Day: March 13, 2019

रेगिस्तान के विस्तार को आमंत्रण (दैनिक ट्रिब्यून)

पंकज चतुर्वेदी बीती 27 फरवरी को हरियाणा विधानसभा में जो हुआ, वह पर्यावरण के प्रति सरकारों की संवेदनहीनता की बानगी है। बहाना बनाया गया कि महानगरों का विकास करना है, इसलिए करोड़ों वर्ष पुरानी ऐसी संरचना जो कि रेगिस्तान के विस्तार को रोकने से लेकर जैव विविधता संरक्षण तक के लिए अनिवार्य है, को कंक्रीट...

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जिम्मेदारी से चुनें जवाबदेह सरकार (दैनिक ट्रिब्यून)

राजकुमार सिंह सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव का बिगुल बज चुका है। बिगुल तब बजा, जब विपक्ष ने सवाल उठाया कि केंद्र और राज्यों की भाजपाई सरकारों को नयी योजनाओं की घोषणाओं और परियोजनाओं के उद्घाटन-शिलान्यास के लिए समय देने की खातिर चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा में विलंब कर रहा है। जहां तक सवाल...

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पटनायक की पहल (दैनिक ट्रिब्यून)

चुनाव आयोग द्वारा आम चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करने से पहले, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन में महिलाओं का कोटा निर्धारित करके एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी बीजद 21 लोकसभा क्षेत्रों में से सात में महिलाओं को मैदान...

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धनबल का बोलबाला (नवभारत टाइम्स)

आम चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में चुनाव सुधार के मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। काले धन पर रोक लगाने और नकदी का लेन-देन घटाने के लिए ढाई साल पहले नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया था। इसके बावजूद कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनावी...

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सबक भविष्य के लिए (राष्ट्रीय सहारा)

नवम्बर 2016 में नोटबंदी का जो फैसला हुआ था, उसकी कई परतें अब जाकर खुल रही हैं। इन खुलती परतों में भविष्य के लिए सबक हैं। हाल में सूचना के अधिकार के तहत कुछ दस्तावेज सामने आए हैं, इनमें यह पता चला है कि 8 नवम्बर 2016 को नोटबंदी के फैसले से सिर्फ ढाई घंटे...

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दखल से इनकार (राष्ट्रीय सहारा)

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आर्थिक आधार पर दिए गए आरक्षण पर स्थगनादेश राहत भरा निर्णय है। इससे उन लोगों की उम्मीद कायम रही है, जो वर्षो से जातिगत आरक्षण से स्वयं को पीड़ित मान रहे थे। यह आरक्षण गरीबी का जीवन जीते हुए जातिगत आधार पर आरक्षण से वंचित तबकों के लिए आशा की किरण बनकर...

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बच्चों की सेहत से खिलवाड़ (राष्ट्रीय सहारा)

जब हम ‘‘भारत के लोग’ अपना नया स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, बाबा नागार्जुन की एक प्रसिद्ध कविता का वह सवाल पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, जिसमें पहले वे पूछतेैहैं : किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? बाबा अपने सवाल को कौन त्रस्त, कौन पस्त और कौन मस्त तक भी ले जाते हैं,...

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पहल पर अमल करें (राष्ट्रीय सहारा)

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने घोषणा की है कि हम एक तिहाई सीटें महिला प्रत्याशियों को देंगे। प्रगतिशील दृष्टि से यह घोषणा क्रांतिकारी है और उससे देश के दूसरे राजनीतिक दलों पर भी दबाव बनेगा कि वे भी अपने प्रत्याशियों के चयन में महिला प्रत्याशियों को वरीयता दें। सत्रहवीं लोक सभा चुनाव में देश...

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Why the Left isn’t right (The Indian Express)

Written by Arun Anand The Allahabad High Court judgment on the Ram Janmabhoomi, delivered on September 30, 2010, caused great discomfort to left historians and commentators. This discomfort has now increased with the Supreme Court setting up a panel for mediation on this issue with a time limit of eight weeks. And, there also seems...

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A time for her story (The Indian Express)

Written by Mrinal Pande “The universe,” wrote a wise woman (Muriel Rukeyser), “is made of stories, not of atoms”. Several years ago, chatting informally with some outstanding women parliamentarians from privileged backgrounds, the talk veered towards some unspoken facts of careers that demanded constant mobility in company that largely consisted of men. Stories, at once...

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