Day: September 19, 2019

चमकीली होती सोने की चमक (प्रभात खबर)

सतीश सिंह आर्थिक विशेषज्ञ सोने की चमक फीकी पड़ने का नाम नहीं ले रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़कर 1,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच चुकी है. भारत के वायदा बाजार में अक्तूबर का वायदा भाव 37,800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो चुका है. सितंबर के पहले सप्ताह में मुंबई...

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चमकीली होती सोने की चमक (प्रभात खबर)

सतीश सिंह, आर्थिक विशेषज्ञ सोने की चमक फीकी पड़ने का नाम नहीं ले रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़कर 1,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच चुकी है. भारत के वायदा बाजार में अक्तूबर का वायदा भाव 37,800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो चुका है. सितंबर के पहले सप्ताह में मुंबई...

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बदले माहौल में स्वर्ण पर लगते भारतीय निशाने (हिन्दुस्तान)

मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार क्रिकेट अब अकेला ऐसा खेल नहीं रहा, जिसमें हम विश्व स्तर पर बड़ी उम्मीद बांध सकते हैं। इन खेलों में निशानेबाजी पहले नंबर पर है। पहले हमारे निशानेबाज अंतरराष्ट्रीय स्पद्र्धाओं में भाग लेने के लिए जाया करते थे, लेकिन अब वे पदक, खासतौर से सोने के तमगे पर निशाना साधने...

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संपादकीय: पारदर्शिता का तकाजा (जनसत्ता)

करीब चौदह साल पहले जब सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ था, तब इसका मकसद यही था कि सरकार और उसकी मदद से चलने वाले संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता लाई जाए, ताकि जनता का हित सुनिश्चित हो सके। शुरुआती दिनों से ही इस कानून ने समूचे सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर खासा असर डाला...

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संपादकीय: जुर्माने का खौफ और सवाल (जनसत्ता)

संजय कुमार सिंह नए मोटर वाहन कानून में भारी जुर्माने की धाराओं को लेकर इन दिनों काफी शोर और विवाद मचा हुआ है। भारी जुर्माने से यातायात नियमों के उल्लंघन को कम करने की कोशिश केंद्र सरकार का एक स्वागतयोग्य कदम है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यातायात के नियमों का उल्लंघन नहीं...

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संपादकीय: फिर मध्यस्थता (जनसत्ता)

रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच एक बार फिर से मध्यस्थता की बात उठी है। हालांकि इस बार सुनवाई करने वाले पांच सदस्यीय खंडपीठ ने यह साफ कर दिया है कि भले मध्यस्थता के प्रयास चलते रहें, लेकिन अदालत इस मामले की सुनवाई जारी रखेगी। अदालत ने दोनों...

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Dangerous vacuum: On detention of J&K leaders (The Hindu)

The detention of National Conference leader Farooq Abdullah under the Public Safety Act on Monday marks a new, dangerous low in the overreach of state power to curtail liberty in Kashmir. The 81-year old leader has been thrice Chief Minister, Union Minister and five times Member of Parliament. He is currently MP from Srinagar. His...

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The Taliban problem: On the Afghan crisis (The Hindu)

When the U.S.-Taliban talks collapsed last week, the insurgent group threatened to step up attacks in Afghanistan. It made good on its pledge on Tuesday using two suicide bombers who killed at least 48 people by targeting a rally being addressed by Afghan President Ashraf Ghani north of Kabul, and also the capital. These attacks...

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निर्णय की ओर (हिन्दुस्तान)

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले को लेकर इधर अचानक ही उलझनें कुछ ज्यादा बढ़ रही थीं। रोज-रोज की सुनवाई में जब यह मामला तेजी से आगे बढ़ रहा था, तो अचानक ही कुछ शंकाएं पैदा हो गईं। फिर से कुछ पक्षों ने मध्यस्थता की मांग शुरू कर दी, जिसकी कोशिश...

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ओबीसी आरक्षण और ‘क्रीमी लेयर’, सभी वर्गों के विकास की चिंता (अमर उजाला)

महीपाल देश आजाद हुआ, तो सबके विकास के लिए संविधान में अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों में प्रावधान किया गया। पर यह प्रावधान स्पष्ट न होकर अनुच्छेद 340 में किया गया था। उसी के तहत जनवरी, 1953 में काका कालेलकर की अध्यक्षता में प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग गठित हुआ। आयोग ने सामाजिक...

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