उसकी रूपरेखा सामने आ गई। अब देखना यह है कि एक हजार रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक के चुनावी बांड राजनीति में कालेधन के इस्तेमाल को किस हद तक […]

तीन तलाक पर केंद्र सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर (दैनिक जागरण)

रणदीप सिंह सुरजेवाला, नई दिल्ली। केंद्र की भाजपा सरकार की मानें तो तीन तलाक यानी ‘तलाक-ए-बिद्दत’ पर कानून लाने का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाना है। इस कानून से संबंधित विधेयक तीन तलाक को अवैध घोषित करने वाले सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को दोहराकर परिभाषित करता है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं और बच्चों […]

बैंकों के बुरे दिन कैसे होंगे खत्म (अमर उजाला)

अनन्त मित्तल सरकारी बैंकों को मिलने वाली 2.11 लाख रुपये अतिरिक्त पूंजी के बावजूद उनके अच्छे दिन नहीं आने की आशंका, मंद अर्थव्यवस्था की तलवार अभी लटके रहने और राजनीति के गर्माने का इशारा कर रही है। मंदी खिंचने की आशंका की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी पुष्टि कर दी। वित्त मंत्री भी संसद में […]

Anxieties of the dominant (The Indian Express)

Written by Christophe Jaffrelot , Kalaiyarasan A The recent clash in Pune district between the Mahars and Marathas reflects the anti-Dalit prejudice of the latter, but it needs to be analysed in the context of the changing status of dominant castes, not only in Maharashtra but across India. The claims of Patels, Jats and Marathas […]

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