Day: February 23, 2019

तंग नज़रिए से न हो आतंक परिभाषित (दैनिक ट्रिब्यून)

राजेश रामचंद्रन जितने अधिक समय तक मेघालय के राज्यपाल तथागत राय पद पर बने रहते हैं और कश्मीरियों पर हमले करते रहते हैं, राष्ट्र को उतना ही नुकसान होगा। दुर्भाग्य से, वही एक अकेले ऐसा बोलने वाले नहीं हैं। वे एक चेहरा, एक नाम और विभाजक एजेंडे के लिए संवैधानिक प्राधिकारी की एक मुहर मात्र...

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राखीगढ़ी की चिंता (दैनिक ट्रिब्यून)

हिसार जिले में स्थित राखीगढ़ी में घुसते ही गंभीर लापरवाही दृष्टिगोचर होती है। यह हड़प्पा सभ्यता के समकालीन पुरातात्विक स्थल है, जो तकरीबन 550 एकड़ में विस्तारित और मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है; भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने 1997 से 2000 के बीच की खुदाई में एक बहुत ही सुनियोजित शहर खोज निकाला, जो कि...

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महाराष्ट्र के महाभारत की रणभेरियां (दैनिक ट्रिब्यून)

हरीश लखेड़ा केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ सियासी शब्द-बाण चलाते रहने के बावजूद शिवसेना महाराष्ट्र में लोकसभा की चुनावी जंग लड़ने के लिए भाजपा के साथ आ गई। अब महाराष्ट्र में इस गठबंधन का सीधा मुकाबला एक बार फिर कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस से होगा। प्रदेश के ज्यादातर छोटे दल भी इन्हीं दो खेमों से जुड़ने...

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जवानों की खातिर (नवभारत टाइम्स)

पिछले हफ्ते पुलवामा में हुए आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में सरकार का यह फैसला खासा अहम है कि कश्मीर में तैनात अर्धसैनिक बलों के जवान अब दिल्ली-श्रीनगर, श्रीनगर-दिल्ली, जम्मू-श्रीनगर और श्रीनगर-जम्मू आने-जाने के लिए हवाई सफर कर सकेंगे। पुलवामा में पिछले गुरुवार को सड़क मार्ग से गुजर रहे सीआरपीएफ के काफिले पर जैशे मोहम्मद के...

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खजाने के पीछे (नवभारत टाइम्स)

‘धमाल’ शृंखला के लेटेस्ट प्रॉडक्ट के तौर पर कल रिलीज हुई फिल्म चाहे जैसी भी निकले, पर इसने यह तो साबित कर ही दिया है कि छुपाकर रखी नकदी खोजने का फॉर्म्युला भारत में डिजिटल युग आ जाने के बावजूद चलन से बाहर नहीं हुआ है। यह धमाल सिरीज की तीसरी फिल्म है। पहली दोनों...

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नये रुख के मायने (राष्ट्रीय सहारा)

कृष्ण प्रताप सिंह गत 12 फरवरी को ही सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में संवासिनियों के बलात्कार व शोषण के बहुचर्चित मामले से सम्बन्धित अपने आदेश की अवमानना को लेकर केन्द्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व कार्यवाहक निदेशक एम. नागेश्वर राव और विधि सलाहकार एस. भासुरम को एक-एक लाख रु पये के...

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How judicial activism has aggravated the backlog of cases in Pakistan’s courts (The Indian Express)

Written by Khaled Ahmed The chief justice of the Supreme Court of Pakistan Justice Saqib Nisar, who retired on January 17, must go down as the most “activist” judge in the country’s history. He leaned on Article 184(3) of the Constitution on “fundamental rights” to barge into any image-enhancing case, raiding hospitals while neglecting his...

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2019 alliance math — road to nowhere (The Indian Express)

Written by Surjit S Bhalla They say that a week is a long time in politics, so what might a month be? In January, opinion polls were sanguine, and unanimous, about a hung Parliament. The range of seats, regardless of the polling organisation, was 80-120 seats for the Congress and 180-220 for the BJP. If...

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By discussing retribution for Pulwama, the element of surprise is lost (The Indian Express)

Written by Syed Ata Hasnain The Pulwama incident has created a national outrage even greater than Mumbai 26/11. That is because in the last 10 years, social media has developed to such an extent that information earlier heard on the radio, read in newspapers or watched on television by choice is now absorbed almost by...

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Who’s winning/losing? (The Indian Express)

Written by Pratap Bhanu Mehta After Pulwama, a suffocation has gripped India. Not to put too fine a point on this, political opinion now operates under the disconcerting thought that Pakistan is in some significant sense, winning. The anger against Pakistan is justified. But what we are witnessing in India is more a paroxysm of...

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