Day: October 4, 2019

कुपोषण के विरुद्ध एक अभिनव पहल (दैनिक ट्रिब्यून)

मधुरेन्द्र सिन्हा दुनिया के तमाम धनी देशों की एक खासियत आम है कि उनके नागरिक स्वस्थ और कमोबेश निरोगी हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था आज बेशक दुनिया में छठवें पायदान पर पहुंच गई है लेकिन स्वास्थ्य और निरोगी नागरिकों के मामले में हम कई पड़ोसी देशों से भी पीछे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि हमारे...

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गड्ढों की गहराई, उम्मीदों की ऊंचाइयां (दैनिक ट्रिब्यून)

हेमन्त कुमार पारीक अभी घनघोर बारिश हो रही है। चारों तरफ पानी ही पानी है। सड़कें हंसती-मुस्कुराती महाभारत का जुमला याद दिला रही हैं—मानो कह रही हों, अंधों के पुत्र! देख लो, जहां जल दिख रहा है वहां थल है। …और जहां थल दिखता है वहां जल है। इसी कन्फ्यूजन के चलते धनीराम पुलिस वाला...

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खेलने-खाने की उम्र में बड़ी जिम्मेदारी (दैनिक ट्रिब्यून)

अरुण नैथानी ग्यारह साल की उम्र में कोई लड़की यदि आम रुचियों से इतर दुनिया की गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझने का ज़ज्बा रखे तो हैरत होती है। फिर वह भारत से निकलकर संयुक्त राष्ट्र की बहुचर्चित क्लाइमेट चेंज समिट तक में विरोध दर्ज करा आए तो उसके गंभीर सरोकारों पर चर्चा करना बनता है।...

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साधने पर सफल रहे पीएम मोदी, असहमति के बाद भी करीब आया अमेरिका (दैनिक जागरण)

[हर्ष वी पंत]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया अमेरिकी दौरे पर खासी टीका-टिप्पणियां हो रही हैं। यह स्वभाविक भी है। जहां उनके समर्थक इस दौरे को भारत के लिए बड़ी जीत करार दे रहे हैं वहीं प्रधानमंत्री के आलोचकों का कहना है कि इस दौरे में कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं हुई, मगर इस बात...

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Bihar Flood And Weather Update: बेतरतीब शहरीकरण से आफत बन गईं राहत की बूंदें (दैनिक जागरण)

[प्रमोद भार्गव]। Bihar Flood And Weather Update: मौसम के अनुमानों को गलत साबित करते हुए पिछले सप्ताह मूसलाधार बारिश ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों समेत राजधानी पटना को अपनी चपेट में ले लिया। पटना के करीब 80 प्रतिशत आवासीय इलाकों में पानी भर गया। यहां की सड़कों पर नावें चल रही हैं। लोगों का सामान्य...

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गीता के ज्ञान पर व्यर्थ का विवाद, भारतीय संस्कृति पर सवाल खड़े करना वामपंथियों की पुरानी आदत (दैनिक जागरण)

[प्रो. निरंजन कुमार] प्रसिद्ध चिंतक मारकस गार्वी लिखते हैं कि अपने अतीत, मूल और संस्कृति के ज्ञान के बिना व्यक्ति अथवा समाज एक जड़हीन वृक्ष की तरह है। अतीत की ओर देखने का अर्थ भविष्य से मुंह मोड़ना नहीं है, क्योंकि अतीत भविष्य की प्रशस्त राह बनाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो वामपंथियों, छद्म...

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पराली जलाए जाने से दिल्ली-एनसीआर में हर साल फैलती है जहरीली हवा, केंद्र सरकार पहले से हुई अलर्ट (दैनिक जागरण)

यह हैरान करता है कि बीते वर्षों में तमाम चिंता और चेतावनी जताए जाने के बाद भी दिल्ली के पड़ोसी राज्यों और खासकर पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाया जाना शुरू हो चुका है। हालांकि इन राज्यों में पराली जलाए जाने की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार सतर्क हो गई है, लेकिन ऐसा तो बीते...

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अहम हैं ह्यूस्टन के संदेश (प्रभात खबर)

प्रभु चावला एडिटोरियल डायरेक्टर द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ह्यूस्टन अमेरिका के उस अंतरिक्ष कार्यक्रम का गढ़ था, जिसने मनुष्य को चांद पर भेजा. पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ह्यूस्टन के भरे-पूरे स्टेडियम में ‘हाउडी मोदी!’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आकर्षण का संग पाकर फूले नहीं समा रहे थे, जब इस कार्यक्रम ने व्हाॅइट...

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संपादकीय: पाबंदी से मुक्ति (जनसत्ता)

जम्मू संभाग में विपक्षी नेताओं पर से पाबंदियां हटा ली गई हैं। अब वे सभी तरह की राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से नेताओं को उनके घरों में एक तरह से नजरबंद कर दिया गया था। उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी...

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संपादकीय: एक और कवायद (जनसत्ता)

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को एक बार फिर नीतिगत दरों में कटौती करते हुए अर्थव्यवस्था की सुस्ती तोड़ने की कोशिश की है। केंद्रीय बैंक का यह कदम इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि बाजार की हालत अच्छी नहीं है, इसलिए नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसद की और कटौती करने जैसा...

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