Day: May 6, 2019

आजादी और अनुशासन (हिन्दुस्तान)

शशिप्रभा तिवारी आज हर घर में सबके सोने-जागने का समय अलग है। पहले परिवार में सुबह चाय की चुस्की का आनंद सब साथ-साथ लेते थे। पर अब एक ओर ऑफिस या स्कूल की अफरा-तफरी होती है, तो दूसरी तरफ ट्रैफिक में फंसने का डर मन में होता है। ऐसे में, परिवार को सुचारू तरीके से...

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उपलब्धि और जोखिम (हिन्दुस्तान)

उन लोगों के लिए यह एक अच्छी खबर है, जिन्होंने किसी हादसे, मानसिक आघात या फिर किसी बीमारी की वजह से अपनी वाणी खो दी है। ऐसे लोगों को खुद तो परेशानी होती ही है, साथ ही डॉक्टरों और उनके घर वालों को उनका सही हाल नहीं पता चल पाता है, खासकर उन रोगियों का,...

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हालात अनुकूल बनाकर हासिल सफलता (दैनिक ट्रिब्यून)

रेनू सैनी व्यक्ति ऐसा प्राणी है जो अपने साथ हो रही स्थितियों, परिस्थितियों और लोगों के व्यवहार से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाता है। वह अपनी असफलता और हार का कारण अक्सर इन्हीं कारकों को ठहराता है। वहीं जो लोग स्थितियों, परिस्थितियों, परिणामों के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं और इस बात को जानते...

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उम्मीद जगाते नतीजे (दैनिक ट्रिब्यून)

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं परीक्षा के परिणाम नई उम्मीद व उत्साह जगाने वाले हैं। खासकर इस मायनों में भी लड़कियां न केवल शीर्ष पर रही बल्कि उनका पास होने का कुल प्रतिशत भी लड़कों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। इस परिणाम को सामाजिक बदलाव की आहट के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ...

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अंतरात्मा के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के खतरे (दैनिक ट्रिब्यून)

राजेश रामचंद्रन भारत का चुनाव आयोग गलत दिशा में बढ़ रहा है, यह गलती न केवल प्रधानमंत्री को उनके भाषणों पर कांग्रेस की तरफ से मिली 11 शिकायतों में 2 को क्लीन चिट देने के मामले में है बल्कि अन्य कई विषयों में भी है। अव्वल तो चुनाव आयोग को चुनाव संबंधी विवादों पर सर्वोच्च...

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एटमी खतरे पर उम्मीद (नवभारत टाइम्स)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अचानक यह कहकर सबको चौंका दिया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन से फोन पर करीब एक घंटे बातचीत की और इसमें चीन को मिलाकर त्रिपक्षीय परमाणु समझौते की संभावना पर भी विचार हुआ। ट्रंप के मुताबिक शुरू में दोनों देश परमाणु हथियार बनाने में कमी लाने पर...

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येचुरी की दृष्टि में रामायण-महाभारत में हिंसा है, लेकिन उन्हें ‘वसुधैव कुटुंबकम’ वाला दर्शन नहीं दिखाई पड़ता (दैनिक जागरण)

[ हृदयनारायण दीक्षित ]: हिंसा और करुणा समतुल्य नहीं हैं। बेशक गाय और हिंसक शेर दोनों ही पशु हैं, लेकिन मातृवत गाय और हिंसक शेर की तुलना नहीं हो सकती। खलील जिब्रान ने ठीक लिखा था कि ‘मेंढक बैलों की अपेक्षा भले ही अधिक शोर कर लें, लेकिन वे न तो खेतों में हल खींच...

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राहुल गांधी दूसरों को तो सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं और खुद के सवालों पर मौन धारण कर लेते हैं (दैनिक जागरण)

एक ऐसे समय जब हर आरोप का जवाब प्रत्यारोप से दिया जा रहा है तब यह हैरानी की बात है कि कांग्रेस इस आरोप पर मौन सा धारण किए है कि राहुल गांधी की पूर्व कंपनी के एक साझीदार ने एक रक्षा सौदे के तहत ऑफसेट अनुबंध हासिल किया था। मीडिया में इस आशय की...

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स्वार्थ सिद्धि का साधन: मुस्लिम समाज वोट बैंक बने रहने पर मजबूर, प्रगति की दौड़ में यह तबका पिछड़ा (दैनिक जागरण)

[ आर विक्रम सिंह ]: ऐसा क्यों है कि भारत का मुस्लिम समाज आज भी उसी दिशा भ्रम का शिकार है, जैसे 1940 से 1947 के बीच था। विभाजन के समय भारत की 10 करोड़ की तत्कालीन मुस्लिम आबादी लगभग बराबर-बराबर तीन हिस्सों में बंट गई। पाकिस्तान बनने के बाद 3.4 करोड़ मुसलमानों ने भारत...

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The Election Commission cannot be so selective (Hindustan Times)

The 2019 Lok Sabha election has perhaps been among the most controversial elections in recent history. Not only has political discourse been reduced often to crudities and abuses, but there have been multiple instances of politicians stepping out of line, violating the Model Code of Conduct, even inciting animosity and hatred between communities. It is...

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