Day: March 23, 2019

पर्रिकर के बाद चुनौतियों का नया दौर (दैनिक ट्रिब्यून)

हरीश लखेड़ा पैनक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन के समाचार से पूरे राष्ट्र का ध्यान गोवा पर केंद्रित हो गया। मुख्यमंत्री के लंबे-चौड़े तामझाम की बजाय अक्सर स्कूटर से चलने वाले पर्रिकर अपनी सादगी, ईमानदार छवि, मिलनसार स्वभाव और कर्मठता के कारण गोवा में...

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पश्चिमी पड़ोसियों से बेहतर रिश्ते जरूरी (दैनिक ट्रिब्यून)

जी. पार्थसारथी आजादी के बाद से ही भारत ने दूसरे देशों की आपसी रंजिशों और होड़ में न पड़कर अपने लिए सामरिक दृष्टि से अधिकतम लाभ लेने की नीति रखी है अन्यथा देश के बृहद राष्ट्रीय हितों पर आंच आने की नौबत थी। आरंभिक कुछ साल सोवियत संघ और अमेरिका, दोनों के साथ अच्छे संबंध...

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नज़ीर बनेगा फैसला (दैनिक ट्रिब्यून)

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गैंगरेप पीड़िता के परिवार को राहत देने हेतु क्षतिपूर्ति के लिए अपराधियों की संपत्ति बेचने का निर्देश दिया है। अदालत ने न्याय की नजीर बनने वाला ऐसा फैसला दिया है, जिससे अपराधियों में सख्त संदेश जायेगा  और वे ऐसा घृणित कार्य करने से पहले कई बार सोचेंगे। यह भी...

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इतने बेचैन क्यों (नवभारत टाइम्स)

यह वाकई चिंता की बात है कि प्रसन्न समाजों की सूची में पहले ही काफी नीचे चल रहा हमारा देश अभी थोड़ा और नीचे खिसक गया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2019 में भारत का स्थान 140वां है जबकि पिछले साल वह 133वें स्थान पर था। पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित...

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दिग्गजों की अंतिम पारी (नवभारत टाइम्स)

साल 2019 का लोकसभा चुनाव कई बुजुर्ग दिग्गज राजनेताओं की आखिरी सियासी पारी का गवाह बनने वाला है। कई लीडर जो कल तक भारतीय राजनीति में छाए रहे, आज उम्र के उस मुकाम पर पहुंच गए हैं कि अगला चुनाव लड़ना तो दूर, उसमें कोई भूमिका भी वे शायद ही निभा पाएं। अलबत्ता इस चुनाव...

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गेम की गिरफ्त (नवभारत टाइम्स)

दुनियाभर के बच्चों में लोकप्रिय ऑनलाइन गेम ‘पबजी’ (प्लेयर अननोन्स बैटलग्राउंड्स) के कई खतरनाक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसने एक नशे या लत का रूप ले लिया है। जो भी एक बार इसकी गिरफ्त में आ रहा है, उसका इससे निकलना मुश्किल हो रहा है। इसे खेलने वाले घर-परिवार और दोस्तों से कटकर एक...

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विश्लेषण : टल सकती थी भगत की फांसी (राष्ट्रीय सहारा)

भारत डोगरा वर्ष 1931 में जब भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने मृत्युदंड दिया तो उससे कई महीने पहले ही ये युवा क्रांतिकारी देश भर की आंख के तारे बन चुके थे। लोग उन्हें बहुत गहराई से प्यार करते थे, उनकी बहुत इज्जत करते थे व दिलोजान से चाहते थे कि जो...

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अर्थव्यवस्था – सुधारों की राजनीति (राष्ट्रीय सहारा)

राजीव सिंह किसी सरकार का मुख्य लक्ष्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का होना चाहिए ताकि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आए। ऐसे में चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के आर्थिक रिकार्डस की तुलना जरूरी हो जाती है। किस सरकार में आर्थिक मोर्चे पर क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की गई और सत्ता में...

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Main nahin chowkidar (The Indian Express)

Written by Kancha Ilaiah Shepherd When I go to Delhi, from the airport to the inner city, the cabs take me via Munirka. Almost no house in Munirka that I pass by has a chowkidar at the gate. The semi-slum looks like a place that supplies chowkidars to the rich people of Delhi. As one...

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The Mullah Baradar mystery (The Indian Express)

Written by Khaled Ahmed On January 26, the Afghan Taliban and US officials in Doha, Qatar, agreed on a preliminary draft of a likely peace accord, including US withdrawal from Afghanistan in 18 months. If this is not a false beginning, it denotes the adoption of a “moderate” approach by the Taliban under their negotiator,...

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