Day: September 7, 2019

संपादकीय: जुर्माना और अनुशासन (जनसत्ता)

जबसे मोटर वाहन संबंधी संशोधित अधिनियम लागू हुआ है, एक अजीब तरह की अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। पिछले करीब एक हफ्ते से रोज भारी जुर्माने की खबरें आ रही हैं। किसी पर चौरानबे हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा चुका है। इससे आहत होकर एकाध लोगों के पुलिस कर्मियों से उलझने और...

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करदाताओं का बढ़ता दायरा और बचने की सीमित गुंजाइश का मतलब (अमर उजाला)

नारायण कृष्णमूर्ति विगत 31 अगस्त को वार्षिक आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि खत्म हुई है और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आंकड़े उत्साहजनक संकेत दर्शा रहे हैं। विगत 31 अगस्त तक 5.65 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए, जिनमें से 49,29,121 आयकर रिटर्न अंतिम तिथि को दाखिल किए गए, यानी आखिरी दिन...

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शिवकुमार की बहुमुखी प्रतिभा सबके लिए फायदे का सौदा (बिजनेस स्टैंडर्ड)

आदिति फडणीस कांग्रेस नेता डोड्डलहल्ली केंपेगौड़ा (डीके) शिवकुमार को इस सप्ताह के आरंभ में कथित धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया। कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित राज्य होने के बावजूद शिवकुमार प्रांत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन करवाने में कामयाब रहे। रामनगर, चेन्नपट्टना और उसके आसपास के इलाके...

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बाकी हैं एनआरसी पर न्याय की उम्मीदें (दैनिक ट्रिब्यून)

अवधेश कुमार असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची पर जिस तरह का हंगामा मचा है, वह स्वाभाविक है। जब जुलाई 2018 में मसौदा जारी हुआ था तब भी ऐसा हुआ था। हालांकि उस समय सूची से 40.37 लाख लोगों के नाम गायब थे। अब अंतिम सूची से 19,06,657 लोग बाहर हो गए...

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अर्थव्यवस्था का प्रश्न (बिजनेस स्टैंडर्ड)

टी. एन. नाइनन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली दूसरी सरकार पर कोई यह आरोप नहीं लगा सकता कि वह निष्क्रिय है। उसके शुरुआती 100 दिन तो सक्रियता से भरे रहे हैं। जम्मू कश्मीर में ऐतिहासिक कदम उठाया गया, संसद के जरिये कई कानून पारित किए गए और स्वयं प्रधानमंत्री भूटान, जी-7, संयुक्त अरब अमीरात,...

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थर्ड डिग्री के होने-न-होने का रुतबा (दैनिक ट्रिब्यून)

अब अपराधियों को थर्ड डिग्री देने की कोई जरूरत नहीं है। पहले जिस अपराधी को थर्ड डिग्री नहीं मिलती थी, उसे अपराधियों की बिरादरी में या तो कतई सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता है या फिर बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था, बीच का कोई रास्ता नहीं था। जैसे पांच-सात खून...

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वेब के प्रतिगामी दौर में किताब की वापसी (बिजनेस स्टैंडर्ड)

अजित बालकृष्णन जब मुझे यह अहसास हुआ कि मैं इलेक्ट्रॉनिक किताबों की तुलना में हाल-फिलहाल छपी हुई किताबें पढऩा काफी पसंद करने लगा हूं तो मैं आदत में आए इस बदलाव पर गौर करने से खुद को नहीं रोक पाया। पिछले दो दशकों से किंडल जैसे इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में उपलब्ध किताबें ही खरीदकर पढ़ता आया...

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NHAI can, should reduce debt burden (The Economic Times)

Reports say that the National Highways Authority of India (NHAI) is fast accumulating excessive debt as it grows fast. Union highways minister Nitin Gadkari says NHAI plans to raise long-term finance from banks by securitising user fee receipts from toll plazas. But it surely can do much more. NHAI needs to leverage its locational, ‘right...

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Getting states to release payments (The Economic Times)

One of the seriously useful measures announced by finance minister Nirmala Sitharaman to counter the economic slowdown was releasing outstanding dues of the government to companies that had done work for it or supplied things for it. For the central government, she said,.`30,000 crore of dues would be released. She went on to say that...

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भारत की साख और शक्ति के लिए जरूरी पहल (हिन्दुस्तान)

राजेश्वरी पिल्लई राजगोपालन प्रमुख, न्यूक्लीयर ऐंड स्पेस पॉलिसी इनीशिएटिव, ओआरएफ भारत चंद्रयान-2 के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में नई कहानी लिख रहा है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे अन्य देश पहले चंद्रमा पर मानव और रोवर लैंडिंग कर चुके हैं। भारत पहले चंद्रमा और मंगल के लिए अभियान कर चुका है। यह बहुचर्चित तथ्य है...

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