Day: December 6, 2017

शशि कपूर : संवेदनशील सिनेमा के युगदृष्टा (पत्रिका)

– दीपक महान, वरिष्ठ टिप्पणीकार अपार दौलत इकट्ठी करने के बजाए शशि कपूर ने समाज को ‘कलयुग’, ‘36 चौरंगी लेन’ और ‘जुनून’ जैसी सार्थक फिल्में और ‘पृथ्वी थिएटर’ जैसा रंगमंच प्रदान किया ताकि नवीन कलाकारों को सृजन के अवसर मिल सकें। अगर मुस्कराहट से घायल करना जुर्म होता तो शशि कपूर करोड़ों बार मुजरिम होते। […]

दीर्घायु होना अभिशाप न बन जाए..? (पत्रिका)

– डॉ. नरेंद्र गुप्ता भारत में आम नागरिकों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, लोग लंबा जीवन जी रहे हैं। लेकिन, इस लंबे जीवन का क्या लाभ जबकि हम उन रोगों से घिर रहे हों जो जीवनशैली से जुड़े हैं। इसके साथ ही यह प्रश्न भी जुड़ा हुआ है कि क्या हम स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं […]

मुश्किल प्रत्यर्पण अपराधियों के लिए मौका (पत्रिका)

– विवेक तनखा, टिप्पणीकार अगर किसी देश का कोई नागरिक अपराध करके ब्रिटेन में शरणागत है तो उस देश की सरकार को वहां के न्यायालय के समक्ष साबित करना होगा कि उसने वाकई उनके देश के कानून का उल्लंघन किया है। लगता है ब्रिटेन, भारत के सफेदपोश अपराधियों के लिए कानून की गिरफ्त से बचने […]

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा बैंकों पर हमलों का सिलसिला लगातार जारी (पंजाब केसरी)

जहां पाकिस्तान ने अपने अस्तित्व में आने के समय से ही भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध छेड़ रखा है वहीं इसके पाले हुए आतंकी भी जम्मू-कश्मीर व भारत में अन्य स्थानों पर हिंसक गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। अब तो इन्होंने नोटबंदी के बाद अपनी आॢथक जरूरतें पूरी करने के लिए जम्मू-कश्मीर में बैंकों को […]

पाबंदी पर विवाद (हिन्दुस्तान)

अमेरिका की मंशा पूरी हुई या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबी हुई आकांक्षाओं की पूर्ति माना जाए? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आखिर छह मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका प्रवेश को प्रतिबंधित करने के राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश को मंजूरी दे दी। अलग बात है कि निचली अदालतों में अब भी इस मामले के कानूनी […]

वह दिन जब दुनिया हिल उठी (हिन्दुस्तान)

अशोक पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार भिंची हुई मुट्ठियां और उठे हुए हाथ इतिहास लिखते हैं, चाहे वह 15 अगस्त,1947 का स्वर्णिम इतिहास हो या 6 दिसंबर, 1992 की स्याह इबारत। आज पूरे पच्चीस बरस हो गए बाबरी विध्वंस को। हो सकता है कि कुछ जमातें इसे ‘शौर्य’ और ‘काला दिवस’ के रूप में फिर मनाएं, कुछ […]

सुनवाई से आस (जनसत्ता)

आखिर काफी इंतजार के बाद अयोध्या विवाद के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई शुरू हो गई। लिहाजा, अब उम्मीद की जा सकती है कि इस लंबे विवाद का स्थायी हल निकल आएगा। भारत में शायद ही कोई अन्य दीवानी मामला इतना चर्चित और इतना जटिल रहा हो। फिर, इस मामले की सबसे […]

न्याय का तंत्र (जनसत्ता)

भारत में अदालतों में जजों की भारी कमी और दो करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित होने के आंकड़े सिर्फ रस्मी तौर पर दोहराए जाते हैं। संवेदनशील और जागरूक लोगों के लिए यह एक बेचैन करने वाली खबर होती है, मगर हमारी सरकारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। न्यायशास्त्र के इस सूत्रवाक्य, ‘न्याय में […]

चुनावी भक्ति से नहीं धुलेंगे पुराने दाग (नईदुनिया)

– ए सूर्यप्रकाश कांग्र्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधी का हालिया सोमनाथ दौरा विवादों में घिर गया। राहुल के दौरे से दिखा कि चुनावी दौर में मतदाताओं को लुभाने के लिए नेता किस हद तक जा सकते हैं। यह साफ है कि राहुल गांधी चुनावी फायदे के लिए ही मंदिरों की खाक छानते फिर […]

जल्द निपटारे की आस (नईदुनिया)

अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस की 25वीं बरसी से एक दिन पहले ये उम्मीद बंधी कि इस मामले का निपटारा निकट भविष्य में हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को जुलाई 2019 (यानी अगले आम चुनाव के बाद) तक टालने की सुन्न्ी वक्फ बोर्ड के वकील की गुजारिश नामंजूर कर दी। इससे वे […]

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