नवाब की बेबाक दास्तान (दैनिक ट्रिब्यून)


आरती लम्ब
‘खुश रहो अहले वतन/हम तो सफर करते हैं’ या फिर ‘बाबुल मोरा/नैहर छूटोहि जाये…’ लिखावट के हर हरफ ने बताया कि लिखने वाला दिल किस कदर भावुक। अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह। कहने को शाह-नवाब, मगर दिल… खालिस कलाकार का। गर इतिहास उन्हें रंगीले पिया, जाने आलम जैसे रंगीन उनवानों से पुकारे तो क्या गलत। बेबाक भी इस कदर कि अपनी तमाम रंगीनियों की दास्तान को 26 बरस की उमर में उड़ेल डाला परीखाने के हर एक पन्ने पर। इस इश्कनामे को उन्होंने फारसी में लिखा, जो फारसी से उर्दू और फिर उर्दू से शकील सिद्दीकी द्वारा किये हिंदी तर्जुमे के बाद अब परीखाना नाम से प्रकाशित हुआ है। पाठकों तक इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को पहुंचाने का काम किया है प्रकाशक ‘राजपाल एंड सन्ज़’ ने।
इस सांस्कृतिक दस्तावेज़ में धड़कती है लखनवी नफासत-नज़ाकत, नवाब की मोहब्बत और केवल मोहब्बत से सराबोर शख्सियत, इश्क की रंगीनियां, हुस्न की चालाकियां, महलों के भीतर के रनिवासों में होने वाले धोखे, छल-कपट, राजनीति से भी गहरी राजनीति। ये सब ब्योरा तफसील से एक-एक घटना के ज़रिये शुमार है इस किताब में। 26 की बाली उमर में इंसान जिस तरह का माशूक हो सकता है, बिल्कुल उसी तरह के माशूक नवाब वाजिद अली शाह। हालांकि कम उम्र में ही इश्क के ढेरों अनुभवों से राब्ता कायम था उनका। किताब पढ़ते हुए वाजिद अली की जिस शख्सियत से हम रूबरू होते हैं, वह कामकुंठा से ग्रस्त नवाब की नज़र आती है। स्त्री उन्मुख एक ऐसा किरदार, जिसका सारा समय प्रेमिकाओं, परियों और बेगमों से चुहलबाजियां करने, उनके नाज़-नखरे उठाने, स्त्री संपर्क के नये अनुभव हासिल करने में बीतता है। मगर उनकी कम उम्र या तब के नवाबी माहौल का तकाज़ा करें तो शायद समझ पायेंगे कि इतनी विलासिता क्यों? सामंती इतिहास इसी विलासिता और भोग-विलास के तो दर्शन करवाता है।
मगर किताब में भोग-विलासी नवाब के अलावा जिस चीज़ के दर्शन होते हैं, वह है संगीत के प्रति उनका प्रेम और उनका शायराना होना। लिजलिजे खुलासों के बावजूद उस दौर के जीवन की चटख परझाइयां इस किताब को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक दस्तावेज़ों की सूची में शुमार करती है।
0पुस्तक : परीखाना 0अनुवादक : शकील सिद्दीकी 0प्रकाशक : राजपाल एंड सन्ज़ 0पृष्ठ संख्या : 170 0मूल्य : रु.225


सौजन्य – दैनिक ट्रिब्यून।

Updated: January 6, 2018 — 9:39 pm

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Loading...
संपादकीय:Editorials (Hindi & English) © 2016