Day: September 2, 2019

पुलिस सुधारों का वक्‍त: जब आम नागरिक सुरक्षित होगा, तभी विकास के लिए बनेगा उचित माहौल (दैनिक जागरण)

[ संजय गुप्त ]: जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करने का बड़ा काम करने के बाद ऐसा लगता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी निगाह आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने पर लगा दी है। पिछले दिनों पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के स्थापना दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने जो कुछ...

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रचनात्मक आलोचना की जरूरत: आलोचना और असहमति के अभाव में लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं (दैनिक जागरण)

[ हृदयनारायण दीक्षित ]: मनुष्य प्रकृति का चिंतनशील प्राणी है। वह प्रतिपल सोचता है। सोच-विचार के नए क्षेत्रों में प्रवेश करता है। चिंतन विवेचन से अंत में प्राप्त निष्कर्ष को सिद्धांत कहा जाता है, लेकिन सिद्धांत निरपेक्ष नहीं होते। सिद्धांत या वाद के प्रतिवाद भी होते हैं। इनकी आलोचना भी होती है। आलोचना निंदा नहीं...

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लोक संस्कृति से जुड़े शिक्षा: आधुनिकता के दौर में पारंपरिक एवं सांस्कृतिक ज्ञान की महत्ता को समझना चाहिए (दैनिक जागरण)

[ बद्री नारायण ]: केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने हाल में भारत में शिक्षा को संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया। इस पर लोगों ने तुरंत ही सहमति और असहमति व्यक्त करनी शुरू कर दी। मानव संसाधन विकास मंत्री के इस आह्वान पर हमारी असहमति हो सकती है, किंतु अगर गहराई...

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पौष्टिक एवं संतुलित आहार की उपलब्धता बनी संकट, सदाबहार ‘कृषि क्रांति’ की दरकार (दैनिक जागरण)

प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक की पूर्णता की ओर अग्रसर मानव समुदाय विविध तकनीकी कारणों से बहुआयामी समस्याओं से जूझ रहा है। असंतुलित आहार एवं कुपोषण जैसी चुनौतियां उनमें से एक है, जो प्रकारांतर से अंधाधुंध अपनाई जाने वाली तकनीकी कारणों का प्रतिफल हैं। एक क्षेत्र की संरचना, मिट्टी, जलसंसाधन एवं...

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आहार की गुणवत्ता में हो सुधार, तभी साकार होगा कुपोषण मुक्त भारत का सपना (दैनिक जागरण)

नई दिल्ली, जेएनएन। कुपोषण के कई रूप हैं, जैसे बच्चों का नाटा रह जाना, कम वजन, एनीमिया प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में समय के साथ सुधार हुआ है। ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे गरीब राज्यों में भी सुधार देखा गया। यह किसी विडंबना से कम नहीं है कि कुपोषण के साथ भारत अधिक वजन, मधुमेह और...

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अरुंधति के भाषण को लेकर पाकिस्तान ने भारत को किया बदनाम, बयान से बेनकाब हो रही विचारधारा (दैनिक जागरण)

इन दिनों एक बार फिर से बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरुंधति राय चर्चा में हैं। वर्ष 2011 में दिए गए उनके एक भाषण के अंश को पाकिस्तानी मीडिया ने भारत को बदनाम करने की नीयत से छाप दिया। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने भी उसकी आड़ में भारत को घेरने की कोशिश की। अरुंधति के...

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मंदी ने दी दस्तक: मोदी को मौजूदा आर्थिक हालात से निपटने के लिए हर संभव उपाय करना चाहिए (दैनिक जागरण)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भले ही सीधे तौर पर यह मानने से इन्कार कर रही हों कि अर्थव्यवस्था सुस्ती की चपेट में आ गई है, लेकिन यथार्थ यही है कि मंदी ने दस्तक दे दी है। जब आर्थिक विकास दर के आंकड़ों के साथ अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक बनने वाले कई प्रमुख सेक्टर...

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एनआरसी को लेकर सियासत शुरू, भारत कोई धर्मशाला नहीं कि जो चाहे यहां आकर बस जाए (दैनिक जागरण)

आखिरकार असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी की अंतिम लिस्ट सामने आ गई। इस लिस्ट के अनुसार 19 लाख से अधिक लोग ऐसे हैं जो अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाए हैं। हालांकि यह एक बड़ी संख्या है, लेकिन असम के ही कई नेता यह सवाल कर रहे हैं कि क्या केवल इतने...

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NRC: An experiment gone awry (Hindustan Times)

Thirty years after an anti-immigrant movement rocked the state of Assam, the process of identifying Indian citizens and detecting outsiders finally reached a (partial) conclusion on Saturday. The National Register of Citizens was updated, excluding over 1.9 million people – six percent of Assam’s population. The NRC process took four years, involved the massive deployment...

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NRC को लेकर उठते प्रश्न (पंजाब केसरी)

असम पुलिस के अलावा केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की 218 कम्पनियों की तैनाती के बीच 31 अगस्त को सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला के नेतृत्व में एन.आर.सी. ने नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (एन.आर.सी.) का फाइनल ड्राफ्ट जारी किया। इसकी वजह अवैध अप्रवासियों की परिभाषा तय करने के लिए दशक लम्बा...

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