Day: March 28, 2019

मतों के मूल्य बराबर नहीं (राष्ट्रीय सहारा)

कृष्ण प्रताप सिंह अगर आप मतदाता हैं और देश के दूसरे करोड़ों लोगों की तरह इस जोर-शोर से प्रचारित लोकतांत्रिक मिथ के शिकार हैं कि लोक सभा चुनाव में हर मतदाता के मत का मूल्य समान और नई लोक सभा के गठन में उसकी एक जैसी हिस्सेदारी या भूमिका होती है, तो अपनी यह गलतफहमी...

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जरूरी है राजकोषीय मितव्ययिता (प्रभात खबर)

अजीत रानाडे , सीनियर फेलो, तक्षशिला इंस्टीट्यूशन  विश्व के सबसे बड़े आम चुनावों की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. लगभग 90 करोड़ मतदाता तकरीबन 10 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान कर लगभग 10 हजार उम्मीदवारों के बीच से संसद के निचले सदन के लिए 545 सदस्यों को चुनेंगे. इस पूरी प्रक्रिया में 11 सप्ताह का...

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जरूरी है चीन पर आर्थिक चोट (प्रभात खबर)

प्रभु चावला, एडिटोरियल डायरेक्टर, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस यों तो मसूद अजहर पाकिस्तानी आइएसआइ की कठपुतली है, पर चीन उसे खुद के लिए संपदा का एक ऐसा सृजनकर्ता मानता है, जो पाकिस्तान और यहां तक कि उसके आगे भी चीन के सामरिक तथा कारोबारी हितों का पोषण करता है. मगर ऐसा करते हुए चीन हमारी...

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मतदाताओं के मतों का मूल्य (प्रभात खबर)

कृष्ण प्रताप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अगर आप मतदाता हैं और देश के करोड़ों लोगों की तरह इस जोर-शोर से प्रचारित लोकतांत्रिक मिथ के शिकार हंै कि लोकसभा चुनाव में हर मतदाता के मत का मूल्य समान और नयी लोकसभा के गठन में उसकी एक जैसी हिस्सेदारी या भूमिका होती है, तो अपनी यह गलतफहमी दूर...

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लोकतंत्र का एक और उत्सव? (पत्रिका)

मोहन गुरुस्वामी, नीति विश्लेषक सत्रहवां लोकसभा चुनाव सिर पर है। एक बार फिर इसे लोकतंत्र का उत्सव बताया जा रहा है। सवाल उठता है यह उत्सव कैसे है और किसके लिए है? यहां मुझे महाभारत का एक प्रसंग याद आ रहा है। अठारह दिनों तक चले युद्ध में विजय के कई साल बाद युधिष्ठिर हस्तिनापुर...

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राजनीति में नए नाम राष्ट्रहित में (पत्रिका)

महेश भारद्वाज, विश्लेषक मशहूर क्रिकेटर गौतम गंभीर के भारतीय जनता पार्टी मेंं और बहुत सारे अन्य क्षेत्रों के ख्यातनाम लोगों के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों मेंं शामिल होने और चुनाव लडऩे की खबरों ने यह एक बार फिर स्थापित कर दिया कि राजनीति को श्रेष्ठ लोगों की और श्रेष्ठ लोगों को राजनीति की बराबर की दरकार...

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मर्यादा का रखें ख्याल (पत्रिका)

लगता है, आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपना पुराना सब कुछ छोड़ देना चाहते हैं। नीति-नियम, मान-मर्यादा, धर्म और परम्परा सब कुछ। चिंता इस बात की भी कम नहीं है कि यह हर क्षेत्र में हो रहा है। कोई-सा भी क्षेत्र, चाहे वह धर्म हो, राजनीति, समाज या व्यवसाय हो, इससे अछूता नहीं है।...

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सवाल अनिवासी भारतीयों के मत का (पत्रिका)

डी.पी. शर्मा, श्रम मामलों के जानकार मुझे वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित मत करो, मैं इसी देश का ‘कॉमन मैन’ यानी आम नागरिक हूं।’ यह तकलीफ आज ऐसे लाखों भारतीय नागरिकों की है, जिन्हें भारत में जीने के अधिकार की प्राप्ति के लिए रोजगार, शिक्षा या सेवा करने का मौका नहीं मिला तो...

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नया झांसा (पत्रिका)

चुनाव का मौसम है, सो वादों और झांसों की बौछार तो होगी ही। हर पार्टी मतदाताओं से वादे कर रही है, सतरंगी सपने दिखा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सत्ता में आने पर पांच करोड़ गरीब परिवारों के खाते में हर साल ७२ हजार रुपए डालने का वादा कर डाला। आश्चर्य की...

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Patriot Games At Election Time (TOI)

Why 2019 could be India’s most polarised polls. Campaign 2019 is in full swing and politicians are hurling accusations at each other. Elections in India have always been bruisingly rough combat but this election shows an altogether new trend. This time ruling party leaders and supporters are attempting to paint 2019 as a fight between...

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