Month: July 2019

आरटीआइ पर चिंता के मायने (प्रभात खबर)

पवन के वर्मा लेखक एवं पूर्व प्रशासक सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआइ एक्ट) 2005 में पारित हुआ और उसी वर्ष अक्तूबर में लागू हुआ था. देश के विधिक इतिहास में यह एक मीलस्तंभ जैसा था, जिसने पहली बार नागरिकों को भी इस हेतु अधिकृत किया कि वे सरकारी प्राधिकारियों से अहम सूचनाएं पा सकें. अब...

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सीसीडी: कॉफी के प्याले में तूफान (पत्रिका)

धन और साधन के अभाव में तनाव झेलने वाले तो असंख्य हैं, लेकिन मालामाल हस्तियों के भी तनाव में होने की खबर इस तथ्य को रेखांकित करती है कि जहां कुबेर के खजाने के लिए दरवाजे खुलते हैं, वहां तनाव के लिए भी कई रास्ते बन जाते हैं। तनाव के ताने-बाने को धन की तलवार...

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कानून का शिकंजा (जनसत्ता)

निवेशकों को कम समय में मोटा मुनाफा देकर अमीर बनाने का सपना दिखाने वाली पोंजी योजनाओं पर अब लगाम कसी जा सकेगी। संसद ने ‘अनियमित जमा योजनाएं विधेयक, 2019’ को मंजूरी दे दी है। इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि नया कानून लागू होने के बाद लोगों को ठगने वाली ऐसी योजनाएं चलाने वालों के...

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बाघ का जीवन (जनसत्ता)

संरक्षित पशु के रूप में बाघों की घटती संख्या को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है और इसमें सुधार के लिए तमाम अभियान चलाए गए। लेकिन इस मसले पर कोई अच्छी खबर नहीं मिल पा रही थी। बाघों की तादाद पर आए नए आंकड़े से यह साबित होता है कि इस मोर्चे...

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Flee market: on Indian stock market rally (The Hindu)

The wheels of India’s multi-year stock market rally are slowly beginning to come off. Since the Union Budget was presented this month, there has been a palpable change in mood among investors, who in June led a mini-rally in the market as signs emerged one after another that the government led by Prime Minister Narendra...

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Burning bright: on India’s tiger census (The Hindu)

If India has increased its population of tigers to an estimated 2,967 individuals in 2018-19, putting behind fiascos such as the Sariska wipeout 15 years ago, it adds to its global standing as a conservation marvel: a populous country that has preserved a lot of its natural heritage even amid fast-paced economic growth. Since the...

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एक अलबेला प्रधानमंत्री : इन्हीं कारणों से विभिन्न पत्रिका प्रबंधनों ने उन्हें तीन बार बर्खास्त किया (अमर उजाला)

के. विक्रम राव ब्रिटिश मीडिया की नजर में प्रधानमंत्री पद हेतु अंतिम पसंद एलेक्जेंडर बोरिस जॉनसन थे। गत सप्ताह वह यह पद पा भी गए। तीन दशकों से श्रमजीवी पत्रकार रहे जॉनसन को उनके संपादकजन मानते रहे कि वे तथ्यों का आदतन निरादर करते हैं। सार्वजानिक उक्तियों तथा वक्तव्यों को विकृत करते हैं। उनकी कलम...

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समाज और शोध से जुड़े शिक्षा : पिछली शिक्षा नीति लगभग तीन दशक पहले आई थी (अमर उजाला)

सृजन पाल सिंह मई 2019 में नई सरकार का गठन होते ही नई शिक्षा नीति का मसौदा पेश किया गया था। पिछली शिक्षा नीति लगभग तीन दशक पहले आई थी। इस बात से शायद ही किसी को इनकार होगा कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की काफी आवश्यकता है। इसी वर्ष प्रकाशित टाइम्स...

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उचित माहौल जरूरी (बिजनेस स्टैंडर्ड)

गत सप्ताह सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की अपनी नीति पर और अधिक जोर देना आरंभ कर दिया। उसने इन वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया। वहीं इन वाहनों के चार्जर पर भी जीएसटी की दर 18 फीसदी से कम करके...

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महज सूचकांक से नहीं लगता प्रगति का सही अंदाजा (बिजनेस स्टैंडर्ड)

कनिका दत्ता वैश्विक स्तर पर अपने प्रदर्शन को आंकने के लिए आतुर देशों की नजर में वैश्विक सूचकांक तेजी से मापदंड बनते जा रहे हैं। खास तौर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए जद्दोजहद कर रहे विकासशील देशों के बीच इन सूचकांकों को लेकर खास आकर्षण देखा जा रहा है। सवाल है कि क्या...

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