मुश्किल प्रत्यर्पण अपराधियों के लिए मौका (पत्रिका)


– विवेक तनखा, टिप्पणीकार

अगर किसी देश का कोई नागरिक अपराध करके ब्रिटेन में शरणागत है तो उस देश की सरकार को वहां के न्यायालय के समक्ष साबित करना होगा कि उसने वाकई उनके देश के कानून का उल्लंघन किया है।

लगता है ब्रिटेन, भारत के सफेदपोश अपराधियों के लिए कानून की गिरफ्त से बचने की सुरक्षित शरणगाह बनता जा रहा है। कैसेट किंग गुलशन कुमार हत्याकांड के मुख्य आरोपी नदीम अख्तर सैफी हो या इंडियन प्रीमियर लीग घोटाले के साजिशकर्ता ललित मोदी अथवा फिर भारत के सार्वजनिक और निजी बैंको का हजारों करोड़ रुपया डकारने वाले लिकर किंग विजय माल्या। उसके प्रत्यर्पण पर ब्रिटेन में सुनवाई हो रही है। ये सभी भारत से भागकर कर ब्रिटेन में शरण लिये हुए हैं।

इन्हें लगता है कि समस्त विश्व में ब्रिटेन की एकमात्र वह देश है जहां ये सजा से बचे रह सकते हैं। इसका प्रमुख कारण है ब्रिटेन की न्याय व्यवस्था का निष्पक्ष और बेहद मजबूत होना। वहां के न्यायालय के न्यायाधीश किसी भी राजनीतिक, सामाजिक अथवा आर्थिक दबाव से प्रभावित नहीं होते।


किसी देश का कोई नागरिक अपराध करके ब्रिटेन में शरणागत है तो उस देश की सरकार को वहां के न्यायालय के समक्ष साबित करना होगा कि उसने वाकई उनके देश के कानून का उल्लंघन किया है। ऐसे में जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों पर आ जाती है कि वह अपने सबूत मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखे। इन सभी मामलों में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि किसी को आखिर इतना मौका ही क्यों मिलता है कि वह देश में अपराध कर किसी दूसरे देश में शरण ले ले।

क्या यह हमारी कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार संस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा नहीं करता। जब अपराधी देश में ही जांच एजेंसियों के सामने होता है तो उसे इतनी ढील क्यों दी जाती है कि वह सबको अंगूठा दिखाकर बिना किसी हानि के सुरक्षित निकल जाए। जब ऐसे प्रभावशाली लोगों के खिलाफ शिकायतों पर शिकायतें दर्ज होती हैं तब ही कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होती?

क्यों जांच के नाम पर इन्हें अपने बचाव का समय दिया जाता है। लम्बी प्रक्रिया व लचीले सरकारी रवैये से ब्रिटेन ऐसे अपराधियों के लिए पसंदीदा देश बनता जा रहा है। क्या हमारी सरकार ऐसे मामलों में ब्रिटिश न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रख पाती है? पिछले वर्षों के दौरान हुए मामलों को देखें तो भारत सरकार की नाकामी साफ नजर आती है।

ऐसी ही नाकामी नदीम अख्तर और ललित मोदी मामले में उजागर हो चुकी है। ललित मोदी के खिलाफ तो रेडकॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अभी तक पकड़ में नहीं आया। अब आवश्यक हो गया है कि सरकार ऐसे मामलों में सख्ती से निपटे। साथ ही ऐसे अपराधियों को सजा दिलाकर ब्रिटेन को भी अपराधियों की शरणगाह बनने से बचाना होगा।

सौजन्य – पत्रिका।

Updated: December 6, 2017 — 10:16 am

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