Day: March 12, 2019

2019, the irony (The Indian Express)

Written by Suhas Palshikar The 2014 elections produced a government which subsequently expanded its limited mandate. They also considerably complicated Indian democracy. It is worthwhile to ask if the 2019 elections are likely to strengthen democracy. Five years ago, the BJP rode to power on the twin advantage of leadership and anti-incumbency. Both these issues...

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राजनीतिक शरारत: जब नवरात्र में चुनाव में हो सकते हैैं, तो फिर रमजान के महीने में क्यों नहीं? (दैनिक जागरण)

यह आपत्ति एक किस्म की राजनीतिक शरारत ही है कि रमजान के महीने में आम चुनाव क्यों कराए जा रहे हैैं? यह मानने के अच्छे-भले कारण हैैं कि निर्वाचन आयोग की ओर से आम चुनाव की घोषणा होते ही कुछ राजनीतिक दलों ने खुद को मुस्लिम समुदाय का हितचिंतक जताने के लिए ही यह कहा...

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पाक पर भारतीय सैन्य कार्रवाई से देश का माहौल बदला, और मजबूत हुई मोदी की राजनीतिक जमीन (दैनिक जागरण)

[ संजय गुप्त ]: चुनाव आयोग की ओर से आम चुनाव की घोषणा कभी भी की जा सकती है। यह घोषणा जब भी हो, यह तय है कि आम चुनाव उस परिदृश्य से भिन्न दशा में होंगे जो कुछ समय पहले तक दिख रहा था। पहले 14 फरवरी को पुलवामा में एक आतंकी हमले में...

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जानें, आखिर क्‍या है सुरक्षा परिषद का Chapter 7 Resolution, जिससे डरता है पाकिस्‍तान (दैनिक जागरण)

[विवेक काटजू]। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुछ प्रस्ताव को अपनाने के लिए सक्षम है, जिसका सभी सदस्य देशों को अनुपालन करना होता है। इन्हें आमतौर पर अध्याय 7 प्रस्ताव कहा जाता है। यूएनएससी ने 3 प्रस्तावों को अपनाया है, जो आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को एक सूची में रखने में सक्षम बनाते हैं। चूंकि पहले...

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ये है भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का असली रक्तबीज (दैनिक जागरण)

[मनोहर मनोज]। कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले 72 वर्षों से चली आ रही तनातनी का केंद्र है। मगर हकीकत यह कि कश्मीर भारत-पाक तनाव का वास्तव में जरिया नहीं है। इसके मूल में है 1947 में हुआ भारत का सांप्रदायिक विभाजन। कश्मीर समस्या की जड़ें वास्तव में इसी सांप्रदायिक विभाजन में छिपी हैं...

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चुनाव किस संदर्भ में होते हं या फिर संदर्भ किस चुनाव में बनते हं, इस पर निर्भर होते हं उनके परिणाम (दैनिक जागरण)

[ गोपालकृष्ण गांधी ]: हम भारत के लोग समझदार हं, भावुक भी। हम अक्लमंद हैं, लेकिन दिल के गुलाम भी। हमें बहकाना आसान नहीं। चालाक, दगाबाज कोई हमारे सामने आए तो हम उसे पहचानने में देर नहीं लगाते-निकम्मा आदमी है यह, चतुरनाथ नंबर वन। न जाने कहां से उसको ऐसा तेज दिमाग, ऐसी तिरछी नजर,...

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घर-परिवार का अर्थशास्त्र: स्वतंत्र आय हासिल करने से महिला सबल और स्वस्थ्य रहती हैं (दैनिक जागरण)

महिला और पुरुष का भेद पुरातन है। पहले जीव एक सेल के गैमेट (युग्मक) होते थे। ये एकलिंगीय और केवल एक कोशिका से बने होते थे। इनमें नर और मादा नहीं होते थे। फिर भी दो गैमेट के संयोग से नए गैमेटों का सृजन होता था। बड़े गैमेट अपनी जगह स्थिर रहने लगे, जबकि छोटे...

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BJD’s decision to reserve seats for women is great but it’s half the job done (Hindustan Times)

Odisha chief minister Naveen Patnaik on Sunday said the Bjiu Janata Dal (BJD) will field women candidates in at least 33% of the 21 parliamentary seats from the state in the Lok Sabha elections, which begins on April 11. The BJD has a record of taking steps to ensure the representation of women in the...

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The EC must remedy its error and hold polls in J&K (Hindustan Times)

The Election Commission’s (EC) decision to not hold the assembly elections in Jammu and Kashmir is a mistake. To be sure, the EC’s claim that security considerations did not permit simultaneous Lok Sabha and assembly elections has to be carefully considered. It is indeed true that there has been an alarming rise in violence in the...

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हम दो हमारे तीन’ नारे की सफलता संदिग्ध (पंजाब केसरी)

जहां एक ओर देश में जनसंख्या कम करने की बातें हो रही हैं तो दूसरी ओर एक समुदाय की ओर से अपनी जनसंख्या बढ़ाने की बातें की जा रही हैं। इनमें विशेष रूप से पारसी और जैन समुदाय के लोग शामिल हैं। जहां भारत के पारसी समुदाय ने अपने युवाओं को अधिक बच्चे पैदा करने...

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