Month: November 2017

पूरब की ओर देखते पश्चिम के देश (पत्रिका)

डॉ. मनन द्विवेदी विदेश मामलों के जानकार यह पहली बार नहीं है और न ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जो एशिया खासकर दक्षिण पूर्व एशिया को लेकर विशेष रणनीति पर काम कर रहे हैं। इतिहास में देखें तो पता चलता है कि अमरीका में वर्ष 1648 में वेस्टफेलिया संधि बनी। इस […]

ठप होता न्याय (पत्रिका)

गुलाब कोठारी राजसमंद जिले के देवगढ़ की घटना रौंगटे खड़े करने वाली है। उस पर पेश इस्तगासे पर अदालत ने यह कहते हुए प्रसंज्ञान लेने से इनकार कर दिया कि राज्य सरकार की ओर से पारित अध्यादेश के बाद मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती। यहां तक कि पुलिस अधीक्षक तक ने उसे बैरंग […]

दरवाजे खोलने ही होंगे युवाओं के लिए (पत्रिका)

– वरुण गांधी, भाजपा सांसद दलों को गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को कुछ पदों पर आरक्षण दिए जाने के साथ ही मुख्यधारा की राजनीति में प्रोफेशनल्स को शामिल करने के मुद्दे पर सक्रियता से विचार करने की जरूरत है। युवा राजनेता विशाल युवा आबादी वाले भारत की जरूरतों और ख्वाहिशों को समझते हैं। […]

वायु प्रदूषण का असर पडऩे लगा वैवाहिक जीवन पर (पंजाब केसरी)

राजधानी दिल्ली सहित देश के अन्य अनेक भागों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि में वायु एवं अन्य प्रदूषणों की समस्या पिछले चंद वर्षों के दौरान लगातार गम्भीर से गम्भीरतर होती जा रही है। इसी के दुष्प्रभावों के सम्बन्ध में गत दिनों जब हमारे एक परिचित मिलने आए तो उन्होंने बड़ी दिलचस्प और आश्चर्यजनक बात सुनाई। […]

दुनिया से जुड़ने का हमारा अधिकार (हिन्दुस्तान)

हरजिंदर, हेड-थॉट, हिन्दुस्तान मान लीजिए, आपकी तबीयत खराब है और आप डॉक्टर के पास जाने के लिए टैक्सी बुलाते हैं। टैक्सी वाला बताता है कि अगर आप फलां डॉक्टर के पास जाते हैं, तो आपको टैक्सी का इतना किराया देना पड़ेगा और अगर दूसरे के पास जाते हैं, तो किराया कुछ ज्यादा लगेगा। उसकी लिस्ट […]

तंजीमों के आगे नतमस्तक एक मुल्क (हिन्दुस्तान)

सुशांत सरीन, पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ पाकिस्तान के अंदरूनी हालात अच्छे नहीं दिख रहे। वहां अगले साल अगस्त के आसपास आम चुनाव होने वाले हैं, लेकिन मौजूदा सियासी तस्वीर अस्थिरता की ही है। जो शख्स (नवाज शरीफ) चुनाव जीतता है, उसे सियासत से कानूनी तौर पर बाहर कर दिया गया है, मगर परदे के पीछे […]

बयान बनाम पहरेदारी (जनसत्ता)

पिछले दिनों फिल्म पद्मावती को लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अनेक राजनेताओं ने तल्ख बयान दिए, जिसके मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि फिल्म पर राजनेताओं को किसी भी तरह के बयान से बचना चाहिए। मगर यह बात अपने बयानों और ट्वीटों के लिए सदा चर्चा में रहने वाले हरियाणा के स्वास्थ्यमंत्री अनिल विज […]

मौत की नींद (जनसत्ता)

कई बार ऐसे बड़े हादसे हो जाते हैं, जिनसे मामूली सावधानी बरत कर बचा जा सकता है। मगर कई बार जागरूकता के अभाव में तो कई बार अभाव में जरूरत पूरी करने की गरज में लोग ऐसे रास्तों का सहारा ले लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। दिल्ली के कैंट इलाके […]

मुशर्रफ का सईद-प्रेम (नईदुनिया)

पाकिस्तान में राजनीति, सेना और आतंकवाद के बीच सीमारेखा खींचना कठिन है, यह बात जगजाहिर है। वहां सरकार की कमान सेना के हाथ में रहती है और वे दोनों मिलकर अक्सर आतंकवाद का इस्तेमाल करते हैं, इसकी अनगिनत मिसालें हैं। पाकिस्तानी राजसत्ता ने दशकों से भारत और अफगानिस्तान के मामले में अपने रणनीतिक हित साधने […]

कहां तक जा रहा झूठ का ये कारवां! (नईदुनिया)

– प्रदीप सिंह ‘कौआ कान ले गया कहावत तो आपने सुनी ही होगी। लोग अपना कान देखने की जहमत उठाने के बजाय कौवे के पीछे दौड़ पड़ने का काम करते ही रहते हैं। बाकी कोई ऐसा करे तो करे, लेकिन जब पत्रकार/बुद्धिजीवी ऐसा करने लगें तो मानना चाहिए कि कुछ गड़बड़ है और समस्या गंभीर […]

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