Day: June 20, 2019

भागें नहीं, राह निकालें (नवभारत टाइम्स)

केंद्र और राज्यों के चुनाव एकसाथ कराने को लेकर राजनीतिक नेतृत्व में आम सहमति तो क्या, व्यापक संवाद भी अभी नहीं बन पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘एक देश, एक चुनाव’ पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई जिसमें जेडीयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, एनसीपी...

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पूरे देश में हो समान कानून (राष्ट्रीय सहारा)

बिहार सरकार ने हाल ही में एक अहम फैसले में कहा है कि अगर कोई संतान अपने मां-बाप की सेवा नहीं करेगा तो उसे जेल जाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में राज्य कैबिनेट ने हाल ही में इससे जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है। बिहार सरकार के इस फैसले के बाद यह...

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नये भारत का विचार (राष्ट्रीय सहारा)

कहा जा सकता है कि 2019 में भारत में स्वास्य सार्वजनिक एवं राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। 2017 में नई राष्ट्रीय स्वास्य नीति की घोषणा की गई। तत्पश्चात 2018 में आयुष्मान भारत कार्यक्रम आरंभ किया गया। उतने ही जोरशोर से आरंभ किया गया जितनी राज्य केंद्रित-दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक्स तथा तेलंगाना में...

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Need to equip judiciary to deal with forces of populism (The Indian Express)

Written by Ranjan Gogoi The word “independent” has been variously defined and understood across different societies and cultures. However, in legal systems the word means and implies “not dependent on” or “not controlled by” any outside agency or source. Independence could be said to be the very soul of a functional judiciary. Whatever be the...

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The next structural change (The Indian Express)

Written by Akhilesh Mishra Should there be economic reforms? Almost instinctively, most people would answer this question in the affirmative. But why are reforms necessary? Leaving aside the ideological and conceptual changes in direction, most of the time, reforms are simply necessary because processes usually do not perform as well in the long term as...

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A coup and a crisis (The Indian Express)

Written by Bhaskar Chakravorti The elections made one thing amply clear: It’s NOT the economy, stupid. Neither the lowest quarterly GDP growth in 20 quarters nor the highest unemployment rate in 45 years could put the brakes on Narendra Modi’s thunderous return to South Block. And now, with the election in the history books, it...

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एक साथ चुनाव का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों को संकीर्ण स्वार्थों के आगे समय और धन की बर्बादी नहीं दिखती (दैनिक जागरण)

यह अच्छा नहीं हुआ कि एक साथ चुनाव कराने के मसले पर प्रधानमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में कांग्रेस समेत आठ राजनीतिक दलों ने भाग लेना भी उचित नहीं समझा। समझना कठिन है कि इन दलों के जो नेता यह कहते हुए दिख रहे हैैं कि इस या उस कारण एक साथ चुनाव...

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बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत का गुनहगार कौन? (दैनिक जागरण)

[अवधेश कुमार]। बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत पर देश में हाहाकार मचना स्वाभाविक है। आगे बढ़ने से पहले कुछ तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक है। सबसे पहला, अभी तक के किसी रिसर्च में लीची से इसका संबंध नहीं पाया गया है। इसलिए लीची खाने से बीमारी होने की बात बिल्कुल निराधार...

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सेक्युलर पार्टियों के लिए बेचैनी का सबब जरूर है कि पीएम मोदी ने मुस्लिम समाज का दिल जीत लिया (दैनिक जागरण)

[ डॉ. एके वर्मा ]: भारत में मुस्लिम-विमर्श को हमेशा हिंदू-मुस्लिम और सेक्युलर-सांप्रदायिक चश्मे से देखा गया है। संभवत: इसलिए कि हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाली भाजपा को सांप्रदायिक ठहराया जाए और अन्य दल ‘स्वघोषित’ सेक्युलरवादी बताए जाएं ताकि मुसलमानों को लामबंद कर उनके वोट पर एकाधिकार किया जा सके। इसीलिए कट्टर और सांप्रदायिक मुस्लिम...

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चांद पर उपग्रह भेजने वाले देश की 82 फीसद ग्रामीण आबादी आज भी साफ पानी के लिए तरस रही है (दैनिक जागरण)

[ रमेश कुमार दुबे ]: आजादी के बाद से ही बिजली-पानी को केंद्र में रखकर चुनाव लड़े गए, लेकिन आम आदमी को बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं अपेक्षा के अनुरूप उपलब्ध नहीं हो पाईं। 16वीं लोकसभा चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में बिजली, पानी, सड़क, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं आम...

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