Day: May 2, 2019

मीठी गोली-मीठी बोली की वेला (दैनिक ट्रिब्यून)

शमीम शर्मा भैंस तो खो गई पर पाली को दोपहर काे पता चल गया। इस चुनाव में नेताओं का यही हुआ है। हार-जीत तो देखी जायेगी पर नेताओं को धूप की मार और कष्टदायक लू के थपेड़ों का ज्ञान ज़रूर हो गया है। उन्हें अवश्य आभास हुआ होगा कि किसान कैसे धूप में तपता है...

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वक्त के साथ बदलती धर्मनिरपेक्षता की दृष्टि (दैनिक ट्रिब्यून)

जी. पार्थसारथी सोवियत यूनियन का पतन और विखंडन यूरोप भर में वामपंथी व नास्तिक सिद्धांत वाली सरकारें रद्द करने का सबब बना था। इस घटनाक्रम से विश्वभर में धार्मिक प्रवृत्ति का पुनरुद्धार और प्रभाव बढ़ना शुरू हुआ था। आज कोई देश अपने आंतरिक मामलों के अलावा विदेश एवं सुरक्षा नीतियों पर क्या सोच और व्यवहार...

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दागियों के सवाल पर नीयत में खोट (दैनिक ट्रिब्यून)

अनूप भटनागर मालेगांव बम विस्फोट कांड में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के भोपाल संसदीय सीट से भाजपा का उम्मीदवार बनाये जाने के साथ ही उनके खिलाफ लंबित मामले को लेकर भाजपा की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने भी भाजपा का उम्मीदवार बनते ही ‘हिन्दू आतंकवाद’ के मुद्दे को हवा देकर 17वीं...

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नई हुई प्राचीन राजशाही (नवभारत टाइम्स)

जापान में सम्राट अकीहितो के पदत्याग के बाद बुधवार को उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रिंस नारुहितो ने उनका पदभार ग्रहण किया। जापान दुनिया के उन गिने-चुने देशों में है जहां आज भी, नाममात्र के लिए ही सही पर राजशाही चल रही है। उन चुनिंदा देशों में भी यह इस मायने में खास है कि यहां का...

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पर्यावरण- अदालत की अनूठी पहल (राष्ट्रीय सहारा)

जाहिद खान राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरण को बचाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक नई कवायद शुरू की है। इसके तहत वादी-प्रतिवादियों पर हर्जाना लगाते हुए, अदालत उन्हें शहर को हरा-भरा करने का निर्देश दे रही है। जस्टिस नजमी वजीरी ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए, एक बार फिर दोषियों...

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राजनीति अब ’ताकत‘‘ का नाम है (राष्ट्रीय सहारा)

प्रमोद जोशी समय के साथ राजनीति में आ रहे बदलावों पर क्या आपने ध्यान दिया है? कुछ साल पहले सायास और अनायास मुझे कुछ ऐसे लोगों से मिलने का मौका लगा, जो ऊंचे खानदान से वास्ता रखते हैं और राजनीति में आना चाहते हैं। उन्होंने जो रास्ता चुना, वह जनता के बीच जाने का नहीं...

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अस्मिता की नई राजनीति: वंचित वर्ग में राष्ट्रीय अस्मिता, दलित अस्मिता और अति पिछड़े वर्गों की अस्मिता समाहित हो गई (दैनिक जागरण)

[ प्रदीप सिंह ]: दुनिया भर में अस्मिता की राजनीति का प्रचलन है। भारत में जाति व्यवस्था के कारण शायद ज्यादा ही। पिछले 70 सालों की बात करें तो जातीय अस्मिता का भारतीय राजनीति पर सबसे ज्यादा प्रभाव रहा है। जातीय अस्मिता की राजनीति लंबे समय से राजनीति में सफलता की कुंजी रही है। अब...

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एक ही मुद्दा-एक ही नाम: लोकसभा चुनाव ‘मोदी लाओ’ अथवा ‘मोदी हटाओ’ पर ही केंद्रित हो गया (दैनिक जागरण)

[ निरंजन कुमार ]: मतदान के चार चरण पूरे होने के साथ ही लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर आ चुका है। चुनावी मैदान में राजनीतिक दल विभिन्न मुद्दों की रणभेरी बजा रहे हैं, लेकिन जाने-अनजाने एक ही मुद्दा सब मुद्दों के केंद्र में है और वह है नरेंद्र मोदी। पूरा चुनाव एक...

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लिबरल खेमे को राज ठाकरे के अलावा और कोई ऐसा मोदी विरोधी नहीं मिला जिसे तारीफ के काबिल पाते (दैनिक जागरण)

[ राजीव सचान ]: पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त ही देश में जैसा माहौल बन गया था उससे यह स्पष्ट था कि आने वाला समय विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक कटुता बढ़ाने वाला होगा। आखिरकार ऐसा ही हुआ। समय के साथ सत्तापक्ष-विपक्ष की राजनीतिक कटुता में अन्य क्षेत्रों के लोग भी शामिल हो गए। इनमें...

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सिर उठाते नक्सली: गढ़चिरौली की घटना बता रही कि नक्सलियों की सही तरह से घेरेबंदी नहीं हो पा रही (दैनिक जागरण)

बर्बर नक्सलियों ने एक बार फिर अपना खूनी चेहरा दिखाया। इस बार उन्होंने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पुलिस के त्वरित कार्रवाई दस्ते के एक वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया। इसके चलते 15 जवानों के साथ एक वाहन चालक वीरगति को प्राप्त हुआ। बीते कुछ समय से नक्सली जिस तरह नए सिरे से...

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