Day: May 1, 2019

सत्ता के खेल में लोकतंत्र से खिलवाड़ (दैनिक ट्रिब्यून)

राजकुमार सिंह लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? यह सवाल कई पाठकों को अटपटा भी लग सकता है, पर देश में लोकतंत्र की दशा-दिशा पर गंभीर सार्थक चर्चा के लिए यह जरूरी है। लोकतंत्र की संक्षिप्त प्रचलित परिभाषा है : जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन। अब जरा अपने देश के लोकतंत्र को इस...

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मजदूरों के फिर एक होने का वक्त (दैनिक ट्रिब्यून)

कृष्ण प्रताप सिंह दुनिया के कई देशों में भूमंडलीकरण के दौर में भी मजदूर दिवस सरकारी छुट्टी का दिन है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के संस्थापक सदस्य भारत में ऐसा नहीं है। इस देश में ऐसी कोई परम्परा भी नहीं बन पायी है, जिससे मजदूरों के संदेशों को दूसरी नहीं तो कम से कम उनकी...

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कहां का बदला किससे (नवभारत टाइम्स)

श्रीलंका में पिछले दिनों हुए सीरियल ब्लास्ट की जवाबदेही लेते हुए इस्लामिक स्टेट (आईएस) के प्रमुख अबू-बकर-अल-बगदादी का जो विडियो जारी किया गया है, उससे कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। इस 18 मिनट के विडियो में बगदादी को श्रीलंका धमाकों की तारीफ करते हुए और इन्हें सीरिया में उसके बागूज ठिकाने की हार...

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मई दिवस -बदला फलक, बदले तकाजे (राष्ट्रीय सहारा)

कृष्णप्रताप सिंह निया के कई देशों में भूमंडलीकरण व्यापने के बावजूद मजदूर दिवस सरकारी छुट्टी का दिन है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के संस्थापक सदस्य भारत में ऐसा नहीं है। और तो और, इस देश में ऐसी कोई परंपरा भी नहीं बन पाई है जिससे मजदूरों के संदेशों को दूसरी नहीं तो कम से कम...

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संतुलित उपयोग जरूरी (राष्ट्रीय सहारा)

-डॉ. रामकुमार वर्मा विश्व स्वास्य संगठन का टीवी, मोबाइल आदि के बच्चों पर प्रभाव से संबंधित रिपोर्ट शिक्षा एवं जीवन में तकनीकी के अंधाधुंध प्रयोग पर उचित निर्णय लेने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विमर्श है। संगठन का कहना है कि टीवी, मोबाइल या लैपटॉप पर ज्यादा वक्त बिताने से बच्चों की सेहत पर बुरा प्रभाव...

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चुनावों में बाहुबल पर तो अंकुश लग गया, लेकिन बेलगाम होता चुनावी खर्च लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं (दैनिक जागरण)

[ ए. सूर्यप्रकाश ]: चुनावों में धनबल का बढ़ता इस्तेमाल गंभीर चिंता का कारण बन रहा है। चुनाव आयोग के एक आंकड़े के अनुसार 23 अप्रैल तक करीब 3200 करोड़ रुपये की वह सामग्री बरामद की जा चुकी है जिसका इस्तेमाल मतदाताओं को लुभाने में किया जाना था। इनमें नकदी के अलावा शराब एवं अन्य...

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धार्मिक पहचान से त्रस्त सभ्य समाज: मानवीय मूल्यों का मजहब से कोई लेना-देना नहीं है (दैनिक जागरण)

[ राजीव सचान ]: पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त ही देश में जैसा माहौल बन गया था उससे यह स्पष्ट था कि आने वाला समय विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक कटुता बढ़ाने वाला होगा। आखिरकार ऐसा ही हुआ। समय के साथ सत्तापक्ष-विपक्ष की राजनीतिक कटुता में अन्य क्षेत्रों के लोग भी शामिल हो गए। इनमें...

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‘चौकीदार चोर है’ के बयान के मामले में राहुल को अब लिखित में सुप्रीम कोर्ट में देना होगा माफीनामा (दैनिक जागरण)

आखिरकार राहुल गांधी को अपनी गलतबयानी के लिए माफी मांगने को मजबूर होना पड़ा। इस माफी के लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैैं, क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर यह कहा था कि राफेल मामले में अब तो देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी मान लिया कि चौकीदार ने चोरी की है। यदि...

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‘धर्मस्थलों में बढ़ रहे हमले’ असहनशीलता का परिणाम (पंजाब केसरी)

हालांकि सभी धर्म लोगों को आपस में मिलजुल कर शांतिपूर्वक रहने, किसी का बुरा न करने और हिंसा से दूर रहने का उपदेश देते हैं परंतु यह एक विडम्बना ही है कि आज संसार में हो इसके विपरीत रहा है। नि:संदेह आज विश्व में बड़ी संख्या में सभी धर्मों का प्रचार बढ़ रहा है परंतु...

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Of the Akshay-Modi ‘show’ and the portrayal of Indian farmers (Livemint)

Salil Tripathi In what can only be described as his latest performance, Akshay Kumar acts as a journalist interviewing Prime Minister Narendra Modi. He is convincing as a hesitant, rookie reporter in awe of his subject, apologetically telling a joke about Gujaratis which yields a polite, indulgent smile. Another question he asked has provoked considerable...

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