Day: May 20, 2019

नंबर नहीं, मौलिक चिंतन का दीजिए मंत्र (दैनिक ट्रिब्यून)

सुरेश सेठ पिछले दिनों देश के सीबीएसई से लेकर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड तक के कई बड़े स्कूल बोर्डों ने बारहवीं और दसवीं परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों के परीक्षा परिणाम स्पूतनिक गति से आगे-पीछे निकाल दिये। सीमित औसत दिनों में परिणाम सामने आ गये। परिणाम देख बहुत से मां-बाप या अभिभावकों को लगने लगा...

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जीवन में पाना है जो चाहो शिद्दत से (दैनिक ट्रिब्यून)

सीताराम गुप्ता ब्राजील निवासी पुर्तगाली भाषा के मशहूर लेखक पाओलो कोएलो अपने चर्चित उपन्यास द अल्केमिस्ट में कहते हैं कि जब आप दिल से कुछ चाहते हैं तो सारी क़ायनात उसे आपसे मिलाने के लिए साजिश रचती है। फिल्म ओम शांति ओम में शाहरुख़ ख़ान अत्यंत उत्साहपूर्वक एवं विश्वास के साथ एक डायलॉग बार-बार दोहराते...

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आखिर हो गए चुनाव (नवभारत टाइम्स)

17वीं लोकसभा के लिए चुनाव का सातवां और आखिरी चरण रविवार को संपन्न हुआ। मतदाता अपना फैसला दे चुके हैं। 23 मई को मतों की गिनती के बाद उनका फैसला सार्वजनिक हो जाएगा। उस फैसले को एक तरफ रखकर सोचें तो दो महीनों में फैली यह सघन चुनावी लड़ाई अपने पीछे ऐसा बहुत कुछ छोड़...

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इन मुद्दों में गलत क्या? (राष्ट्रीय सहारा)

हर चुनाव में यह टिप्पणी फैशन बन गया है कि चुनाव मुद्दाविहीन हो गया या जो मुद्दे होने चाहिए उनकी जगह गैर मुद्दे मुद्दे बन गए। ठीक है कि जो मसले उठे उनमें और जुड़ सकते थे। उदाहरण के लिए स्वास्य देश की प्राथमिकता होनी चाहिए। यह मुद्दा उस रूप में नहीं बनता जैसे बनना...

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Iranian delusion and the American war machine (The Indian Express)

Written by Ramin Jahanbegloo “Should we negotiate with Iran’s ayatollahs?” This is a question which was put by Henry Kissinger, the former US Secretary of State under Richard Nixon, to Bernard Lewis, the British-American historian of the Middle East. “Certainly not!” came Lewis’s uncompromising response. It looks like the overall stance of the Trump Administration...

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In Good Faith: Behind the veil (The Indian Express)

Written by Zehra Naqvi “Hijab” is one of the most emotionally charged and politically flammable words of our times. And it doesn’t help that the word rhymes with — of all things — jihad. Being a hijab-clad woman who chooses to assert herself within the mainstream is like being a walking target for “counter-terror operations”...

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At last, the end, with bitterness (The Indian Express)

Written by P Chidambaram It has been a long, tiresome and sometimes depressing 10 weeks from the date of the notification to the last date of polling — which is today. We have seen an abundance of everything except debates on policies. There has been an abundance of political parties, candidates, rallies and roadshows, money...

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The unpeople of India (The Indian Express)

Written by Abdul Khaliq I fear for our future as a secular, multicultural country that once celebrated a richness of culture and tradition. Till not long ago we affirmed our common humanity even as we celebrated our differences. Our nation represented diversity, kindness, compassion and a revulsion of extremist views. But, over time, our collective...

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इतिहास से छेड़छाड़: स्वाधीनता संग्राम हमारे इतिहास का गौरवशाली अध्याय है तो सावरकर उसके स्वर्णिम पृष्ठ हैं (दैनिक जागरण)

[ हृदयनारायण दीक्षित ]: इतिहास अपरिवर्तनीय होता है। इतिहास का अर्थ है-‘ऐसा ही हुआ है।’ हम इतिहास से सबक लेकर वर्तमान व भविष्य संवार सकते हैं, लेकिन राजनीतिक जरूरतों के अनुसार इतिहास में बदलाव नहीं कर सकते। भारतीय इतिहास के साथ अक्सर ऐसा ही होता है। वामपंथी लेखकों ने इतिहास का विरुपण किया। कांग्रेस ने...

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पश्तूनों का पाकिस्तानी फौज के खिलाफ सड़कों पर उतर आने से आइएसआइ के लिए बड़ा झटका (दैनिक जागरण)

[ दिव्य कुमार सोती ]: इन दिनों पाकिस्तान अपने आर्थिक संकट को लेकर चर्चा में है। उसकी समस्या केवल आर्थिक हालात तक ही सीमित नहीं हैं। वहां असंतोष का एक ज्वालामुखी भी धधक रहा है। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट के बैनर तले पश्तून तबका पाकिस्तानी फौज के खिलाफ संघर्षरत है जो फौज एक अर्से से उन...

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