Day: September 5, 2019

अपाचे की ताकत (जनसत्ता)

बदलते दौर में जैसी गंभीर सामरिक चुनौतियां सामने आ रही हैं और लड़ाई के तौर-तरीके बदल रहे हैं, उसे देखते हुए अत्याधुनिक हथियारों और साधनों की जरूरत भी बढ़ी है। ऐसे में सेना के आधुनिकीकरण की महत्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। भारतीय वायु सेना के इतिहास में मंगलवार को उस वक्त नया अध्याय...

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संपादकीय: हादसों के ठिकाने (जनसत्ता)

औद्योगिक हादसों पर काबू पाने और कारखानों में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के पुख्ता उपाय करने की जरूरत लंबे समय से रेखांकित की जाती रही है मगर इस दिशा में अपेक्षित ध्यान अब तक नहीं दिया गया है। यही वजह है कि जब-तब कारखानों में आग लगने, रसायन और गैस आदि के रिसाव...

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मंजिलें और भी हैं: समय मिले तो हमें अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूसरों का भला करना चाहिए (अमर उजाला)

डॉ शशि राव अर्थशास्त्र से परास्नातक की डिग्री लेने के बाद मैं नौकरी करने के उद्देश्य से अमेरिका चली गई। यों तो मैं बंगलूरू की रहने वाली हूं, पर मेरी उच्च शिक्षा पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला से हुई है। अमेरिका जाने के बाद शुरुआती दौर में नौकरी नहीं मिली, तो मैंने वहां के एक डे-केयर सेंटर...

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Unions protest too much on mergers (The Economic Times)

Banks unions are reportedly planning to launch a protest against the proposed merger of 10 State-owned banks into four large ones. Resistance from unions is not unexpected, but the view that the plan lacks any rationale and will not help reduce the problem of bad loans is blinkered. A few large banks that can lend...

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ब्रेग्जिट पर समस्या (द गार्जियन, ब्रिटेन)

विपक्ष और अपनी ही पार्टी के 21 सांसदों के हाथों बोरिस जॉनसन की हार कंजरवेटिव पार्टी की आत्मा पर प्रहार जैसी है। बोरिस को प्रधानमंत्री पद संभाले छह सप्ताह बीत चुके हैं। वह 31 अक्तूबर तक यूरोपीय संघ छोड़ने का अपना वादा तोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जबकि उन्होंने इसे करो या मरो का...

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इस कोशिश को आगे ले जाना होगा (हिन्दुस्तान)

अजय साहनी, आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ पड़ोसी देश की जमीन पर पल रहे दाऊद इब्राहीम, मसूद अजहर, जकी-उर रहमान लखवी और हाफिज सईद को भारत सरकार ने अब गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत आतंकी घोषित कर दिया है। ये सभी अपराधी भारत में कई आतंकी हमलों के सूत्रधार रहे हैं। कानून में इस प्रावधान से...

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रस्म भर न रह जाए शिक्षक दिवस (हिन्दुस्तान)

हरिवंश चतुर्वेदी डायरेक्टर, बिमटेक देश के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाने का जो सिलसिला 1967 में शुरू हुआ, स्कूल-कॉलेजों में अब वह एक उत्सव का रूप ले चुका है। इस दिन जमकर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और शिक्षकों की महिमा के गीत गाए जाते हैं। इस बीच...

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बटाला के सबक (हिन्दुस्तान)

समाचारों में इसे महज हादसा ही बताया जा रहा है, लेकिन गुरदासपुर के बटाला कस्बे की गैरकानूनी पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट और आगजनी को हादसा बताना इसके पीछे की गलतियों और लापरवाहियों को बहुत कम करके देखना होगा। जिस एक घटना में 23 लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए, वह...

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शहरों की चिंता (हिन्दुस्तान)

हमारे शहर क्या रहने लायक हैं? अगर रहने लायक हैं, तो कितने रहने लायक हैं? ऐसे प्रश्न जितने जरूरी हैं, उतने ही जरूरी हैं इनके उत्तर। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने जो ताजा ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स (जीवन-अनुकूलता सूचकांक) की रिपोर्ट जारी की है, उसमें न केवल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, बल्कि देश की व्यावसायिक राजधानी कहलाने वाली...

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कश्मीर में अब एक नया राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत है जो कश्मीरियत को भारतीयता का पर्याय बना सके (दैनिक जागरण)

जम्मू-कश्मीर को भेदभाव भरे अनुच्छेद 370 से मुक्त हुए एक माह होने जा रहे हैैं। इस दौरान वहां और खासकर घाटी में हिंसा की कोई बड़ी वारदात न होना उल्लेखनीय है, लेकिन यह भी साफ है कि यह कड़ी चौकसी का नतीजा है। नि:संदेह चौकसी आगे भी बरतनी पड़ेगी, क्योंकि पाकिस्तान इस फिराक में है...

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