Day: October 1, 2019

ग्लोबल वार्मिंग के खतरों के अनुरूप बने नीति (दैनिक ट्रिब्यून)

भरत झुनझुनवाला वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि किसी क्षेत्र में किसी विशेष समय भारी वर्षा के कारण बाढ़ से तबाही हो रही है। वही क्षेत्र एक माह पहले सूखे की चपेट में था। जैसे इस समय मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ देखी जा रही है। इस परिस्थिति का...

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केंद्र के फैसले की न्यायिक समीक्षा का प्रश्न (दैनिक ट्रिब्यून)

अनूप भटनागर ‘एक राष्ट्र, एक विधान-एक ध्वज, एक राष्ट्रगान’ के भाजपा और संघ के नारों के परिप्रेक्ष्य में भले ही केन्द्र ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों के साथ ही अनुच्छेद 35-ए को खत्म कर दिया है, लेकिन सरकार के इस फैसले की न्यायिक समीक्षा...

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श्मशान में कस्टमर केयर और विदेशी निवेश (दैनिक ट्रिब्यून)

आलोक पुराणिक पीएम मोदी ने अमेरिका में भारतीय अर्थव्यवस्था की शानदार तस्वीर पेश की, उम्मीद है कि अब अमेरिका में भारी तादाद में विदेशी निवेश आयेगा। भारतीय अब लाइफ स्टाइल पर बहुत खर्च करने लगे हैं, यह बात अमेरिकन कंपनियों को समझ में आ रही है और उन्हें यह भी समझ में आ रहा है...

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आफत की बारिश (दैनिक ट्रिब्यून)

मा नसून की विदाई का समय पूरा होने के बावजूद हो रही मूसलाधार बारिश से देश के विभिन्न भागों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत और जन-जीवन अस्त-व्यस्त होने की खबरें हैं। अकेले उत्तर प्रदेश व बिहार में पचास से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो बिहार की...

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सत्ता दमनकारी क्यों है? (राष्ट्रीय सहारा)

सड़कों पर चलने वाले यातायात के साधनों के लिए नियम-शतरे के उल्लंघन को रोकने के इरादे से केंद्र सरकार ने नये दंडात्मक उपाय किए हैं। केंद्र का कहना है कि ये उपाय जरूरी थे क्योंकि हर वर्ष लाखों लोग सड़क दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं को राष्ट्रीय क्षति माना जाता है। सरकार...

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An illusion of parity (The Indian Express)

Written by C. Raja Mohan As China celebrates the 70th anniversary of the founding of the People’s Republic with much military pomp and nationalist pride today, India must reflect upon the extraordinary transformation on its northern frontiers. China’s internal and external trajectory has enthused, puzzled and troubled India since the early 20th century. The PRC’s...

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Swachh Bharat Mission के 5 साल, जानें- कितना रहा कामयाब; यूपी CM का विशेष लेख (दैनिक जागरण)

[योगी आदित्यनाथ]। अल्पानामपि वस्तूनां संहति कार्यसाधिका। तृणैर्गुणत्वमापन्नैर बध्यन्ते मत्तदन्तिन।। अर्थात अल्प वस्तुओं का पुंज भी कार्य निपटाने वाला बन जाता है। तिनके जब रस्सी बन जाएं तो उसमें मत्त हाथी भी बांध दिए जाते हैं। स्वतंत्र भारत की ऐसी ही अद्भुत और अद्वितीय घटना है स्वच्छ भारत अभियान। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि...

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अब शहरों में बच्चे क्रेच में पलने और बुजुर्ग ओल्ड एज होम्स या वृद्धाश्रम में रहने को विवश क्‍यों? (दैनिक जागरण)

[मुनि शंकर]। प्रसिद्ध विचारक जेम्स गारफील्ड ने कहा है, ‘यदि वृद्धावस्था की झुर्रियां पड़ती हैं तो उन्हें हृदय पर मत पड़ने दो। कभी भी आत्मा को वृद्ध मत होने दो।’ मगर आज ये झुर्रियां अपनों के बर्ताव के कारण बहुत से वृद्धों के चेहरे पर समय से पहले दिखने लगती हैं। वर्तमान समय में हमारे...

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राष्ट्रपिता गांधी जी का सपना पूरा करता स्वच्छता अभियान, जन सहयोग बना क्रियान्वयन का माध्यम (दैनिक जागरण)

[ गजेंद्र सिंह शेखावत ]: हमारे देश में यह त्रासदी रही कि जिस स्वच्छता को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता से भी ज्यादा आवश्यक मानते थे उस विषय को आजादी के बाद यथोचित प्राथमिकता नहीं दी गई। 1947 से लेकर 2014 तक हम केवल 39 प्रतिशत घरों तक ही शौचालय की सुविधा पहुंचा पाए थे। इसके...

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बैैंक घोटाले पर शरद पवार की राजनीति: हम शिवाजी के अनुयायी हैं दिल्ली के तख्त के आगे नहीं झुकेंगे (दैनिक जागरण)

[ अवधेश कुमार ]: महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार सहित बैंक के 70 पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग और अन्य मामलों में मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तो हंगामा मचा ही है, देश में भी...

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